गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निराकरण की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिकों की शिकायतों का त्वरित एवं संतोषजनक समाधान हो। कलेक्टर ने विशेष रूप से खरीफ फसलों के विविधीकरण, जनशिकायतों के त्वरित निराकरण और एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान पर ध्यान देने को कहा। कलेक्टर ने खरीफ फसलों की बोनी की प्रगति की समीक्षा करते हुए धान के साथ-साथ मूंगफली, उड़द और अरहर जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में, उन्होंने वर्षा ऋतु को देखते हुए मौसमी बीमारियों की रोकथाम, स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता और आमजन को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक रूप से संचालित करने पर बल दिया। उन्होंने सभी विभागों को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों और शासकीय कार्यालय परिसरों में वृहद स्तर पर पौधरोपण कराने के निर्देश दिए। जनशिकायतों की समीक्षा करते हुए, जिसमें कलेक्टर जनदर्शन, मुख्यमंत्री निवास जनदर्शन और सुशासन तिहार से प्राप्त शिकायतें शामिल थीं, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इस बैठक में वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री मुकेश रावटे, अपर कलेक्टर श्री दिलेराम दाहिरे, एसडीएम पेंड्रारोड श्री अमित बेक, एसडीएम मरवाही सुश्री निकिता मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निराकरण की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिकों की शिकायतों का त्वरित एवं संतोषजनक समाधान हो। कलेक्टर ने विशेष रूप से खरीफ फसलों के विविधीकरण, जनशिकायतों के त्वरित निराकरण और एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान पर ध्यान देने को कहा। कलेक्टर ने खरीफ फसलों की बोनी की प्रगति की समीक्षा करते हुए धान के साथ-साथ मूंगफली, उड़द और अरहर जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में, उन्होंने वर्षा ऋतु
को देखते हुए मौसमी बीमारियों की रोकथाम, स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता और आमजन को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक रूप से संचालित करने पर बल दिया। उन्होंने सभी विभागों को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों और शासकीय कार्यालय परिसरों में वृहद स्तर पर पौधरोपण कराने के निर्देश दिए। जनशिकायतों की समीक्षा करते हुए, जिसमें कलेक्टर जनदर्शन, मुख्यमंत्री निवास जनदर्शन और सुशासन तिहार से प्राप्त शिकायतें शामिल थीं, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इस बैठक में वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री मुकेश रावटे, अपर कलेक्टर श्री दिलेराम दाहिरे, एसडीएम पेंड्रारोड श्री अमित बेक, एसडीएम मरवाही सुश्री निकिता मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं के क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निराकरण की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, साथ ही यह भी कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिकों की शिकायतों का त्वरित एवं संतोषजनक समाधान हो। कलेक्टर ने विशेष रूप से खरीफ फसलों के विविधीकरण, जनशिकायतों के त्वरित निराकरण और एक व्यापक वृक्षारोपण अभियान पर ध्यान देने को कहा। कलेक्टर ने खरीफ फसलों की बोनी की प्रगति की समीक्षा करते हुए धान के साथ-साथ मूंगफली, उड़द और अरहर जैसी दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को उद्यानिकी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि में विविधीकरण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में, उन्होंने वर्षा ऋतु को देखते हुए मौसमी बीमारियों की रोकथाम, स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता और आमजन को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर ने वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और वृक्षारोपण अभियान को जनभागीदारी के साथ व्यापक रूप से संचालित करने पर बल दिया। उन्होंने सभी विभागों को स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रम-छात्रावासों और शासकीय कार्यालय परिसरों में वृहद स्तर पर पौधरोपण कराने के निर्देश दिए। जनशिकायतों की समीक्षा करते हुए, जिसमें कलेक्टर जनदर्शन, मुख्यमंत्री निवास जनदर्शन और सुशासन तिहार से प्राप्त शिकायतें शामिल थीं, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण और संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने का आदेश दिया। इस बैठक में वनमंडलाधिकारी श्रीमती ग्रीष्मी चांद, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री मुकेश रावटे, अपर कलेक्टर श्री दिलेराम दाहिरे, एसडीएम पेंड्रारोड श्री अमित बेक, एसडीएम मरवाही सुश्री निकिता मरकाम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।2
- मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक तीर्थ स्थल पवित्र नगरी अमरकंटक में पिछले तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। आषाढ़ माह के आगमन के साथ ही क्षेत्र का मौसम पूरी तरह सुहावना हो गया है और प्रकृति अपने वास्तविक तथा मनोहारी स्वरूप में दिखाई दे रही है। 5 जुलाई 2026, रविवार से शुरू हुई तेज गर्जना, बादलों की गड़गड़ाहट और रुक-रुककर हो रही मूसलाधार वर्षा 7 जुलाई 2026, मंगलवार को भी जारी रही। इस दौरान कभी तेज, कभी मध्यम तो कभी रिमझिम वर्षा होती रही, जबकि आसमान में दिनभर घने काले बादलों का डेरा रहा और बीच-बीच में घना कोहरा छाने से वातावरण और भी मनमोहक हो गया। लगातार बादल छाए रहने के कारण पूरे दिन भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए, वहीं वातावरण में अत्यधिक आर्द्रता बढ़ जाने से लोगों को गीले कपड़े सुखाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही वर्षा के कारण अमरकंटक आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में अन्य दिनों की अपेक्षा कमी देखी गई। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खेती-किसानी के कार्यों, विशेषकर जुताई और बुवाई में व्यस्त हो गए हैं, जिससे बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर सामान्य दिनों की अपेक्षा कम चहल-पहल दिखाई दी। तीन दिनों से जारी इस वर्षा के चलते पवित्र नगरी अमरकंटक का मौसम अत्यंत ठंडा और खुशनुमा हो गया है। अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच मात्र दो डिग्री सेल्सियस का अंतर रहा। वायु गुणवत्ता सूचकांक 16 दर्ज होने से वातावरण पूरी तरह स्वच्छ और शुद्ध बना हुआ है। लगातार हो रही वर्षा, चारों ओर फैली हरियाली, बादलों की आवाजाही, घना कोहरा और रिमझिम फुहारों ने अमरकंटक की प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं, जिससे यह मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है।1
- मध्य प्रदेश के अन्नूपुर जिले की ग्राम पंचायत खाटी के दुवारिहा टोला मोहल्ले में सड़कों की अत्यंत दयनीय स्थिति के कारण एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। एक ग्रामीण ने बताया कि सड़क की बदहाली के चलते कल समय पर गाड़ी नहीं पहुँच पाई, जिससे इंतज़ार करते-करते उनके नाती का निधन हो गया। इस गंभीर समस्या के कारण गाँव के छोटे बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीण के अनुसार, यदि सड़क पर मुरुम बिछा दिया जाता तो यह समस्या काफी हद तक सुलझ जाती। स्थिति तब और बिगड़ जाती है जब नेहरू, जो चमरू के बेटे हैं, मुख्य सड़क पर आवाजाही रोक देते हैं; वे कभी सड़क पर काँटे डाल देते हैं तो कभी गड्ढे खोद देते हैं। इन सब समस्याओं के बावजूद, माननीय भादर सिंह नेटी सरपंच ने इस दिशा में कोई काम नहीं करवाया है, और शिकायत करने पर वे इसे गाँव की ही समस्या बताकर टाल देते हैं। इस विकट स्थिति को देखते हुए, शिकायतकर्ता ने माननीय कलेक्टर महोदय जी से विनम्र निवेदन किया है कि वे किसी भी दिन एक उच्च अधिकारी को भेजकर इस सड़क समस्या का शीघ्र निराकरण करवाएँ, और स्पष्ट रूप से कहा है कि सरपंच या सचिव को न भेजकर ऊपर के अधिकारी को भेजा जाए।1
- पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री विक्रांत मुराब के निर्देश पर जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 'सुरक्षित स्कूल बस अभियान 3.0' के तहत 10 दिवसीय विशेष जांच अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान की थीम 'बच्चों के हंसते हुए चेहरों के लिए सुरक्षित सफर' रखी गई है। अभियान के पहले दिन ही कोतमा के सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल में यातायात पुलिस ने आठ स्कूल बसों का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, पाँच बसों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी पाई गई, जिसके बाद यातायात पुलिस ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत उन पर चालानी कार्यवाही की। जांच में पाया गया कि कई बसों में फायर एक्सटिंग्विशर की वैधता समाप्त हो चुकी थी, फर्स्ट एड बॉक्स मानकों के अनुरूप नहीं थे, और अन्य सुरक्षा उपकरण भी अधूरे थे। यातायात पुलिस ने स्कूल प्रबंधन को तत्काल इन कमियों को दूर करने के सख्त निर्देश दिए। इस दौरान सभी बस चालकों की ब्रीथ एनालाइजर मशीन से भी जांच की गई, जिसमें सभी चालक नशामुक्त पाए गए। चालकों और परिचालकों को विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए समझाइश दी गई। बसों की जांच के साथ-साथ, यातायात पुलिस ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया। इसमें बच्चों को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों, सीट बेल्ट के महत्व और सुरक्षित यात्रा के बारे में जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त, 'Safe Click' साइबर जागरूकता अभियान के तहत विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, फिशिंग लिंक, फर्जी कॉल, ओटीपी धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तार से बताया गया, ताकि वे छात्र जीवन से ही साइबर अपराधों के प्रति जागरूक हो सकें। अनूपपुर यातायात पुलिस ने बताया कि यह 10 दिवसीय अभियान जिले के सभी स्कूलों में चलाया जाएगा, जिसमें स्कूल बसों की नियमित जांच, चालकों की स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण और विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे। यातायात पुलिस ने पूर्व में आयोजित एक बैठक में सभी स्कूल वाहन संचालकों को अपने वाहनों में निर्धारित सभी सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे।4
- अनूपपुर नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है, जहाँ शहर के पुराने नगर पालिका भवन परिसर में स्थापित पेयजल पंप पिछले 19 दिनों से खराब पड़ा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान उसकी मोटर सुधारने या नई मोटर लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इस गंभीर लापरवाही के कारण दीनदयाल रसोई, पुलिस लाइन तथा आसपास के वार्डों के सैकड़ों नागरिक भीषण पेयजल संकट का सामना करने को मजबूर हैं। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए लोग प्रतिदिन इधर-उधर भटक रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन गरीब, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को हो रही है, जो दीनदयाल रसोई में भोजन के लिए आते हैं। वहीं, पुलिस लाइन के कर्मचारी एवं समीप के वार्डों के रहवासी भी पिछले कई दिनों से पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका को कई बार सूचना देने और शिकायतें करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि ऐसी स्थिति किसी वीआईपी क्षेत्र में होती, तो संभवतः कुछ ही घंटों में व्यवस्था बहाल कर दी जाती, लेकिन आम नागरिकों की परेशानी को लेकर नगर पालिका प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। 19 दिनों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य शुरू न होना नगर पालिका की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है, कि आखिर क्यों एक खराब मोटर 19 दिनों तक नहीं बदली जा सकी और क्या आम जनता की समस्याओं का समाधान केवल कागजों तक ही सीमित रह गया है। शहरवासियों का कहना है कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नगर पालिका का पहला दायित्व है, लेकिन दुर्भाग्य से सबसे बुनियादी सुविधा ही लोगों को नहीं मिल पा रही है। बरसात के मौसम में भी पेयजल संकट बना रहना यह दर्शाता है कि नगर पालिका की प्राथमिकताओं में आम जनता की समस्याएं कहीं पीछे छूट गई हैं, और लोग पूछ रहे हैं कि नगर पालिका अध्यक्ष तथा जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब जागेंगे। नागरिकों ने नगर पालिका अध्यक्ष एवं जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल खराब मोटर को बदलकर पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें जनआंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी। नगरवासियों का कहना है कि पेयजल कोई सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, और यदि नगर पालिका समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं करती, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही ही नहीं, बल्कि आम जनता की पीड़ा के प्रति गंभीर संवेदनहीनता का भी उदाहरण माना जाएगा।1
- एमसीबी मनेंद्रगढ़ जिले में एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए अनिल (21 वर्ष) और सुरेश (22 वर्ष) निवासी छिपछिपी की जिंदगी उस समय बच गई, जब उन्हें 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल, मनेंद्रगढ़ में नाजुक हालत में लाया गया। परिजनों ने बताया कि दोनों की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनके बचने की उम्मीद बेहद कम थी। अस्पताल के उपचार अभिलेखों के अनुसार, एक युवक के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं, जबकि दूसरे के चेहरे पर चोट के साथ जांघ (फीमर) की हड्डी में फ्रैक्चर था। अस्पताल पहुंचते ही, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल इलाज शुरू कर दिया। एक गंभीर घायल मरीज की सांसें प्रभावित होने पर, डॉ. राजीव गुप्ता और उनकी टीम ने तुरंत इंट्यूबेशन (श्वास नली डालकर वायुमार्ग सुरक्षित करना) किया, जिससे उसकी सांसें सामान्य करने में सफलता मिली और उसकी जान बचाई जा सकी। प्राथमिक उपचार के तौर पर आवश्यक दवाइयां, आईवी फ्लूइड और दर्द निवारक उपचार सहित अन्य आपातकालीन चिकित्सा भी उपलब्ध कराई गई। मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें उच्च स्तरीय उपचार के लिए लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के माध्यम से चिकित्सकीय निगरानी में मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया गया। यह घटना स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के विधानसभा क्षेत्र में स्थित 220 बिस्तरीय सिविल अस्पताल, मनेंद्रगढ़ में हुई, जहाँ आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की त्वरित कार्यशैली ने गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार प्रदान किया। परिजनों ने अस्पताल की चिकित्सकीय टीम की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय रहते इलाज नहीं मिलता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती थी। अस्पताल प्रशासन ने इस पूरी घटना को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की तत्परता और टीमवर्क का एक अनुकरणीय उदाहरण बताया।1