नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, आस्था आहत! नवादा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। शहर के प्रसिद्ध गोवर्धन मंदिर में एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा जूते पहनकर प्रवेश करने और रील बनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर जहां लोग सिर झुकाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, वहां वर्दी में तैनात महिला कर्मी का इस तरह जूते पहनकर रील बनाना लोगों को नागवार गुजरा। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है तथा श्रद्धालुओं में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मंदिर केवल ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, जहां प्रवेश से पहले जूते उतारना हमारी संस्कृति और परंपरा का मूल हिस्सा है। ऐसे पवित्र स्थान पर वर्दी में मौजूद किसी पुलिसकर्मी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि"जिस पुलिस पर समाज को कानून और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी है, वही अगर इस तरह धार्मिक नियमों की अनदेखी करे, तो आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है!! यह घटना केवल एक वीडियो या रील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है जहां सोशल मीडिया की चकाचौंध में लोग अपने संस्कार और जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। “रील का बुखार” अब इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग पवित्र स्थानों की गरिमा तक को नजरअंदाज करने लगे हैं। धर्म और आस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है! चाहे वह आम आदमी हो या फिर वर्दीधारी पुलिसकर्मी। वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक भी होती है। जब वही वर्दी मर्यादा तोड़ती नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करे और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति, खासकर जिम्मेदार पद पर बैठा हुआ—ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे। यह घटना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ हैँ! चाहे अनजाने में हो या दिखावे के लिए, ऐसी शर्मनाक घटना समाज कभी स्वीकार नहीं करता।लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “ड्यूटी के प्रति लापरवाही” और “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में कहीं जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी मर्यादा और कर्तव्य को तो नहीं भूल रहे। आखिर सवाल यह है कि क्या कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए वर्दी की गरिमा और धार्मिक आस्था को दरकिनार किया जा सकता है?
नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, आस्था आहत! नवादा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। शहर के प्रसिद्ध गोवर्धन मंदिर में एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा जूते पहनकर प्रवेश करने और रील बनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर जहां लोग सिर झुकाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, वहां वर्दी में तैनात महिला कर्मी का इस तरह जूते पहनकर रील बनाना लोगों को नागवार गुजरा। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है तथा श्रद्धालुओं में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मंदिर केवल ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, जहां प्रवेश से पहले जूते उतारना हमारी संस्कृति और परंपरा का मूल हिस्सा है। ऐसे पवित्र स्थान पर वर्दी में मौजूद किसी पुलिसकर्मी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि"जिस पुलिस पर समाज को कानून और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी है, वही अगर इस तरह धार्मिक नियमों की अनदेखी करे, तो आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है!! यह घटना केवल एक वीडियो या रील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है जहां सोशल मीडिया की चकाचौंध में लोग अपने संस्कार और जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। “रील का बुखार” अब इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग पवित्र स्थानों की गरिमा तक को नजरअंदाज करने लगे हैं। धर्म और आस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है! चाहे वह आम आदमी हो या फिर वर्दीधारी पुलिसकर्मी। वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक भी होती है। जब वही वर्दी मर्यादा तोड़ती नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करे और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति, खासकर जिम्मेदार पद पर बैठा हुआ—ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे। यह घटना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ हैँ! चाहे अनजाने में हो या दिखावे के लिए, ऐसी शर्मनाक घटना समाज कभी स्वीकार नहीं करता।लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “ड्यूटी के प्रति लापरवाही” और “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में कहीं जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी मर्यादा और कर्तव्य को तो नहीं भूल रहे। आखिर सवाल यह है कि क्या कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए वर्दी की गरिमा और धार्मिक आस्था को दरकिनार किया जा सकता है?
- SANTOSH barma Bhuvanडोभी, गया, बिहारमंदिर मे नहीं मंदिर का बाहर मे है जो ब्राह्मण भी जूते पहनकर घूमते और भी कार्य करते कई बार देखा है4 hrs ago
- नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, आस्था आहत! नवादा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। शहर के प्रसिद्ध गोवर्धन मंदिर में एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा जूते पहनकर प्रवेश करने और रील बनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर जहां लोग सिर झुकाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, वहां वर्दी में तैनात महिला कर्मी का इस तरह जूते पहनकर रील बनाना लोगों को नागवार गुजरा। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है तथा श्रद्धालुओं में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मंदिर केवल ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, जहां प्रवेश से पहले जूते उतारना हमारी संस्कृति और परंपरा का मूल हिस्सा है। ऐसे पवित्र स्थान पर वर्दी में मौजूद किसी पुलिसकर्मी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि"जिस पुलिस पर समाज को कानून और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी है, वही अगर इस तरह धार्मिक नियमों की अनदेखी करे, तो आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है!! यह घटना केवल एक वीडियो या रील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है जहां सोशल मीडिया की चकाचौंध में लोग अपने संस्कार और जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। “रील का बुखार” अब इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग पवित्र स्थानों की गरिमा तक को नजरअंदाज करने लगे हैं। धर्म और आस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है! चाहे वह आम आदमी हो या फिर वर्दीधारी पुलिसकर्मी। वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक भी होती है। जब वही वर्दी मर्यादा तोड़ती नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करे और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति, खासकर जिम्मेदार पद पर बैठा हुआ—ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे। यह घटना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ हैँ! चाहे अनजाने में हो या दिखावे के लिए, ऐसी शर्मनाक घटना समाज कभी स्वीकार नहीं करता।लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “ड्यूटी के प्रति लापरवाही” और “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में कहीं जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी मर्यादा और कर्तव्य को तो नहीं भूल रहे। आखिर सवाल यह है कि क्या कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए वर्दी की गरिमा और धार्मिक आस्था को दरकिनार किया जा सकता है?1
- bati Wale Baba ghata Ayodhya bhishan Aag laga1
- ब्लास्ट हो जाता है1
- Post by News Of Nawada1
- Post by Md Akhtar1
- Post by Garibnath Sahani1
- मैट्रिक परीक्षाफल में सुखदेव प्रसाद वर्मा प्लस टू विद्यालय टेहटा की छात्रा राधा बनी सेकंड जिला टॉपर रविवार के दिन 3 बजे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा मैट्रिक परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए हैं घोषित किए गए परिणामों में मखदुमपुर प्रखंड के टेहटा बाजार में संचालित सुखदेव प्रसाद वर्मा प्लस टू विद्यालय की छात्रा राधा कुमारी ने सेकंड जिला टॉपर घोषित की गई है। राधा को 480 अंक प्राप्त हुए हैं। इस बाबत सफल छात्रा राधा ने बताई की वर्ग 1 से लेकर 8 तक टेहटा बाजार में संचालित एक निजी विद्यालय में पढ़ती थी वही नवमी क्लास में सुखदेव प्रसाद वर्मा प्लस टू विद्यालय में एडमिशन ली थी ।जहां से इस बार मैट्रिक की परीक्षा दी थी ।जिसमें उसे सफलता मिला है ।सफल छात्रा ने बताया कि उनके पिता राजू कुमार किसान है ।जो खेती कर घर का भरण पोषण करते हैं वही माता नीतू कुमारी गृहणी है। उसने बताया कि उसके दो भाई एवं दो बहन हैं उसे एक बहन बड़ी है जबकि दोनों भाई छोटे हैं। उसने कहा कि आगे वह चलकर सिविल सेवा में जाना चाहती है । वहीं छात्रा को सेकंड टॉपर घोषित किए जाने पर विद्यालय के हेड मास्टर रमाकांत प्रसाद में खुशी का इजहार करते हुए बताया कि हमारे विद्यालय के शिक्षकों की मेहनत से लगातार विद्यालय टॉपर सूची में शामिल हो रहा है। उन्होंने छात्रा को विद्यालय परिवार की ओर से सम्मानित करने की बात कही है। वही विद्यालय के शिक्षक रीता कुमारी राजकमल कुमार राहुल कुमार वर्मा समेत कई लोगों ने सफल छात्र को बधाई दी है बता दे कि बिहार बोर्ड द्वारा मैट्रिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया है जिसमें मखदुमपुर प्रखंड के तीन बच्चे टॉप 3 में जगह बनाया है ।1
- Hii1