क्या अब इस देश में वर्दी पहनते ही कानून खत्म हो जाता है? एक छात्र को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो बेहोश हो गया… और सिस्टम कहता है — “लाइन हाजिर कर दिया।” क्या यही न्याय है? अगर यही काम कोई आम युवक करता, तो उसी रात FIR, गिरफ्तारी और जेल तय थी। लेकिन वर्दी वालों के लिए सिर्फ कुर्सी बदल देना ही कार्रवाई कहलाता है? याद रखिए— वर्दी संविधान से ऊपर नहीं है। थाना किसी की जान और सम्मान तोड़ने की जगह नहीं, न्याय देने की जगह होना चाहिए। अगर छात्र के साथ मारपीट हुई है, अगर मानवाधिकार कुचले गए हैं, तो सिर्फ विभागीय दिखावा नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, FIR और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वरना जनता ये मानने लगेगी कि इस देश में कानून सिर्फ कमजोर लोगों के लिए बचा है। आज एक छात्र बेहोश हुआ है, कल किसी मां का बेटा हमेशा के लिए खामोश हो सकता है। और तब “लाइन हाजिर” शब्द इंसाफ नहीं, सिस्टम की बेशर्मी कहलाएगा।
क्या अब इस देश में वर्दी पहनते ही कानून खत्म हो जाता है? एक छात्र को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो बेहोश हो गया… और सिस्टम कहता है — “लाइन हाजिर कर दिया।” क्या यही न्याय है? अगर यही काम कोई आम युवक करता, तो उसी रात FIR, गिरफ्तारी और जेल तय थी। लेकिन वर्दी वालों के लिए सिर्फ कुर्सी बदल देना ही कार्रवाई कहलाता है? याद रखिए— वर्दी संविधान से ऊपर नहीं है। थाना किसी की जान और सम्मान तोड़ने की जगह नहीं, न्याय देने की जगह होना चाहिए। अगर छात्र के साथ मारपीट हुई है, अगर मानवाधिकार कुचले गए हैं, तो सिर्फ विभागीय दिखावा नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, FIR और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वरना जनता ये मानने लगेगी कि इस देश में कानून सिर्फ कमजोर लोगों के लिए बचा है। आज एक छात्र बेहोश हुआ है, कल किसी मां का बेटा हमेशा के लिए खामोश हो सकता है। और तब “लाइन हाजिर” शब्द इंसाफ नहीं, सिस्टम की बेशर्मी कहलाएगा।
- क्या अब इस देश में वर्दी पहनते ही कानून खत्म हो जाता है? एक छात्र को इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो बेहोश हो गया… और सिस्टम कहता है — “लाइन हाजिर कर दिया।” क्या यही न्याय है? अगर यही काम कोई आम युवक करता, तो उसी रात FIR, गिरफ्तारी और जेल तय थी। लेकिन वर्दी वालों के लिए सिर्फ कुर्सी बदल देना ही कार्रवाई कहलाता है? याद रखिए— वर्दी संविधान से ऊपर नहीं है। थाना किसी की जान और सम्मान तोड़ने की जगह नहीं, न्याय देने की जगह होना चाहिए। अगर छात्र के साथ मारपीट हुई है, अगर मानवाधिकार कुचले गए हैं, तो सिर्फ विभागीय दिखावा नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, FIR और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। वरना जनता ये मानने लगेगी कि इस देश में कानून सिर्फ कमजोर लोगों के लिए बचा है। आज एक छात्र बेहोश हुआ है, कल किसी मां का बेटा हमेशा के लिए खामोश हो सकता है। और तब “लाइन हाजिर” शब्द इंसाफ नहीं, सिस्टम की बेशर्मी कहलाएगा।1
- बेगमिया गांव में आग लगने से 20 बीघा गेहूं का चारा जलकर राख, 3 भैंस झुलसी। भदेसर। उपखंड के बेगमिया गांव में आग लगने से 20 बीघा गेहूं का चारा जलकर राख हो गया। इस घटना में तीन भैंसें बुरी तरह झुलस गईं, जिनका पशु चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। समाजसेवी एवं टेंट व्यवसायी पप्पू लाल गाडरी ने बताया कि बेगमिया निवासी उदयलाल गाडरी पुत्र केली राम गाडरी के बाड़े में रोज की तरह लगभग 15 से 20 पशु बंधे हुए थे। बाड़े में पशुओं के लिए गेहूं का चारा (शुक्ला) भी रखा था। अज्ञात कारणों से बाड़े में अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। आग लगने की सूचना पर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण मौके पर पहुंचे। खेत मालिक सहित अन्य ग्रामीणों ने आग के बीच बाड़े में घुसकर बंधे पशुओं की रस्सियां काटीं और उन्हें आजाद किया। इस दौरान तीन भैंसें गंभीर रूप से झुलस गईं। घटना की सूचना फायर ब्रिगेड को दी गई। भदेसर उपखंड मुख्यालय पर फायर ब्रिगेड न होने के कारण लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित मंडफिया से दमकल पहुंची और आग पर काबू पाया। दमकल पहुंचने से पहले ही पशुओं का चारा और गेहूं का शुक्ला लगभग पूरी तरह जलकर नष्ट हो चुका था। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि आग खेत से गुजर रही 11000 केवी बिजली लाइन में फाल्ट होने के कारण लगी होगी, क्योंकि बाड़े के पास से ही यह लाइन गुजरती है। झुलसी हुई भैंसों की हालत गंभीर बनी हुई है। खेत मालिक ने उचित मुआवजे के साथ-साथ झुलसे हुए पशुओं के इलाज की भी मांग की है।1
- 8 मई 2026 को चित्तौड़गढ़ जिले की सभी प्रमुख और महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी पाएं। हैलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ पर आपको दिनभर की हर बड़ी खबर एक साथ मिलेगी।1
- चित्तौड़गढ़ के आयुष हॉस्पिटल में बिना ऑपरेशन पंचकर्म थैरेपी से सफल इलाज हुआ है। एक मरीज ने अपनी 'दर्द की कहानी' साझा की है, जिसमें उसे पूर्ण राहत मिली।1
- चित्तौड़गढ़ में भक्त श्री लक्ष्मीनाथ, शिव शंकर और गोविंद सांवरिया सेठ के नाम का जाप कर रहे हैं। यह भक्ति संदेश 'नमो भगवते वासुदेवाय' और 'ॐ शिवाय नमः' जैसे पवित्र मंत्रों से भरा है। 'श्री राम जय राम जय जय राम' के जयकारे पूरे वातावरण में गूंज रहे हैं।1
- नवागत एसपी राजेश व्यास एक्शन मोड में: अपराध पर जीरो टॉलरेंस, महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम पर सख्ती—पत्रकारों से मुलाकात कर दिया साफ संदेश, नीमच पुलिस अब हाई अलर्ट पर 🚔🔥 नवागत एसपी राजेश व्यास एक्शन मोड में: अपराध पर जीरो टॉलरेंस, महिला सुरक्षा और साइबर क्राइम पर सख्ती—पत्रकारों से मुलाकात कर दिया साफ संदेश, नीमच पुलिस अब हाई अलर्ट पर 🚔🔥2
- शास्त्रीनगर के आदर्श विद्या मंदिर में सौर ऊर्जा और स्मार्ट क्लास का भव्य लोकार्पण किया गया है। इस पहल से छात्रों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा मिलेगी और स्कूल आत्मनिर्भर बनेगा।1
- एक युवक पुलिस टॉर्चर से परेशान होकर अपनी जान दे देता है… और सिस्टम का जवाब क्या आता है? “थाना प्रभारी लाइन हाजिर।” क्या इंसान की जान इतनी सस्ती हो गई है? अगर आम आदमी पर आरोप लगे तो तुरंत जेल, लेकिन वर्दी वालों पर आरोप लगे तो सिर्फ कुर्सी बदल दो? ये कैसा न्याय है जहां एक मां का बेटा मर जाता है, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर सिर्फ दिखावटी कार्रवाई होती है। याद रखिए— जब थाने न्याय की जगह डर का अड्डा बन जाएं, तो जनता का कानून से भरोसा टूटने लगता है। वर्दी का मतलब सुरक्षा है, अत्याचार नहीं। अगर किसी युवक को इतना प्रताड़ित किया गया कि उसने मौत को चुन लिया, तो सिर्फ “लाइन हाजिर” नहीं, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आज एक परिवार उजड़ा है, कल किसी और का घर बर्बाद होगा… अगर अब भी आवाज नहीं उठी तो। कल आपकी बारी आ जाएगी1