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नए भारत की विचलित करती तस्वीर, यह सब गरीब परिवार के साथ ही क्यों होता है ? ओडिशा के एक गरीब आदिवासी जीतू मुंडा को अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से सिर्फ 19,300 रुपये निकालने थे। बैंक ने कहा - खाताधारक को लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस का प्रमाण दो। गरीबी, लाचारी और व्यवस्था की बेरुख़ी ने जीतू को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया कि उसने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और 5 किलोमीटर कंधे पर लादकर बैंक पहुंच गया। यह तस्वीर “विश्वगुरु” और “बड़ी अर्थव्यवस्था” के दावों के पीछे छिपे असली भारत की है - जहाँ गरीब आज भी सम्मान नहीं, सिर्फ अपमान पाता है, ऐसे में मन में सवाल खड़ा होता है कि गरीबों की सरकार होने के दावा करनी वाली तमाम सरकारों में सिर्फ गरीब परिवारों की ही ऐसी तस्वीरें क्यों देखने को मिलती है।
Haseeb Khan Mansuri Journalist
नए भारत की विचलित करती तस्वीर, यह सब गरीब परिवार के साथ ही क्यों होता है ? ओडिशा के एक गरीब आदिवासी जीतू मुंडा को अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से सिर्फ 19,300 रुपये निकालने थे। बैंक ने कहा - खाताधारक को लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस का प्रमाण दो। गरीबी, लाचारी और व्यवस्था की बेरुख़ी ने जीतू को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया कि उसने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और 5 किलोमीटर कंधे पर लादकर बैंक पहुंच गया। यह तस्वीर “विश्वगुरु” और “बड़ी अर्थव्यवस्था” के दावों के पीछे छिपे असली भारत की है - जहाँ गरीब आज भी सम्मान नहीं, सिर्फ अपमान पाता है, ऐसे में मन में सवाल खड़ा होता है कि गरीबों की सरकार होने के दावा करनी वाली तमाम सरकारों में सिर्फ गरीब परिवारों की ही ऐसी तस्वीरें क्यों देखने को मिलती है।
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- ओडिशा के एक गरीब आदिवासी जीतू मुंडा को अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से सिर्फ 19,300 रुपये निकालने थे। बैंक ने कहा - खाताधारक को लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस का प्रमाण दो। गरीबी, लाचारी और व्यवस्था की बेरुख़ी ने जीतू को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया कि उसने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और 5 किलोमीटर कंधे पर लादकर बैंक पहुंच गया। यह तस्वीर “विश्वगुरु” और “बड़ी अर्थव्यवस्था” के दावों के पीछे छिपे असली भारत की है - जहाँ गरीब आज भी सम्मान नहीं, सिर्फ अपमान पाता है, ऐसे में मन में सवाल खड़ा होता है कि गरीबों की सरकार होने के दावा करनी वाली तमाम सरकारों में सिर्फ गरीब परिवारों की ही ऐसी तस्वीरें क्यों देखने को मिलती है।1
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- भोपाल में नशे के खिलाफ पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहर में रोलिंग पेपर, स्मोकिंग कोन और ऐसे सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यह प्रतिबंध पान की दुकानों, किराना और चाय की दुकानों सहित उन सभी जगहों पर लागू होगा जहाँ ये आसानी से मिलते थे। पुलिस का कहना है कि इनका इस्तेमाल गांजा जैसे नशीले पदार्थों के सेवन में हो रहा था, जिससे युवाओं में नशे की लत बढ़ रही थी और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ रहा था। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने चेतावनी दी है कि नियम तोड़ने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी1
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