स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ ने प्रबंधन को सौंपा मांग पत्र - सात दिन में समाधान नहीं किया तो होगा आन्दोलन* ✍ ..*आज़ाद शेरवानी* कोटा 11 मई 2026, स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ, रानपुर कोटा द्वारा अध्यक्ष नाथूलाल गोस्वामी के नेतृत्व में स्टोन शिपर्स कंपनी प्रबंधन को मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा गया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से कर्मचारियों की वेतन वृद्धि एवं वेतन विसंगति सहित विभिन्न समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। महंगाई के अनुरूप वेतन वृद्धि नहीं होने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मांग पत्र में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर कर शीघ्र वेतन वृद्धि लागू करने तथा कर्मचारियों की समस्याओं का सकारात्मक समाधान करने की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं होने पर कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष राजेश पाराशर, नरेंद्र मेहता, मेघराज नागर सहित संघ के विभिन्न पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ ने प्रबंधन को सौंपा मांग पत्र - सात दिन में समाधान नहीं किया तो होगा आन्दोलन* ✍ ..*आज़ाद शेरवानी* कोटा 11 मई 2026, स्टोन शिपर्स कर्मचारी संघ, रानपुर कोटा द्वारा अध्यक्ष नाथूलाल गोस्वामी के नेतृत्व में स्टोन शिपर्स कंपनी प्रबंधन को मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा गया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से कर्मचारियों की वेतन वृद्धि एवं वेतन विसंगति सहित विभिन्न समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। महंगाई के अनुरूप वेतन वृद्धि नहीं होने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मांग पत्र में कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर कर शीघ्र वेतन वृद्धि लागू करने तथा कर्मचारियों की समस्याओं का सकारात्मक समाधान करने की मांग की गई। साथ ही चेतावनी दी गई कि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं होने पर कर्मचारी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर कार्यकारी अध्यक्ष राजेश पाराशर, नरेंद्र मेहता, मेघराज नागर सहित संघ के विभिन्न पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- मृतक प्रसूता महिला के परिवार को पुलिस ने धमकाया मेडिकल कॉलेज परिसर खाली करो नही तो होगी कार्यवाही कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने जताया विरोध कोटा राजस्थान . कोटा कोटा शहर में अब खाकी का रोब मृतक प्रसूता के परिजनों को सोमवार को शाम 5 बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे थे जब देखने को मिला। शहर कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम ने बताया कि मृतक प्रसूता परिवार के न्याय के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में परिवार के साथ धरने पर बैठे थे। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल नीलेश जैन व पुलिस के अधिकारी धरना स्थल पर आये और पीड़ित परिवार को स्थान खाली करने के लिए धमकाने लगे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि मैने डिप्टी को भैया कहकर सम्भोधित किया तो वह भड़क गए और धमकाने लगे।ओर देख लेने की धमकी दी। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय के लिए शांति पूर्वक धरना देना गलत है क्या। वही मृतक प्रसूता महिला के पति दिनेश ने भी पुलिस द्वारा धमकाने का आरोप लगाया। ओर परिसर को खाली करने को कहा।3
- कोटा: धरने के सवा साल बाद भी जेके फैक्ट्री के मजदूरों का जोश बरकरार बकाया भुगतान की मांग को लेकर 18 फरवरी 2025 से कोटा कलेक्ट्रेट पर चल रहे जेके फैक्ट्री के मजदूरों के धरने को लगभग सवा साल होने को है, फिर भी मजदूरों का जोश और जज्बा देखते ही बनता है, तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मजदूरों का हौसला टूटने के बजाय और बढ़ता ही जा रहा है...1
- सिलेंडर में लीकेज से आग,मां समेत दो बेटियां जिन्दा जली पाली जिले के रेलडा ग्राम पंचायत के काणेचा गांव में सिलेंडर में लीकेज होने से मां के साथ दो बेटियां जिंदा जल गयी। हृदय विदारक इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई।1
- कोटा के बोरखेड़ा में एक अवैध सब्जी मंडी से परेशानी बढ़ गई है। यहां सब्जी विक्रेताओं से गैरकानूनी तरीके से किराया वसूला जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।1
- कोटा में छात्रों के बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन पर डॉ. नितिन शर्मा ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि बच्चों को सिर्फ 'स्टूडेंट' न समझें, बल्कि उनसे प्यार से बात कर एक भावनात्मक सहारा दें। उनका मानना है कि 'रैंक से पहले जिंदगी जरूरी है', और अपनापन किसी की जान बचा सकता है।1
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की NNW दिशा प्रेम, आकर्षण और भावनात्मक जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि इस दिशा में गंदगी, अंधेरा या दोष हों, तो पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव और दूरियां आ सकती हैं। यह दिशा व्यवसाय में ग्राहकों को आकर्षित करने में भी अहम भूमिका निभाती है, इसलिए इसे संतुलित रखना फायदेमंद है।1
- बंगाल में 'तथाकथित दीदी' पर हिंदुओं के साथ 'अन्याय और अत्याचार की इंतिहा' करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन घटनाओं को बदलाव या बदले की कार्रवाई का नतीजा बताया जा रहा है, जिसे 'यह तो होना ही था' कहकर अभिव्यक्त किया गया है।1
- कोटा में जेके फैक्ट्री के मजदूर 30 साल से बकाया भुगतान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले सवा साल से कलेक्ट्रेट पर चल रहे उनके धरने को दिल्ली के किसान आंदोलन की तरह डिस्टर्ब करने की कोशिशें हो रही हैं।1