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जोधपुर में आसाराम से जुड़े मामले को लेकर एक अपडेट सामने आया है, जिसमें अधिवक्ता रविंदर सिंह सलूजा का जिक्र है।
Jitendra dave
जोधपुर में आसाराम से जुड़े मामले को लेकर एक अपडेट सामने आया है, जिसमें अधिवक्ता रविंदर सिंह सलूजा का जिक्र है।
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- जोधपुर से जुड़ी एक महिला इन्फ्लुएंसर के बारे में एक विशेष समाचार न्यूज़ इंडिया पर दिखाया गया है।1
- पाली में करीब आठ वर्ष पुराने ₹10 लाख के चर्चित चेक अनादरण (चेक बाउंस) प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने अहम फैसला सुनाया है। इस निर्णय में मारवाड़ जंक्शन निवासी आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया को लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया गया है। यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली ने न्यायालय में प्रस्तुत किया था। परिवादी ने आरोप लगाया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उनसे ₹10 लाख उधार लिए थे। इस राशि को लौटाने के लिए आरोपी द्वारा ₹5-5 लाख के दो चेक दिए गए, जो बैंक में प्रस्तुत करने पर “फंड्स इनसफिशिएंट” (अपर्याप्त निधि) के कारण अनादृत हो गए। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान न मिलने पर परिवादी ने न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उन्होंने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने यह तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में एक वीसी (कमेटी) का संचालन करते थे और उसी के संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि वर्ष 2017 में परिवादी की ₹10 लाख उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी। वहीं, आरोपी की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं थी कि उसे इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता होती, क्योंकि वह पानी के कैंपर भरकर बेचने का व्यवसाय करता है। बचाव पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से यह भी दर्शाया कि नोटबंदी के बाद वर्ष 2017 में परिवादी द्वारा ₹500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया गया था। इसी अवधि में परिवादी ने अन्य व्यक्तियों को भी लाखों रुपये उधार देने के दावे कर उनके विरुद्ध चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए थे, जिससे उनके दावों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह माना कि परिवादी ₹10 लाख उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय और संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया। इसके विपरीत, बचाव पक्ष की जिरह और प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। अदालत ने कहा कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के तहत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित किया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की वास्तविक आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।2
- पाली में लगभग आठ वर्ष पुराने 10 लाख रुपये के चर्चित चेक अनादरण प्रकरण में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (एन.आई. एक्ट प्रकरण संख्या-2) की पीठासीन अधिकारी विनस चौधरी ने आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया निवासी सिंधी बाजार, मारवाड़ जंक्शन को आरोपों से बरी करने का आदेश पारित किया है। अदालत ने अपने निर्णय में पाया कि परिवादी गौरव मर्लेचा 10 लाख रुपये उधार देने की अपनी आर्थिक क्षमता को विश्वसनीय एवं संतोषजनक ढंग से सिद्ध नहीं कर पाया, जिसके चलते परिवादी की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ। यह प्रकरण परिवादी गौरव मर्लेचा निवासी सुमेरपुर रोड, पाली द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद से संबंधित है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने उससे 10 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोप के अनुसार, राशि लौटाने के लिए आरोपी द्वारा 5-5 लाख रुपये के दो चेक दिए गए थे, जो बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर "फंड्स इनसफिशिएंट" के कारण अनादृत हो गए थे। विधिक नोटिस के बावजूद भुगतान नहीं होने पर परिवादी ने न्यायालय की शरण ली थी। सुनवाई के दौरान, आरोपी प्रमोद कुमार चौरसिया ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उसने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था। बचाव पक्ष ने, जिसकी पैरवी सीनियर एडवोकेट अशोक अरोड़ा और उनके सहयोगी अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ ने की, तर्क दिया कि गौरव मर्लेचा मारवाड़ जंक्शन में वीसी का संचालन करता था और उसी संबंध में सुरक्षा के तौर पर आरोपी के पांच हस्ताक्षरित खाली चेक लिए गए थे, जिन्हें वीसी समाप्त होने के बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2017 में परिवादी की 10 लाख रुपये उधार देने की आर्थिक क्षमता नहीं थी, और न ही पानी के कैम्पर भरकर बेचने का कार्य करने वाले आरोपी को इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता थी। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अरोड़ा ने न्यायालय के समक्ष दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए यह भी दर्शाया कि 2016 में नोटबंदी के बाद 2017 में परिवादी ने 500-500 रुपये के नए नोटों में ऋण देने का दावा किया, और उसी अवधि में अन्य व्यक्तियों को भी 25 लाख रुपये उधार देने का दावा करते हुए उनके विरुद्ध भी चेक बाउंस के मुकदमे दायर किए, जिससे उसके दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया। न्यायालय ने बचाव पक्ष की जिरह एवं प्रस्तुत दस्तावेजों से परिवादी के कथनों पर गंभीर संदेह उत्पन्न पाया। अपने निर्णय में न्यायालय ने यह माना कि आरोपी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई. एक्ट) के अंतर्गत परिवादी के पक्ष में उपलब्ध वैधानिक उपधारणा को सफलतापूर्वक खंडित कर दिया। परिणामस्वरूप, आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय चेक बाउंस मामलों में परिवादी द्वारा ऋण देने की आर्थिक क्षमता सिद्ध किए जाने की आवश्यकता को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।1
- परीक्षा से संबंधित जाँच प्रक्रिया में अनियमितता का मामला सामने आया है, जहाँ विद्यार्थियों और निजी व्यक्तियों द्वारा चेकिंग की जा रही है। बताया गया है कि परीक्षा परिणाम से जुड़े इस कार्य में पुलिस प्रशासन का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं है, इसके बावजूद भी यह जाँच निजी लोगों की तरफ से हो रही है।1
- पाली पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से एक विशेष यातायात अभियान शुरू किया है। यह अभियान 4 जून से 30 जून 2026 तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा। इस दौरान वाहनों में किए गए अवैध संशोधन, जैसे लाल-नीली बत्ती, हूटर, प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, नियम विरुद्ध नंबर प्लेट और अन्य अनधिकृत चिह्नों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला पुलिस अधीक्षक मोनिका सेन (आईपीएस) ने बताया कि ये वाहन न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई मामलों में ऐसे वाहनों का उपयोग अवैध गतिविधियों और अपराधों में किया जाता है। यह विशेष अभियान राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के आधार पर चलाया जा रहा है। अभियान के तहत, वाहन की बॉडी और चेसिस में अवैध परिवर्तन करने वालों, लाल-नीली बत्ती व फ्लैशर लगाने वालों, प्रेशर हॉर्न व एयर हॉर्न का उपयोग करने वालों, ब्लैक फिल्म चढ़े वाहनों और नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगाने वालों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) सभी पंजीकृत वाहनों के लिए अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, हिस्ट्रीशीटरों और हार्डकोर अपराधियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों की भी विशेष जांच की जाएगी, और आवश्यकतानुसार वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। पाली पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और अपने वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।4
- शुक्रवार दोपहर 1 बजे मिली जानकारी के अनुसार, रायपुर नगर पालिका के समीप सड़क पर लावारिस हालत में पड़ा एक मोबाइल फोन पत्रकार जगदीश माली को मिला। उन्होंने ईमानदारी का परिचय देते हुए मोबाइल को सुरक्षित अपने पास रखा और उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाने का प्रयास किया। मोबाइल मिलने के तुरंत बाद, पत्रकार जगदीश माली ने रायपुर थाना अधिकारी राजूराम सीरवी को इसकी सूचना दी। थाना अधिकारी के निर्देश पर, मोबाइल को रायपुर पुलिस थाने में जमा करवा दिया गया। पुलिस ने अब मोबाइल को अपने कब्जे में लेकर उसके मालिक की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जगदीश माली ने इस बात पर जोर दिया कि सड़क पर मिला मोबाइल किसी भी व्यक्ति का महत्वपूर्ण व्यक्तिगत सामान हो सकता है और खोई हुई वस्तु को उसके असली मालिक तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है, इसलिए उसे पुलिस को सौंपना सबसे उचित कदम है। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने पत्रकार जगदीश माली के इस कृत्य की सराहना की है। लोगों का मानना है कि आज के समय में जब ऐसी ईमानदारी के उदाहरण कम देखने को मिलते हैं, ऐसे में यह पहल एक प्रेरणादायक कार्य है जो समाज में विश्वास और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश देता है। रायपुर पुलिस ने भी आम जनता से अपील की है कि यदि उन्हें सड़क, बाजार या किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई खोई हुई वस्तु मिलती है, तो उसे संबंधित पुलिस थाने में जमा करवाएं ताकि वह वस्तु सुरक्षित रूप से उसके मालिक तक पहुंच सके।1