जहर बोने को न्याय नहीं कहा जा सकता। आज यूजीसी समर्थकों से मेरा सीधा सवाल है — क्या किसी को गलत तरीके से फँसाना न्याय है? क्या समाज को बाँटकर अधिकार दिलाए जा सकते हैं? कुछ लोग ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं कि एक वर्ग दूसरे का हक छीन रहा है। लेकिन सच्चाई साफ है — कोई किसी का हक नहीं छीनता। हक मेहनत से मिलता है, काबिलियत से मिलता है। जातिगत आधार पर किसी को टारगेट करना गलत है। काबिलियत खुद में पैदा करनी पड़ती है — काबिल लोगों को गिराकर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। मेरा विरोध हमेशा व्यवस्था से रहा है, किसी व्यक्ति से नहीं। मैं चाहता हूँ कि देश में नीतियाँ ऐसी हों जो असली जरूरतमंद तक पहुँचें — पहचान देखकर नहीं, परिस्थिति देखकर। लेकिन जब मैंने पूरा चित्र देखा, तो समझ आया कि तस्वीर सिर्फ एक पहलू की नहीं होती। सच यह भी है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐसे बदलाव हुए जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — ✔ करोड़ों गरीब परिवारों तक शौचालय, बिजली और गैस कनेक्शन पहुँचे ✔ डिजिटल सिस्टम ने पारदर्शिता बढ़ाई और भ्रष्टाचार कम किया ✔ एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज विस्तार हुआ ✔ महामारी के समय भारत ने अपनी वैक्सीन बनाकर करोड़ों लोगों को सुरक्षा दी ✔ और वैश्विक मंचों पर भारत की ताकत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई हाँ — कुछ फैसले विवादित रहे, कुछ नीतियों पर सवाल उठे। लेकिन लोकतंत्र में सवाल उठाना गलत नहीं होता। गलत तब होता है जब हम सिर्फ विरोध में अटक जाएँ और पूरा सच देखना छोड़ दें। 👉 मेरी सोच अब साफ है — देश को मजबूत कानून चाहिए सुधार चाहिए कठोर फैसले चाहिए क्योंकि कड़वी दवा ही बीमारी ठीक करती है। अगर नेतृत्व में सुधार की क्षमता है, फैसले लेने का साहस है, और देशहित प्राथमिकता है — तो भरोसा किया जा सकता है। 📌 इसलिए आज मेरा निष्कर्ष है — अंधा विरोध नहीं, तथ्य आधारित विचार ही असली देशभक्ति है। अगर आप भी मानते हैं कि देश पहले — राजनीति बाद में, तो इस वीडियो को शेयर जरूर करें ताकि बहस नफरत की नहीं, समझ की हो। जय हिंद।
जहर बोने को न्याय नहीं कहा जा सकता। आज यूजीसी समर्थकों से मेरा सीधा सवाल है — क्या किसी को गलत तरीके से फँसाना न्याय है? क्या समाज को बाँटकर अधिकार दिलाए जा सकते हैं? कुछ लोग ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं कि एक वर्ग दूसरे का हक छीन रहा है। लेकिन सच्चाई साफ है — कोई किसी का हक नहीं छीनता। हक मेहनत से मिलता है, काबिलियत से मिलता है। जातिगत आधार पर किसी को टारगेट करना गलत है। काबिलियत खुद में पैदा करनी पड़ती है — काबिल लोगों को गिराकर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। मेरा विरोध हमेशा व्यवस्था से रहा है, किसी व्यक्ति से नहीं। मैं चाहता हूँ कि देश में नीतियाँ ऐसी हों जो असली जरूरतमंद तक पहुँचें — पहचान देखकर नहीं, परिस्थिति देखकर। लेकिन जब मैंने पूरा चित्र देखा, तो समझ आया कि तस्वीर सिर्फ एक पहलू की नहीं होती। सच यह भी है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐसे बदलाव हुए जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — ✔ करोड़ों गरीब परिवारों तक शौचालय, बिजली और गैस कनेक्शन पहुँचे ✔ डिजिटल सिस्टम ने पारदर्शिता बढ़ाई और भ्रष्टाचार कम किया ✔ एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज विस्तार हुआ ✔ महामारी के समय भारत ने अपनी वैक्सीन बनाकर करोड़ों लोगों को सुरक्षा दी ✔ और वैश्विक मंचों पर भारत की ताकत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई हाँ — कुछ फैसले विवादित रहे, कुछ नीतियों पर सवाल उठे। लेकिन लोकतंत्र में सवाल उठाना गलत नहीं होता। गलत तब होता है जब हम सिर्फ विरोध में अटक जाएँ और पूरा सच देखना छोड़ दें। 👉 मेरी सोच अब साफ है — देश को मजबूत कानून चाहिए सुधार चाहिए कठोर फैसले चाहिए क्योंकि कड़वी दवा ही बीमारी ठीक करती है। अगर नेतृत्व में सुधार की क्षमता है, फैसले लेने का साहस है, और देशहित प्राथमिकता है — तो भरोसा किया जा सकता है। 📌 इसलिए आज मेरा निष्कर्ष है — अंधा विरोध नहीं, तथ्य आधारित विचार ही असली देशभक्ति है। अगर आप भी मानते हैं कि देश पहले — राजनीति बाद में, तो इस वीडियो को शेयर जरूर करें ताकि बहस नफरत की नहीं, समझ की हो। जय हिंद।
- विरोध से विश्वास तक — सवाल भी ज़रूरी, संतुलन भी ज़रूरी समस्या नहीं, समाधान विकल्प है #विरोध_से_विश्वास #समाधान_की_सोच #तथ्य_आधारित_सोच #नीति_पर_बहस #नरेंद्र_मोदी #भारत_राजनीति #संतुलित_विचार #देश_हित #जन_चर्चा #विकास_बनाम_विवाद #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur1
- *पकड़ीदयाल मोतिहारी रोड स्थित रौनक संस्कृत संस्थान के संचालक जितेन्द्र कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने वाले 430 विद्यार्थियों को दी विदाई।* (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) सिरहाकोठी 14 फरवरी 2026 सिरहाकोठी:-पकड़ीदयाल मोतिहारी रोड स्थित रौनक संस्कृत संस्थान के संचालक जितेन्द्र कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने वाले 430 विद्यार्थियों को दी विदाई। जितेंद्र कुमार ने बताया कि प्रत्येक वर्ष के भांति इस वर्ष में भी इस संस्था से काफी बेहतर तरीका से अनुशासन में रहकर छात्र-छात्राओं ने अध्ययन किया। परिणाम भी बेहतर आएंगे। छात्र -छात्राओं को भावुक देखकर उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया की विदाई नहीं यह एक नई शुरुआत हो रही है भारतीय संस्कार में इस कार्यक्रम को समावर्तन संस्कार कहा गया है जिसे शिक्षा संस्कार का अंतिम संस्कार भी कहा जाता है। इसके साथ ही संचालक ने सभी विद्यार्थियों की उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए परीक्षा केंद्र पर 30 मिनट पहले जाने को कहा। वहीं शिक्षक सिकन्दर यादव,रविरंजन कुमार, संदीप कुमार, अंकित कुमार, जितेंद्र पुरी, रौशन कुमार, रमेश कुशवाहा,सोनू ठाकुर,रमेश कुमार, मिथलेश सहनी, राकेश कुमार आदि उपस्थित रहे।1
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- नौतन प्रखंड के दक्षिण तेल्हुआ राजकीय जनता हाई स्कूल 10+2 के प्रांगण में पश्चिम बंगाल सिवान के खिलाड़ियों के बीच घमासान खेल हुआ बाजी मारी पश्चिम बंगाल विजय घोषित हुई अमर यादव भूमि पूजन किया मौके पर बाबा भागवत डिग्री कॉलेज की अध्यक्ष विभूति नारायण राय सचिव उमाशंकर राय मीडिया प्रभारी कैलाश सहनी सरपंच राजू ठाकुर अवध सहनी आदि ग्रामीण मौजूद रहे1
- पूरे बिहार में पहली बार गोपालगंज जिला प्रशासन के द्वारा फ्रेंडली रिक्वेस्ट नशा छोड़ो, नाता जोड़ो गोपालगंज,SP विनय तिवारी जी के द्वारा किया गया,, जो पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है,, थावे से लेकर पूरे शहर में लगा जागरूकता का दौड़ 👍🙏1
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- जहर बोने को न्याय नहीं कहा जा सकता। आज यूजीसी समर्थकों से मेरा सीधा सवाल है — क्या किसी को गलत तरीके से फँसाना न्याय है? क्या समाज को बाँटकर अधिकार दिलाए जा सकते हैं? कुछ लोग ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करते हैं कि एक वर्ग दूसरे का हक छीन रहा है। लेकिन सच्चाई साफ है — कोई किसी का हक नहीं छीनता। हक मेहनत से मिलता है, काबिलियत से मिलता है। जातिगत आधार पर किसी को टारगेट करना गलत है। काबिलियत खुद में पैदा करनी पड़ती है — काबिल लोगों को गिराकर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। मेरा विरोध हमेशा व्यवस्था से रहा है, किसी व्यक्ति से नहीं। मैं चाहता हूँ कि देश में नीतियाँ ऐसी हों जो असली जरूरतमंद तक पहुँचें — पहचान देखकर नहीं, परिस्थिति देखकर। लेकिन जब मैंने पूरा चित्र देखा, तो समझ आया कि तस्वीर सिर्फ एक पहलू की नहीं होती। सच यह भी है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ऐसे बदलाव हुए जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — ✔ करोड़ों गरीब परिवारों तक शौचालय, बिजली और गैस कनेक्शन पहुँचे ✔ डिजिटल सिस्टम ने पारदर्शिता बढ़ाई और भ्रष्टाचार कम किया ✔ एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर का तेज विस्तार हुआ ✔ महामारी के समय भारत ने अपनी वैक्सीन बनाकर करोड़ों लोगों को सुरक्षा दी ✔ और वैश्विक मंचों पर भारत की ताकत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई हाँ — कुछ फैसले विवादित रहे, कुछ नीतियों पर सवाल उठे। लेकिन लोकतंत्र में सवाल उठाना गलत नहीं होता। गलत तब होता है जब हम सिर्फ विरोध में अटक जाएँ और पूरा सच देखना छोड़ दें। 👉 मेरी सोच अब साफ है — देश को मजबूत कानून चाहिए सुधार चाहिए कठोर फैसले चाहिए क्योंकि कड़वी दवा ही बीमारी ठीक करती है। अगर नेतृत्व में सुधार की क्षमता है, फैसले लेने का साहस है, और देशहित प्राथमिकता है — तो भरोसा किया जा सकता है। 📌 इसलिए आज मेरा निष्कर्ष है — अंधा विरोध नहीं, तथ्य आधारित विचार ही असली देशभक्ति है। अगर आप भी मानते हैं कि देश पहले — राजनीति बाद में, तो इस वीडियो को शेयर जरूर करें ताकि बहस नफरत की नहीं, समझ की हो। जय हिंद।1