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नमामि गंगे योजना में हर घर जल योजना में डाली जा रही पाईप लाइन से उखड़ी सड़कों ने किया शहरबासियों का निकलना मुश्किल
मुजीब आलम पत्रकार
नमामि गंगे योजना में हर घर जल योजना में डाली जा रही पाईप लाइन से उखड़ी सड़कों ने किया शहरबासियों का निकलना मुश्किल
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- उरई, जालौन। अखिल भारतीय बसोर समाज विकास समिति की ओर से रविवार को शहर के एक रेस्टोरेंट में गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें समाज से जुड़े लोगों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई। करन बरार व रामबाबू बरार ने बताया कि ग्राम्य विकास विभाग को भेजे गए पत्र में बसोंड, वंशफार व धरकार जातियों को मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) में प्राथमिकता दिए जाने की मांग की गई थी। आरोप है कि जनपद जालौन में विकास खंड अधिकारियों व परियोजना निदेशक द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट (पत्र संख्या 645) में इन समाजों की संख्या शून्य दर्शा दी गई, जिससे ये वर्ग योजनाओं के लाभ से वंचित हो गए, जबकि जिले में इनकी संख्या लगभग एक लाख बताई जा रही है। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि 28 मार्च 2026 को सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे समाज में रोष व्याप्त है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति सूची में बसोंड, धरकार व वंशफ़ौर जातियां दर्ज हैं और इन्हें वंचित श्रेणी में रखा गया है, बावजूद इसके योजनाओं का लाभ संख्या के अनुपात में नहीं मिल पा रहा है। गोष्ठी में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ क्षेत्रों में बसोंड समाज के लोगों का जबरन जाति परिवर्तन कर धानुक के रूप में दर्ज कराया जा रहा है, जिससे समाज की वास्तविक संख्या प्रभावित हो रही है और लाभ लेने में बाधा उत्पन्न हो रही है। इस पर रोक लगाने व जांच कराने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश स्तर पर भी समाज के उत्थान के लिए प्रस्ताव रखे गए हैं और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को सदन में उठाया गया है, लेकिन जालौन में स्थिति जस की तस बनी हुई है। समिति ने सरकार व जनप्रतिनिधियों से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा वंचित समाज को योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। साथ ही समाज को उसकी आबादी के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी दिए जाने की भी मांग उठाई गई।इस मौके पर अरविंद, रविंद्र, हल्के, जितेंद्र, पवन कुमार मनोज कुमार, जतन सिंह, तेजराम अवनीश, मान कुंवर,अशोक, मुन्ना लाल, रामसखी,पूजा कुमारी,रिंकी, किशना देवी,गंगा देवी,मौजूद रही।1
- थाना कालपी क्षेत्रांतर्गत ग्राम लोहार में दो अज्ञात शव मिलने की सूचना पर पुलिस अधीक्षक जालौन व थाना कालपी पुलिस द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया । फील्ड यूनिट टीम द्वारा साक्ष्य संकलन की कार्यवाही की गयी है । दोनों शवों के पंचायतनामा की कार्यवाही पूर्ण कर पोस्टमार्टम हेतु भिजवाया गया है । अग्रिम वैधानिक कार्यवाही प्रचलित है । इस सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक जालौन द्वारा दी गयी बाइट ।1
- Post by मुजीब आलम पत्रकार1
- Post by Bheem rajawat 96288004581
- थाना सिरसा कलार क्षेत्र के ग्राम हथना बुजुर्ग में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अचानक खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली की तार से चिंगारी गिरने के कारण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 10 बीघा खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। बताया जा रहा है कि रविवार दोपहर खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन में अचानक स्पार्किंग हुई, जिसके बाद सूखी खड़ी गेहूं की फसल ने तुरंत आग पकड़ ली। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। आग की लपटें उठती देख आसपास के किसानों में हड़कंप मच गया और ग्रामीण बाल्टी, पाइप व ट्रैक्टर की मदद से आग बुझाने में जुट गए। ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक करीब 10 बीघा गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह खाक हो चुकी थी। किसानों को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बिजली के तार काफी जर्जर हैं और कई बार शिकायत के बावजूद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते यह घटना हुई। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित किसानों मनोज पाठक पुत्र बृजनंदन राजू पाठक पुत्र बृजनंदन दीपक पाठक पुत्र रामसेवक को मुआवजा देने और जर्जर बिजली तारों को जल्द बदलने की मांग की है। घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन को भी अवगत कराया गया है। राजस्व विभाग की टीम द्वारा नुकसान का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है2
- गजनेर थाना क्षेत्र में अलग अलग जगहों पर लड़ाई झगड़ा हो गया था। वहीं दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर आरोप लगाकर शिकायती पत्र दिया गया।वहीं पुलिस ने जांच पड़ताल कर माहौल बिगाड़ने के आरोप में दो लोगों पर शांतिभंग की कार्यवाही की।थाना प्रभारी सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि दो लोगों पर शांतिभंग की कार्यवाही की गई ।1
- Post by KD पत्रकारMEDIA1
- ओलावृष्टि पर प्रशासन की त्वरित कार्रवाई, खेतों तक पहुंचा तंत्र—किसानों को राहत का भरोसा डीएम ने खुद संभाली कमान, शाम से ही शुरू हुआ सर्वे—हर नुकसान का हो रहा पारदर्शी आकलन शनिवार शाम अचानक बदले मौसम ने जनपद में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के साथ कहर बरपाया, जिससे जालौन, माधौगढ़, कुठौंद, कोंच और नदीगांव क्षेत्र के करीब 30 गांवों में खड़ी एवं कटी फसलें प्रभावित हो गईं। गेहूं और चना की तैयार फसलें सबसे अधिक नुकसान की चपेट में आईं, जहां कई खेतों में फसलें जमीन पर बिछ गईं तो कहीं कटी फसल भीगकर खराब हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मा0 मुख्यमंत्री जी के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने तत्काल प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय कर दिया। अपर जिलाधिकारी संजय कुमार, एसडीएम हेमंत पटेल और एसडीएम वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता के साथ स्वयं प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके पर ही समाधानात्मक निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने मौके पर ही राजस्व निरीक्षक, लेखपालों और कृषि विभाग की टीमों को निर्देशित करते हुए कहा कि फसल क्षति का सर्वे शनिवार शाम 6 बजे से ही प्रारंभ कर दिया गया है और इसे पूर्ण पारदर्शिता के साथ समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने फसल बीमा कंपनियों को भी निर्देशित किया कि वे त्वरित रूप से नुकसान का आकलन कर किसानों को लाभ दिलाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।कुठौंद और माधौगढ़ क्षेत्र में सबसे अधिक नुकसान सामने आया है, जबकि जालौन और कोंच तहसीलों में आंशिक क्षति दर्ज की गई है। मदनेपुर, गोरा राठौर, सलैया, चटसारी, दावर और ऊंचा गांव सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी किसान को नुकसान के आकलन में उपेक्षित नहीं किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से बटाई व बलकट पर खेती करने वाले किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए कि लेखपाल खेत मालिकों से सहमति पत्र प्राप्त कर ऐसे किसानों को भी मुआवजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रत्येक प्रभावित किसान की फसल का शत-प्रतिशत आकलन कर शासन स्तर से शीघ्र राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि यदि किसी भी प्रकार की जनहानि या पशु हानि की सूचना मिलती है तो 24 घंटे के भीतर सहायता राशि प्रदान की जाए। जिला प्रशासन की त्वरित सक्रियता और मौके पर पहुंचकर किए जा रहे सर्वे कार्य से किसानों में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि इस आपदा में किसी भी प्रभावित किसान को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।1