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कानपुर देहात के रुरा थाना क्षेत्र के सरवा गांव में दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। इस घटना के बाद, दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायती पत्र सौंपे। मामले की जांच-पड़ताल करने के उपरांत, पुलिस ने माहौल बिगाड़ने के आरोप में एक व्यक्ति पर शांतिभंग की कार्यवाही की। थाना प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने बताया कि सुनील उर्फ अमित सिंह गौर नामक व्यक्ति के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
Arvind sharma kanpur dehat
कानपुर देहात के रुरा थाना क्षेत्र के सरवा गांव में दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। इस घटना के बाद, दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए पुलिस को शिकायती पत्र सौंपे। मामले की जांच-पड़ताल करने के उपरांत, पुलिस ने माहौल बिगाड़ने के आरोप में एक व्यक्ति पर शांतिभंग की कार्यवाही की। थाना प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने बताया कि सुनील उर्फ अमित सिंह गौर नामक व्यक्ति के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र स्थित पीएल कमला हॉस्पिटल में एक प्रसूता की मौत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृत प्रसूता के शव को जबरन एम्बुलेंस में डालकर कहीं और रेफर कर दिया। मृतिका के परिजनों ने डॉक्टरों पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है, जिसे उन्होंने प्रसूता की मौत का कारण बताया। यह पूरा मामला जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र के पीएल कमला हॉस्पिटल से जुड़ा हुआ है।4
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि देश और समाज के लिए खतरा बनने वाले तत्वों के विरुद्ध आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानून व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, "देश और समाज के लिए खतरा बनने वालों के लिए जरूर पड़ने पर हिंसा अपनानी पड़ती है।" उन्होंने यह भी बताया कि सरकार अपराध, अराजकता और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर काम कर रही है। उनका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना तथा अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना है, क्योंकि समाज में शांति, सुरक्षा और विकास के लिए कानून का शासन आवश्यक है। मुख्यमंत्री के इस बयान पर विभिन्न वर्गों में चर्चा जारी है। समर्थकों का मानना है कि समाज की सुरक्षा के लिए कठोर कानून व्यवस्था आवश्यक है, जबकि आलोचक इन बयानों पर अपने-अपने अलग दृष्टिकोण रखते हैं।1
- जालौन जिले के उरई स्थित पीएल कमला हॉस्पिटल नामक एक निजी अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है, जिसके बाद घटना की जांच शुरू कर दी गई है। आक्रोशित परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की मौत के उपरांत अस्पताल प्रशासन ने शव को जबरन एंबुलेंस में डालकर कहीं और रेफर करने का प्रयास किया। इस घटना के बाद, अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा।1
- जालौन जिले के कुठोंद थाना क्षेत्र से एक खबर सामने आई है, जहाँ कुठोंद पुलिस ने एक वांछित वारंटी को पकड़ा है। थाना प्रभारी जगदंबा दुबे के नेतृत्व में पुलिस की टीम ने यह कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद, वांछित वारंटी को न्यायालय भेज दिया गया है। यह पूरी रिपोर्ट द न्यूज जालौन पर देवेश कुमार स्वर्णकार द्वारा शुरू एप्प के माध्यम से प्रस्तुत की गई है।1
- कानपुर देहात के माती कोर्ट में माननीय न्यायालय जे.एम. भोगनीपुर ने गाली गलौज और मारपीट से संबंधित एक मामले में अभियुक्त शमशुला को दोषी ठहराया है। अभियुक्त शमशुला, पुत्र गफ्फार, ग्राम ग्रोर, थाना बरौर, जनपद कानपुर देहात का निवासी है। न्यायालय ने अभियुक्त को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई है और साथ ही ₹1,300 का अर्थदंड भी लगाया है।1
- जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र स्थित पीएल कमला हॉस्पिटल नाम के एक निजी अस्पताल में एक प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने उसके शव को जबरन एम्बुलेंस में डालकर कहीं और रेफर कर दिया। इस घटना को लेकर मृतका के परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया है।4
- उत्तर प्रदेश के कालपी तहसील का उपनिबंधक कार्यालय अब सरकारी दफ्तर से ज्यादा गुंडागर्दी का अड्डा बन गया है। उरई से बैनामा कराने आए एक युवक के साथ हुई घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है, जहाँ एक मामूली फाइल नंबर के विवाद ने इतना विकराल रूप ले लिया कि रजिस्ट्रार ऑफिस के भीतर ही कानून की धज्जियाँ उड़ गईं। युवक ने सिर्फ इतना पूछा था कि उसकी फाइल पहले होने के बावजूद पीछे क्यों कर दी गई, जिसके जवाब में वहाँ मौजूद बैनामा लेखकों और बाबुओं का पारा चढ़ गया। जवाब देने की बजाय उन्होंने कानून को हाथ में ले लिया, और देखते ही देखते गाली-गलौज, धमकी तथा सरेआम लात-घूंसे बरसने लगे। यह बवाल सरकारी दफ्तर के अंदर शुरू होकर बाहर सड़क तक आ गया, जहाँ दबंगई लगातार जारी रही। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम लोगों के सामने हुआ, लेकिन जिम्मेदार सिस्टम कहीं भी नजर नहीं आया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि बैनामा लेखक और बाबुओं ने मिलकर युवक को पीटा। इस घटना के वायरल वीडियो ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जैसे कि क्या कालपी तहसील में काम बिना 'सेटिंग' के नहीं होता और क्या फाइलों की हेराफेरी पर सवाल उठाना अब गुनाह बन गया है। यह भी पूछा जा रहा है कि क्या सरकारी कर्मचारी अब खुलेआम दबंगई करेंगे, और आम आदमी को तहसील में काम कराने के लिए पिटाई का जोखिम भी उठाना पड़ेगा। अगर तहसील जैसे संवेदनशील सरकारी दफ्तर में आम आदमी सुरक्षित नहीं है, तो फिर न्याय की उम्मीद कहाँ से की जाए? सबसे बड़ा सवाल प्रशासन पर उठ रहा है कि क्या वह इस गुंडागर्दी पर कोई कार्रवाई करेगा या फिर सबकुछ हमेशा की तरह 'मैनेज' कर लिया जाएगा। अब देखना यह है कि इस वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर सिस्टम इसे भी निगल जाएगा, क्योंकि यह घटना तहसील में 'जंगलराज' जैसी स्थिति को दर्शाती है।1