Shuru
Apke Nagar Ki App…
देखिए इस वीडियो में किस तरह से एक व्यक्ति चिला रहा की मेरा पत्नी को मार रहा हैं।
News Of Nawada
देखिए इस वीडियो में किस तरह से एक व्यक्ति चिला रहा की मेरा पत्नी को मार रहा हैं।
More news from बिहार and nearby areas
- नवादा 29 मार्च । नवादा पीयूसीएल द्वारा आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे और आखिरी दिन रविवार को प्रशिक्षकों ने संविधान के मौलिक अधिकारों से संबंधित धाराओं की सूक्ष्म जानकारी दी । आज के सत्र की अध्यक्षता डॉ ओंकार निराला ने की जबकि प्रशिक्षकों के पैनल में प्रो पुष्पेंद्र , इबरान, मो जाहिद , डॉ गोपाल कृष्ण एवं अधिवक्ता प्रतिभा भट्ट उपस्थित रहे । 9 बजे प्रातः से प्रारंभ प्रशिक्षण सत्र में सामाजिक अत्याचार और पुलिस लॉकअप में हिंसा जैसी घटनाओं पर विशद चर्चा की गई । प्रशिक्षक पुष्पेंद्र ने लैंगिक , जातीय , रंग , धर्म आधारित भेद भाव को मानवाधिकार पर कुठाराघात बताया । खासकर प्रशिक्षु प्रतिनिधियों से स्थानीय स्तर पर हुए मानवाधिकार उलंघन के मामलों की जानकारी ली गई और उसपर विचार मंथन करते हुए कलमबद्ध किया गया । स्वतंत्रता के अधिकारों की व्याख्या करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस , प्रशासन अथवा सरकार के स्तर पर लगातार स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन किया जा रहा है । अब तो डिजिटल रूप से बेडरूम तक पहरेदारी की जा रही है जो बेहद खतरनाक है । किसी भी व्यक्ति की निजता पर किसी भी रूप में निगहबानी करना मौलिक अधिकारों का हनन है । इन सब से निपटने के लिए समाज के जिम्मेदार लोगों को लंबे समय तक प्रतिरोध करना होगा । व्यवस्था में लगे पीयूसीएल राज्य पार्षद दिनेश कुमार अकेला , सचिव , नारायण पासवान , सामाजिक कार्यकर्ता सोहन जी इत्यादि ने आगंतुक मेहमानों का स्वागत किया और भविष्य में इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन होते रहने की कामना की । कार्यक्रम में गया के साथी बिहार विकलांग संघ के संयोजक कृष्णा यादव , पटना से वेद प्रकाश समेत अन्य पड़ोसी जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जबकि स्थानीय पीयूसीएल कार्यकर्ताओं में अशोक समदर्शी , विप्लेंद्र कुमार , मो इनायतुल्ला कासमी , सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह , रेहाना खातून , मुफ्ती सबा उद्दीन , रेणु कुमारी , चंद्रिका प्रसाद , अवधेश कुमार , मथुरा पासवान इत्यादि ने दो दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त किया । कार्यक्रम का समापन शहीद गीत से किया गया जिसे दिनेश कुमार अकेला ने प्रस्तुत की4
- Post by News Of Nawada1
- Post by Prafull Kumar Suman1
- नवादा: मंझवे से गोविंदपुर के बीच बन रही सड़क अब राहगीरों के लिए काल साबित हो रही है। आज फिर पतंग के पास एक जबरदस्त दुर्घटना हुई, जिसमें घायल को गंभीर स्थिति में अस्पताल भेजा गया है। लापरवाही की हद: सड़क पर न तो कोई संकेतक (Signboard) है और न ही सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग। खूनी रफ्तार: कुछ दिन पहले ही निर्माण वाहन की चपेट में आने से जमालपुर के एक युवक की जान जा चुकी है। फिसलन भरी राह: पांच दिन पहले हुई हल्की बारिश ने कंपनी के दावों की पोल खोल दी थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। क्या प्रशासन और निर्माण कंपनी किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं? जनता की जान से खिलवाड़ कब तक चलेगा? #NawadaNews #RoadAccident #Govindpur #Manjhe #PublicSafety #RoadConstruction #BiharNews1
- bati Wale Baba ghata Ayodhya bhishan Aag laga1
- डॉ दिव्य ज्योति लड़ेंगी पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से MLC चुनाव #नवादा में किया ऐलान #एजेंडा भी कर दिया सेट #शिक्षकों को किया सम्मानित...!4
- नवादा में वर्दी पर सवाल,मंदिर में जूते पहनकर रील बनाने वाली महिला पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल, आस्था आहत! नवादा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। शहर के प्रसिद्ध गोवर्धन मंदिर में एक महिला पुलिसकर्मी द्वारा जूते पहनकर प्रवेश करने और रील बनाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर जहां लोग सिर झुकाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं, वहां वर्दी में तैनात महिला कर्मी का इस तरह जूते पहनकर रील बनाना लोगों को नागवार गुजरा। वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है तथा श्रद्धालुओं में आक्रोश साफ देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मंदिर केवल ईंट पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र होता है, जहां प्रवेश से पहले जूते उतारना हमारी संस्कृति और परंपरा का मूल हिस्सा है। ऐसे पवित्र स्थान पर वर्दी में मौजूद किसी पुलिसकर्मी का इस तरह का व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है। स्थानीय श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि"जिस पुलिस पर समाज को कानून और मर्यादा का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी है, वही अगर इस तरह धार्मिक नियमों की अनदेखी करे, तो आम लोगों से क्या अपेक्षा की जा सकती है!! यह घटना केवल एक वीडियो या रील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घटना उस मानसिकता को उजागर करती है जहां सोशल मीडिया की चकाचौंध में लोग अपने संस्कार और जिम्मेदारियों को भूलते जा रहे हैं। “रील का बुखार” अब इस हद तक बढ़ चुका है कि लोग पवित्र स्थानों की गरिमा तक को नजरअंदाज करने लगे हैं। धर्म और आस्था का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है! चाहे वह आम आदमी हो या फिर वर्दीधारी पुलिसकर्मी। वर्दी केवल अधिकार नहीं देती, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक भी होती है। जब वही वर्दी मर्यादा तोड़ती नजर आए, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को चाहिए कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करे और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति, खासकर जिम्मेदार पद पर बैठा हुआ—ऐसी गलती करने से पहले सौ बार सोचे। यह घटना आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ हैँ! चाहे अनजाने में हो या दिखावे के लिए, ऐसी शर्मनाक घटना समाज कभी स्वीकार नहीं करता।लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे “ड्यूटी के प्रति लापरवाही” और “धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़” करार दिया है। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव में कहीं जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी मर्यादा और कर्तव्य को तो नहीं भूल रहे। आखिर सवाल यह है कि क्या कुछ लाइक्स और व्यूज के लिए वर्दी की गरिमा और धार्मिक आस्था को दरकिनार किया जा सकता है?1
- Hii1