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बिहार के स्वास्थ्य विभाग को सुधारने के लिए निशांत कुमार ने एक 'नया अवतार' दिखाया है, जहाँ वे रात-रात भर जागकर विभाग की सभी फाइलें पढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और हर एक विवरण की व्यक्तिगत रूप से जाँच की है ताकि समस्याओं को गहराई से समझा जा सके। इसके तहत, 15,000 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा जिससे डॉक्टरों की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सकेगी। निशांत कुमार ने खुद हर जगह जाकर कैमरों के माध्यम से निगरानी करने की बात कही है, जिसमें यह ट्रैक किया जाएगा कि डॉक्टरों ने कितने ऑपरेशन किए और कितने राउंड लगाए। उनके इस विस्तृत और गहन कार्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे आखिर करना क्या चाहते हैं और क्या उन्होंने बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने का ठेका ले लिया है? यह भी आशंका जताई गई है कि वे बिहार के मेडिकल माफिया के सामने कितने दिन टिक पाएंगे, क्योंकि नीतीश कुमार ने अपने बेटे को 'सबसे बड़ा माफिया वाला मंत्रालय' दिया है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि यदि निशांत कुमार इन चुनौतियों से निपटने में सफल होते हैं, तो 2030 में उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा और वे सबको चौंका देंगे। उनके इस व्यापक प्रयास की तुलना देश के स्वास्थ्य मंत्री से की गई है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे सिर्फ 'साहब को चाय पिलाते हैं' और 70% भारतीयों को बिना गूगल किए उनका नाम भी पता नहीं होगा। निशांत कुमार ने मंत्रालय में पहले दिन कहा था कि वे नए हैं और पहले देखेंगे, सीखेंगे, फिर कुछ बोलेंगे।

1 hr ago
user_MD AZAD ABBAS
MD AZAD ABBAS
मेहरमा, गोड्डा, झारखंड•
1 hr ago

बिहार के स्वास्थ्य विभाग को सुधारने के लिए निशांत कुमार ने एक 'नया अवतार' दिखाया है, जहाँ वे रात-रात भर जागकर विभाग की सभी फाइलें पढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और हर एक विवरण की व्यक्तिगत रूप से जाँच की है ताकि समस्याओं को गहराई से समझा जा सके। इसके तहत, 15,000 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा जिससे डॉक्टरों की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सकेगी। निशांत कुमार ने खुद हर जगह जाकर कैमरों के माध्यम से निगरानी करने की बात कही है, जिसमें यह ट्रैक किया जाएगा कि डॉक्टरों ने कितने ऑपरेशन किए और कितने राउंड लगाए। उनके इस विस्तृत और गहन कार्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे आखिर करना क्या चाहते हैं और क्या उन्होंने बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने का ठेका ले लिया है? यह भी आशंका जताई गई है कि वे बिहार के मेडिकल माफिया के सामने कितने दिन टिक पाएंगे, क्योंकि नीतीश कुमार ने अपने बेटे को 'सबसे बड़ा माफिया वाला मंत्रालय' दिया है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि यदि निशांत कुमार इन चुनौतियों से निपटने में सफल होते हैं, तो 2030 में उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा और वे सबको चौंका देंगे। उनके इस व्यापक प्रयास की तुलना देश के स्वास्थ्य मंत्री से की गई है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे सिर्फ 'साहब को चाय पिलाते हैं' और 70% भारतीयों को बिना गूगल किए उनका नाम भी पता नहीं होगा। निशांत कुमार ने मंत्रालय में पहले दिन कहा था कि वे नए हैं और पहले देखेंगे, सीखेंगे, फिर कुछ बोलेंगे।

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  • बंजारा समाज की डोली के अचानक गायब हो जाने से पूरे समुदाय में चिंता व्याप्त है। समुदाय के लोग अपनी डोली का पता लगाने के लिए एकजुट होकर उसकी तलाश में जुटे हुए हैं।
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    बंजारा समाज की डोली के अचानक गायब हो जाने से पूरे समुदाय में चिंता व्याप्त है। समुदाय के लोग अपनी डोली का पता लगाने के लिए एकजुट होकर उसकी तलाश में जुटे हुए हैं।
    user_Raju Ranjan
    Raju Ranjan
    Media Consultant कहलगाँव, भागलपुर, बिहार•
    8 hrs ago
  • सीवान डबल मर्डर केस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में आरोपी वीरेंद्र यादव की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बावजूद वीरेंद्र यादव अब तक फरार चल रहा है और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
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    सीवान डबल मर्डर केस से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में आरोपी वीरेंद्र यादव की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बावजूद वीरेंद्र यादव अब तक फरार चल रहा है और उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।
    user_BHOLA KUMAR
    BHOLA KUMAR
    Local News Reporter Kahalgaon, Jamālpur•
    8 hrs ago
  • एक वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने का अनुरोध किया गया है। यह अपील दर्शकों से की गई है कि वे वीडियो को व्यापक रूप से प्रसारित करें।
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    एक वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने का अनुरोध किया गया है। यह अपील दर्शकों से की गई है कि वे वीडियो को व्यापक रूप से प्रसारित करें।
    user_Topesh Kumar
    Topesh Kumar
    मंद्रो, साहेबगंज, झारखंड•
    9 hrs ago
  • दिल्ली के निवासियों के लिए एक बड़ी खबर है, जहाँ 30 जून से राजधानी में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) नामक एक बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। यह कोई मामूली सरकारी काम नहीं है; यह अभियान दिल्ली की वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट और दुरुस्त करने के लिए चलाया जाएगा। इसके तहत, बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) 30 जून से 29 जुलाई तक, पूरे एक महीने के लिए, खुद घर-घर आकर यह सुनिश्चित करेंगे कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम छूट न गया हो या उसमें कोई गलती न हो। यह सरकारी प्रक्रिया दिल्ली के निवासियों के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से सीधे तौर पर जुड़ी है। इस अभियान के तहत, BLO घर-घर जाकर उन सभी मुद्दों का समाधान करेंगे, जैसे किसी का नाम वोटर लिस्ट में न होना या उसमें कोई गलती होना। दिल्ली चुनाव आयोग की इस तैयारी में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि BLO कितनी बार घरों का दौरा करेंगे, यदि घर बंद पाया जाता है तो नागरिकों को क्या करना होगा, और नौकरीपेशा व व्यापारियों के लिए चुनाव आयोग ने किस प्रकार का 'फ्लेक्सिबल शेड्यूल' तैयार किया है। इस प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए नागरिकों को अपने सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज़ (डॉक्यूमेंट्स) तैयार रखने की सलाह दी गई है। दिल्ली चुनाव आयोग द्वारा की जा रही इस महा-तैयारी का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को समझना और लागू करना है। इस संदर्भ में, नागरिकों से यह भी जानना चाहा गया है कि क्या उन्हें लगता है कि इस अभियान से वोटर लिस्ट की सभी गड़बड़ियां पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी।
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    दिल्ली के निवासियों के लिए एक बड़ी खबर है, जहाँ 30 जून से राजधानी में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) नामक एक बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। यह कोई मामूली सरकारी काम नहीं है; यह अभियान दिल्ली की वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट और दुरुस्त करने के लिए चलाया जाएगा। इसके तहत, बूथ-लेवल अधिकारी (BLO) 30 जून से 29 जुलाई तक, पूरे एक महीने के लिए, खुद घर-घर आकर यह सुनिश्चित करेंगे कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम छूट न गया हो या उसमें कोई गलती न हो।

यह सरकारी प्रक्रिया दिल्ली के निवासियों के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से सीधे तौर पर जुड़ी है। इस अभियान के तहत, BLO घर-घर जाकर उन सभी मुद्दों का समाधान करेंगे, जैसे किसी का नाम वोटर लिस्ट में न होना या उसमें कोई गलती होना। दिल्ली चुनाव आयोग की इस तैयारी में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि BLO कितनी बार घरों का दौरा करेंगे, यदि घर बंद पाया जाता है तो नागरिकों को क्या करना होगा, और नौकरीपेशा व व्यापारियों के लिए चुनाव आयोग ने किस प्रकार का 'फ्लेक्सिबल शेड्यूल' तैयार किया है। इस प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए नागरिकों को अपने सभी आवश्यक सरकारी दस्तावेज़ (डॉक्यूमेंट्स) तैयार रखने की सलाह दी गई है।

दिल्ली चुनाव आयोग द्वारा की जा रही इस महा-तैयारी का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को समझना और लागू करना है। इस संदर्भ में, नागरिकों से यह भी जानना चाहा गया है कि क्या उन्हें लगता है कि इस अभियान से वोटर लिस्ट की सभी गड़बड़ियां पूरी तरह से ठीक हो पाएंगी।
    user_Abhishek ranjan C E O
    Abhishek ranjan C E O
    Court reporter कहलगाँव, भागलपुर, बिहार•
    21 hrs ago
  • नौगछिया मार्केट में स्थित एक सैकड़ों साल पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा कर लिया गया है। इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है, जिसकी लोग सराहना कर रहे हैं।
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    नौगछिया मार्केट में स्थित एक सैकड़ों साल पुराने मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य पूरा कर लिया गया है। इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है, जिसकी लोग सराहना कर रहे हैं।
    user_Explore Naugachia
    Explore Naugachia
    Content Creator (YouTuber) नवगछिया, भागलपुर, बिहार•
    25 min ago
  • बिहार के स्वास्थ्य विभाग को सुधारने के लिए निशांत कुमार ने एक 'नया अवतार' दिखाया है, जहाँ वे रात-रात भर जागकर विभाग की सभी फाइलें पढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और हर एक विवरण की व्यक्तिगत रूप से जाँच की है ताकि समस्याओं को गहराई से समझा जा सके। इसके तहत, 15,000 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा जिससे डॉक्टरों की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सकेगी। निशांत कुमार ने खुद हर जगह जाकर कैमरों के माध्यम से निगरानी करने की बात कही है, जिसमें यह ट्रैक किया जाएगा कि डॉक्टरों ने कितने ऑपरेशन किए और कितने राउंड लगाए। उनके इस विस्तृत और गहन कार्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे आखिर करना क्या चाहते हैं और क्या उन्होंने बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने का ठेका ले लिया है? यह भी आशंका जताई गई है कि वे बिहार के मेडिकल माफिया के सामने कितने दिन टिक पाएंगे, क्योंकि नीतीश कुमार ने अपने बेटे को 'सबसे बड़ा माफिया वाला मंत्रालय' दिया है। हालांकि, यह माना जा रहा है कि यदि निशांत कुमार इन चुनौतियों से निपटने में सफल होते हैं, तो 2030 में उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा और वे सबको चौंका देंगे। उनके इस व्यापक प्रयास की तुलना देश के स्वास्थ्य मंत्री से की गई है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे सिर्फ 'साहब को चाय पिलाते हैं' और 70% भारतीयों को बिना गूगल किए उनका नाम भी पता नहीं होगा। निशांत कुमार ने मंत्रालय में पहले दिन कहा था कि वे नए हैं और पहले देखेंगे, सीखेंगे, फिर कुछ बोलेंगे।
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    बिहार के स्वास्थ्य विभाग को सुधारने के लिए निशांत कुमार ने एक 'नया अवतार' दिखाया है, जहाँ वे रात-रात भर जागकर विभाग की सभी फाइलें पढ़ रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और हर एक विवरण की व्यक्तिगत रूप से जाँच की है ताकि समस्याओं को गहराई से समझा जा सके। इसके तहत, 15,000 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे और एक सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा जिससे डॉक्टरों की हर गतिविधि पर नज़र रखी जा सकेगी। निशांत कुमार ने खुद हर जगह जाकर कैमरों के माध्यम से निगरानी करने की बात कही है, जिसमें यह ट्रैक किया जाएगा कि डॉक्टरों ने कितने ऑपरेशन किए और कितने राउंड लगाए।

उनके इस विस्तृत और गहन कार्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि वे आखिर करना क्या चाहते हैं और क्या उन्होंने बिहार के हेल्थ सिस्टम को सुधारने का ठेका ले लिया है? यह भी आशंका जताई गई है कि वे बिहार के मेडिकल माफिया के सामने कितने दिन टिक पाएंगे, क्योंकि नीतीश कुमार ने अपने बेटे को 'सबसे बड़ा माफिया वाला मंत्रालय' दिया है।

हालांकि, यह माना जा रहा है कि यदि निशांत कुमार इन चुनौतियों से निपटने में सफल होते हैं, तो 2030 में उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा और वे सबको चौंका देंगे। उनके इस व्यापक प्रयास की तुलना देश के स्वास्थ्य मंत्री से की गई है, जिनके बारे में कहा गया है कि वे सिर्फ 'साहब को चाय पिलाते हैं' और 70% भारतीयों को बिना गूगल किए उनका नाम भी पता नहीं होगा। निशांत कुमार ने मंत्रालय में पहले दिन कहा था कि वे नए हैं और पहले देखेंगे, सीखेंगे, फिर कुछ बोलेंगे।
    user_MD AZAD ABBAS
    MD AZAD ABBAS
    मेहरमा, गोड्डा, झारखंड•
    1 hr ago
  • हाजीपुर में एक मरीज की मौत के बाद भारी बवाल मच गया है। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज का इलाज उसकी जाति पूछने के बाद किया था, जिसके चलते यह घटना और गंभीर हो गई। इस स्थिति ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पासवान समुदाय की इस हालात का जिम्मेदार कौन है।
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    हाजीपुर में एक मरीज की मौत के बाद भारी बवाल मच गया है। आरोप है कि डॉक्टर ने मरीज का इलाज उसकी जाति पूछने के बाद किया था, जिसके चलते यह घटना और गंभीर हो गई। इस स्थिति ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पासवान समुदाय की इस हालात का जिम्मेदार कौन है।
    user_रिपोर्टर- संजीव कुमार [ग्लोबल
    रिपोर्टर- संजीव कुमार [ग्लोबल
    Local News Reporter मेहरमा, गोड्डा, झारखंड•
    53 min ago
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