उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरजनपदीय 'ब्लड माफिया' गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना कोतवाली नगर पुलिस ने इंसानियत को शर्मसार करने वाले इस खेल का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 253 फर्जी ब्लड बैंक कार्ड, 10 डिस्पोजेबल सिरिंज और 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह संगठित गिरोह अस्पतालों में भर्ती लाचार मरीजों के परिजनों को अपना शिकार बनाता था और समय पर खून देने के नाम पर मोटी रकम वसूलकर संदिग्ध और एक्सपायरी खून थमा देता था। इस गिरोह की संवेदनहीनता के कारण एक मासूम की जान भी चली गई। जांच में सामने आया कि एक 9 वर्षीय बच्ची को कथित रूप से एक्सपायरी ब्लड चढ़ाया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक मामले में कोतवाली नगर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरोह की ठगी का एक और शिकार खरगूपुर का रहने वाला एक व्यक्ति हुआ, जिसने अपनी पत्नी के इलाज के लिए गिरोह को ₹12,500 दिए थे। हालांकि, डॉक्टरों ने उस खून को संदिग्ध बताते हुए चढ़ाने से मना कर दिया। पैसे लेने के बाद भी आरोपियों ने न तो सही खून दिया और न ही पीड़ित के पैसे वापस किए। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत काम करते थे। गिरोह के कुछ सदस्य अस्पतालों और अन्य जगहों पर जरूरतमंदों से संपर्क साधते थे, जबकि दो आरोपियों के बलरामपुर में ब्लड बैंक संचालन से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार, पुलिस इस पूरे अवैध नेटवर्क की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है और गिरोह के अन्य संभावित आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में अवैध रूप से खून की खरीद-फरोख्त करने वाले एक बड़े अंतरजनपदीय 'ब्लड माफिया' गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना कोतवाली नगर पुलिस ने इंसानियत को शर्मसार करने वाले इस खेल का पर्दाफाश करते हुए 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 253 फर्जी ब्लड बैंक कार्ड, 10 डिस्पोजेबल सिरिंज और 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह संगठित गिरोह अस्पतालों में भर्ती लाचार मरीजों के परिजनों को अपना शिकार बनाता था और समय पर खून देने के नाम पर मोटी रकम वसूलकर संदिग्ध और एक्सपायरी खून थमा देता था। इस गिरोह की संवेदनहीनता के कारण एक मासूम की जान भी चली गई। जांच में सामने आया कि एक 9 वर्षीय बच्ची को कथित रूप से एक्सपायरी ब्लड चढ़ाया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक मामले में कोतवाली नगर थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरोह की ठगी का एक और शिकार खरगूपुर का रहने वाला एक व्यक्ति हुआ, जिसने अपनी पत्नी के इलाज के लिए गिरोह को ₹12,500 दिए थे। हालांकि, डॉक्टरों ने उस खून को संदिग्ध बताते हुए चढ़ाने से मना कर दिया। पैसे लेने के बाद भी आरोपियों ने न तो सही खून दिया और न ही पीड़ित के पैसे वापस किए। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत काम करते थे। गिरोह के कुछ सदस्य अस्पतालों और अन्य जगहों पर जरूरतमंदों से संपर्क साधते थे, जबकि दो आरोपियों के बलरामपुर में ब्लड बैंक संचालन से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल के अनुसार, पुलिस इस पूरे अवैध नेटवर्क की तह तक जाने के लिए जांच कर रही है और गिरोह के अन्य संभावित आरोपियों की सरगर्मी से तलाश की जा रही है।
- गोंडा से अंकुर गर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन शुक्ल ने बताया है कि उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ डीआईजी ने प्रेरित किया था। इस पूरे मामले में ₹6 लाख में डील तय हुई थी।2
- गोंडा में गुरु नानक चौराहे पर चेकिंग के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में CO यातायात विनय सिंह पर एक बाइक चालक से ₹2,000 की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और बाइक चालक द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले में अब पुलिस या संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के गोंडा में पुलिस और साइबर सेल ने 'Cy-Vazra' अभियान के तहत एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेरोजगार और जरूरतमंद लोगों को सोलर कंपनी में ₹15,000 मासिक वेतन की नौकरी का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद, उन्हीं खातों का इस्तेमाल देश भर में साइबर अपराधों से ठगी गई करोड़ों रुपये की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। गिरोह के सदस्य पीड़ितों के नाम पर उद्यम और जीएसटी पंजीकरण कराकर बैंकों में करंट अकाउंट खुलवा लेते थे। वे बैंक खाते में पीड़ित की जगह अपना मोबाइल नंबर दर्ज कराते थे, जिससे इंटरनेट बैंकिंग का पूरा नियंत्रण उनके पास ही रहता था। इन खातों का उपयोग इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और अन्य साइबर अपराधों की रकम ट्रांसफर करने में किया जाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 6 मोबाइल फोन, 15 आधार कार्ड, 10 सिम कार्ड, 8 मोहर, 2 पैन कार्ड, डेबिट कार्ड, मेमोरी कार्ड, 2 वोटर आईडी, एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी बरामद की है। जांच में अब तक ऐसे 20 से अधिक म्यूल अकाउंट की जानकारी मिली है, जिनमें ₹21 करोड़ से अधिक का लेन-देन किया जा चुका है। इन खातों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, लद्दाख, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों से कुल 43 शिकायतें दर्ज हैं। इस कार्रवाई के दौरान लगभग ₹3.20 करोड़ की धनराशि को फ्रीज भी करवा दिया गया है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।1
- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों के आरोपियों पर एनएसए (NSA) लगाया है। इसके तहत खुर्जा क्षेत्र में हुए ट्रिपल मर्डर केस के आरोपी पर पुलिस प्रशासन द्वारा एनएसए की कार्रवाई की गई है। दूसरी तरफ, जिले के अनूपशहर में यूरिया की कालाबाजारी करने के आरोपियों के खिलाफ भी प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एनएसए की कार्रवाई की है। बुलंदशहर के एसपी देहात अंतरिक्ष जैन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि यूरिया की कालाबाजारी करने वाले और ट्रिपल मर्डर कांड के आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की गई है।1
- अयोध्या के कचहरी परिसर में प्रदर्शन करते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों का गुस्सा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करते हुए राम जन्मभूमि थाने का घेराव करेंगे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने कहा कि एफआईआर दर्ज न होने के संबंध में एक बार फिर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से वार्ता की जाएगी। इसके बाद बार एसोसिएशन के वकील कचहरी परिसर से सीधे थाना रामजन्म भूमि पर जाकर बैठ जाएंगे।1
- अयोध्या में कॉलेज हड़पने का एक सनसनीखेज आरोप सामने आया है। इस मामले को लेकर कॉलेज के प्रबंधक ने खुद एक प्रेसवार्ता आयोजित की और सबके सामने सबूत पेश किए हैं।1
- अयोध्या के जिला पुरुष चिकित्सालय में औचक निरीक्षण के दौरान मरीजों की जान से जुड़ी जीवनरक्षक व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, अयोध्या मंडल के अपर निदेशक डॉ. बृजेश कुमार सिंह चौहान ने सोमवार को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहां इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक अव्यवस्थाओं का अंबार मिला। इस दौरान सबसे बड़ी चूक ऑक्सीजन प्लांट के बंद पाए जाने पर सामने आई। जब एडी हेल्थ इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे, तो वहां की ऑक्सीजन पाइपलाइन में ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप थी। इस अव्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने मौके पर मौजूद मैट्रन को जमकर फटकार लगाई। इसके तुरंत बाद सीएमएस डॉ. राजेश सिंह को बुलाकर ऑक्सीजन प्लांट चलाने वाले कर्मचारी को तलब किया गया, जिसने सफाई दी कि कंप्रेशर में पानी भरने के कारण प्लांट नहीं चल रहा है। इस तर्क पर भड़कते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि अस्पताल की यह हालत देखकर लगता है कि कोई बड़ी घटना होने पर स्टाफ सिलेंडर लेकर इधर-उधर दौड़ता नजर आएगा। उन्होंने इस भारी लापरवाही के लिए सीएमएस को भी फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी वार्ड में अन्य खामियां भी मिलीं, जहां तैनात इमरजेंसी चिकित्सक डॉ. विशाल चौधरी और फार्मासिस्ट सर्वेश निर्धारित वेशभूषा में नहीं थे। एडी हेल्थ ने सीएमएस को सख्त निर्देश दिए कि इमरजेंसी वार्ड में 24 घंटे बी-टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन फ्लोमीटर और एक ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर अनिवार्य रूप से बैकअप के तौर पर आरक्षित रखे जाएं। साथ ही अस्पताल में बिजली और जनरेटर की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। डॉ. बृजेश सिंह ने साफ चेतावनी दी है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और ऑक्सीजन जैसी जीवनरक्षक व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले दोषियों पर कार्रवाई तय है।3
- उत्तर प्रदेश के गोंडा में सरयू नदी में एक बुजुर्ग लापता हो गए हैं। लापता बुजुर्ग का पता लगाने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) की टीम नदी में लगातार तलाश कर रही है।1