Shuru
Apke Nagar Ki App…
मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा जनसैलाब श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के अवसर पर अजमेर के मांगलियावास स्थित प्राचीन कल्पवृक्ष मेले में शुक्रवार को श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा। मान्यता है कि 800-1000 साल पुराना यह कल्पवृक्ष मनोकामना पूरी करता है। सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पेड़ की परिक्रमा कर नारियल, चुनरी और मन्नत का धागा बांधा। कई दंपतियों ने संतान प्राप्ति की कामना की। मेला प्रशासन ने सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। मेले में झूले, खिलौने, घरेलू सामान और कृषि उपकरणों की दुकानें आकर्षण का केंद्र रही।
PRADEEP CHOUDHARY
मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा जनसैलाब श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के अवसर पर अजमेर के मांगलियावास स्थित प्राचीन कल्पवृक्ष मेले में शुक्रवार को श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा। मान्यता है कि 800-1000 साल पुराना यह कल्पवृक्ष मनोकामना पूरी करता है। सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पेड़ की परिक्रमा कर नारियल, चुनरी और मन्नत का धागा बांधा। कई दंपतियों ने संतान प्राप्ति की कामना की। मेला प्रशासन ने सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। मेले में झूले, खिलौने, घरेलू सामान और कृषि उपकरणों की दुकानें आकर्षण का केंद्र रही।
More news from राजस्थान and nearby areas
- मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा जनसैलाब श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के अवसर पर अजमेर के मांगलियावास स्थित प्राचीन कल्पवृक्ष मेले में शुक्रवार को श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ा। मान्यता है कि 800-1000 साल पुराना यह कल्पवृक्ष मनोकामना पूरी करता है। सुबह से ही महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने पेड़ की परिक्रमा कर नारियल, चुनरी और मन्नत का धागा बांधा। कई दंपतियों ने संतान प्राप्ति की कामना की। मेला प्रशासन ने सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे। मेले में झूले, खिलौने, घरेलू सामान और कृषि उपकरणों की दुकानें आकर्षण का केंद्र रही।4
- मांगलियावास कल्पवृक्ष मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने करी पूजा अर्चना, मांगलियावास पुलिस सहित पीसांगन पुलिस और जाप्ते से आई पुलिस ने संभाला मोर्चा, ग्राम पंचायत प्रशासक सहित कार्यकर्ताओं की रहा सराहनीय सहयोग मांगलियावास कल्पवृक्ष मेले में लाखों श्रद्धालुओं ने करी पूजा अर्चना, मांगलियावास पुलिस सहित पीसांगन पुलिस और जाप्ते से आई पुलिस ने संभाला मोर्चा, ग्राम पंचायत प्रशासक सहित कार्यकर्ताओं की रहा सराहनीय सहयोग4
- मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा आस्था का महासागर; लाखों श्रद्धालुओं ने टेका माथा मांगलियावास (अजमेर), 12 अगस्त 2026: श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर आज अजमेर जिले के मांगलियावास में प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला पूरी भव्यता और धार्मिक उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। विश्वविख्यात 'राजा-रानी' कल्पवृक्ष के जोड़े के दर्शन और पूजन के लिए अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। अमावस्या की पूर्व रात्रि से शुरू हुआ भक्तों का आगमन मेले को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। हरियाली अमावस्या की पूर्व रात्रि से ही मांगलियावास में भक्तों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसमें दूर-दराज से आए लाखों लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मेले में चारों तरफ हर-हर महादेव और लोकगीतों की गूंज सुनाई दे रही है। मनोकामना पूर्ति का केंद्र है कल्पवृक्ष धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांगलियावास के ये प्राचीन कल्पवृक्ष जोड़े के रूप में स्थित हैं, जिन्हें इच्छापूर्ति का वरदान प्राप्त है। हरियाली अमावस्या के इस विशेष अवसर पर मन्नत मांगने और कल्पवृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। आज दिनभर यहाँ कुंवारी कन्याओं और महिलाओं द्वारा वृक्षों की परिक्रमा करने, मौली बांधने और रक्षा सूत्र अर्पित करने का क्रम जारी है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। मेला परिसर में रौनक और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मेला ग्राउंड पर सजी खिलौनों, चाट-पकौड़ों, श्रृंगार सामग्री और झूला-चकरी की दुकानों पर बच्चों व युवाओं की खासी भीड़ नजर आ रही है। प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित मेला संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, यातायात और पेयजल के कड़े प्रबंध किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।2
- मांगलियावास में आस्था का सैलाब, हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्ष मेले में आज लाखों श्रद्धालु बांधेगे मन्नते की मौली, मांगलियावास में आस्था का सैलाब, हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्ष मेले में आज लाखों श्रद्धालु बांधेगे मन्नते की मौली, मांगलियावास कल्पवृक्ष मंदिर को पर्यटक स्थल बनाने की मांग योगेश आचार्य मांगलियावास...राजस्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक परिदृश्य में आज आस्था का एक अनूठा संगम देखने को मिलेगा। अजमेर-ब्यावर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पौराणिक मांगलियावास गांव में हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर वार्षिक कल्पवृक्ष मेले का आयोजन होगा। पुष्कर मेले के बाद जिले के इस दूसरे सबसे बड़े मेले में करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कल्पवृक्ष के दर्शन कर देश में खुशहाली और अमन-चैन की कामना करते है। इस बार मेले से पूर्व ग्रामीणों द्वारा मांगलियावास कल्पवृक्ष मंदिर को पर्यटक स्थल बनाने की मांग जोर पकड़ ली। ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर मांगलियावास कल्पवृक्ष मंदिर को पर्यटक स्थल बनाने की मांग की है। 5 हजार वर्ष पुराने कल्पवृक्ष की महिमा मंदिर प्रशासन और स्थानीय जानकारों के अनुसार, यहाँ स्थित 'राजा-रानी' नाम के दो कल्पवृक्ष करीब 800 से 5,000 वर्ष पुराने हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, समुद्र मंथन से निकले इन दिव्य वृक्षों को द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण स्वर्ग से द्वारका लाए थे। बाद में द्वारका के जलमग्न होने पर ये वृक्ष दिव्य रूप में यहाँ तपस्या कर रहे महात्मा मंगल सिंह वह फतेह सिंह के प्रभाव से यहीं स्थापित हो गए। भाग्यशालियों को ही मिलता है यह फल कल्पवृक्ष पर 12 वर्ष में केवल एक ही बार विशेष फल आता है। ऐसा माना जाता है कि यह फल हर किसी को दिखाई नहीं देता और यह केवल किसी परम भाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होता है।12 वर्षों में एक बार आने वाले कल्पवृक्ष के फल को देखने के लिए भी लोग खासे उत्साहित दिखे। उपेक्षा का शिकार ऐतिहासिक कल्पवृक्ष, ग्रामीणों ने की पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग मांगलियावास के ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान रखने वाले मांगलियावास गांव के कल्पवृक्ष क्षेत्र को आधिकारिक पर्यटक स्थल (टूरिस्ट स्पॉट) घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होने के बावजूद, बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में गहरा रोष है। ग्रामीणों ने इस संबंध में राज्य सरकार और पर्यटन विभाग को पत्र भेजकर कल्पवृक्ष धरा को पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान दिलाने की पुरजोर मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों ने मांगलियावास मेल सहित कल वृक्ष मंदिर में की शिरकत मांगलियावास में आयोजित होने वाले कल्पवृक्ष मेले में गत वर्ष कैबिनेट मंत्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव नानी, नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लांबा शाहिद के बड़े नेताओं में प्रशासनिक अधिकारियों ने मेले में शिरकत की। इसके बावजूद मांगलियावास कल्पवृक्ष के विकास व पर्यटक स्थल की मांग को लेकर कोई कठोर कदम नहीं उठाए गए। इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राज्य सिंधिया ने भी मांगलियावास कल्पवृक्ष मंदिर में पहुंचकर पूजा कर भाजपा कार्यकर्ता के साथ बैठक आयोजित की थी। लाखों की आस्था, फिर भी विकास से दूर हर साल श्रावण मास की हरियाली अमावस्या पर यहाँ भरने वाले कल्पवृक्ष मेले में दो लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा, सालभर यहाँ मन्नतें मांगने वाले पर्यटकों का तांता लगा रहता है। इसके बावजूद यहाँ एक अच्छे पर्यटन स्थल के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि सरकार इसे आधिकारिक तौर पर पर्यटन स्थल का दर्जा देती है, तो यहाँ नियमित विकास कार्य हो सकेंगे। दुर्लभ वृक्षों के संरक्षण पर भी उठे सवाल ग्रामीणों ने कल्पवृक्ष की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर भी गहरी चिंता जताई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार करीब 800 वर्ष पुराने इस दुर्लभ जोड़े में से 'नर कल्पवृक्ष' कुछ वर्ष पहले समय पर उचित देखरेख न मिलने के कारण सूखकर गिर गया था। वर्तमान में यहाँ 'मादा कल्पवृक्ष' (रानी वृक्ष) और वृक्ष ही सुरक्षित बचे हैं। ग्रामीणों का तर्क है कि इसे पर्यटन स्थल घोषित करने से न केवल इस दुर्लभ वानस्पतिक धरोहर का वैज्ञानिक संरक्षण हो सकेगा, बल्कि देश-विदेश के शोधकर्ता भी यहाँ रिसर्च के लिए आकर्षित होंगे। प्रमुख मांग: कल्पवृक्ष परिसर के चारों ओर एक सर्वसुविधायुक्त सुंदर गार्डन और वॉकिंग ट्रैक का निर्माण हो। यात्री निवास और सुलभ शौचालय: दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के ठहरने के लिए आधुनिक विश्राम गृह बनाए जाएं। सरोवर का जीर्णोद्धार: कल्पवृक्ष के पास स्थित प्राचीन पवित्र सरोवर और कुंड का सुंदरीकरण और सफाई की जाए। रोजगार के अवसर: पर्यटन स्थल बनने से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, हस्तशिल्प और होटल व्यवसाय के नए रास्ते खुलेंगे। ग्रामीणों का कहना है: "पुष्कर के बाद यह अजमेर का सबसे बड़ा धार्मिक केंद्र है। यदि सरकार इसे पर्यटन हब के रूप में विकसित करती है, तो यह राजस्थान के राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ हमारी प्राचीन संस्कृति को भी बचाए रखने में मददगार साबित होगा।" मांगलियावास... कल्पवृक्ष की देखरेख के अभाव में सूखा हुआ कल्पवृक्ष व मंदिर परिसर में रानी का वृक्ष1
- राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जसनगर में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत एक तिरंगा प्रदर्शनी और मेले का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रदर्शनी का उद्देश्य उन्हें देश के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय ध्वज के महत्व से अवगत कराना था। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद सैनी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला। सैनी ने बंग-भंग, मार्ले-मिंटो सुधार, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, क्रिप्स मिशन, 9 अगस्त 1925 के काकोरी कांड और 9 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक महत्ता का विस्तार से वर्णन किया। सैनी ने बताया कि 'हर घर तिरंगा' कार्यक्रम के तहत 9 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ और आमजन से अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन की भी जानकारी दी। सैनी ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा जाएगा। विद्यालय के प्राचार्य शहाबुद्दीन मंसूरी ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए और उन्हें अपने-अपने घरों पर तिरंगा ससम्मान फहराने के लिए प्रेरित किया। इतिहास के व्याख्याता ने भी 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और राष्ट्रीय कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ, विद्यार्थी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जसनगर में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत एक तिरंगा प्रदर्शनी और मेले का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रदर्शनी का उद्देश्य उन्हें देश के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय ध्वज के महत्व से अवगत कराना था। इस अवसर पर सहायक विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद सैनी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला। सैनी ने बंग-भंग, मार्ले-मिंटो सुधार, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, क्रिप्स मिशन, 9 अगस्त 1925 के काकोरी कांड और 9 अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक महत्ता का विस्तार से वर्णन किया। सैनी ने बताया कि 'हर घर तिरंगा' कार्यक्रम के तहत 9 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों, विद्यालय स्टाफ और आमजन से अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजन की भी जानकारी दी। सैनी ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा जाएगा। विद्यालय के प्राचार्य शहाबुद्दीन मंसूरी ने विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए और उन्हें अपने-अपने घरों पर तिरंगा ससम्मान फहराने के लिए प्रेरित किया। इतिहास के व्याख्याता ने भी 'हर घर तिरंगा अभियान' के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और राष्ट्रीय कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ, विद्यार्थी और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।1
- भारत का युवा आज दुनिया में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहा है। शिक्षा, विज्ञान, खेल, अंतरिक्ष, टेक्नोलॉजी और उद्यमिता सहित कई क्षेत्रों में भारतीय युवाओं की उपलब्धियाँ देश का गौरव बढ़ा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएँ। #InternationalYouthDay1
- मांगलियावास का ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला आस्था और उल्लास का केंद्र बना रहा। मेले में 2 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। पीसांगन के मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर कल्पवृक्ष मेले में उमड़ा जनसैलाब, 2 लाख श्रद्धालुओं ने की पूजा अर्चना हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर पीसांगन उपखंड क्षेत्र के मांगलियावास का ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला आस्था और उल्लास का केंद्र बना रहा। मेले में 2 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। तड़के से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। कल्पवृक्ष की पूजा कर मांगी सुख-समृद्धि मान्यता है कि हरियाली अमावस्या के दिन कल्पवृक्ष के पवित्र जोड़े के नीचे सच्चे मन से की गई कामना पूर्ण होती है। श्रद्धालुओं ने राजा, रानी और राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध पवित्र वृक्षों को शुद्ध जल से सींचा। इसके बाद कुमकुम, रोली,मोली,अक्षत,मिष्ठान,नारियल और वस्त्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की। कुंवारी कन्याओं ने अच्छे वर की कामना की, जबकि सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की मनोकामना मांगी। श्रद्धालुओं द्वारा बांधी गई मौलियों से वृक्षों के तने ढक गए और पूजा सामग्री का ढेर लग गया। मेले में झूलों और दुकानों पर रही भीड़ पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में लगे गगनचुंबी झूलों और चकरी का जमकर आनंद लिया। मिठाई, चाट, पकौड़ी और आइसक्रीम की दुकानों पर दिनभर भीड़ रही। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ब्यावर-अजमेर डिपो की ओर से मेला स्पेशल बसें चलाई गईं। आयुर्वेद विभाग के उप स्वास्थ्य केंद्र पर अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। जनप्रतिनिधि और प्रशासन रहा मौजूद मेले में नसीराबाद विधायक रामस्वरूप लांबा, नसीराबाद विधानसभा प्रत्याशी शिवप्रकाश गुर्जर पीसांगन प्रधान दिनेश नायक, सीआर प्रदीप वाल्मीकि,ब्रिकचियावास सरपंच भैरूलाल धांधड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे। कानून व्यवस्था के लिए पीसांगन बीडीओ साजिया तबस्सुम, ग्राम विकास अधिकारी रमेश चौधरी, मांगलियावास थानाधिकारी हरीश चौधरी सहित पीसांगन, नसीराबाद, गेगल और पुलिस लाइन का अतिरिक्त जाब्ता तैनात रहा।2
- मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा आस्था का महासागर; लाखों श्रद्धालुओं ने टेका माथा मांगलियावास में हरियाली अमावस्या पर सजा ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला, उमड़ा आस्था का महासागर; लाखों श्रद्धालुओं ने टेका माथा मांगलियावास (अजमेर), 12 अगस्त 2026: श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के पावन पर्व पर आज अजमेर जिले के मांगलियावास में प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कल्पवृक्ष मेला पूरी भव्यता और धार्मिक उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। विश्वविख्यात 'राजा-रानी' कल्पवृक्ष के जोड़े के दर्शन और पूजन के लिए अलसुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। अमावस्या की पूर्व रात्रि से शुरू हुआ भक्तों का आगमन मेले को लेकर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। हरियाली अमावस्या की पूर्व रात्रि से ही मांगलियावास में भक्तों के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसमें दूर-दराज से आए लाखों लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। मेले में चारों तरफ हर-हर महादेव और लोकगीतों की गूंज सुनाई दे रही है। मनोकामना पूर्ति का केंद्र है कल्पवृक्ष धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांगलियावास के ये प्राचीन कल्पवृक्ष जोड़े के रूप में स्थित हैं, जिन्हें इच्छापूर्ति का वरदान प्राप्त है। हरियाली अमावस्या के इस विशेष अवसर पर मन्नत मांगने और कल्पवृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। आज दिनभर यहाँ कुंवारी कन्याओं और महिलाओं द्वारा वृक्षों की परिक्रमा करने, मौली बांधने और रक्षा सूत्र अर्पित करने का क्रम जारी है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। मेला परिसर में रौनक और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम मेला ग्राउंड पर सजी खिलौनों, चाट-पकौड़ों, श्रृंगार सामग्री और झूला-चकरी की दुकानों पर बच्चों व युवाओं की खासी भीड़ नजर आ रही है। प्रशासन और स्थानीय समितियों द्वारा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित मेला संपन्न कराने के लिए सुरक्षा, यातायात और पेयजल के कड़े प्रबंध किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े4