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आजकल बाजार में मिलने वाले दूध-दही, पनीर और हरी सब्जियों सहित हर खाद्य पदार्थ में धड़ल्ले से केमिकल और मिलावट का खेल चल रहा है। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस नकली और जहरीले सामान को खाने पर मजबूर है। इस स्थिति पर गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या चंद पैसों के अंधे लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करना सही है। यह कीमती मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिला है, और यह कहा गया है कि इंसान ने भले ही दुनिया भर के आविष्कार कर लिए हों और रोबोट बना लिए हों, लेकिन कोई भी आज तक एक मृत शरीर में फिर से 'जान' नहीं डाल पाया है। ईश्वर सत्य है, और सभी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब यहीं होना है, क्योंकि लोग खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाते हैं, अपने साथ सिर्फ अच्छे कर्म ही ले जाते हैं। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि 'प्लास्टिक के चावल' की जो अफवाहें उड़ती हैं, वह वास्तव में सरकार द्वारा पोषण बढ़ाने के लिए मिलाया गया 'फोर्टिफाइड चावल' होता है, लेकिन दूध, मावा और सब्जियों में यूरिया और केमिकल का जो असली खेल चल रहा है, वह 100% सच है और यह हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। इस गंभीर समस्या के मद्देनजर, सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना की गई है कि अगर वे कहीं भी ऐसी मिलावट या गलत काम होते देखें, तो चुप न रहें, बल्कि उन लोगों को शांति और समझदारी से समझाएं। इसमें किसी भी तरह की हिंसा, मारपीट या झगड़ा करने से मना किया गया है, और समाज को शांतिपूर्ण ढंग से सुधारने की बात कही गई है। यह भी जोर दिया गया है कि इस कलयुग में केवल जागरूक बनकर ही अपने प्रियजनों की जान बचाई जा सकती है। इस बेबाक आवाज को अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर) ने मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) के माध्यम से उठाया है, और अनाया सिंह पाठशाला 'सच्चे संस्कार और शिक्षा की ओर कदम' बढ़ाते हुए जमीनी सेवा प्रदान कर रही है। अंत में यह सवाल उठाया गया है कि 'किराए का जीवन' होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों नहीं थम रहा है, और क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है।

15 hrs ago
user_Anuj Chauhan (Reporter)
Anuj Chauhan (Reporter)
Local News Reporter बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
15 hrs ago
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आजकल बाजार में मिलने वाले दूध-दही, पनीर और हरी सब्जियों सहित हर खाद्य पदार्थ में धड़ल्ले से केमिकल और मिलावट का खेल चल रहा है। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस नकली और जहरीले सामान को खाने पर मजबूर है। इस स्थिति पर गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या चंद पैसों के अंधे लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करना सही है। यह कीमती मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिला है, और यह कहा गया है कि इंसान ने भले ही दुनिया भर के आविष्कार कर लिए हों और रोबोट बना लिए हों, लेकिन कोई भी आज तक एक मृत शरीर में फिर से 'जान' नहीं डाल पाया है। ईश्वर सत्य है, और सभी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब यहीं होना है, क्योंकि लोग खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाते हैं, अपने साथ सिर्फ अच्छे कर्म ही ले जाते हैं। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि 'प्लास्टिक के चावल' की जो अफवाहें उड़ती हैं, वह वास्तव में सरकार द्वारा पोषण बढ़ाने के लिए मिलाया गया 'फोर्टिफाइड चावल' होता है, लेकिन दूध, मावा और

सब्जियों में यूरिया और केमिकल का जो असली खेल चल रहा है, वह 100% सच है और यह हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। इस गंभीर समस्या के मद्देनजर, सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना की गई है कि अगर वे कहीं भी ऐसी मिलावट या गलत काम होते देखें, तो चुप न रहें, बल्कि उन लोगों को शांति और समझदारी से समझाएं। इसमें किसी भी तरह की हिंसा, मारपीट या झगड़ा करने से मना किया गया है, और समाज को शांतिपूर्ण ढंग से सुधारने की बात कही गई है। यह भी जोर दिया गया है कि इस कलयुग में केवल जागरूक बनकर ही अपने प्रियजनों की जान बचाई जा सकती है। इस बेबाक आवाज को अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर) ने मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) के माध्यम से उठाया है, और अनाया सिंह पाठशाला 'सच्चे संस्कार और शिक्षा की ओर कदम' बढ़ाते हुए जमीनी सेवा प्रदान कर रही है। अंत में यह सवाल उठाया गया है कि 'किराए का जीवन' होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों नहीं थम रहा है, और क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है।

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  • लखनऊ और उन्नाव से सामने आ रही जमीनी हकीकत सोशल मीडिया और विज्ञापनों में किए जा रहे बड़े-बड़े विकास के दावों के ठीक उलट है। आज देश में आम और गरीब नागरिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों जैसे गैस सिलेंडर, राशन, अस्पताल की दवाइयों और पेट्रोल के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि इन जरूरी चीजों की भारी किल्लत है। इसके विपरीत, समाज को बर्बादी की ओर धकेलने वाली शराब और दारू की पेटियाँ गाड़ियों से बिना किसी रुकावट के धड़ल्ले से उतारी जा रही हैं, और ठेकों पर न तो कोई कतार दिखती है और न ही कोई किल्लत है। यह स्थिति प्रशासन और व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाती है कि क्या देश दारू के भरोसे चलेगा? पोस्ट में यह भी कहा गया है कि मानव जीवन बहुत छोटा और अनिश्चित है, और आज लोग चंद पैसों के मुनाफे के लिए पूरे समाज के भविष्य में जहर घोल रहे हैं। यह सवाल उठाया गया है कि जब हम खुद किसी मशीन या रोबोट में 'जान' नहीं डाल सकते, तो किसी की जिंदगी को इतना लाचार बनाने का हक हमें किसने दिया। यह भी जोर दिया गया है कि ईश्वर सत्य है और इन बुरे कर्मों का हिसाब इसी दुनिया में होगा। अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर), मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) द्वारा प्रस्तुत यह बेबाक आवाज़ सभी से विनम्रतापूर्वक आह्वान करती है कि इस सामाजिक अव्यवस्था के खिलाफ शांति और समझदारी से अपनी आवाज़ उठाएं, अपने परिवार और समाज को जागरूक बनाएं। यह अपील की गई है कि इस कड़वे सच से सहमत लोग इस आवाज़ को आगे बढ़ाएं ताकि सोई हुई व्यवस्था जाग सके। संस्कार और समाज सेवा के लिए अनाया सिंह पाठशाला 1 का भी इसमें उल्लेख है।
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    लखनऊ और उन्नाव से सामने आ रही जमीनी हकीकत सोशल मीडिया और विज्ञापनों में किए जा रहे बड़े-बड़े विकास के दावों के ठीक उलट है। आज देश में आम और गरीब नागरिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों जैसे गैस सिलेंडर, राशन, अस्पताल की दवाइयों और पेट्रोल के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि इन जरूरी चीजों की भारी किल्लत है।

इसके विपरीत, समाज को बर्बादी की ओर धकेलने वाली शराब और दारू की पेटियाँ गाड़ियों से बिना किसी रुकावट के धड़ल्ले से उतारी जा रही हैं, और ठेकों पर न तो कोई कतार दिखती है और न ही कोई किल्लत है। यह स्थिति प्रशासन और व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाती है कि क्या देश दारू के भरोसे चलेगा?

पोस्ट में यह भी कहा गया है कि मानव जीवन बहुत छोटा और अनिश्चित है, और आज लोग चंद पैसों के मुनाफे के लिए पूरे समाज के भविष्य में जहर घोल रहे हैं। यह सवाल उठाया गया है कि जब हम खुद किसी मशीन या रोबोट में 'जान' नहीं डाल सकते, तो किसी की जिंदगी को इतना लाचार बनाने का हक हमें किसने दिया। यह भी जोर दिया गया है कि ईश्वर सत्य है और इन बुरे कर्मों का हिसाब इसी दुनिया में होगा। अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर), मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) द्वारा प्रस्तुत यह बेबाक आवाज़ सभी से विनम्रतापूर्वक आह्वान करती है कि इस सामाजिक अव्यवस्था के खिलाफ शांति और समझदारी से अपनी आवाज़ उठाएं, अपने परिवार और समाज को जागरूक बनाएं। यह अपील की गई है कि इस कड़वे सच से सहमत लोग इस आवाज़ को आगे बढ़ाएं ताकि सोई हुई व्यवस्था जाग सके। संस्कार और समाज सेवा के लिए अनाया सिंह पाठशाला 1 का भी इसमें उल्लेख है।
    user_Anuj Chauhan (Reporter)
    Anuj Chauhan (Reporter)
    Local News Reporter बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • उन्नाव में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह करीब 5:00 बजे एक डबल डेकर ए.सी. बस पलट गई।
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    उन्नाव में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह करीब 5:00 बजे एक डबल डेकर ए.सी. बस पलट गई।
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Unnao, Uttar Pradesh•
    11 hrs ago
  • कानपुर देहात के सीओ संजय सिंह के कुछ बयान सामने आए हैं, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि पब्लिक को बवाल करने देना चाहिए और पुलिस को घटनास्थल पर नहीं पहुंचना चाहिए, बल्कि दूर खड़े होकर देखना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कुछ होता है तो वे बचा लेंगे। अपने इन बयानों के दौरान, सीओ संजय सिंह ने यह भी जिक्र किया कि उन्होंने ‘अमूल वाले’ मामले की जांच में भी बचाया था और आगे भी ऐसा ही करेंगे। इन टिप्पणियों को लेकर सिर्फ उनकी भाषा पर ही नहीं, बल्कि पूरी पुलिसिंग मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या पुलिस अब दूर से तमाशा देखने के सिद्धांत पर काम करेगी।
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    कानपुर देहात के सीओ संजय सिंह के कुछ बयान सामने आए हैं, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि पब्लिक को बवाल करने देना चाहिए और पुलिस को घटनास्थल पर नहीं पहुंचना चाहिए, बल्कि दूर खड़े होकर देखना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कुछ होता है तो वे बचा लेंगे।

अपने इन बयानों के दौरान, सीओ संजय सिंह ने यह भी जिक्र किया कि उन्होंने ‘अमूल वाले’ मामले की जांच में भी बचाया था और आगे भी ऐसा ही करेंगे। इन टिप्पणियों को लेकर सिर्फ उनकी भाषा पर ही नहीं, बल्कि पूरी पुलिसिंग मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या पुलिस अब दूर से तमाशा देखने के सिद्धांत पर काम करेगी।
    user_Manas Mishra
    Manas Mishra
    Local News Reporter कानपुर, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश•
    34 min ago
  • कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सोमवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब स्टेशन परिसर में दो अलग-अलग घटनाओं में मारपीट होने से यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। पहली घटना स्टेशन के वीआईपी कहे जाने वाले प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर हुई, जहाँ दो सफाई कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि वे करीब आधे घंटे तक जमकर लात-घूंसे चलाते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान मौके पर काफी देर तक पुलिस नहीं पहुँची, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और यात्री तमाशबीन बने रहे। यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि जीआरपी थाने के सामने दो पार्सल दलाल आपस में खींचतान और बहस करते नजर आए, जिसके बाद वहाँ भी हंगामे जैसी स्थिति बन गई। लगातार हुई इन दो घटनाओं से स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में भय और अफरा-तफरी फैल गई। लोगों ने स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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    कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर सोमवार को हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब स्टेशन परिसर में दो अलग-अलग घटनाओं में मारपीट होने से यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। पहली घटना स्टेशन के वीआईपी कहे जाने वाले प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर हुई, जहाँ दो सफाई कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि वे करीब आधे घंटे तक जमकर लात-घूंसे चलाते रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस दौरान मौके पर काफी देर तक पुलिस नहीं पहुँची, जिससे स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और यात्री तमाशबीन बने रहे। यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि जीआरपी थाने के सामने दो पार्सल दलाल आपस में खींचतान और बहस करते नजर आए, जिसके बाद वहाँ भी हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

लगातार हुई इन दो घटनाओं से स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में भय और अफरा-तफरी फैल गई। लोगों ने स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
    user_Anoop Nishad Kanpur
    Anoop Nishad Kanpur
    कानपुर, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कानपुर में फिल्म "समर्पित : फादर्स लव" की स्टारकास्ट ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर फिल्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। निर्देशक एक्शान खान ने बताया कि यह फिल्म एक पिता के संघर्ष और बच्चों के प्रति उसके गहरे समर्पण की एक भावुक कहानी को दर्शाती है। इस फिल्म की एक खास बात यह है कि इसकी कुल कमाई का 50 प्रतिशत हिस्सा कैंसर मरीजों के इलाज और जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए दान किया जाएगा। फिल्म में जया भट्टाचार्य, जावेद हैदर और देव व्यास जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म 19 जून 2026 को पूरे देश के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।
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    कानपुर में फिल्म "समर्पित : फादर्स लव" की स्टारकास्ट ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर फिल्म से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। निर्देशक एक्शान खान ने बताया कि यह फिल्म एक पिता के संघर्ष और बच्चों के प्रति उसके गहरे समर्पण की एक भावुक कहानी को दर्शाती है।

इस फिल्म की एक खास बात यह है कि इसकी कुल कमाई का 50 प्रतिशत हिस्सा कैंसर मरीजों के इलाज और जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए दान किया जाएगा। फिल्म में जया भट्टाचार्य, जावेद हैदर और देव व्यास जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।

यह फिल्म 19 जून 2026 को पूरे देश के सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है।
    user_KANPUR SAMACHAR DIGITAL NEWS
    KANPUR SAMACHAR DIGITAL NEWS
    Local News Reporter कानपुर, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • 'करंट टाइम न्यूज़' चैनल ने दर्शकों से अपनी वीडियो को लाइक करने, चैनल को सब्सक्राइब करने और बेल आइकन दबाने का आग्रह किया है। चैनल स्वयं को सबसे तेज़ और सबसे पहले खबरें प्रदान करने वाला बताता है। वे 'देश में हड़कंप!' के माहौल के बीच दर्शकों को 'आज की सबसे बड़ी खबरें SUPERFAST NEWS 8 PM' देखने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
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    'करंट टाइम न्यूज़' चैनल ने दर्शकों से अपनी वीडियो को लाइक करने, चैनल को सब्सक्राइब करने और बेल आइकन दबाने का आग्रह किया है। चैनल स्वयं को सबसे तेज़ और सबसे पहले खबरें प्रदान करने वाला बताता है। वे 'देश में हड़कंप!' के माहौल के बीच दर्शकों को 'आज की सबसे बड़ी खबरें SUPERFAST NEWS 8 PM' देखने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
    user_Current Time News
    Current Time News
    Newspaper publisher कानपुर, कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • भदोही जिले के औराई में स्थित परिवहन विभाग का बस अड्डा गंभीर उपेक्षा का शिकार है। यहां बसों की कमी के चलते यात्रियों को आवागमन के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन विभाग की इस लापरवाही के कारण प्राइवेट वाहनों की खूब चांदी हो रही है, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इस स्थिति के मद्देनजर, जनहित में एक 'हवाई कार्यक्रम' शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने में सहायता मिल सके।
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    भदोही जिले के औराई में स्थित परिवहन विभाग का बस अड्डा गंभीर उपेक्षा का शिकार है। यहां बसों की कमी के चलते यात्रियों को आवागमन के लिए दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिवहन विभाग की इस लापरवाही के कारण प्राइवेट वाहनों की खूब चांदी हो रही है, जिससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इस स्थिति के मद्देनजर, जनहित में एक 'हवाई कार्यक्रम' शुरू करने की भी मांग की गई है, ताकि यात्रियों की यात्रा को सुगम बनाने में सहायता मिल सके।
    user_Rajkumar
    Rajkumar
    Mechanic Kanpur, Kanpur Nagar•
    5 hrs ago
  • आजकल बाजार में मिलने वाले दूध-दही, पनीर और हरी सब्जियों सहित हर खाद्य पदार्थ में धड़ल्ले से केमिकल और मिलावट का खेल चल रहा है। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस नकली और जहरीले सामान को खाने पर मजबूर है। इस स्थिति पर गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या चंद पैसों के अंधे लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करना सही है। यह कीमती मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिला है, और यह कहा गया है कि इंसान ने भले ही दुनिया भर के आविष्कार कर लिए हों और रोबोट बना लिए हों, लेकिन कोई भी आज तक एक मृत शरीर में फिर से 'जान' नहीं डाल पाया है। ईश्वर सत्य है, और सभी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब यहीं होना है, क्योंकि लोग खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाते हैं, अपने साथ सिर्फ अच्छे कर्म ही ले जाते हैं। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि 'प्लास्टिक के चावल' की जो अफवाहें उड़ती हैं, वह वास्तव में सरकार द्वारा पोषण बढ़ाने के लिए मिलाया गया 'फोर्टिफाइड चावल' होता है, लेकिन दूध, मावा और सब्जियों में यूरिया और केमिकल का जो असली खेल चल रहा है, वह 100% सच है और यह हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। इस गंभीर समस्या के मद्देनजर, सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना की गई है कि अगर वे कहीं भी ऐसी मिलावट या गलत काम होते देखें, तो चुप न रहें, बल्कि उन लोगों को शांति और समझदारी से समझाएं। इसमें किसी भी तरह की हिंसा, मारपीट या झगड़ा करने से मना किया गया है, और समाज को शांतिपूर्ण ढंग से सुधारने की बात कही गई है। यह भी जोर दिया गया है कि इस कलयुग में केवल जागरूक बनकर ही अपने प्रियजनों की जान बचाई जा सकती है। इस बेबाक आवाज को अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर) ने मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) के माध्यम से उठाया है, और अनाया सिंह पाठशाला 'सच्चे संस्कार और शिक्षा की ओर कदम' बढ़ाते हुए जमीनी सेवा प्रदान कर रही है। अंत में यह सवाल उठाया गया है कि 'किराए का जीवन' होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों नहीं थम रहा है, और क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है।
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    आजकल बाजार में मिलने वाले दूध-दही, पनीर और हरी सब्जियों सहित हर खाद्य पदार्थ में धड़ल्ले से केमिकल और मिलावट का खेल चल रहा है। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस नकली और जहरीले सामान को खाने पर मजबूर है। इस स्थिति पर गंभीर सवाल उठाया गया है कि क्या चंद पैसों के अंधे लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करना सही है।

यह कीमती मानव जीवन बड़ी मुश्किल से मिला है, और यह कहा गया है कि इंसान ने भले ही दुनिया भर के आविष्कार कर लिए हों और रोबोट बना लिए हों, लेकिन कोई भी आज तक एक मृत शरीर में फिर से 'जान' नहीं डाल पाया है। ईश्वर सत्य है, और सभी के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब यहीं होना है, क्योंकि लोग खाली हाथ आते हैं और खाली हाथ ही जाते हैं, अपने साथ सिर्फ अच्छे कर्म ही ले जाते हैं। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि 'प्लास्टिक के चावल' की जो अफवाहें उड़ती हैं, वह वास्तव में सरकार द्वारा पोषण बढ़ाने के लिए मिलाया गया 'फोर्टिफाइड चावल' होता है, लेकिन दूध, मावा और सब्जियों में यूरिया और केमिकल का जो असली खेल चल रहा है, वह 100% सच है और यह हमारे शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है।

इस गंभीर समस्या के मद्देनजर, सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना की गई है कि अगर वे कहीं भी ऐसी मिलावट या गलत काम होते देखें, तो चुप न रहें, बल्कि उन लोगों को शांति और समझदारी से समझाएं। इसमें किसी भी तरह की हिंसा, मारपीट या झगड़ा करने से मना किया गया है, और समाज को शांतिपूर्ण ढंग से सुधारने की बात कही गई है। यह भी जोर दिया गया है कि इस कलयुग में केवल जागरूक बनकर ही अपने प्रियजनों की जान बचाई जा सकती है। इस बेबाक आवाज को अनुज चौहान (संपादक/रिपोर्टर) ने मनुज क्रांति न्यूज़ (वतन की गरिमा, लखनऊ) के माध्यम से उठाया है, और अनाया सिंह पाठशाला 'सच्चे संस्कार और शिक्षा की ओर कदम' बढ़ाते हुए जमीनी सेवा प्रदान कर रही है। अंत में यह सवाल उठाया गया है कि 'किराए का जीवन' होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों नहीं थम रहा है, और क्या गरीब होना ही सबसे बड़ा गुनाह है।
    user_Anuj Chauhan (Reporter)
    Anuj Chauhan (Reporter)
    Local News Reporter बीघापुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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