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सूर्यदेव उपासक और ज्योतिषाचार्य पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ ने पिता दिवस के अवसर पर पुत्र या पुत्र वधू को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। पंडित वशिष्ठ अखिल भारत वर्षीय ब्रह्म महासभा (पंजीकृत) से जुड़े हुए हैं, जिसकी स्थापना सन 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा एनसीआर दिल्ली में की गई थी।
कुंजबिहारी वशिष्ठ ज्योतिषी
सूर्यदेव उपासक और ज्योतिषाचार्य पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ ने पिता दिवस के अवसर पर पुत्र या पुत्र वधू को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। पंडित वशिष्ठ अखिल भारत वर्षीय ब्रह्म महासभा (पंजीकृत) से जुड़े हुए हैं, जिसकी स्थापना सन 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा एनसीआर दिल्ली में की गई थी।
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- एक सकारात्मक संदेश में बताया गया है कि संबंधित व्यक्ति को बहुत कम समय में तेजी से प्रगति हासिल होगी। इस संदेश में त्वरित उन्नति और सफलता की बात कही गई है।1
- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ, जो कि एक ज्योतिषाचार्य, सूर्यदेव उपासक, पूर्व कार्यालय अधीक्षक नगर पालिका परिषद मोदीनगर और अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण समाज एनसीआर के मीडिया प्रभारी हैं, ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उनके अनुसार, बचपन में जिन हाथों ने सहारा दिया, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि अब थकना उनका हक है। पंडित जी के इन वचनों को 'बिल्कुल सत्य' बताते हुए, सनातन धर्म के सार पर प्रकाश डाला गया कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है। मनुस्मृति का हवाला देते हुए कहा गया है कि 'पितरः प्रथमे देवता:', यानी पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित कर देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान मानी गई है। यह भी रेखांकित किया गया कि पंडित जी मोदीनगर से अखिल भारतवर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कार्य को सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया। पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ का यह संदेश उन सभी व्यक्तियों के लिए है, जिन्होंने 'अपना आंगन' बड़ा करने की चाह में 'पिता का आंगन' छोटा कर दिया। इस प्रेरणादायी संदेश के साथ 'पितृदेवो भवः' का भाव व्यक्त किया गया और पंडित जी के सेवा भाव के सदा अक्षुण्ण रहने की कामना की गई।1
- भारत देश से अंधविश्वास की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आते रहते हैं। इसी कड़ी में अंधविश्वास से जुड़ा एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी सटीक जगह पता नहीं चल पाई है। इस वीडियो को लेकर बताया जा रहा है कि आज के समय में भी देश में अंधविश्वास अपने चरम पर है। लोग ढोंगी बाबाओं के चक्कर में फंसकर बर्बाद हो चुके हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। यह वायरल वीडियो देश में अंधविश्वास की इस बढ़ती प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर करता है, जिस पर लोगों से अपनी राय मांगी गई है।1
- गाजियाबाद के वीवीआईपी नेहरू स्टेडियम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का एक भव्य प्रकट समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए कुल 518 शिक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद राष्ट्र सेवा और अनुशासन का दृढ़ संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान, स्वयंसेवकों ने अपनी दक्षता का प्रदर्शन करते हुए मार्च पास्ट, योग, प्राणायाम, नियुद्ध, दण्ड संचालन और विभिन्न व्यूह रचनाओं का शानदार प्रदर्शन किया। विशेष रूप से, 107 शिक्षार्थियों के घोष वादन ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कर दिया, जिससे उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर, मुख्य वक्ता क्षेत्र प्रचारक महेंद्र जी ने अपने संबोधन में संघ के मूल उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ का प्रमुख लक्ष्य चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ कार्यकर्ताओं का निर्माण करना है। वहीं, इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी ने अनुशासित नागरिकों को देश की सुरक्षा की वास्तविक रीढ़ बताया, उनकी महत्ता पर जोर दिया। करीब 5000 लोगों की भारी उपस्थिति में आयोजित इस भव्य समारोह का समापन सामूहिक संघ प्रार्थना के साथ हुआ, जिसने कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक और संगठनात्मक पूर्णता प्रदान की।1
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- भारतीय किसान यूनियन बाबा के जिला अध्यक्ष पद पर मुकेश शर्मा को नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रतिनिधि ठाकुर धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। इस अवसर पर मुकेश शर्मा को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं, और कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे।1
- मेरठ के बुढ़ाना गेट क्षेत्र में मोहर्रम की पाँचवीं तारीख के अवसर पर एक पारंपरिक जुलूस पूरी अकीदत और अनुशासन के साथ निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादार शामिल हुए, जिन्होंने नोहाख्वानी और मातम के ज़रिए हज़रत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस के पूरे मार्ग पर एक गमगीन माहौल बना रहा, जिसके बीच अमन, इंसाफ और इंसानियत का संदेश लगातार गूंजता रहा। इस धार्मिक आयोजन के दौरान सामाजिक सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली। हिंदू समाज के लोगों ने विभिन्न स्थानों पर अज़ादारों और राहगीरों के लिए रूह अफ़ज़ा और शरबत का वितरण कर उनकी सेवा की। इस पहल को स्थानीय लोगों ने खूब सराहा, जिसने गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक बेहतरीन तस्वीर पेश की। इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में हिंदू, सिख और सुन्नी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी की। कई उपस्थित लोगों ने जुलजिनाह (ज़ुलजनाह) के साथ तस्वीरें खिंचवाकर आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया। उपस्थित लोगों ने इस अवसर पर कहा कि मोहर्रम की सीख हमें इंसाफ, त्याग और मानवता के उच्च मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है। बुढ़ाना गेट से निकला यह जुलूस धार्मिक आस्था का प्रतीक होने के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का भी एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।1
- फादर्स डे के अवसर पर पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ जी ने एक अत्यंत हृदयस्पर्शी 'सेवा का संदेश' दिया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बचपन में जिन हाथों ने संभाला, अब उनके कांपते हाथों को थामना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि थकना अब उनका हक है। इस संदेश को बिल्कुल सत्य वचन बताते हुए, इसमें सनातन धर्म का सार बताया गया है कि पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण होता है। मनुस्मृति के कथन 'पितरः प्रथमे देवता:' का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पिता ही पहले देवता हैं। जिस प्रकार सूर्यदेव बिना थके प्रकाश देते हैं, ठीक वैसे ही पिता भी अपना जीवन निस्वार्थ भाव से दे देते हैं। बुढ़ापे में उनका सहारा बनना ही वशिष्ठ कुल और सूर्य उपासक की सच्ची पहचान है। अखिल भारत वर्षीय ब्रह्म महासभा, जिसकी स्थापना 1939 में पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने की थी, की परंपरा को पंडित कुंजबिहारी वशिष्ठ जी मोदीनगर से आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे सेवा, संस्कार और समाज का संगम बताया गया है। उनका यह संदेश विशेष रूप से उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपना आंगन बड़ा करने की होड़ में पिता का आंगन छोटा कर दिया है। इस संदेश का मूल भाव 'पितृदेवो भवः' है और यह कामना की गई है कि सेवा भाव सदा अक्षुण्ण बना रहे।1