तहसील दिवस पर पहुंचे कानपुर जिला अधिकारी जीतेंद्र प्रताप सिंह *जहां खेतों में उग रही है तरक्की की नई कहानी, भीटी हवेली के किसान बदल रहे खेती की तस्वीर* *कानपुर नगर* बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती कर रहे हैं और कम जमीन में अधिक आमदनी का नया रास्ता बना रहे हैं। सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा। खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें इस बात का प्रमाण थीं कि यदि सोच बदली जाए तो खेती भी पूरी तरह बदल सकती है। निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक कृषि आर.एस. वर्मा एवं जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीटी हवेली जैसे गांव पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। गांव में कुल 453 कृषक हैं और 225 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है। इनमें से 375 किसान करीब 175 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद मक्का की खेती कर रहे हैं। यहां गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का दायरा सीमित हो गया है और उनकी जगह मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती ने ले ली है, जिससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है। गांव की पहचान बन चुकी मल्टी लेयर फार्मिंग अब किसानों के लिए आय का मजबूत आधार बन रही है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 50 किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर कई फसलें उगाई जाती हैं। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसान सुनील सिंह कटियार के खेत का अवलोकन किया, जहां एक ही संरचना में परवल, कुंदरू, बैंगन और फूलों की खेती एक साथ की जा रही है। यह मॉडल न केवल भूमि का बेहतर उपयोग करता है, बल्कि जोखिम को कम कर आय के कई स्रोत भी सुनिश्चित करता है। सुनील सिंह कटियार मक्का उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी हैं और उन्हें जनपद में सर्वाधिक मक्का उत्पादन के लिए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वे आलू की खेती भी करते हैं और कस्टम हायरिंग सेंटर योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की लागत से कृषि यंत्रों की स्थापना कर चुके हैं, जिसमें 4 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की खेती में प्रति हेक्टेयर वार्षिक लागत लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच आती है, जबकि आय आठ से दस लाख रुपये तक पहुंच रही है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में तीन से चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि खेती में नवाचार ही किसानों की आय वृद्धि का आधार है और ऐसे मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाया जाए और संसाधनों के अभाव में पीछे रह रहे कृषकों को भी योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित किया जाए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अधिक पानी लेने वाली फसलों के स्थान पर मक्का जैसी कम जल वाली फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
तहसील दिवस पर पहुंचे कानपुर जिला अधिकारी जीतेंद्र प्रताप सिंह *जहां खेतों में उग रही है तरक्की की नई कहानी, भीटी हवेली के किसान बदल रहे खेती की तस्वीर* *कानपुर नगर* बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती कर रहे हैं और कम जमीन में अधिक आमदनी का नया रास्ता बना रहे हैं। सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा। खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें इस बात का प्रमाण थीं कि यदि सोच बदली जाए तो खेती भी पूरी तरह बदल सकती है। निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक कृषि आर.एस. वर्मा एवं जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीटी हवेली
जैसे गांव पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। गांव में कुल 453 कृषक हैं और 225 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है। इनमें से 375 किसान करीब 175 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद मक्का की खेती कर रहे हैं। यहां गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का दायरा सीमित हो गया है और उनकी जगह मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती ने ले ली है, जिससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है। गांव की पहचान बन चुकी मल्टी लेयर फार्मिंग अब किसानों के लिए आय का मजबूत आधार बन रही है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 50 किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर कई फसलें उगाई जाती हैं। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसान सुनील सिंह कटियार के खेत का अवलोकन किया, जहां एक ही संरचना में परवल, कुंदरू, बैंगन और फूलों की खेती एक साथ की जा रही है। यह मॉडल न केवल भूमि का बेहतर उपयोग करता है, बल्कि जोखिम को कम कर आय के कई स्रोत भी सुनिश्चित करता है। सुनील सिंह कटियार मक्का उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी हैं और उन्हें जनपद
में सर्वाधिक मक्का उत्पादन के लिए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वे आलू की खेती भी करते हैं और कस्टम हायरिंग सेंटर योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की लागत से कृषि यंत्रों की स्थापना कर चुके हैं, जिसमें 4 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की खेती में प्रति हेक्टेयर वार्षिक लागत लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच आती है, जबकि आय आठ से दस लाख रुपये तक पहुंच रही है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में तीन से चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि खेती में नवाचार ही किसानों की आय वृद्धि का आधार है और ऐसे मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाया जाए और संसाधनों के अभाव में पीछे रह रहे कृषकों को भी योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित किया जाए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अधिक पानी लेने वाली फसलों के स्थान पर मक्का जैसी कम जल वाली फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
- कानपुर ब्रेकिंग एक दर्जन से अधिक मुकदमे में वांछित लुटेरे को पुलिस ने किया गिरफ्तार गांव के पास ही अंडरपास के नीचे से लुटेरे को घेराबंदी कर किया गिरफ्तार मुखबिर की सटीक सूचना पर पहुंची थी पुलिस कानपुर नगर देहात समेत आसपास के जिलों में की थी लूट की कई वारदातें कुछ माह चौबेपुर के बंसठी गांव के पास महिला के साथ की थी लूट चौबेपुर के संडीला गांव निवासी है लूटेरा संजय गौतम चौबेपुर पुलिस को मिली बड़ी सफलता1
- *जहां खेतों में उग रही है तरक्की की नई कहानी, भीटी हवेली के किसान बदल रहे खेती की तस्वीर* *कानपुर नगर* बिल्हौर तहसील का छोटा सा गांव भीटी हवेली अब खेती के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। यहां खेतों में सिर्फ फसल नहीं उगती, बल्कि नई सोच, नई तकनीक और बढ़ती आय की एक सशक्त कहानी आकार ले रही है। परंपरागत खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए यहां के किसान वैज्ञानिक विधियों से मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती कर रहे हैं और कम जमीन में अधिक आमदनी का नया रास्ता बना रहे हैं। सोमवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर यहां की उन्नत खेती पद्धतियों को करीब से देखा। खेतों में विकसित मल्टी लेयर फार्मिंग की संरचनाएं और उनमें एक साथ उगती विविध फसलें इस बात का प्रमाण थीं कि यदि सोच बदली जाए तो खेती भी पूरी तरह बदल सकती है। निरीक्षण के दौरान उपनिदेशक कृषि आर.एस. वर्मा एवं जिला कृषि अधिकारी प्राची पांडेय भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भीटी हवेली जैसे गांव पूरे जनपद के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। गांव में कुल 453 कृषक हैं और 225 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर खेती होती है। इनमें से 375 किसान करीब 175 हेक्टेयर क्षेत्र में जायद मक्का की खेती कर रहे हैं। यहां गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों का दायरा सीमित हो गया है और उनकी जगह मक्का, सब्जियों और फूलों की खेती ने ले ली है, जिससे किसानों की आय में स्पष्ट वृद्धि दर्ज की जा रही है। गांव की पहचान बन चुकी मल्टी लेयर फार्मिंग अब किसानों के लिए आय का मजबूत आधार बन रही है। लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 50 किसान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिसमें एक ही खेत में अलग-अलग स्तरों पर कई फसलें उगाई जाती हैं। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसान सुनील सिंह कटियार के खेत का अवलोकन किया, जहां एक ही संरचना में परवल, कुंदरू, बैंगन और फूलों की खेती एक साथ की जा रही है। यह मॉडल न केवल भूमि का बेहतर उपयोग करता है, बल्कि जोखिम को कम कर आय के कई स्रोत भी सुनिश्चित करता है। सुनील सिंह कटियार मक्का उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी हैं और उन्हें जनपद में सर्वाधिक मक्का उत्पादन के लिए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वे आलू की खेती भी करते हैं और कस्टम हायरिंग सेंटर योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की लागत से कृषि यंत्रों की स्थापना कर चुके हैं, जिसमें 4 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। जिलाधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की खेती में प्रति हेक्टेयर वार्षिक लागत लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये के बीच आती है, जबकि आय आठ से दस लाख रुपये तक पहुंच रही है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में तीन से चार गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि खेती में नवाचार ही किसानों की आय वृद्धि का आधार है और ऐसे मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाया जाए और संसाधनों के अभाव में पीछे रह रहे कृषकों को भी योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित किया जाए। साथ ही उन्होंने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अधिक पानी लेने वाली फसलों के स्थान पर मक्का जैसी कम जल वाली फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है।3
- आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसा । डिवाइडर से टकराई स्लीपर बस एक की मौत 40 घायल। इस जांच पड़ताल में जुटी1
- मार्च-अप्रैल आते ही प्राइवेट स्कूलों की 'दुकानें' सज जाती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे के बेहतर भविष्य के नाम पर आपकी जेब कैसे काटी जा रही है? इस विशेष रिपोर्ट में #DDTodayNews ने प्राइवेट स्कूलों के उस काले सच का पर्दाफाश किया है, जिसका शिकार आज हर आम और मिडिल क्लास इंसान हो रहा है। एक पत्रकार और वकील होने के नाते, मेरा मकसद आपको जागरूक करना है। अगर आपके बच्चों के स्कूल में भी यही खेल चल रहा है, तो कमेंट बॉक्स में उस स्कूल का नाम और अपना अनुभव बेखौफ होकर लिखें। DD Today News आपकी आवाज़ बनेगा! 📢 वीडियो को हर उस माता-पिता तक शेयर करें जो अपने बच्चों की फीस भरते-भरते थक चुका है! 🔔 सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करने के लिए DD Today News को Subscribe/Follow ज़रूर करें। #PrivateSchools #EducationScam #SchoolFees1
- jila kannoj gram paraspur ke driver1
- प्रशासन बेखबर, बस्ता गांव में गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी का वीडियो वायरल राजेंद्र सिंह धुऑंधार कन्नौज। जनपद में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक के दावों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ठठिया थाना क्षेत्र के बस्ता गांव में एक दुकान पर दर्जनों गैस सिलेंडर खुलेआम रखे होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि इस वायरल वीडियो की पुष्टि हमारा अखबार नहीं करता है, लेकिन इसके सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वीडियो में एक दुकान पर बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर रखे दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें कथित तौर पर सरकारी दर से अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है। जबकि जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि गैस सिलेंडर केवल उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी के माध्यम से ही उपलब्ध कराए जाएं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कोई एक दिन का मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से प्राइवेट वाहनों के जरिए गोदाम से सिलेंडर लाकर खुलेआम बिक्री की जा रही है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस पूरे प्रकरण पर उपजिलाधिकारी तिर्वा राकेश सिंह ने कहा कि उन्हें फिलहाल वायरल वीडियो की जानकारी नहीं है, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए क्या कदम उठाता है।1
- Post by मोनू शुक्ला1
- मार्च-अप्रैल आते ही प्राइवेट स्कूलों की 'दुकानें' सज जाती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे के बेहतर भविष्य के नाम पर आपकी जेब कैसे काटी जा रही है? इस विशेष रिपोर्ट में #DDTodayNews ने प्राइवेट स्कूलों के उस काले सच का पर्दाफाश किया है, जिसका शिकार आज हर आम और मिडिल क्लास इंसान हो रहा है। एक पत्रकार और वकील होने के नाते, मेरा मकसद आपको जागरूक करना है। अगर आपके बच्चों के स्कूल में भी यही खेल चल रहा है, तो कमेंट बॉक्स में उस स्कूल का नाम और अपना अनुभव बेखौफ होकर लिखें। DD Today News आपकी आवाज़ बनेगा! 📢 वीडियो को हर उस माता-पिता तक शेयर करें जो अपने बच्चों की फीस भरते-भरते थक चुका है! 🔔 सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता का समर्थन करने के लिए DD Today News को Subscribe/Follow ज़रूर करें। #PrivateSchools #EducationScam #SchoolFees1