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देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है। बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।

2 hrs ago
user_Amod Kumar
Amod Kumar
रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है। बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है। बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं। सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
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    देश के अमृतकाल में प्रवेश करने और विकास के तीव्र गति से आगे बढ़ने के तमाम दावों के बावजूद, उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की मवई बुजुर्ग स्थित एक दलित बस्ती की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल उठाती है। यह बस्ती विकास की कथित 'राजपथ' से पूरी तरह कटी हुई है, जहां आज भी न कोई उचित सड़क है, न नाली की व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। भले ही सरकारी फाइलों और चुनावी भाषणों में विकास 'संतोषजनक' दिखाया जाता हो, लेकिन इस बस्ती में वह आज भी रास्ता ही तलाश रहा है।

बरसात का मौसम यहां के लोगों के लिए 'मुसीबत' बनकर आता है, जब पानी आसमान से कम और 'व्यवस्था की उदासीनता' से ज्यादा बरसता है, जिससे घरों के सामने दलदल बन जाता है। यहाँ के बच्चे बचपन से ही यह सीख जाते हैं कि विकास एक ऐसा शब्द है जो भाषणों में तो रहता है, पर बस्तियों तक नहीं पहुँचता। लोग वर्षों से अपनी फरियाद कर रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतें केवल आवेदनों में, आवेदन फाइलों में और फाइलें लंबे इंतजार में बदल जाती हैं, और उनकी आवाज उन वातानुकूलित कमरों तक नहीं पहुँच पाती जहाँ विकास की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाती हैं।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आता है जब एक माँ अपनी बेटी की शादी से पहले दहेज की चिंता नहीं करती, बल्कि बारात के गाँव तक पहुँचने के लिए सड़क न होने की चिंता में रोती है। यह आँसू करोड़ों के विकास का दावा करने वाली व्यवस्था के चेहरे पर एक सवाल हैं, जो कुछ मीटर सड़क भी उपलब्ध नहीं करा पाती। इतिहास जब इस दौर को लिखेगा, तो वह यह जरूर दर्ज करेगा कि यह वह समय था जब विकास के महलों में जश्न मनाया जा रहा था और उसी देश के एक कोने में कुछ लोग कीचड़ में धँसकर यह पूछ रहे थे कि, 'क्या हम भी इसी भारत के नागरिक हैं, या सिर्फ़ आँकड़ों की भीड़ में गुम एक अनसुनी बस्ती?' और तब विकास शायद चुप रहेगा, क्योंकि उसके पास भाषण तो बहुत हैं, लेकिन इस बस्ती के सवालों का जवाब नहीं।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • बांदा में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन बांदा में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास किया। सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी लाइन सुश्री मेविस टॉक की उपस्थिति में, योगाचार्यों ने योग के महत्व और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बारे में जानकारी प्रदान की। इस दौरान, पुलिसकर्मियों ने अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से योगाभ्यास किया। इसी कड़ी में, जनपद के सभी पुलिस थानों में भी योग शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में थाना प्रभारियों सहित समस्त पुलिस बल ने योग क्रियाओं में भाग लेकर स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन जीने का संदेश दिया।
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    बांदा में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन बांदा में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास किया। सहायक पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी लाइन सुश्री मेविस टॉक की उपस्थिति में, योगाचार्यों ने योग के महत्व और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के बारे में जानकारी प्रदान की। इस दौरान, पुलिसकर्मियों ने अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से योगाभ्यास किया।

इसी कड़ी में, जनपद के सभी पुलिस थानों में भी योग शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में थाना प्रभारियों सहित समस्त पुलिस बल ने योग क्रियाओं में भाग लेकर स्वस्थ और तनावमुक्त जीवन जीने का संदेश दिया।
    user_Surash Sahu
    Surash Sahu
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
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    बाँदा-कानपुर रेलवे लाइन के दोहरीकरण का काम बहुत तेजी से चल रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह कार्य करीब दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा। इस दोहरीकरण के परिणामस्वरूप, बाँदा जिले को कई नई ट्रेनें मिलेंगी, जिससे लोगों को दूसरे जिलों से ट्रेन पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों का समय भी बचेगा और डबल लाइन बनने से लोगों में खुशी का माहौल है।
    user_दिलीप कुमार जैन
    दिलीप कुमार जैन
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के सख्त निर्देशों के बाद बाँदा में अपराधियों पर शिकंजा कसा गया है। इसी कड़ी में तिंदवारी पुलिस ने साधु-संत का वेश धारण कर लोगों को ठगने वाले तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। ये ठग भोले-भाले लोगों को 'रुपए दोगुना' करने का लालच देकर उनकी जेब काटते थे। हाल ही में 18 जून को हुई एक घटना के अनुसार, फतेहपुर के मनीष साहू जब बाँदा आ रहे थे, तब बेंदाघाट चौराहे पर उन्हें एक 'साधु' मिला। इस 'साधु' ने मनीष को रुपए दोगुना करने का झांसा दिया। इसी बीच, एक चारपहिया गाड़ी से दो अन्य लोग उतरे और मनीष की गाड़ी से 50 हजार रुपए लेकर तीनों उसी गाड़ी से फरार हो गए। इस सूचना के बाद थाना तिंदवारी में तत्काल मुकदमा दर्ज कर एक टीम का गठन किया गया। वैज्ञानिक तरीकों और मुखबिर की मदद से पुलिस टीम ने 19/20 जून की दरमियानी रात भिडौरा रोड से तीनों ठगों को दबोच लिया। इनके पास से 75,200 रुपए नगद, एक चार पहिया गाड़ी, एक अवैध तमंचा 315 बोर और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार किए गए ठगों की पहचान अजय नाथ (पिंगरी, फरह, मथुरा), नवाब नाथ (विसरख सेक्टर-1, गौतमबुद्ध नगर) और गौरव नाथ (अछेजा, हसनपुर, पलवल हरियाणा) के रूप में हुई है। पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने इस संबंध में कहा है कि बाँदा में अब ठगों और बदमाशों की खैर नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों का भेष कोई भी हो, जो जनता को ठगेगा वह सीधे जेल जाएगा। एसपी ने तिंदवारी पुलिस के इस शानदार काम की सराहना करते हुए बताया कि इस पूरे गिरोह को खंगाला जा रहा है, और यह भी सामने आएगा कि उन्होंने और कहाँ-कहाँ ठगी की है। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे लालची लोगों से सावधान रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों पर न फंसे, क्योंकि लालच बुरी बला है।
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    पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल के सख्त निर्देशों के बाद बाँदा में अपराधियों पर शिकंजा कसा गया है। इसी कड़ी में तिंदवारी पुलिस ने साधु-संत का वेश धारण कर लोगों को ठगने वाले तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। ये ठग भोले-भाले लोगों को 'रुपए दोगुना' करने का लालच देकर उनकी जेब काटते थे।

हाल ही में 18 जून को हुई एक घटना के अनुसार, फतेहपुर के मनीष साहू जब बाँदा आ रहे थे, तब बेंदाघाट चौराहे पर उन्हें एक 'साधु' मिला। इस 'साधु' ने मनीष को रुपए दोगुना करने का झांसा दिया। इसी बीच, एक चारपहिया गाड़ी से दो अन्य लोग उतरे और मनीष की गाड़ी से 50 हजार रुपए लेकर तीनों उसी गाड़ी से फरार हो गए।

इस सूचना के बाद थाना तिंदवारी में तत्काल मुकदमा दर्ज कर एक टीम का गठन किया गया। वैज्ञानिक तरीकों और मुखबिर की मदद से पुलिस टीम ने 19/20 जून की दरमियानी रात भिडौरा रोड से तीनों ठगों को दबोच लिया। इनके पास से 75,200 रुपए नगद, एक चार पहिया गाड़ी, एक अवैध तमंचा 315 बोर और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। गिरफ्तार किए गए ठगों की पहचान अजय नाथ (पिंगरी, फरह, मथुरा), नवाब नाथ (विसरख सेक्टर-1, गौतमबुद्ध नगर) और गौरव नाथ (अछेजा, हसनपुर, पलवल हरियाणा) के रूप में हुई है।

पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने इस संबंध में कहा है कि बाँदा में अब ठगों और बदमाशों की खैर नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों का भेष कोई भी हो, जो जनता को ठगेगा वह सीधे जेल जाएगा। एसपी ने तिंदवारी पुलिस के इस शानदार काम की सराहना करते हुए बताया कि इस पूरे गिरोह को खंगाला जा रहा है, और यह भी सामने आएगा कि उन्होंने और कहाँ-कहाँ ठगी की है। उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसे लालची लोगों से सावधान रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति की बातों पर न फंसे, क्योंकि लालच बुरी बला है।
    user_Altmush Husain
    Altmush Husain
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • आज अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज द्वारा थाना मटौंध का गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र, महिला हेल्प डेस्क, थाना कार्यालय और परिसर, विभिन्न अभिलेखों, मालखाना, शस्त्रागार, कंप्यूटर कक्ष, बैरक, मेस तथा थाने की साफ-सफाई का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के बाद, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पाई गई कमियों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके अतिरिक्त, अभिलेखों के समुचित रख-रखाव और नियमित अद्यतनीकरण सुनिश्चित करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने तथा जनसुनवाई की गुणवत्ता में सुधार लाने हेतु भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस कर्मियों को आमजन के प्रति संवेदनशील और तत्पर रहकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
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    आज अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज द्वारा थाना मटौंध का गहन निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र, महिला हेल्प डेस्क, थाना कार्यालय और परिसर, विभिन्न अभिलेखों, मालखाना, शस्त्रागार, कंप्यूटर कक्ष, बैरक, मेस तथा थाने की साफ-सफाई का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के बाद, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि पाई गई कमियों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसके अतिरिक्त, अभिलेखों के समुचित रख-रखाव और नियमित अद्यतनीकरण सुनिश्चित करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने तथा जनसुनवाई की गुणवत्ता में सुधार लाने हेतु भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस कर्मियों को आमजन के प्रति संवेदनशील और तत्पर रहकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
    user_दुर्गेश कश्यप
    दुर्गेश कश्यप
    बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
  • मौदहा कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को विभिन्न स्थानों पर योग शिविरों का आयोजन किया गया। गल्ला मंडी समिति परिसर और रहमानिया ग्राउंड सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ और संतुलित जीवन का संकल्प लिया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गल्ला मंडी समिति परिसर में आयोजित योग शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति अनेक बीमारियों से बच सकता है। इस दौरान राम नारायण, शिवकरण, जयपाल, शत्रुघ्न, सत्य प्रकाश, जियालाल, रोहित और अनिल ने उपस्थित लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में युवराज सिंह, रामदेव सिंह और सुरेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। वहीं, रहमानिया ग्राउंड में आयोजित योग शिविर में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक योगाभ्यास किया। योग ट्रेनर हामिद भाई, अरशद मामा, शहबाज अली, आशिफ, सकील और राजेंद्र मधुपिया ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र, शांत और सकारात्मक रखता है। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के 'योग को जन-जन तक पहुंचाने' के आह्वान का समर्थन करते हुए सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। कई स्थानों पर योगाभ्यास के साथ स्वास्थ्य जागरूकता संबंधी संदेश भी दिए गए, जिसमें लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से कस्बे में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश प्रसारित हुआ। पूरे दिन विभिन्न स्थानों पर योग से जुड़े आयोजन होते रहे और लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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    मौदहा कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को विभिन्न स्थानों पर योग शिविरों का आयोजन किया गया। गल्ला मंडी समिति परिसर और रहमानिया ग्राउंड सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर लोगों ने सामूहिक रूप से योगाभ्यास कर स्वस्थ और संतुलित जीवन का संकल्प लिया। इन कार्यक्रमों में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

गल्ला मंडी समिति परिसर में आयोजित योग शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, वज्रासन, प्राणायाम और ध्यान की विभिन्न विधियों का अभ्यास कराया। योग प्रशिक्षकों ने बताया कि नियमित योग से शरीर स्वस्थ रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति अनेक बीमारियों से बच सकता है। इस दौरान राम नारायण, शिवकरण, जयपाल, शत्रुघ्न, सत्य प्रकाश, जियालाल, रोहित और अनिल ने उपस्थित लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में युवराज सिंह, रामदेव सिंह और सुरेंद्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

वहीं, रहमानिया ग्राउंड में आयोजित योग शिविर में भी लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और सामूहिक योगाभ्यास किया। योग ट्रेनर हामिद भाई, अरशद मामा, शहबाज अली, आशिफ, सकील और राजेंद्र मधुपिया ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच योग एक प्रभावी समाधान बनकर उभरा है। उन्होंने आगे कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है, बल्कि मन को भी एकाग्र, शांत और सकारात्मक रखता है। कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के 'योग को जन-जन तक पहुंचाने' के आह्वान का समर्थन करते हुए सभी से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की।

कई स्थानों पर योगाभ्यास के साथ स्वास्थ्य जागरूकता संबंधी संदेश भी दिए गए, जिसमें लोगों को नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से कस्बे में स्वास्थ्य, फिटनेस और सकारात्मक जीवनशैली का संदेश प्रसारित हुआ। पूरे दिन विभिन्न स्थानों पर योग से जुड़े आयोजन होते रहे और लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
    user_ISLAM
    ISLAM
    Local News Reporter मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    48 min ago
  • हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
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    हमीरपुर जिले में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को जिला मुख्यालय स्थित राजकीय स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जहाँ उन्होंने सामूहिक योगाभ्यास किया और नियमित रूप से योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

मुख्य अतिथि ने उपस्थित जनसमूह के साथ मिलकर विभिन्न योगासन एवं प्राणायामों का अभ्यास कर योग के महत्व पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में उन्होंने योग को भारतीय संस्कृति की एक अमूल्य धरोहर बताते हुए स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन योग करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान गायत्री परिवार के बच्चों ने योग पर आधारित अपनी आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनसे लोगों को जागरूक किया गया और वहाँ मौजूद सभी ने उनकी सराहना की। कार्यक्रम में सदर विधायक मनोज प्रजापति, नगर पालिका चेयरमैन, भाजपा जिला अध्यक्ष, खनिज निदेशक माला श्रीवास्तव और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहित जिले के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।

योग शिविर के दौरान प्रतिभागियों ने प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास किया। कार्यक्रम का समापन लोगों से नियमित रूप से योग को अपनाने और एक स्वस्थ व निरोग जीवन जीने की अपील के साथ हुआ।
    user_Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    Raj kumar जिला ब्यूरो चीफ
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • जनपद बांदा के महुआ गांव के पास रविवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, घायल हुए तीनों व्यक्ति कानपुर के निवासी हैं, जो चित्रकूट स्थित भगवान कामतानाथ के दर्शन कर अपने घर वापस लौट रहे थे। हादसे के तुरंत बाद, मौके पर पहुंची पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और सभी घायलों को एम्बुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती कराया। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है, जिसमें से दो घायलों की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने इस घटना की सूचना घायलों के परिजनों को दे दी है और मामले की जांच की जा रही है। यह हादसा कैसे हुआ, इसके कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। दुर्घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया था।
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    जनपद बांदा के महुआ गांव के पास रविवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, घायल हुए तीनों व्यक्ति कानपुर के निवासी हैं, जो चित्रकूट स्थित भगवान कामतानाथ के दर्शन कर अपने घर वापस लौट रहे थे। हादसे के तुरंत बाद, मौके पर पहुंची पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया और सभी घायलों को एम्बुलेंस की मदद से मेडिकल कॉलेज बांदा में भर्ती कराया।

चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है, जिसमें से दो घायलों की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने इस घटना की सूचना घायलों के परिजनों को दे दी है और मामले की जांच की जा रही है। यह हादसा कैसे हुआ, इसके कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। दुर्घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बन गया था।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
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