स्वास्थ्य विभाग पलवल द्वारा जिले के सभी गांवों और शहरी इलाकों में मलेरिया को खत्म करने के लिए एक योजना तैयार की गई है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घनी जोखिम वाली आबादी की मॉनिटरिंग पर फोकस किया गया है। ऐसे इलाकों में स्वास्थ्य टीमें हर महीने घर घर जाकर सर्वे कर रही हैं, उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में जिला में अभी तक मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। पलवल डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि पलवल एक औद्योगिक क्षेत्र है। जिले में अधिकतर लोग माइग्रेट होते रहते है। जिसके चलते मलेरिया के केस आने की संभावना बनी रहती है। मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीमों का गठन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों एवं नगर परिषद को निर्देश दिए गए है,कि गली मोहल्लों में पानी को एकत्रित न होने दें। खड़े हुए पानी की निकासी करें। जहां मच्छर पनप रहे है वहां पर फोङ्क्षगंग करवाऐं। स्वास्थ्य विभाग की सभी टीमों को मलेरिया रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट प्रदान की गई है। यह किट खून में मलेरिया परजीवी का पता लगाने वाला एक तेज उपकरण है। उन्होंने कहा कि बुखार का कोई भी केस सामने आता है तो उसे मलेरिया मानकर चलते है। जैसे ही कोई केस पॉजिटिव आता है तो उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक में मलेरिया के मच्छर के लार्वा को समाप्त करने की दवाई पहुंचा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए है कि जहां पर भी गंदा पानी जमा है वहां पर दवाई डालने का कार्य करें। डिप्टी सिविल सर्जन नवीन गर्ग ने बताया कि जिले के गांवों में बने हुए तालाब में गंबूजिया मछली डालने का कार्य किया जा रहा है। जिले के 90 प्रतिशत गांवों में गंबूजिया मछली डाल दी गई है। गंबूजिया मछली मलेरिया मच्छर के लार्वा को खाकर समाप्त कर देती है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोशिश की जा रही है कि जिले में मलेरिया का केस न आए।
स्वास्थ्य विभाग पलवल द्वारा जिले के सभी गांवों और शहरी इलाकों में मलेरिया को खत्म करने के लिए एक योजना तैयार की गई है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घनी जोखिम वाली आबादी की मॉनिटरिंग पर फोकस किया गया है। ऐसे इलाकों में स्वास्थ्य टीमें हर महीने घर घर जाकर सर्वे कर रही हैं, उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में जिला में अभी तक मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। पलवल डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि पलवल एक औद्योगिक क्षेत्र है। जिले में अधिकतर लोग माइग्रेट होते रहते है। जिसके चलते मलेरिया के केस आने की संभावना बनी रहती है। मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीमों का गठन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों एवं नगर परिषद को निर्देश दिए गए है,कि गली मोहल्लों में पानी को एकत्रित न होने दें। खड़े हुए पानी की निकासी करें। जहां मच्छर पनप रहे है वहां पर फोङ्क्षगंग करवाऐं। स्वास्थ्य विभाग की सभी टीमों को मलेरिया रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट प्रदान की गई है। यह किट खून में मलेरिया परजीवी का पता लगाने वाला एक तेज उपकरण है। उन्होंने कहा कि बुखार का कोई भी केस सामने आता है तो उसे मलेरिया मानकर चलते है। जैसे ही कोई केस पॉजिटिव आता है तो उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक में मलेरिया के मच्छर के लार्वा को समाप्त करने की दवाई पहुंचा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए है कि जहां पर भी गंदा पानी जमा है वहां पर दवाई डालने का कार्य करें। डिप्टी सिविल सर्जन नवीन गर्ग ने बताया कि जिले के गांवों में बने हुए तालाब में गंबूजिया मछली डालने का कार्य किया जा रहा है। जिले के 90 प्रतिशत गांवों में गंबूजिया मछली डाल दी गई है। गंबूजिया मछली मलेरिया मच्छर के लार्वा को खाकर समाप्त कर देती है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोशिश की जा रही है कि जिले में मलेरिया का केस न आए।
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- पलवल डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. नवीन गर्ग ने बताया कि पलवल एक औद्योगिक क्षेत्र है। जिले में अधिकतर लोग माइग्रेट होते रहते है। जिसके चलते मलेरिया के केस आने की संभावना बनी रहती है। मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीमों का गठन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों एवं नगर परिषद को निर्देश दिए गए है,कि गली मोहल्लों में पानी को एकत्रित न होने दें। खड़े हुए पानी की निकासी करें। जहां मच्छर पनप रहे है वहां पर फोङ्क्षगंग करवाऐं। स्वास्थ्य विभाग की सभी टीमों को मलेरिया रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट प्रदान की गई है। यह किट खून में मलेरिया परजीवी का पता लगाने वाला एक तेज उपकरण है। उन्होंने कहा कि बुखार का कोई भी केस सामने आता है तो उसे मलेरिया मानकर चलते है। जैसे ही कोई केस पॉजिटिव आता है तो उसका इलाज शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक में मलेरिया के मच्छर के लार्वा को समाप्त करने की दवाई पहुंचा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए है कि जहां पर भी गंदा पानी जमा है वहां पर दवाई डालने का कार्य करें। डिप्टी सिविल सर्जन नवीन गर्ग ने बताया कि जिले के गांवों में बने हुए तालाब में गंबूजिया मछली डालने का कार्य किया जा रहा है। जिले के 90 प्रतिशत गांवों में गंबूजिया मछली डाल दी गई है। गंबूजिया मछली मलेरिया मच्छर के लार्वा को खाकर समाप्त कर देती है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोशिश की जा रही है कि जिले में मलेरिया का केस न आए।1
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- नूंह। जिला पुलिस द्वारा अवैध खनन की रोकथाम को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार 29 अप्रैल को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई की गई। जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान के तहत थाना रोजका मेव और थाना पिनंगवा क्षेत्र में अवैध खनन के संभावित स्थलों पर पहुंचकर रास्तों को अवरुद्ध किया गया। थाना रोजका मेव क्षेत्र के गांव बड़का अलीमुद्दीन की पहाड़ी में हो रही अवैध खनन गतिविधियों को रोकने के लिए प्रबंधक थाना रोजका मेव निरीक्षक विनोद कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान ग्राम पंचायत सरपंच को बुलाकर जेसीबी मशीन की मदद से उन रास्तों को बंद कराया गया, जिनका उपयोग अवैध खनन में लगे वाहनों द्वारा किया जा रहा था। वहीं थाना पिनंगवा क्षेत्र के कुतकपुर शाह चोखा पहाड़ी इलाके में भी वन विभाग की टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई की गई। यहां अवैध खनन की संभावनाओं को देखते हुए जेसीबी मशीन द्वारा रास्तों की खुदाई कर उन्हें अवरुद्ध किया गया, ताकि खनन में प्रयुक्त साधनों की आवाजाही को रोका जा सके। इस कार्रवाई के दौरान संबंधित थाना पुलिस बल और वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस प्रवक्ता कृष्ण कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि नूंह जिला पुलिस अवैध खनन को रोकने के लिए पूरी तरह गंभीर है और इस दिशा में लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार संबंधित विभागों, विशेषकर वन विभाग और खनन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे अवैध खनन पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।1
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