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डिंडौरी जिले में खनिज संसाधनों के दोहन में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशों पर, खनिज विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले उत्खनिपट्टा धारकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है, जिसमें अर्थदण्ड, प्रतिभूति राशि राजसात करने के साथ-साथ कई उत्खनिपट्टे निरस्त भी किए गए हैं। खनिज विभाग की जांच में मेसर्स अनुराग स्टोन क्रेशर के प्रोपराइटर संदीप रजक (शहपुरा), उत्तम साहू (बजाग) और शैलेन्द्र कुशवाह (गुना) द्वारा स्वीकृत उत्खनिपट्टा क्षेत्रों में मध्य प्रदेश गौण खनिज नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिसके बाद उनकी जमा प्रतिभूति राशि शासन के पक्ष में राजसात कर दी गई। वहीं, ग्राम खिरसारी में अवैध खनिज भंडारण पाए जाने पर श्रीमती सुमित्रा चौकसे पर 4 लाख 43 हजार 100 रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया। इसी तरह, शारदा राय को ग्राम शक्तिभगदू रैयत स्थित उत्खनिपट्टा क्षेत्र में ई-टीपी के दुरुपयोग के मामले में 3 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया, साथ ही शहपुरा स्थित उनके स्वीकृत भंडारण क्षेत्र में अनियमितताएं पाए जाने पर 25 हजार रुपये की प्रतिभूति राशि भी राजसात की गई। खनिज विभाग ने यह भी बताया कि इससे पहले मेसर्स परमार कंस्ट्रक्शन पर उत्खनिपट्टा की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण 4 लाख रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जा चुका है। प्रशासन की सख्ती यहीं नहीं रुकी; नियमों के लगातार उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए प्रकाश राय (ग्राम अण्डई), आर.एस. मिनरल्स (ग्राम कमरासोंढा), प्रमोद साहू (ग्राम करौंदा) और प्रभात अग्रवाल (ग्राम धौरई) के स्वीकृत उत्खनिपट्टे भी निरस्त कर दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिज संपदा के संरक्षण और वैधानिक खनन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि अवैध उत्खनन एवं भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

5 hrs ago
user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago
63fea321-6ad0-4d77-97d7-4bfe31298206

डिंडौरी जिले में खनिज संसाधनों के दोहन में पारदर्शिता और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशों पर, खनिज विभाग ने नियमों का उल्लंघन करने वाले उत्खनिपट्टा धारकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है, जिसमें अर्थदण्ड, प्रतिभूति राशि राजसात करने के साथ-साथ कई उत्खनिपट्टे निरस्त भी किए गए हैं। खनिज विभाग की जांच में मेसर्स अनुराग स्टोन क्रेशर के प्रोपराइटर संदीप रजक (शहपुरा), उत्तम साहू (बजाग) और शैलेन्द्र कुशवाह (गुना) द्वारा स्वीकृत उत्खनिपट्टा क्षेत्रों में मध्य प्रदेश गौण खनिज नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए, जिसके बाद उनकी जमा प्रतिभूति राशि शासन के पक्ष में राजसात कर दी गई। वहीं, ग्राम खिरसारी में अवैध खनिज भंडारण पाए जाने पर श्रीमती सुमित्रा चौकसे पर 4 लाख 43 हजार 100 रुपये का अर्थदण्ड लगाया गया। इसी तरह, शारदा राय को ग्राम शक्तिभगदू रैयत स्थित उत्खनिपट्टा क्षेत्र में ई-टीपी के दुरुपयोग के मामले में 3 लाख रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया, साथ ही शहपुरा स्थित उनके स्वीकृत भंडारण क्षेत्र में अनियमितताएं पाए जाने पर 25 हजार रुपये की प्रतिभूति राशि भी राजसात की गई। खनिज विभाग ने यह भी बताया कि इससे पहले मेसर्स परमार कंस्ट्रक्शन पर उत्खनिपट्टा की शर्तों का उल्लंघन करने के कारण 4 लाख रुपये का अर्थदण्ड अधिरोपित किया जा चुका है। प्रशासन की सख्ती यहीं नहीं रुकी; नियमों के लगातार उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए प्रकाश राय (ग्राम अण्डई), आर.एस. मिनरल्स (ग्राम कमरासोंढा), प्रमोद साहू (ग्राम करौंदा) और प्रभात अग्रवाल (ग्राम धौरई) के स्वीकृत उत्खनिपट्टे भी निरस्त कर दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में खनिज संपदा के संरक्षण और वैधानिक खनन व्यवस्था को बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि अवैध उत्खनन एवं भंडारण पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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  • डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'। नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'
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    डिण्डौरी जिले के शहपुरा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति, ढोंढ़ा, जैविक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। जिले के प्रसिद्ध जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित यह समिति विगत 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि डिण्डौरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए निरंतर प्रशिक्षण भी देते हैं। वे किसानों के साथ-साथ महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिण्डौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसमें उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है।

समिति पशुओं के गोबर से बायोगैस के निर्माण का भी प्रदर्शन करती है, जिसे प्लास्टिक के 6 फुट चौड़े और 10 फुट लंबे टांके में घोलकर डाला जाता है। इसमें 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरा 4 इंच का पाइप ओवरफ्लो के लिए लगा होता है, जहाँ से गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी उत्तम जैविक खाद का काम करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है। यह जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन और 30-40% CO2 होती है, जो एक बार लगने के बाद कई वर्षों तक चलती है। यह कार्य आत्मा परियोजना के तहत डिण्डौरी जिले में 33 बीआरसी किसानों को भी दिया गया है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार, जैव आदान संसाधन केंद्र द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं, और बिहारी लाल साहू एक बीआरसी के रूप में प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन, जानकारी और सलाह भी देते हैं, जिसके लिए उनका नारा है, 'जैविक खेती अपनाएं, स्वास्थ्य और धरती बचाएं'।

नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र आदि का निर्माण कर विक्रय किया जाता है। साथ ही बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निशुल्क प्रदान की जाती है। यहां जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी, मेथी भाजी जैसी विभिन्न फसलें जैविक विधि से उगाई जाती हैं।

जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने इस अवसर पर बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। उनके अनुसार, जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। कार्यक्रम में बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। बिहारी लाल साहू डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का हार्दिक अभिनंदन करते हैं। उन्होंने 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों और 80 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है, और इस संदेश को एक दोहे के माध्यम से भी व्यक्त किया है: 'ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचे जीवन बचे, स्वाद रहे भरपूर।'
    user_Pradeep singh Rajput
    Pradeep singh Rajput
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा। इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
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    डिंडौरी जिला जल संरचनाओं के निर्माण और जल स्रोतों के जीर्णोद्धार में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। पिछले दो महीनों से जिले में जनभागीदारी के माध्यम से लगातार यह कार्य किया जा रहा है। अब तक जिला और जनपद पंचायत क्षेत्रों में कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाओं का निर्माण कराया जा चुका है, जिसमें ग्रामीणों की सक्रिय भूमिका रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल संरक्षण का महत्व समझाया, जिससे उन्हें यह बात समझ आई कि पानी रोकने से ही बचेगा और फिर से उपलब्ध होगा।

इस समझ के बाद, लोगों ने स्वयं प्रेरित होकर अपने घरों में जल संचय के कार्य शुरू कर दिए। बजाग जनपद पंचायत की सिंहपुर ग्राम पंचायत में, जहाँ लगभग साढ़े तीन सौ मकान हैं, हर घर में सोखता पिट और छतों से बारिश के पानी को रोकने के लिए पाइप के जरिए वाटर हार्वेस्टिंग की तैयारी की गई है। गांव की महिला मेकिन बाई ने बताया कि पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन सरपंच दीपचंद पूषाम और अधिकारियों ने उन्हें जल का महत्व समझाया, जिसके बाद उन्होंने स्वयं मेहनत कर और थोड़ा पैसा खर्च कर पाइप खरीदे और घर के सामने सोखता पिट बनाया, जिसमें अब निस्तार का पानी जा रहा है। इसी तरह, जमुना खैरवार ने भी स्वीकार किया कि वे पहले पानी का महत्व नहीं जानते थे और सोचते थे कि पानी उपलब्ध कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। सरपंच और अधिकारियों द्वारा थोड़ी मेहनत से पानी बचाने और धरती को रिचार्ज करने की जानकारी देने के बाद उन्होंने अपने घर में दो सोखता पिट बनवाए। अब वे गांव में जाकर अन्य लोगों को भी जागरूक कर रही हैं ताकि बारिश का पानी रोका जा सके और आने वाली पीढ़ी के लिए पानी बचाया जा सके।

इसके अतिरिक्त, आजीविका परियोजना से जुड़ी कृषक सखी सुदामा सुरेश्वर ने 'मां की बगिया' योजना के बारे में बताया, जिसके तहत पांच हितग्राही हैं। एक बगिया में 15 नींबू और 35 आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिन्हें टपक पद्धति से पानी दिया जा रहा है। कृषक सखी ने पानी बचाने और पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हितग्राहियों को जागरूक किया और उन्हें टपकना, हांडी और स्लाइन की बोतल से पेड़ों को पानी देने के तरीके बताए। अब ये हितग्राही स्वयं पेड़ों की सुरक्षा और सिंचाई का कार्य कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि पानी की बचत के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सके।
    user_NILMANI CHOUDHARY
    NILMANI CHOUDHARY
    Farmer डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं। ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया। कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके। निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
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    डिंडौरी जिले की कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने ग्राम पंचायत घुसिया माल के ढीमरटोला में पेयजल की लंबी समस्या का त्वरित समाधान कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कार्रवाई तब हुई जब कुछ दिन पूर्व ढीमरटोला के ग्रामीण पेयजल संकट को लेकर जनसुनवाई में कलेक्टर के पास पहुँचे थे। समस्या की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को दो दिनों के भीतर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे और इन्हीं निर्देशों के क्रियान्वयन का जायजा लेने वे स्वयं गांव पहुँचीं।

ग्रामीणों ने बताया कि पानी की कमी के कारण उन्हें कुओं में उतरकर पानी भरना पड़ रहा था। स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन करने के बाद, कलेक्टर ने खराब पड़े बोरवेल में अपने समक्ष एक नया पंप लगवाकर उसे चालू कराया और घर-घर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी करवाईं। उन्होंने स्वयं बोरवेल का पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जाँची और बच्चों को भी पानी पिलाया। ग्रामीणों की सुविधा के लिए दो-दो हजार लीटर क्षमता की दो पानी टंकियां भी स्थापित की गईं और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने पर तत्काल स्टेबलाइजर लगाने के निर्देश देकर व्यवस्था को सुचारु बनाया गया। इस दौरान उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का निरीक्षण भी किया।

कलेक्टर की इस मौजूदगी और त्वरित निर्णयों से गांव में उत्साह का माहौल बन गया, जहाँ ग्रामीणों ने पहली बार किसी वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर खड़े होकर समस्या का समाधान करते देखा। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए, कलेक्टर ने गर्मी के मौसम में पानी के सदुपयोग की अपील की और मोटर संचालन की जिम्मेदारी किसी जिम्मेदार व्यक्ति को सौंपने का सुझाव दिया ताकि पूरे गांव को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके।

निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने ग्रामीणों को सोखता टैंक निर्माण की जानकारी दी और उन्हें घरों में ऐसे टैंक बनाने के लिए प्रेरित किया, यह समझाते हुए कि इससे भूजल स्तर संरक्षित रहेगा और वर्षा जल संचयन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर रामबाबू देवांगन, सुंदरलाल यादव, चेतराम अहिरवार, प्रमोद उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कलेक्टर की इस पहल ने न केवल पेयजल संकट का समाधान किया, बल्कि प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास की एक नई मिसाल भी कायम की है।
    user_वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    वाइस ऑफ़ राइट्स न्यूज चैनल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।
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    समनापुर क्षेत्र में नौतपा के दौरान हुई बारिश ने गर्मी का असर काफी कम कर दिया है। इस बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। किसान भी इस बारिश को फायदेमंद मान रहे हैं, क्योंकि इससे खेतों में नमी बढ़ी है और आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों में भी मदद मिलेगी।
    user_लखन बर्मन
    लखन बर्मन
    पत्रकार Dindori, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • डिंडोरी जिले में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के बीच, शनिवार शाम करीब 5:00 बजे मौसम ने अचानक करवट बदली। मोहदा छांटा क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई, जिससे कुछ समय के लिए जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा था, और तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ था, जिससे आमजन गर्मी से काफी परेशान थे। शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी। इस दौरान कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर भागना पड़ा, जबकि बाजारों और सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। तेज हवा के कारण पेड़ों की डालियां झूमने लगीं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की सूचना मिली। हालांकि, इस अचानक हुई बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। बारिश के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया, और किसानों व ग्रामीणों ने भी इस बारिश को गर्मी से राहत देने वाला बताया।
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    डिंडोरी जिले में नौतपा के दौरान पड़ रही भीषण गर्मी और उमस के बीच, शनिवार शाम करीब 5:00 बजे मौसम ने अचानक करवट बदली। मोहदा छांटा क्षेत्र में तेज आंधी-तूफान के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई, जिससे कुछ समय के लिए जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो रहा था, और तापमान लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ था, जिससे आमजन गर्मी से काफी परेशान थे।

शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और तेज हवाओं के साथ बारिश होने लगी। इस दौरान कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर भागना पड़ा, जबकि बाजारों और सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। तेज हवा के कारण पेड़ों की डालियां झूमने लगीं और कुछ क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की सूचना मिली। हालांकि, इस अचानक हुई बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली है। बारिश के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे मौसम सुहावना हो गया, और किसानों व ग्रामीणों ने भी इस बारिश को गर्मी से राहत देने वाला बताया।
    user_खमोद चंदेल
    खमोद चंदेल
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • डिंडोरी जिले के समनापुर जनपद अंतर्गत देवलपुर गांव इस समय पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिससे गांव में त्राहि-त्राहि मची हुई है। गांव के सयाना मुखिया ने ब्लॉक कार्यालय पहुंचकर चेतावनी दी है कि एक सप्ताह पहले सूचना देने के बावजूद हैंडपंप नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों की ओर से मुखिया ने प्रशासन से सवाल किया है कि पीने के पानी के लिए वे अब कहां जाएं।
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    डिंडोरी जिले के समनापुर जनपद अंतर्गत देवलपुर गांव इस समय पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिससे गांव में त्राहि-त्राहि मची हुई है। गांव के सयाना मुखिया ने ब्लॉक कार्यालय पहुंचकर चेतावनी दी है कि एक सप्ताह पहले सूचना देने के बावजूद हैंडपंप नहीं बनाया गया है। ग्रामीणों की ओर से मुखिया ने प्रशासन से सवाल किया है कि पीने के पानी के लिए वे अब कहां जाएं।
    user_Santosh Ahirwar
    Santosh Ahirwar
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति जैविक खेती के प्रत्यक्ष अनुभव का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गई है। यह समिति पिछले 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि जिले व आसपास के क्षेत्रों के किसानों को लगातार प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। वे महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिंडौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसके तहत उन्होंने 20,000 विद्यार्थियों और 80,000 से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है। उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है। समिति गोबर गैस, जिसे बायोगैस भी कहते हैं, के निर्माण और उपयोग का प्रदर्शन भी करती है। इस प्रक्रिया में पशुओं के गोबर को घोलकर एक प्लास्टिक के टांके (6 फीट चौड़ा, 10 फीट लंबा) में डाला जाता है। इसमें एक 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरी ओर 4 इंच का ओवरफ्लो पाइप लगा होता है, जहाँ गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी एक उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में कार्य करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है, जहाँ यह जलती है। यह गैस जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन (CH4) और 30-40% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होती है। एक बार लगने के बाद यह कई वर्षों तक चलती है। 30 मई 2026 को बीआरसी ढोंढ़ा में गोबर गैस से भोजन बनाना शुरू हुआ, जिससे एलपीजी गैस की खपत में बचत होगी। डिण्डौरी जिले में आत्मा परियोजना द्वारा 33 बीआरसी किसानों को यह सुविधा दी गई है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार और जैव आदान संसाधन केंद्र के माध्यम से प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद, प्रशिक्षण और सलाह भी उपलब्ध कराई जाती है। नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र और बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निःशुल्क दी जाती है। यहाँ जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी और मेथी भाजी जैसी फसलें उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। इस अवसर पर श्री बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का भी हार्दिक अभिनंदन किया गया। इस प्रयास को एक कविता के माध्यम से भी रेखांकित किया गया है: “ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचै जीवन बचै, स्वाद रहे भरपूर ।”
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    डिंडौरी जिले के ढोंढ़ा में स्थित नर्मदांचल गौ सेवा समिति जैविक खेती के प्रत्यक्ष अनुभव का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गई है। यह समिति पिछले 10 वर्षों से जैविक खेती के क्षेत्र में सक्रिय जैविक कृषि विशेषज्ञ श्री बिहारी लाल साहू द्वारा संचालित है। श्री साहू न केवल स्वयं जैविक खेती करते हैं, बल्कि जिले व आसपास के क्षेत्रों के किसानों को लगातार प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं। वे महाविद्यालयों, विद्यालयों, शासकीय संस्थानों और एनजीओ के माध्यम से डिंडौरी सहित अन्य जिलों में जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं, जिसके तहत उन्होंने 20,000 विद्यार्थियों और 80,000 से अधिक किसानों को प्राकृतिक/जैविक खेती पर प्रशिक्षण दिया है। उनके फार्म हाउस में जैविक खेती का लाइव डेमो भी प्रदर्शित किया जाता है।

समिति गोबर गैस, जिसे बायोगैस भी कहते हैं, के निर्माण और उपयोग का प्रदर्शन भी करती है। इस प्रक्रिया में पशुओं के गोबर को घोलकर एक प्लास्टिक के टांके (6 फीट चौड़ा, 10 फीट लंबा) में डाला जाता है। इसमें एक 4 इंच का पाइप गोबर घोल डालने के लिए और दूसरी ओर 4 इंच का ओवरफ्लो पाइप लगा होता है, जहाँ गैस बनने के बाद निकलने वाली वेस्ट स्लरी एक उत्कृष्ट जैविक खाद के रूप में कार्य करती है। एक तीसरा पाइप गैस को सीधे चूल्हे तक ले जाता है, जहाँ यह जलती है। यह गैस जैव-अपघटनीय पदार्थों को बिना ऑक्सीजन के सड़ाकर बनती है, जिसमें 55-65% मीथेन (CH4) और 30-40% कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) होती है। एक बार लगने के बाद यह कई वर्षों तक चलती है। 30 मई 2026 को बीआरसी ढोंढ़ा में गोबर गैस से भोजन बनाना शुरू हुआ, जिससे एलपीजी गैस की खपत में बचत होगी। डिण्डौरी जिले में आत्मा परियोजना द्वारा 33 बीआरसी किसानों को यह सुविधा दी गई है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, भारत सरकार और जैव आदान संसाधन केंद्र के माध्यम से प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैविक उत्पाद, प्रशिक्षण और सलाह भी उपलब्ध कराई जाती है।

नर्मदांचल गौ सेवा समिति में गौवंश आधारित प्राकृतिक जैविक खाद जैसे केंचुआ खाद, वर्मीवाश, जीवामृत, अग्नि अस्त्र और बीज उपचार सहित जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी निःशुल्क दी जाती है। यहाँ जैविक फार्म में केला, पपीता, अदरक, करेला, सेमी, टमाटर, गोभी, बैंगन, आलू, मटर, प्याज, लहसुन, लाल भाजी और मेथी भाजी जैसी फसलें उगाई जाती हैं। जैविक कृषि विशेषज्ञ बिहारी लाल साहू ने बताया कि जैविक उत्पाद मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं और रासायनिक मुक्त खेती मिट्टी की उर्वरता तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी आवश्यक है। जैविक खेती से किसानों की लागत कम होती है और उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है। इस अवसर पर श्री बिहारी लाल साहू, आयुष साहू, प्रगति साहू सहित अन्य जन उपस्थित रहे। डिण्डौरी जिला आत्मा परियोजना के सभी अधिकारियों का भी हार्दिक अभिनंदन किया गया। इस प्रयास को एक कविता के माध्यम से भी रेखांकित किया गया है: “ऐसी खेती कीजिए, खाद रसायन दूर। खेत बचै जीवन बचै, स्वाद रहे भरपूर ।”
    user_Neeraj rajak
    Neeraj rajak
    Voice of people डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • डिंडोरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एंबुलेंस व्यवस्था खुद ही खराब स्थिति में है। इस बदहाली के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि जिला अस्पताल से जबलपुर सहित अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है। डिंडोरी जिले में वर्तमान में जननी एक्सप्रेस, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) समेत कुल 29 एंबुलेंस वाहन संचालित हैं। हालांकि, इनमें से कई वाहन लंबे समय से खराब होकर खड़े हैं और मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
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    डिंडोरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एंबुलेंस व्यवस्था खुद ही खराब स्थिति में है। इस बदहाली के कारण गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालत यह है कि जिला अस्पताल से जबलपुर सहित अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किए गए मरीजों को एंबुलेंस के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।

डिंडोरी जिले में वर्तमान में जननी एक्सप्रेस, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) समेत कुल 29 एंबुलेंस वाहन संचालित हैं। हालांकि, इनमें से कई वाहन लंबे समय से खराब होकर खड़े हैं और मरम्मत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस स्थिति के चलते जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
    user_Pradeep singh Rajput
    Pradeep singh Rajput
    डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
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