मधेपुरा अनुमंडल क्षेत्र में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अब पेट्रोल पंपों से बोतल, केन, गैलन या किसी भी खुले पात्र में पेट्रोल और डीजल बेचने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संतोष कुमार द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़ी आगजनी या हादसे को रोकना है। हालांकि, धान की रोपनी के इस मौसम में प्रशासन के इस फैसले से खेतों में काम कर रहे किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि उनके लिए ट्रैक्टर और पंपसेट को बार-बार पेट्रोल पंप तक ले जाना आसान नहीं है। एसडीएम संतोष कुमार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के नियमों के अनुसार प्लास्टिक या कांच की बोतलों सहित किसी भी खुले पात्र में ज्वलनशील पदार्थ रखना और देना सुरक्षा मानकों के सख्त खिलाफ है। हाल के दिनों में कई पेट्रोल पंपों पर खुले बर्तनों में ईंधन बेचे जाने की जानकारी मिली थी, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ था। नए नियमों के तहत अब केवल वाहनों की फ्यूल टैंक में ही सीधे ईंधन भरा जाएगा। इसके साथ ही, सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने परिसर में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में "बोतल में पेट्रोल देना सख्त मना है" लिखा चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन के इस फैसले का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जो वर्षों से खेतों में चल रहे ट्रैक्टरों और पंपसेटों के लिए गैलन और केन के जरिए डीजल ले जाते थे। अब उन्हें या तो अपनी मशीनों को पेट्रोल पंप तक लाना होगा या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। इस बीच, एसडीएम ने कड़ी चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और पेट्रोलियम नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा भी शामिल है। मामले को लेकर मधेपुरा के माया एचपी के संचालक विभांशु कुमार का पक्ष भी सामने आया है। अब देखना होगा कि यह सख्त आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और प्रशासन किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का क्या समाधान निकालता है।
मधेपुरा अनुमंडल क्षेत्र में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अब पेट्रोल पंपों से बोतल, केन, गैलन या किसी भी खुले पात्र में पेट्रोल और डीजल बेचने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संतोष कुमार द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़ी आगजनी या हादसे को रोकना है। हालांकि, धान की रोपनी के इस मौसम में प्रशासन के इस फैसले से खेतों में काम कर रहे किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि उनके लिए ट्रैक्टर और पंपसेट
को बार-बार पेट्रोल पंप तक ले जाना आसान नहीं है। एसडीएम संतोष कुमार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के नियमों के अनुसार प्लास्टिक या कांच की बोतलों सहित किसी भी खुले पात्र में ज्वलनशील पदार्थ रखना और देना सुरक्षा मानकों के सख्त खिलाफ है। हाल के दिनों में कई पेट्रोल पंपों पर खुले बर्तनों में ईंधन बेचे जाने की जानकारी मिली थी, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ था। नए नियमों के तहत अब केवल वाहनों की फ्यूल टैंक में ही सीधे ईंधन
भरा जाएगा। इसके साथ ही, सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने परिसर में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में "बोतल में पेट्रोल देना सख्त मना है" लिखा चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन के इस फैसले का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जो वर्षों से खेतों में चल रहे ट्रैक्टरों और पंपसेटों के लिए गैलन और केन के जरिए डीजल ले जाते थे। अब उन्हें या तो अपनी मशीनों को पेट्रोल पंप तक लाना होगा या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।
इस बीच, एसडीएम ने कड़ी चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और पेट्रोलियम नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा भी शामिल है। मामले को लेकर मधेपुरा के माया एचपी के संचालक विभांशु कुमार का पक्ष भी सामने आया है। अब देखना होगा कि यह सख्त आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और प्रशासन किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का क्या समाधान निकालता है।
- मधेपुरा अनुमंडल क्षेत्र में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अब पेट्रोल पंपों से बोतल, केन, गैलन या किसी भी खुले पात्र में पेट्रोल और डीजल बेचने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संतोष कुमार द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य किसी भी बड़ी आगजनी या हादसे को रोकना है। हालांकि, धान की रोपनी के इस मौसम में प्रशासन के इस फैसले से खेतों में काम कर रहे किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि उनके लिए ट्रैक्टर और पंपसेट को बार-बार पेट्रोल पंप तक ले जाना आसान नहीं है। एसडीएम संतोष कुमार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के नियमों के अनुसार प्लास्टिक या कांच की बोतलों सहित किसी भी खुले पात्र में ज्वलनशील पदार्थ रखना और देना सुरक्षा मानकों के सख्त खिलाफ है। हाल के दिनों में कई पेट्रोल पंपों पर खुले बर्तनों में ईंधन बेचे जाने की जानकारी मिली थी, जिससे बड़े हादसे का खतरा बना हुआ था। नए नियमों के तहत अब केवल वाहनों की फ्यूल टैंक में ही सीधे ईंधन भरा जाएगा। इसके साथ ही, सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने परिसर में हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में "बोतल में पेट्रोल देना सख्त मना है" लिखा चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन के इस फैसले का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जो वर्षों से खेतों में चल रहे ट्रैक्टरों और पंपसेटों के लिए गैलन और केन के जरिए डीजल ले जाते थे। अब उन्हें या तो अपनी मशीनों को पेट्रोल पंप तक लाना होगा या फिर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। इस बीच, एसडीएम ने कड़ी चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और पेट्रोलियम नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पेट्रोल पंप का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा भी शामिल है। मामले को लेकर मधेपुरा के माया एचपी के संचालक विभांशु कुमार का पक्ष भी सामने आया है। अब देखना होगा कि यह सख्त आदेश जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है और प्रशासन किसानों की व्यावहारिक समस्याओं का क्या समाधान निकालता है।4
- सहरसा जिले में बैजनाथपुर के मनोहर हाई स्कूल से सौर बाजार जाने वाला बाईपास सड़क मार्ग वर्षों से बेहद जर्जर बना हुआ है। इस बदहाल रास्ते के कारण अब तक कई वाहन चालक गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, जिन्हें अस्पताल तक की शरण लेनी पड़ी है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि बैजनाथपुर चौक की बदतर स्थिति को देखते हुए अब यह बाईपास सड़क मार्ग ही मुख्य मार्ग बनता जा रहा है। सौर बाजार, सोनवर्षा राज, पतरघट समेत अन्य जगहों पर जाने के लिए सभी वाहन चालक इसी मार्ग से गुजर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि कई अधिकारियों के वाहन भी इसी जर्जर सड़क से गुजरते हैं, फिर भी इसका निर्माण कार्य न कराया जाना घोर चिंता को दर्शाता है। यदि समय रहते इस सड़क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में न जाने और कितने वाहन चालक हादसों का शिकार हो सकते हैं।1
- मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्रखंड और सदर अस्पताल का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में शंकरपुर प्रखंड और मधेपुरा के सदर अस्पताल से संबंधित दृश्य दिखाए गए हैं।1
- मधेपुरा जिले के कुमारखंड प्रखंड अंतर्गत बिशनपुर बाजार पंचायत में उमेश भगत को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का नया पंचायत अध्यक्ष बनाया गया है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान क्षेत्रीय विधायक डॉ. रमेश ऋषिदेव नवनियुक्त पंचायत अध्यक्ष उमेश भगत के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने नए पंचायत अध्यक्ष को माला पहनाकर बधाई दी। इस अवसर पर पार्टी के कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस दौरान विधायक डॉ. रमेश ऋषिदेव ने कहा कि क्षेत्र में जो भी विकास कार्य बचे हुए हैं, उन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली के क्षेत्र में एनडीए सरकार की हर महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। अपनी इस नई जिम्मेदारी पर नवनियुक्त पंचायत अध्यक्ष उमेश भगत ने पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस दायित्व का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए पंचायत में बूथ स्तर पर अधिक से अधिक नए सदस्य बनाए जाएंगे और सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा। इस बधाई कार्यक्रम के मौके पर प्रखंड जदयू अध्यक्ष संतोष कुमार यादव, प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि अरुण कुमार सिंह, बीससूत्री अध्यक्ष संजय गांधी, व्यावसायिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष नरेश कुमार, पैक्स अध्यक्ष विपिन यादव, अमीर मंडल, महताब आलम, रतन यादव, प्रो. प्रमोद यादव, अनमोल यादव, प्रभाष यादव, उपेंद्र मेहता, गुरु साह, सिंटू भगत, गौरव भगत, सुमित भगत, नरेश भगत, सदानंद सरदार और रंजीत सरदार सहित दर्जनों पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित थे।1
- सहरसा सहित पूरे देश में युवाओं के बीच कफ सिरप का जानलेवा नशा तेज़ी से पैर पसार रहा है। बीमारी ठीक करने के काम आने वाली कफ सिरप (Dextromethorphan + Chlorpheniramine Maleate) की बोतलें अब बिना किसी बीमारी के ही घरों में आ रही हैं, जो नई पीढ़ी के लिए 'मौत का घूंट' साबित हो रही हैं। चंद रुपयों के मुनाफे के लिए बिना पर्चे के बिकने वाली ये दवाइयाँ हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ रही हैं। कफ सिरप का यह नशा शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है, जिससे युवाओं के लिवर और किडनी फेल हो रहे हैं और वे मानसिक पागलपन (Toxic Psychosis) का शिकार बन रहे हैं। इस भयानक स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए सवाल उठाया गया है कि प्रशासन आखिर कब जागेगा और माता-पिता कब सावधान होंगे? 'सहरसा लाइव न्यूज़' की इस विशेष आंखें खोल देने वाली रिपोर्ट के माध्यम से माता-पिता से अपने बच्चों को बचाने और उनके बदलते बर्ताव पर पैनी नज़र रखने की अपील की गई है। इस गंभीर खतरे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए इसे ज़्यादा से ज़्यादा साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- Rahul kumar1
- बिहार के सुपौल जिले के छातापुर में त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के हरिहरपट्टी पंचायत सरकार भवन में हुई लाखों के सामान की चोरी के करीब तीन महीने बाद दो स्ट्रीट लाइटें बरामद की गई हैं। यह बरामदगी पंचायत भवन के पीछे स्थित पटुआ के खेत से हुई है। चोरी का यह सामान आखिरकार इस जगह पर कैसे पहुंचा, इस बात को लेकर स्थानीय ग्रामीण पूरे मामले पर कई गंभीर सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों के मन में इस बरामदगी को लेकर भारी संशय है कि क्या यह महज एक संयोग है या फिर इसके पीछे कोई बहुत बड़ी साजिश छिपी हुई है। इस बीच, पुलिस ने बरामद की गई स्ट्रीट लाइटों को तुरंत अपने कब्जे में लेकर जब्त कर लिया है और मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए अपनी जांच तेज कर दी है।1
- मधेपुरा में पूर्व पार्षद, पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी सह सामाजिक कार्यकर्ता कुमारी विनीता भारती ने शहर में यात्री शेड निर्माण में चल रहे बड़े भ्रष्टाचार को उजागर किया है। उन्होंने रात के समय सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर बने यात्री शेड का जायजा लिया, तो वहां का नजारा बेहद हैरान करने वाला था। लाखों की लागत से बना यह यात्री शेड अपने उद्घाटन से पहले ही पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है। कुमारी विनीता भारती का आरोप है कि मधेपुरा नगर परिषद में मुख्य पार्षद और कार्यपालक महोदया द्वारा मिलकर करोड़ों रुपये की लूट मचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद में न तो बोर्ड की बैठक बुलाई जाती है और न ही समय से बजट पास किया जाता है। सारे कार्य रात के अंधेरे में किए जा रहे हैं। वर्तमान में सभी कार्यों को 'घटनोउत्तर स्वीकृति' के तहत कराया जा रहा है, जबकि नगर परिषद क्षेत्र में कोई आपदा नहीं आई है और सभी पार्षद व अधिकारी पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ कागजों पर योजनाएं दिखाकर जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों को लूटा जा रहा है। इसके अलावा, मुख्य पार्षद और कार्यपालक महोदया अब सच दिखाने वाले पत्रकारों को नोटिस जारी कर रही हैं और उन पर खबर तोड़ने का झूठा आरोप लगा रही हैं। विनीता भारती ने दावा किया कि उनके पास आम नागरिकों और पत्रकारों को धमकाए जाने के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में सौंदर्यकरण, शौचालय, यात्री शेड, वेलकम गेट और कचरा उठाव के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट चरम सीमा पर है। कार्यपालक महोदया किसी भी योजना की जानकारी लिखित में नहीं देती हैं और खुद को मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से भी ऊपर समझती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वह ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों से डरने वाली नहीं हैं और उन्हें डराना बंद किया जाए। जब तक सरकार इन भ्रष्ट पदाधिकारियों को हटाकर इनके कार्यों की जांच और कार्रवाई नहीं करती, तब तक उनकी यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि इन भ्रष्ट लोगों ने पूरे शहर को नरक और कचरे का शहर बना दिया है, इसलिए ऐसे पदाधिकारियों और मुख्य पार्षद को एक मिनट भी पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।4