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तरुण हत्याकांड के विरोध में नवलगढ़ में आक्रोश रैली, आरोपियों को फांसी देने की उठी मांग
Amit Sharma
तरुण हत्याकांड के विरोध में नवलगढ़ में आक्रोश रैली, आरोपियों को फांसी देने की उठी मांग
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- Post by Krishan Singh Rathore1
- चूरू में विप्र महिला मंडल का महिला दिवस समारोह | प्रेरणादायक महिलाओं का सम्मान Churu में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर Vipra Mahila Mandal की ओर से नगरश्री परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पार्षद Mamta Joshi ने की। इस अवसर पर समाज में प्रेरणादायक कार्य करने वाली महिलाओं भगवती शर्मा, सूर्यकांता, संगीता, उमा शर्मा और प्रियंका शर्मा का सम्मान किया गया। सम्मान स्वरूप प्रत्येक महिला को शॉल, श्रीफल और माल्यार्पण के साथ Dr OP Sharma Charitable Trust की ओर से 11 हजार रुपये का चेक भेंट किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सरोज हरित और विशिष्ट अतिथि सरिता शर्मा ने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और परिवार में महिलाओं की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विजयलक्ष्मी पारीक ने मंडल की गतिविधियों की जानकारी दी और विजयलक्ष्मी शर्मा ने राजस्थानी लोकगीत प्रस्तुत कर माहौल को आनंदमय बना दिया। इस अवसर पर आशीष गौत्तम, राजेन्द्र मुसाफिर, प्रोफेसर कमल सिंह कोठारी, जगदीश चोटिया, रमेश सोनी, डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, चंदा बंसिया, डॉ. आशा कोठारी, सरला इंदोरिया और लाजवंती मुद्गल सहित मंडल की कई सदस्य उपस्थित रहीं। #InternationalWomensDay, #ChuruNews, #RajasthanNews, #VipraMahilaMandal, #WomenEmpowerment, #WomensDay, #Churu, #Shekhawati, #WomenInspiration, #LocalNews, #Rajasthan, #CommunityEvent, #WomenPower, #LatestNews, #NewsUpdate1
- नारनौल में तीन बहनों का एक साथ निकाला बनवारा:11 मार्च को होगी शादी गांव वालों ने दिया आशीर्वाद1
- दुबई में फंसे 200 भारतीयों के लिए 'मसीहा' बना राजस्थान का लाल 11 गाड़ियां भेजकर अपने फार्महाउस में दी पनाह नागौर जिले के मेड़ता सिटी के रहने वाले धीरज जैन, जो पिछले 11 वर्षों से यूएई में एक सफल रियल एस्टेट डेवलपर हैं, उन्होंने संकट में फंसे अपने देशवासियों के लिए अपने घर के दरवाजे खोल दिए हैं। धीरज ने बताया कि युद्ध की स्थिति के कारण अचानक फ्लाइट्स और होटल बुकिंग्स कैंसल होने लगीं। कई भारतीय पर्यटक सीमित बजट के साथ वहां गए थे, और अचानक आए इस संकट ने उनके सामने रहने और खाने-पीने की गंभीर समस्या खड़ी कर दी थी। सोशल मीडिया पर नंबर जारी कर कहा- 'घबराएं नहीं, मैं हूँ न' जैसे ही धीरज को पता चला कि भारतीय लोग सड़कों और एयरपोर्ट्स पर परेशान हो रहे हैं, उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया पर अपना मोबाइल नंबर जारी कर दिया। उन्होंने मैसेज दिया कि जिस भी भारतीय के पास रुकने का ठिकाना नहीं है, वह बेझिझक उनके अजमान स्थित फार्महाउस पर आ सकता है। मैसेज वायरल होते ही उनके पास फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई। खुद भेजी 11 गाड़ियां, 200 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया धीरज जैन केवल रहने की जगह देकर ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने देखा कि कई लोगों के पास फार्महाउस तक पहुँचने के लिए साधन भी नहीं हैं। उन्होंने तुरंत अपनी 11 गाड़ियां दुबई और आसपास के शहरों में भेजीं और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित अपने ठिकाने पर बुलवाया। फिलहाल उनके फार्महाउस पर करीब 200 भारतीय ठहरे हुए हैं, जिनके खाने-पीने और रहने का पूरा खर्च धीरज खुद उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो वे 300 लोगों तक के रहने का इंतजाम कर सकते हैं। 'देश लौट सकता था, पर अपनों को अकेला नहीं छोड़ सका' धीरज जैन का कहना है कि उनके परिवार वाले भारत में उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित थे। वे चाहते तो खुद के लिए निजी व्यवस्था कर भारत लौट सकते थे, लेकिन उन्होंने सेवा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा, "इस संकट की घड़ी में अपने देशवासियों की मदद करना मेरा पहला कर्तव्य है।" दिलचस्प बात यह है कि भारतीयों के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिक भी उनसे मदद मांग रहे हैं और धीरज यथासंभव उनकी सहायता कर रहे हैं।1
- Post by Amit Sharma1
- *मासूम के शरीर पर पड़े जख्म ‘केवल’ उस बच्चे के नहीं, ये पूरी शिक्षा व्यवस्था पर लगे दाग हैं!* ,अगर सवाल पूछना गुनाह है तो स्कूल नहीं, यह डर का अड्डा है..! नांगल चौधरी की सरस्वती स्कूल में पहली कक्षा के एक मासूम बच्चे के साथ हुई कथित क्रूरता की घटना केवल एक खबर नहीं है, बल्कि समाज और व्यवस्था के सामने खड़ा एक कठोर सवाल है। जिस जगह को हम “शिक्षा का मंदिर” कहते हैं, अगर वहीं एक नन्हा बच्चा सवाल पूछने की सज़ा में डंडों से पीटा जाए और उसके शरीर पर जख्मों के निशान पड़ जाएं, तो यह केवल एक अध्यापिका की गलती नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का आईना है। 📍बच्चे सवाल पूछते हैं, क्योंकि वही उनकी सीखने की पहली सीढ़ी होती है। लेकिन यदि किसी शिक्षक को एक मासूम का प्रश्न इतना नागवार गुजर जाए कि वह डंडे उठा ले, तो यह केवल अनुशासन नहीं बल्कि क्रूरता की श्रेणी में आता है। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा जगाना होता है, डर पैदा करना नहीं। ❗️सबसे दुखद पहलू यह है कि घटना के बाद बच्चे को अस्पताल ले जाना पड़ा और उसे हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। इसका अर्थ साफ है कि मामला केवल “हल्की डांट” या “अनुशासन” का नहीं बल्कि गंभीर हिंसा का हो सकता है। एक मासूम के शरीर पर पड़े जख्म केवल उस बच्चे के नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था पर लगे दाग हैं। 💥 इस घटना के बाद क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि सरस्वती स्कूल किसी प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति से जुड़ा बताया जा रहा है और इसी कारण मामले को दबाने की कोशिशें हो सकती हैं। यदि ऐसा है तो यह और भी चिंताजनक है। क्योंकि जब सत्ता और प्रभाव बच्चों की पीड़ा से बड़ा हो जाए, तो न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ने लगती है। 💥 यह सवाल भी उतना ही जरूरी है कि आखिर स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी क्या है? क्या शिक्षकों को बच्चों के साथ व्यवहार और संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी जाती है? और यदि नहीं, तो फिर बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा किसके पास है? 💥 कानून इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है। Right to Education Act 2009 के तहत स्कूलों में शारीरिक दंड पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा Juvenile Justice Act बच्चों के साथ क्रूरता को गंभीर अपराध मानता है। ऐसे मामलों में पुलिस आपराधिक मुकदमा दर्ज कर सकती है, शिक्षा विभाग स्कूल और शिक्षक पर कार्रवाई कर सकता है और बाल अधिकार आयोग स्वतः संज्ञान लेकर जांच कर सकता है। ♦️लेकिन असली परीक्षा अब प्रशासन और व्यवस्था की है। क्या इस घटना की निष्पक्ष जांच होगी? क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी प्रभाव, दबाव और समझौतों की भेंट चढ़ जाएगा? क्योंकि सच यही है,यदि स्कूलों में ही बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाए, तो फिर समाज के पास अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का कोई ठिकाना नहीं बचता। ❗️नांगल चौधरी के सरस्वती स्कूल की यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह चेतावनी है कि शिक्षा के मंदिरों में संवेदनशीलता, जवाबदेही और मानवता को बचाना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।2
- Post by RAJESH PATRKAR SIKAR सीकर1