उत्तर प्रदेश में समाज की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान आज सरकार की बेरुखी के कारण बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सन 1948 के एक्ट के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में गठित इस विभाग में ग्रामीण क्षेत्रों के ब्लॉक स्तर से पूरी फोर्स लेवल की तैयारी कराकर जवानों की भर्ती की जाती है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कुंभ मेला व त्योहारों जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटियों की अहम जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इनका भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। सरकार द्वारा इन जवानों का मानदेय मात्र ₹500 प्रतिदिन निर्धारित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की बीमा सुविधा नहीं दी जाती है। ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जवान को इलाज का खर्च भी अपनी जेब से ही उठाना पड़ता है। हद तो यह है कि 60 वर्ष पूरे होने के बाद सेवानिवृत्त होने पर जवान के परिवार को ₹1 की भी आर्थिक सहायता नहीं मिलती। गोरखपुर समेत कई जनपदों के पीआरडी जवान सेवाएं समाप्त होने के बाद घर बैठे हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। आज विभाग की इस बदहाली के कारण जवान और उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है, जिससे हताश होकर मां-बाप अब अपने बच्चों को इस विभाग में भेजने की बजाय मजदूरी करने की सलाह देने लगे हैं। इस अत्यंत दयनीय स्थिति को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 45,000 पीआरडी जवानों के परिवारों के हक के लिए पत्रकारों से विनम्र निवेदन किया गया है। पत्रकारों से अपील की गई है कि वे इस विषय पर विचार-विमर्श करें और जवानों की इस दर्दभरी आवाज को माननीय मुख्यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राष्ट्रपति और माननीय राज्यपाल महोदय तक पहुंचाकर उन्हें न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
उत्तर प्रदेश में समाज की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था संभालने वाले प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवान आज सरकार की बेरुखी के कारण बदहाली की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सन 1948 के एक्ट के तहत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अगुवाई में गठित इस विभाग में ग्रामीण क्षेत्रों के ब्लॉक स्तर से पूरी फोर्स लेवल की तैयारी कराकर जवानों की भर्ती की जाती है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कुंभ मेला व त्योहारों जैसी महत्वपूर्ण ड्यूटियों की अहम जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इनका भविष्य अंधकार में डूबा हुआ है। सरकार द्वारा इन जवानों का मानदेय मात्र ₹500 प्रतिदिन निर्धारित किया गया है और इन्हें किसी भी तरह की बीमा सुविधा नहीं दी जाती है। ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जवान को इलाज का खर्च भी अपनी जेब से ही उठाना पड़ता है। हद तो यह है कि 60 वर्ष पूरे होने के बाद सेवानिवृत्त होने पर जवान के परिवार को ₹1 की भी आर्थिक सहायता नहीं मिलती। गोरखपुर समेत कई जनपदों के पीआरडी जवान सेवाएं समाप्त होने के बाद घर बैठे हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। आज विभाग की इस बदहाली के कारण जवान और उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो चुका है, जिससे हताश होकर मां-बाप अब अपने बच्चों को इस विभाग में भेजने की बजाय मजदूरी करने की सलाह देने लगे हैं। इस अत्यंत दयनीय स्थिति को देखते हुए, उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जनपदों के 45,000 पीआरडी जवानों के परिवारों के हक के लिए पत्रकारों से विनम्र निवेदन किया गया है। पत्रकारों से अपील की गई है कि वे इस विषय पर विचार-विमर्श करें और जवानों की इस दर्दभरी आवाज को माननीय मुख्यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री, माननीय राष्ट्रपति और माननीय राज्यपाल महोदय तक पहुंचाकर उन्हें न्याय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।
- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की सिकंद्राबाद तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में नगर पालिका द्वारा रिहायशी इलाके में कचरा डालने से नाराज स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया और पालिका के ट्रैक्टरों को कूड़ा गिराने से रोक दिया। यह हंगामा रोडवेज बस अड्डे और ब्लॉक के पास नगर पालिका की खाली जमीन पर बने कूड़ेघर पर हुआ, जहां लोगों ने इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन किया। इस विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब सिकंद्राबाद देहात के जोली गांव के पास बने मुख्य कूड़ा-कचरा घर में आग लग गई थी। उस दौरान ग्रामीणों ने हंगामा कर वहां कूड़ा डालने पर रोक लगा दी थी। इसके विकल्प के रूप में नगर पालिका ने नगर का कूड़ा रोडवेज बस अड्डे और ब्लॉक के पास पड़ी अपनी खाली जमीन पर डालना शुरू कर दिया। जब स्थानीय निवासियों ने इसका पुरजोर विरोध किया, तब पालिका के ईओ ने 15 दिनों के भीतर इसका निस्तारण करने और वहां कूड़ा न डालने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद लोग शांत हुए थे। आश्वासन की वह समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब पालिका द्वारा कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो शनिवार 18 जुलाई को लोग आक्रोशित हो उठे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कूड़े के कारण घरों के आसपास भयानक दुर्गंध फैल रही है, जिससे उनके बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और पूरा वातावरण दूषित हो गया है। बदबू के कारण लोगों का खाना खाना भी दूभर हो गया है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं होता, वे मौके पर ही डटे रहेंगे और वहां कूड़ा नहीं डालने देंगे।1
- दिल्ली में संसद के गेट तक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने के बाद वहां की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। इसके साथ ही, अभिजीत दीपके की हड़ताल भी खत्म हो गई है।1
- दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की अपील पर सोमवार को आयोजित 'संसद मार्च' के दौरान भारी बवाल और हिंसा हुई। इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं डिंपल को दिल्ली पुलिस ने दो घंटे तक थाने में रखा। वहीं दूसरी तरफ, बीएचयू में भी छात्रों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां छात्र खंभों पर चढ़ गए। सोमवार सुबह शुरू हुए इस प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी हंगामा करते हुए संसद भवन के बेहद करीब तक पहुंच गए। शाम होते-होते दिल्ली के कई इलाकों से हिंसा की तस्वीरें सामने आईं। दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में भीड़ अचानक हिंसक हो गई और उसने जमकर तोड़फोड़ की। इसके अलावा, फिरोज शाह रोड पर भी प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पथराव किया गया, जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की।1
- लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में स्थित ईफिल विवासा अपार्टमेंट के क्लब हाउस में देर रात शराब पार्टी को लेकर भारी बवाल हो गया। रेजिडेंट्स के कड़े विरोध के बाद मौके पर पुलिस बुलाई गई, जो कई लोगों को अपने साथ थाने ले गई। अपार्टमेंट के निवासी यहां नियमों के विरुद्ध चल रही निजी पार्टियों, डीजे और डांस का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। इस घटना ने क्लब हाउस के संचालन को लेकर बिल्डर और निवासियों के बीच चल रहे विवाद को और हवा दे दी है। निवासियों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर क्लब में प्राइवेट पार्टियां चलाई जा रही थीं। क्लब संचालक के पास वन डे लिकर लाइसेंस था या नहीं, इस पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेजिडेंट्स अब क्लब हाउस को एओए (AOA) को हैंडओवर करने और वैधानिक एसोसिएशन को मान्यता देने की मांग तेज कर रहे हैं। उन्होंने बिल्डर पर फर्जी समिति बनाने का गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। इस हंगामे के बीच अपार्टमेंट की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। बिल्डर की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए रेजिडेंट्स आज सुबह 11 बजे क्लब हाउस में धरना देकर प्रदर्शन करेंगे।1
- उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने अंडरपास में भरे गहरे पानी में डूबे एक व्यक्ति की तलाश के दौरान अपनी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया है। जांबाज सब-इंस्पेक्टर ने अपनी वर्दी उतारी और गहरे पानी में उतरकर स्थानीय लोगों की मदद से डूबे व्यक्ति की खोजबीन शुरू कर दी। काफी कठिन प्रयासों के बाद आखिरकार डूबे हुए व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल लिया गया। इस घटना के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के इस संयुक्त प्रयास की हर तरफ सराहना की जा रही है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद सब-इंस्पेक्टर की बहादुरी और कर्तव्य के प्रति समर्पण की जमकर चर्चा हो रही है। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने आपदा की स्थिति में मानवीय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को बखूबी प्रदर्शित किया है।1
- लखनऊ के कैसरबाग में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता हाथों में 'I Support Sonam' लिखे पोस्टर लेकर उतरे और सीजेपी (CJP) के समर्थन में अपना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान आप कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" के नारे लगाए। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मो. ज़ुनैद द्वारा दी गई है।1
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में युवा सड़कों पर उतर आए हैं। परीक्षाओं की तैयारी पूरी होने से पहले ही कई बार पेपर लीक हो जाने के कारण युवाओं के मन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है और उनमें भारी निराशा देखी जा रही है। इस स्थिति से नाराज युवाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने युवाओं पर लाठियां भांजी, जिसमें कई महिलाएं और पुरुष घायल हो गए हैं।1