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bihar एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ने जाने लिए रास्ता नहीं है l बिहार में कई ऐसे दूर-दराज और ग्रामीण इलाके हैं जहाँ स्कूलों तक पहुँचने के लिए पक्का रास्ता या सड़क नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक और बच्चे शिक्षा के प्रति अपनी लगन से वहां पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय वायरल वीडियो के अनुसार, कई प्राथमिक और राजकीय विद्यालयों (जैसे कुछ अंदरूनी ग्रामीण या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल) में आने-जाने के सुगम मार्ग का अभाव है, जहाँ बच्चों को खेतों की पगडंडियों या कठिन रास्तों से होकर स्कूल पहुँचना पड़ता है, इसके बावजूद वहां के शिक्षक बच्चों को, मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद, लगन से पढ़ाते हैं।
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bihar एक सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ने जाने लिए रास्ता नहीं है l बिहार में कई ऐसे दूर-दराज और ग्रामीण इलाके हैं जहाँ स्कूलों तक पहुँचने के लिए पक्का रास्ता या सड़क नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक और बच्चे शिक्षा के प्रति अपनी लगन से वहां पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय वायरल वीडियो के अनुसार, कई प्राथमिक और राजकीय विद्यालयों (जैसे कुछ अंदरूनी ग्रामीण या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्कूल) में आने-जाने के सुगम मार्ग का अभाव है, जहाँ बच्चों को खेतों की पगडंडियों या कठिन रास्तों से होकर स्कूल पहुँचना पड़ता है, इसके बावजूद वहां के शिक्षक बच्चों को, मूलभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद, लगन से पढ़ाते हैं।
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- मेरी आधी चाय पी गए अंकुर गोस्वामी , अंकुर के हाथों में मिला कप1
- मुश्किलों को मात देकर अरविंद ने हासिल की मंजिल, NEET-2026 में सफलता, अब बनेंगे डॉक्टर पहली असफलता से नहीं मानी हार, दूसरे प्रयास में NEET क्वालिफाई कर डॉक्टर बनेंगे अरविंद कृषि मजदूर परिवार के बेटे का रायपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयन, पंडो समुदाय और क्षेत्र में खुशी का माहौल रामचंद्रपुर/बलरामपुर, 11 सितंबर 2026। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो विपरीत परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इस बात को ग्राम चुनापाथर, विकासखंड रामचंद्रपुर निवासी अरविंद कुमार पंडो ने अपनी मेहनत से साबित कर दिखाया है। आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए अरविंद ने पहले प्रयास में असफलता मिलने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना, तैयारी जारी रखी और दूसरे प्रयास में NEET-2026 क्वालिफाई कर डॉक्टर बनने के अपने सपने की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया। अरविंद का चयन पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में MBBS की पढ़ाई के लिए हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पंडो समुदाय और आदिवासी समाज में खुशी का माहौल है। सफलता की जानकारी मिलने के बाद सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, सरगुजा के संभाग प्रभारी बीपीएस पोया अरविंद के घर पहुंचे और उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कृषि मजदूर परिवार में जन्मे अरविंद ने देखा डॉक्टर बनने का सपना अरविंद कुमार कृषि मजदूर रमेश प्रसाद पंडो और गृहिणी मुनिया देवी के पुत्र हैं। साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद अरविंद ने पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता बनाया। ग्रामीण परिवेश और सीमित सुविधाओं के बीच उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। अरविंद की सफलता इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि उन्होंने ऐसे क्षेत्र से निकलकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की है, जहां विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, मार्गदर्शन और अन्य शैक्षणिक संसाधनों के लिए काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एकलव्य विद्यालय से शुरू हुआ सफलता का सफर अरविंद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक शाला बैकुंठपुर से प्राप्त की। इसके बाद कक्षा 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने एकलव्य विद्यालय, बलरामपुर में पूरी की। स्कूल के दौरान ही उनके मन में डॉक्टर बनने का लक्ष्य मजबूत हुआ। 12वीं के बाद अरविंद ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए अंबिकापुर में रहकर NEET की तैयारी शुरू की। उन्होंने नियमित अध्ययन और मेहनत के साथ परीक्षा की तैयारी की। हालांकि पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने इसे अपनी मंजिल का अंत नहीं माना। पहले प्रयास की असफलता से सीख लेते हुए अरविंद ने अपनी तैयारी की समीक्षा की। जिन विषयों और क्षेत्रों में कमियां थीं, उन पर विशेष ध्यान दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ उन्होंने दोबारा परीक्षा की तैयारी की और दूसरे प्रयास में NEET-2026 क्वालिफाई करने में सफल रहे। असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी अरविंद की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो किसी प्रतियोगी परीक्षा में पहली बार असफल होने के बाद निराश हो जाते हैं। अरविंद ने असफलता को कमजोरी बनाने के बजाय उसे अपनी तैयारी सुधारने का अवसर बनाया। उनकी सफलता बताती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में एक प्रयास में सफलता न मिलने का अर्थ यह नहीं कि लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। सही रणनीति, लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के साथ दोबारा प्रयास किया जाए तो परिणाम बदला जा सकता है। “प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं” : बीपीएस पोया अरविंद को बधाई देने पहुंचे बीपीएस पोया ने कहा कि अरविंद की सफलता पंडो समुदाय सहित पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मेहनत और निरंतर प्रयास से यह साबित किया है कि “प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।” उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी हैं, लेकिन उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी के कारण उन्हें अपनी क्षमता दिखाने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि जाति प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं के कारण पात्र विद्यार्थियों को शिक्षा, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। पात्र विद्यार्थियों तक आरक्षण और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने के साथ समाज में शिक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। “गरीबी-अमीरी नहीं, मेहनत मायने रखती है” बीपीएस पोया ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा, “कौन गरीब है और कौन अमीर, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि हम अपने लक्ष्य और कर्तव्य के प्रति कितनी ईमानदारी और लगन से काम करते हैं।” उन्होंने अरविंद की सफलता को “कहो नहीं, करके दिखाओ” की भावना का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अरविंद ने केवल डॉक्टर बनने का सपना नहीं देखा, बल्कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास किया। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। अरविंद की युवाओं से अपील—नशे से दूर रहें, शिक्षा को बनाएं हथियार अपनी सफलता के बाद अरविंद कुमार ने क्षेत्र के युवाओं और विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा अपने समय और ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं तथा शिक्षा को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाएं। उन्होंने कहा कि जीवन में असफलता आना स्वाभाविक है, लेकिन असफलता के कारण लक्ष्य छोड़ देना सही नहीं है। असफलता से सीख लेकर अपनी कमियों को दूर करना चाहिए और पहले से अधिक मेहनत के साथ दोबारा प्रयास करना चाहिए। अरविंद ने कहा कि मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और सही दिशा में निरंतर प्रयास के माध्यम से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है। MBBS प्रवेश में समाज ने बढ़ाया सहयोग का हाथ अरविंद के MBBS में प्रवेश के दौरान समाज के लोगों ने आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से आने वाले अरविंद के लिए यह सहयोग काफी महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। अरविंद ने कहा कि समाज के लोगों द्वारा दिए गए सहयोग और प्रोत्साहन से उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वे पूरी लगन से MBBS की पढ़ाई करें और भविष्य में समाज एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सकें। “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा” सरपंच प्रतिनिधि नंदकेश्वर पंडो ने अरविंद को बधाई देते हुए कहा, “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वह दहाड़ेगा।” उन्होंने कहा कि अरविंद ने अपनी सफलता से यह साबित किया है कि ग्रामीण क्षेत्र का विद्यार्थी भी मेहनत और लगन के दम पर बड़े मुकाम तक पहुंच सकता है। उन्होंने क्षेत्र के अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान देने और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अरविंद की सफलता से क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों को भी डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। पंडो समाज में खुशी का माहौल अरविंद की सफलता की खबर मिलते ही उनके परिवार, रिश्तेदारों और समाज के लोगों में खुशी का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर मेडिकल कॉलेज में चयन हासिल करने वाले अरविंद को लोग बधाई दे रहे हैं। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि संसाधनों की कमी सपनों को रोक नहीं सकती। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और असफलता के बाद भी प्रयास जारी रखा जाए, तो सुदूर गांव का विद्यार्थी भी देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकता है। इस अवसर पर लक्ष्मी बैगा, राजेंद्र पंडो, कमला पंडो, रामजीत पंडो, सीमा पंडो, गोरेलाल पंडो सहित समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे और अरविंद को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।1
- .राष्ट्रीय वन शहीद दिवस: बलरामपुर में वीर वनकर्मियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, कलेक्टर और DFO रहे मौजूद ..राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के अवसर पर आज बलरामपुर स्थित वन मंडलाधिकारी DFO कार्यालय परिसर में एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान देश की प्राकृतिक संपदा जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर वन शहीदों को याद कर उन्हें नमन किया गया। बीओ01...कार्यक्रम में जिला कलेक्टर, डीएफओ (DFO) सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र एवं फूल-मालाएं अर्पित कर वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी दो जांबाज कर्मचारियों की शहादत को किया याद समारोह के दौरान विशेष रूप से बलरामपुर जिले के उन दो बहादुर वन कर्मियों को याद किया गया, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान नक्सलियों के चंगुल में फंसने के बावजूद हार नहीं मानी और कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अधिकारियों ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों की तरह ही ये वनकर्मी भी अपनी परवाह किए बिना दिन-रात जंगलों की सुरक्षा में डटे रहते हैं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ ने बलरामपुर के शहीदों के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन के दौरान देशभर में शहीद हुए सभी वनकर्मियों के साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों की शहादत हमेशा युवाओं और वन विभाग के अमले को अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने की प्रेरणा देती रहेगी। बाइट 1.. Alok Kumar Bajpai dfo बलरामपुर1
- स्लग...राष्ट्रीय वन शहीद दिवस: बलरामपुर में वीर वनकर्मियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, कलेक्टर और DFO रहे मौजूद जिला बलरामपुर रामानुजगंज लोकेशन..............बलरामपुर स्लग...राष्ट्रीय वन शहीद दिवस: बलरामपुर में वीर वनकर्मियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, कलेक्टर और DFO रहे मौजूद एंकर...राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के अवसर पर आज बलरामपुर स्थित वन मंडलाधिकारी DFO कार्यालय परिसर में एक गरिमामय श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान देश की प्राकृतिक संपदा जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर वन शहीदों को याद कर उन्हें नमन किया गया। बीओ01...कार्यक्रम में जिला कलेक्टर, डीएफओ (DFO) सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र एवं फूल-मालाएं अर्पित कर वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी दो जांबाज कर्मचारियों की शहादत को किया याद समारोह के दौरान विशेष रूप से बलरामपुर जिले के उन दो बहादुर वन कर्मियों को याद किया गया, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान नक्सलियों के चंगुल में फंसने के बावजूद हार नहीं मानी और कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। अधिकारियों ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों की तरह ही ये वनकर्मी भी अपनी परवाह किए बिना दिन-रात जंगलों की सुरक्षा में डटे रहते हैं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएफओ ने बलरामपुर के शहीदों के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन के दौरान देशभर में शहीद हुए सभी वनकर्मियों के साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों की शहादत हमेशा युवाओं और वन विभाग के अमले को अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने की प्रेरणा देती रहेगी। बाइट 1.. Alok Kumar Bajpai dfo बलरामपुर1
- मनिका प्रखंड क्षेत्र के लोहिया भवन में विश्व हिंदू परिषद का 64 व स्थापना दिवस मनाया गया स्थापना दिवस पर प्रांत सत्संग टोली सदस्य दामोदर मिश्र के द्वारा विश्व हिंदू परिषद का कार्य के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई1
- ग्राम बाजना थाना अंतर्गत खेत विवाद को लेकर मारपीट, पांच लोगों पर मामला दर्ज1
- अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी के अवतरण दिवस पर हुआ वृहद वृक्षारोपण रेणुकूट, सोनभद्र। परम पूज्य अघोराचार्य बाबा कीनाराम जी के अवतरण दिवस के अवसर पर श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा रेणुकूट, सोनभद्र द्वारा वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में संस्था से जुड़े पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस दौरान परिसर में विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। पर्यावरण को स्वच्छ एवं संतुलित बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण के साथ लोगों ने समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का भी संकल्प लिया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।1
- प्रधानमंत्री आवास की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का आरोप, कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास की राशि दूसरे खाते में ट्रांसफर करने का आरोप, कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण कलेक्टर से मुलाकात के बाद जिला पंचायत CEO से मिलने पहुंचे ग्रामीण, डेढ़ बजे से शाम 5 बजे तक करते रहे इंतजार; भारी बारिश में भी डटे रहे, अधिकारी के नहीं पहुंचने पर निराश लौटे बलरामपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आवासों की राशि हितग्राहियों के खातों में पहुंचने के बजाय कथित तौर पर दूसरे लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर राशि आहरित किए जाने के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने बलरामपुर कलेक्टर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण में कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके नाम से आवास स्वीकृत हुए थे और योजना की राशि जारी भी की गई, लेकिन कथित रूप से राशि उनके खातों में न जाकर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद राशि का आहरण भी किए जाने का आरोप है। मामले में शिकायत और जानकारी अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीण परेशान हैं। कलेक्टर से मिलने के बाद CEO कार्यालय पहुंचे ग्रामीण ग्रामीणों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी। बताया जा रहा है कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में ग्रामीणों को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मिलने के लिए भेजा गया था, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई के संबंध में चर्चा हो सके। इसी उम्मीद के साथ ग्रामीण दोपहर करीब 1:30 बजे जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार वे जिला पंचायत CEO से मुलाकात के लिए उनके कार्यालय के बाहर इंतजार करते रहे। डेढ़ बजे से शाम 5 बजे तक भारी बारिश में इंतजार ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब साढ़े तीन घंटे तक अधिकारी से मिलने का इंतजार करते रहे। इस दौरान क्षेत्र में भारी बारिश होती रही, लेकिन अपनी शिकायत के निराकरण की उम्मीद में ग्रामीण कार्यालय के बाहर डटे रहे। ग्रामीणों के अनुसार शाम करीब 5 बजे तक भी CEO कार्यालय नहीं पहुंच सके। आखिरकार ग्रामीणों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। बताया गया कि CEO की अनुपस्थिति में उनके स्टेनो के माध्यम से ग्रामीणों को वह डाक दी गई, जिसे संबंधित मैडम द्वारा आगे कार्रवाई के लिए फॉरवर्ड किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि वे अधिकारी से सीधे मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी और उन्हें उपलब्ध दस्तावेज लेकर ही वापस लौटना पड़ा। सवालों के घेरे में योजना की राशि का हस्तांतरण प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में हितग्राही के नाम स्वीकृत राशि यदि किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर हुई और उसका आहरण भी कर लिया गया, तो यह गंभीर मामला है। ग्रामीण अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी समस्या लेकर लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें केवल आश्वासन और पत्राचार का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अब उनकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच किस स्तर पर कराता है और यदि आवास की राशि वास्तव में दूसरे खातों में ट्रांसफर कर आहरित की गई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कब तक कार्रवाई होती है।2
- 🚨 ब्रेकिंग: सोनभद्र चोपन के गुरमुरा में पोखरे में डूबने से 39 वर्षीय रमेश कुमार की मौत। दसवां संस्कार के दौरान नहाते समय पैर फिसलने से गहरे पानी में डूबे। बचाने कूदे गोविन्द 23 वर्ष युवक की हालत सामान्य। परिवार में मचा कोहराम। पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। #Sonbhadra #Chopan #BreakingNews1