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मऊ में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें अपनी प्रमुख मांगें रखीं और निष्पक्ष जांच की मांग की। आशाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी, और इस मामले को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में भी आक्रोश साफ दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं, जो अपनी मांगों को लेकर दृढ़ थीं।
बृजेश मिश्रा “पत्रकार”
मऊ में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें अपनी प्रमुख मांगें रखीं और निष्पक्ष जांच की मांग की। आशाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी, और इस मामले को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में भी आक्रोश साफ दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं, जो अपनी मांगों को लेकर दृढ़ थीं।
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- झांसी का बताया जा रहा एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक दरोगा जी का जोरदार थप्पड़ चर्चा का विषय बन गया है। एक मामूली से विवाद के बाद दरोगा जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, और कैमरे में कैद हुआ यह थप्पड़ अब व्यापक रूप से देखा जा रहा है। वीडियो में दिख रहा यह थप्पड़ पूरे मामले का सबसे चर्चित हिस्सा है, जिसने पुलिस के व्यवहार और उनके अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वायरल वीडियो को देखने वाले लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, इस घटना से संबंधित वीडियो का केवल एक ही हिस्सा सामने आया है। विवाद की शुरुआत कैसे हुई, पहले क्या हुआ और इसमें दोनों पक्षों की क्या भूमिका रही, यह अभी जांच का विषय है। इसलिए, पूरी सच्चाई सामने आने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इस एक थप्पड़ ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह व्यवहार वर्दी की गरिमा के अनुरूप था, या फिर इसके पीछे कोई ऐसी परिस्थिति थी जो वीडियो में दिखाई नहीं दे रही है।1
- प्रतापगढ़ में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, जहाँ पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर की टीम ने 12 साल से फरार एक लाख रुपये के इनामी बदमाश भानु दूबे को गिरफ्तार कर लिया है। एसपी के अनुसार, इस अपराधी पर कुल 19 मुकदमे दर्ज थे। लालगंज का रहने वाला भानु दूबे पुलिस को लगातार चकमा देकर भूमिगत हो गया था और उसने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के बाद गुजरात में अपना ठिकाना बनाया हुआ था। पुलिस अधीक्षक की टीम ने 'यक्ष ऐप' नामक डिजिटल हथियार का इस्तेमाल कर बदमाश की पूरी कुंडली निकाली, जिसके बाद उसे ट्रैक किया जा सका। नगर पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए लालगंज इलाके से इस फरार बदमाश को दबोचा।1
- उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के सराय अकील इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया जब घर से खाना लेकर निकली एक महिला का शव एक बगीचे में संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। इस खबर के सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, और यह घटना एक महिला हत्याकांड के तौर पर देखी जा रही है। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।1
- आज, दिनांक 30 मई 2026 को मां अनारकली फाउंडेशन ने संस्था के संरक्षक श्री जगदीश नारायण तिवारी की उपस्थिति में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा सामग्री वितरित की। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान बच्चों की पढ़ाई किसी भी तरह से प्रभावित न हो। इस अवसर पर बच्चों को नियमित अध्ययन करने, समय का सदुपयोग करने और शिक्षा के प्रति हमेशा जागरूक रहने के लिए प्रेरित भी किया गया। संस्था ने बच्चों को पेंसिल, रबर, कटर और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री प्रदान की। इस वितरण कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ तहसील लालगंज के उपाध्यक्ष श्री नामवर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में संस्था के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें सचिव शिव विनय प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष शिव सागर तिवारी, कोषाध्यक्ष डॉ. दिनकर प्रताप सिंह, उपकोषाध्यक्ष कुंभ प्रताप सिंह शामिल थे। साथ ही, सदस्य राजेश वर्मा, सरला वर्मा, अनुज वर्मा, रुचि वर्मा और कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।4
- हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर लालगंज तहसील परिसर स्थित पत्रकार भवन में एक संगोष्ठी और सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की तहसील इकाई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीएम शैलेंद्र वर्मा और महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ज्ञानप्रकाश शुक्ल ने मिलकर किया। उन्होंने दिवंगत गणेश शंकर विद्यार्थी के चित्र पर माल्यार्पण कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर, एसडीएम शैलेंद्र वर्मा ने राष्ट्र के नवनिर्माण में हिन्दी पत्रकारिता के योगदान की सराहना करते हुए इसे सर्वश्रेष्ठ बताया।1
- अमेठी के जामो क्षेत्र निवासी विवेक मिश्रा ने शनिवार को खंड विकास अधिकारी कार्यालय के सामने बकाया भुगतान की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे कार्यालय में हड़कंप मच गया। शाम को जब खंड विकास अधिकारी बृजेश सिंह कार्यालय से बाहर निकल रहे थे, तब विवेक मिश्रा ने उनके पैर पकड़कर भुगतान दिलाने की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों से भुगतान न मिलने के कारण उनका परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और बच्चों का स्कूल में दाखिला तक नहीं हो पा रहा है क्योंकि खाते में पैसे नहीं हैं। विवेक मिश्रा के अनुसार, उन्होंने कटरा फूल कुंवरि आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण कार्य के लिए मोरंग, गिट्टी सहित अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति की थी। इस आपूर्ति का करीब 5 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान पिछले तीन वर्षों से लंबित है, और वे लगातार अमेठी खंड विकास कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आपूर्ति की गई सामग्री के भुगतान की धनराशि किसी अन्य फर्म के नाम जारी कर दी गई है, जबकि उन्हें आज तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं मिला है। इस मामले में, खंड विकास अधिकारी बृजेश सिंह ने जानकारी दी है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।3
- मऊ में पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी के विरोध में आशा कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और इस कार्रवाई पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा, जिसमें अपनी प्रमुख मांगें रखीं और निष्पक्ष जांच की मांग की। आशाओं ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी, और इस मामले को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों में भी आक्रोश साफ दिखाई दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं, जो अपनी मांगों को लेकर दृढ़ थीं।1