मौत का हाईवे बनती मंझवे-गोविंदपुर निर्माणाधीन सड़क: निर्माण कंपनी की लापरवाही या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार? नवादा: मंझवे से गोविंदपुर के बीच बन रही सड़क अब राहगीरों के लिए काल साबित हो रही है। आज फिर पतंग के पास एक जबरदस्त दुर्घटना हुई, जिसमें घायल को गंभीर स्थिति में अस्पताल भेजा गया है। लापरवाही की हद: सड़क पर न तो कोई संकेतक (Signboard) है और न ही सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग। खूनी रफ्तार: कुछ दिन पहले ही निर्माण वाहन की चपेट में आने से जमालपुर के एक युवक की जान जा चुकी है। फिसलन भरी राह: पांच दिन पहले हुई हल्की बारिश ने कंपनी के दावों की पोल खोल दी थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। क्या प्रशासन और निर्माण कंपनी किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं? जनता की जान से खिलवाड़ कब तक चलेगा? #NawadaNews #RoadAccident #Govindpur #Manjhe #PublicSafety #RoadConstruction #BiharNews
मौत का हाईवे बनती मंझवे-गोविंदपुर निर्माणाधीन सड़क: निर्माण कंपनी की लापरवाही या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार? नवादा: मंझवे से गोविंदपुर के बीच बन रही सड़क अब राहगीरों के लिए काल साबित हो रही है। आज फिर पतंग के पास एक जबरदस्त दुर्घटना हुई, जिसमें घायल को गंभीर स्थिति में अस्पताल भेजा गया है। लापरवाही की हद: सड़क पर न तो कोई संकेतक (Signboard) है और न ही सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग। खूनी रफ्तार: कुछ दिन पहले ही निर्माण वाहन की चपेट में आने से जमालपुर के एक युवक की जान जा चुकी है। फिसलन भरी राह: पांच दिन पहले हुई हल्की बारिश ने कंपनी के दावों की पोल खोल दी थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। क्या प्रशासन और निर्माण कंपनी किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं? जनता की जान से खिलवाड़ कब तक चलेगा? #NawadaNews #RoadAccident #Govindpur #Manjhe #PublicSafety #RoadConstruction #BiharNews
- Hii1
- गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत थाली थाना क्षेत्र के जयप्रकाश नगर के बधार स्थित गेहूं खेत से एक अज्ञात युवती की शव बरामद किया गया, शव सड़े गले स्थिति में पुलिस बरामद किया1
- ब्लास्ट हो जाता है1
- नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, आस्था आहत! नवादा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। शहर के प्रसिद्ध गोवर्धन मंदिर में एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा जूते पहनकर प्रवेश करने और रील बनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर जहां लोग सिर झुकाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, वहां वर्दी में तैनात महिला कर्मी का इस तरह जूते पहनकर रील बनाना लोगों को नागवार गुजरा। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है तथा श्रद्धालुओं में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मंदिर केवल ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, जहां प्रवेश से पहले जूते उतारना हमारी संस्कृति और परंपरा का मूल हिस्सा है। ऐसे पवित्र स्थान पर वर्दी में मौजूद किसी पुलिसकर्मी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि"जिस पुलिस पर समाज को कानून और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी है, वही अगर इस तरह धार्मिक नियमों की अनदेखी करे, तो आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है!! यह घटना केवल एक वीडियो या रील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है जहां सोशल मीडिया की चकाचौंध में लोग अपने संस्कार और जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। “रील का बुखार” अब इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग पवित्र स्थानों की गरिमा तक को नजरअंदाज करने लगे हैं। धर्म और आस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है! चाहे वह आम आदमी हो या फिर वर्दीधारी पुलिसकर्मी। वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक भी होती है। जब वही वर्दी मर्यादा तोड़ती नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करे और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति, खासकर जिम्मेदार पद पर बैठा हुआ—ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे। यह घटना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ हैँ! चाहे अनजाने में हो या दिखावे के लिए, ऐसी शर्मनाक घटना समाज कभी स्वीकार नहीं करता।लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “ड्यूटी के प्रति लापरवाही” और “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में कहीं जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी मर्यादा और कर्तव्य को तो नहीं भूल रहे। आखिर सवाल यह है कि क्या कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए वर्दी की गरिमा और धार्मिक आस्था को दरकिनार किया जा सकता है?1
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