उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह करीब 11 बजे उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अमृतसर से आने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस पहुंची। इस दौरान ट्रेन से उतरकर सामान खरीद रही एक महिला यात्री चलती ट्रेन में सुरक्षित रूप से नहीं चढ़ सकी। इसे देखकर वहां तैनात डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए वॉकी-टॉकी के माध्यम से लोको पायलट को निर्देश देकर ट्रेन को रुकवा दिया। ट्रेन रुकने के बाद जब महिला दोबारा चढ़ने लगी, तभी वहां मौजूद एक आरपीएफ कर्मी ने उसे चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया। डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ कर्मी की इस कार्रवाई का विरोध किया और साफ किया कि ट्रेन चेन पुलिंग से नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा के मद्देनजर उनके निर्देश पर रुकवाई गई थी। स्टेशन अधीक्षक और स्टेशन डायरेक्टर ने भी नरेंद्र चाहर की बात की पुष्टि की, लेकिन आरोप है कि आरपीएफ कर्मियों ने उनकी बात नहीं मानी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में गहरा विवाद हो गया और आरपीएफ कर्मी डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर को जबरन घसीटते हुए आरपीएफ थाने ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्हें करीब 300 मीटर तक हाथ-पैर पकड़कर घसीटा गया। सरकारी कर्मचारी, विशेषकर ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर/डिप्टी एसएस के साथ किया गया यह व्यवहार पूरी तरह से अनुचित और कानून के खिलाफ है। इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध करते हुए मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह करीब 11 बजे उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अमृतसर से आने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस पहुंची। इस दौरान ट्रेन से उतरकर सामान खरीद रही एक महिला यात्री चलती ट्रेन में सुरक्षित रूप से नहीं चढ़ सकी। इसे देखकर वहां तैनात डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए वॉकी-टॉकी के माध्यम से लोको पायलट को निर्देश देकर ट्रेन को रुकवा दिया। ट्रेन रुकने के बाद जब महिला दोबारा चढ़ने लगी, तभी वहां मौजूद एक आरपीएफ कर्मी ने उसे चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया। डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ कर्मी की इस कार्रवाई का विरोध किया और साफ किया कि ट्रेन चेन पुलिंग से नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा के मद्देनजर उनके निर्देश पर रुकवाई गई थी। स्टेशन अधीक्षक और स्टेशन डायरेक्टर ने भी नरेंद्र चाहर की बात की पुष्टि की, लेकिन आरोप है कि आरपीएफ कर्मियों ने उनकी बात नहीं मानी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में गहरा विवाद हो गया और आरपीएफ कर्मी डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर को जबरन घसीटते हुए आरपीएफ थाने ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्हें करीब 300 मीटर तक हाथ-पैर पकड़कर घसीटा गया। सरकारी कर्मचारी, विशेषकर ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर/डिप्टी एसएस के साथ किया गया यह व्यवहार पूरी तरह से अनुचित और कानून के खिलाफ है। इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध करते हुए मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।
- उत्तर प्रदेश के बदायूं जिला के बिल्सी क्षेत्र से एक गरीब युवक की लाचारी का मामला सामने आया है। वीडियो में दिख रहा यह युवक बेहद गरीब है, जो रुपये न होने के कारण बैल नहीं खरीद पाया है। इसी लाचारी और मजबूरी के चलते वह मक्का से भरा हुआ दलम बाइक से ले जाने को मजबूर है। पैसों की कमी के कारण बैल न खरीद पाने की उसकी यह बेबसी इस वीडियो में साफ तौर पर देखी जा सकती है।1
- न्यूज़ चैनल आज के मुख्य समाचार दुनिया भर के मुख्य समाचार1
- सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर यह बड़ा दावा किया जा रहा है कि भारतीय रेलवे ने घूस का नाम बदलकर अब "किराया" कर दिया है। हालांकि, वायरल हो रहे इस वीडियो की पुष्टि नहीं की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार सुबह करीब 11 बजे उस समय गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अमृतसर से आने वाली हीराकुंड एक्सप्रेस पहुंची। इस दौरान ट्रेन से उतरकर सामान खरीद रही एक महिला यात्री चलती ट्रेन में सुरक्षित रूप से नहीं चढ़ सकी। इसे देखकर वहां तैनात डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए वॉकी-टॉकी के माध्यम से लोको पायलट को निर्देश देकर ट्रेन को रुकवा दिया। ट्रेन रुकने के बाद जब महिला दोबारा चढ़ने लगी, तभी वहां मौजूद एक आरपीएफ कर्मी ने उसे चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया। डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ कर्मी की इस कार्रवाई का विरोध किया और साफ किया कि ट्रेन चेन पुलिंग से नहीं, बल्कि यात्री सुरक्षा के मद्देनजर उनके निर्देश पर रुकवाई गई थी। स्टेशन अधीक्षक और स्टेशन डायरेक्टर ने भी नरेंद्र चाहर की बात की पुष्टि की, लेकिन आरोप है कि आरपीएफ कर्मियों ने उनकी बात नहीं मानी। इस बात को लेकर दोनों पक्षों में गहरा विवाद हो गया और आरपीएफ कर्मी डिप्टी एसएसए नरेंद्र चाहर को जबरन घसीटते हुए आरपीएफ थाने ले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्हें करीब 300 मीटर तक हाथ-पैर पकड़कर घसीटा गया। सरकारी कर्मचारी, विशेषकर ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर/डिप्टी एसएस के साथ किया गया यह व्यवहार पूरी तरह से अनुचित और कानून के खिलाफ है। इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध करते हुए मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।1