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चित्तौड़गढ़ ज़िले में औद्योगिक विकास को लेकर सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रगति और आर्थिक विकास का प्रतीक माने जाने वाले बड़े औद्योगिक और सीमेंट प्रोजेक्ट अब स्थानीय समुदायों की कड़ी जाँच का सामना कर रहे हैं। ज़िले भर में हाल ही में हुई जनसुनवाइयों से संकेत मिलता है कि निवासी अब केवल रोज़गार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं; बल्कि वे जल संसाधनों, वनों, कृषि भूमि और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। बेगूँ क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट परियोजना के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान, ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। इसके एक दिन बाद, निम्बाहेड़ा के पास फलवा गाँव में भी इसी तरह की चिंताएँ सामने आईं, जहाँ निवासियों ने वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन विरोधों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये चित्तौड़गढ़ में एक व्यापक और उभरती हुई जनभावना को दर्शाते हैं, जहाँ समुदाय अब औद्योगिक विस्तार के बदले पर्यावरणीय गिरावट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। चित्तौड़गढ़ ज़िला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से चंदेरिया क्षेत्र, अक्सर औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित चर्चाओं का विषय रहा है। वहीं, बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से जुड़े ज़ारोफिक्स कचरे के निपटान को लेकर विवाद बढ़ गया है और यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे औद्योगिक कचरे से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संसाधनों और समग्र पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इन अनुभवों ने कई समुदायों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया है कि क्या औद्योगिक परियोजनाओं के वास्तविक लाभ उनकी पर्यावरणीय लागतों की पर्याप्त भरपाई करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर चूना पत्थर खनन और सीमेंट निर्माण से कई पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे PM10 और PM2.5 जैसे कणों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरे, भूजल संसाधनों पर प्रभाव जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, कृषि उत्पादकता में कमी, और जैव विविधता व हरियाली के लिए ख़तरा। ग्रामीण तर्क देते हैं कि एक बार पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के बाद, इसे बहाल करने में दशकों लग सकते हैं, यदि यह संभव हुआ तो। इन जनसुनवाइयों से यह स्पष्ट संदेश उभरा है कि चित्तौड़गढ़ के लोग विकास तो चाहते हैं, लेकिन वे पर्यावरणीय जवाबदेही की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि संविधान हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार देता है। स्थानीय समुदाय किसी भी मंज़ूरी से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं। अब ज़िला प्रशासन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित है। मुख्य प्रश्न यही है कि क्या जनसुनवाइयों में दर्ज आपत्तियाँ और सिफ़ारिशें अनुमोदन प्रक्रिया में सार्थक भूमिका निभाएँगी। यह देखना होगा कि पर्यावरणीय मंज़ूरी के निर्णय वास्तव में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को दर्शाते हैं, या निवेश और औद्योगिक विकास की आवश्यकताओं के चलते सार्वजनिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाएगा। फिलहाल, एक बात निश्चित है: चित्तौड़गढ़ ज़िले में पानी, जंगल और ज़मीन की सुरक्षा का संघर्ष अब केवल एक पर्यावरणीय बहस नहीं रह गया है; यह नागरिकों के अधिकारों, लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों की भविष्य की स्थिरता का मामला बन गया है।

1 hr ago
user_Alert Nation News
Alert Nation News
Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
1 hr ago

चित्तौड़गढ़ ज़िले में औद्योगिक विकास को लेकर सार्वजनिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। कभी प्रगति और आर्थिक विकास का प्रतीक माने जाने वाले बड़े औद्योगिक और सीमेंट प्रोजेक्ट अब स्थानीय समुदायों की कड़ी जाँच का सामना कर रहे हैं। ज़िले भर में हाल ही में हुई जनसुनवाइयों से संकेत मिलता है कि निवासी अब केवल रोज़गार के वादों से संतुष्ट नहीं हैं; बल्कि वे जल संसाधनों, वनों, कृषि भूमि और अपने जीवन की समग्र गुणवत्ता की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। बेगूँ क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट परियोजना के लिए आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान, ग्रामीणों ने पानी के स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय पर्यावरण पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। इसके एक दिन बाद, निम्बाहेड़ा के पास फलवा गाँव में भी इसी तरह की चिंताएँ सामने आईं, जहाँ निवासियों ने वंडर सीमेंट द्वारा प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर सवाल उठाए। पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन विरोधों को अलग-थलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ये चित्तौड़गढ़ में एक व्यापक और उभरती हुई जनभावना को दर्शाते हैं, जहाँ समुदाय अब औद्योगिक विस्तार के बदले पर्यावरणीय गिरावट को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। चित्तौड़गढ़ ज़िला लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। विशेष रूप से चंदेरिया क्षेत्र, अक्सर औद्योगिक प्रदूषण से संबंधित चर्चाओं का विषय रहा है। वहीं, बड़ी सादड़ी क्षेत्र में हिंदुस्तान जिंक से जुड़े ज़ारोफिक्स कचरे के निपटान को लेकर विवाद बढ़ गया है और यह एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ऐसे औद्योगिक कचरे से मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संसाधनों और समग्र पारिस्थितिक संतुलन पर दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। इन अनुभवों ने कई समुदायों को यह सवाल उठाने पर मजबूर किया है कि क्या औद्योगिक परियोजनाओं के वास्तविक लाभ उनकी पर्यावरणीय लागतों की पर्याप्त भरपाई करते हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर चूना पत्थर खनन और सीमेंट निर्माण से कई पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियाँ पैदा हो सकती हैं, जैसे PM10 और PM2.5 जैसे कणों से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य ख़तरे, भूजल संसाधनों पर प्रभाव जिससे भूजल स्तर में गिरावट आ सकती है, कृषि उत्पादकता में कमी, और जैव विविधता व हरियाली के लिए ख़तरा। ग्रामीण तर्क देते हैं कि एक बार पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के बाद, इसे बहाल करने में दशकों लग सकते हैं, यदि यह संभव हुआ तो। इन जनसुनवाइयों से यह स्पष्ट संदेश उभरा है कि चित्तौड़गढ़ के लोग विकास तो चाहते हैं, लेकिन वे पर्यावरणीय जवाबदेही की भी मांग करते हैं। उनका कहना है कि संविधान हर नागरिक को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार देता है। स्थानीय समुदाय किसी भी मंज़ूरी से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं के सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों के व्यापक और निष्पक्ष मूल्यांकन की अपेक्षा करते हैं। अब ज़िला प्रशासन, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार पर ध्यान केंद्रित है। मुख्य प्रश्न यही है कि क्या जनसुनवाइयों में दर्ज आपत्तियाँ और सिफ़ारिशें अनुमोदन प्रक्रिया में सार्थक भूमिका निभाएँगी। यह देखना होगा कि पर्यावरणीय मंज़ूरी के निर्णय वास्तव में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को दर्शाते हैं, या निवेश और औद्योगिक विकास की आवश्यकताओं के चलते सार्वजनिक आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाएगा। फिलहाल, एक बात निश्चित है: चित्तौड़गढ़ ज़िले में पानी, जंगल और ज़मीन की सुरक्षा का संघर्ष अब केवल एक पर्यावरणीय बहस नहीं रह गया है; यह नागरिकों के अधिकारों, लोकतांत्रिक भागीदारी और स्थानीय समुदायों की भविष्य की स्थिरता का मामला बन गया है।

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  • हरियाणा ने एक अच्छा नेतृत्व खो दिया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महोदया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे इस पद पर एक महत्वपूर्ण नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है।
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    हरियाणा ने एक अच्छा नेतृत्व खो दिया है। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष महोदया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे इस पद पर एक महत्वपूर्ण नेतृत्व की कमी महसूस की जा रही है।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट प्लांट परियोजना के लिए लाइमस्टोन उत्पादन संबंधी पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उत्थेन कला के पास स्थित खाली जमीन पर आयोजित इस सुनवाई में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। जनसुनवाई के दौरान, चंदाखेड़ी, डोरिया, ठुकराई, शादी, परख्याखेड़ी, पालका, उत्थेन कला एवं रायता सहित विभिन्न प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर, कृषि भूमि के उपयोग, रोजगार के अवसरों तथा स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। कार्यवाही के दौरान, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत सभी सुझावों एवं आपत्तियों को विधिवत रूप से दर्ज किया और यह जानकारी दी कि इन्हें संबंधित विभाग को आगे भेजा जाएगा। जनसुनवाई में एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) चित्तौड़गढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर और विकास अधिकारी सुरेश गिरी गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सभी सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल किया जाएगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट प्लांट परियोजना के लिए लाइमस्टोन उत्पादन संबंधी पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उत्थेन कला के पास स्थित खाली जमीन पर आयोजित इस सुनवाई में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

जनसुनवाई के दौरान, चंदाखेड़ी, डोरिया, ठुकराई, शादी, परख्याखेड़ी, पालका, उत्थेन कला एवं रायता सहित विभिन्न प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर, कृषि भूमि के उपयोग, रोजगार के अवसरों तथा स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।

कार्यवाही के दौरान, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत सभी सुझावों एवं आपत्तियों को विधिवत रूप से दर्ज किया और यह जानकारी दी कि इन्हें संबंधित विभाग को आगे भेजा जाएगा। जनसुनवाई में एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) चित्तौड़गढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर और विकास अधिकारी सुरेश गिरी गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सभी सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल किया जाएगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • नीमच जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को कम करने के उद्देश्य से, पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने एक अभिनव पहल करते हुए "जीवन संजीवनी अभियान" की शुरुआत की है। इस अभियान का शुभारंभ ग्राम चल्दु से किया गया है। इसके तहत, जिले में सड़क दुर्घटना संभावित 22 हॉट स्पॉट क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सीपीआर (CPR) और प्राथमिक उपचार का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्तियों को तत्काल सहायता मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके। यह नीमच पुलिस का सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
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    नीमच जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को कम करने के उद्देश्य से, पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने एक अभिनव पहल करते हुए "जीवन संजीवनी अभियान" की शुरुआत की है। इस अभियान का शुभारंभ ग्राम चल्दु से किया गया है। इसके तहत, जिले में सड़क दुर्घटना संभावित 22 हॉट स्पॉट क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सीपीआर (CPR) और प्राथमिक उपचार का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्तियों को तत्काल सहायता मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके। यह नीमच पुलिस का सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार है।
    user_मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    Carpenter Neemuch Nagar, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • भोपाल में एक ऑटो पलट गया, जिसके कारण मंदसौर के विधायक विपिन जैन घायल हो गए। घटना के बाद, उन्हें जयवर्धन सिंह अस्पताल लेकर पहुंचे।
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    भोपाल में एक ऑटो पलट गया, जिसके कारण मंदसौर के विधायक विपिन जैन घायल हो गए। घटना के बाद, उन्हें जयवर्धन सिंह अस्पताल लेकर पहुंचे।
    user_Mahesh Suthar
    Mahesh Suthar
    Carpenter नीमच नगर, नीमच, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • भीलवाड़ा जिले में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'विकास, विश्वास और जनकल्याण' अभियान के तहत कई धार्मिक और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए। जिला मुख्यालय पर स्थित टंकी के बालाजी मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने देव दर्शन करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु होने और राष्ट्र की समृद्धि के लिए कामना की गई। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के अपने संकल्प को भी दोहराया।
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    भीलवाड़ा जिले में भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 'विकास, विश्वास और जनकल्याण' अभियान के तहत कई धार्मिक और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए।

जिला मुख्यालय पर स्थित टंकी के बालाजी मंदिर में भाजपा कार्यकर्ताओं ने देव दर्शन करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की और सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु होने और राष्ट्र की समृद्धि के लिए कामना की गई। पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के अपने संकल्प को भी दोहराया।
    user_Dipesh kumar chhipa
    Dipesh kumar chhipa
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • हेलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ के संपादक पंडित मुकेश कुमार ने लाइव आकर शुरू पब्लिक ऐप से कमाई के पूरे गणित को समझाया और इससे जुड़े कई राज बताए। अपने इस वीडियो के अंत में, उन्होंने चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला मजिस्ट्रेट (DM) से एक बार फिर गुहार लगाई।
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    हेलो चित्तौड़गढ़ न्यूज़ के संपादक पंडित मुकेश कुमार ने लाइव आकर शुरू पब्लिक ऐप से कमाई के पूरे गणित को समझाया और इससे जुड़े कई राज बताए। अपने इस वीडियो के अंत में, उन्होंने चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला मजिस्ट्रेट (DM) से एक बार फिर गुहार लगाई।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • दिल्ली में हुए होटल अग्निकांड में अपनी जान जोखिम में डालकर गद्दे-रजाई बिछाकर कई लोगों की जान बचाने वाले व्यक्ति को ₹1 लाख से सम्मानित किया गया है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि संकट के समय किया गया निस्वार्थ सहयोग कभी व्यर्थ नहीं जाता, और इसलिए किसी भी आपदा या हादसे में व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार तन, मन और धन से सहयोग अवश्य करना चाहिए। इंसानियत की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए, जिन्होंने लोगों की जान बचाई, वे अब स्वयं अपील कर रहे हैं कि उनका नुकसान पूरा हो चुका है और उन्हें किसी अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, वे चाहते हैं कि यदि सहायता देनी ही है तो उस 'झारखंड की बेटी' के परिवार को दी जाए, जो इसी होटल में झाड़ू-पोछा का काम करती थी और इस दुखद हादसे में अपनी जान गंवा बैठी। यह कृत्य सच्ची मानवता का प्रतीक है, जहाँ व्यक्ति अपने हिस्से का सम्मान और सहयोग भी किसी जरूरतमंद के नाम कर देता है।
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    दिल्ली में हुए होटल अग्निकांड में अपनी जान जोखिम में डालकर गद्दे-रजाई बिछाकर कई लोगों की जान बचाने वाले व्यक्ति को ₹1 लाख से सम्मानित किया गया है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि संकट के समय किया गया निस्वार्थ सहयोग कभी व्यर्थ नहीं जाता, और इसलिए किसी भी आपदा या हादसे में व्यक्ति को अपनी क्षमतानुसार तन, मन और धन से सहयोग अवश्य करना चाहिए।

इंसानियत की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए, जिन्होंने लोगों की जान बचाई, वे अब स्वयं अपील कर रहे हैं कि उनका नुकसान पूरा हो चुका है और उन्हें किसी अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, वे चाहते हैं कि यदि सहायता देनी ही है तो उस 'झारखंड की बेटी' के परिवार को दी जाए, जो इसी होटल में झाड़ू-पोछा का काम करती थी और इस दुखद हादसे में अपनी जान गंवा बैठी।

यह कृत्य सच्ची मानवता का प्रतीक है, जहाँ व्यक्ति अपने हिस्से का सम्मान और सहयोग भी किसी जरूरतमंद के नाम कर देता है।
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    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • 'जहर मुक्त 'बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' के आह्वान पर बड़ीसादड़ी में पूर्ण बंद सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह बंद हिन्दुस्तान जिंक के 'जेरोफिक्स अपशिष्ट पदार्थ' से जुड़े मामले के विरोध में किया गया था। इस सफल बंद के दौरान, मेडिकल स्टोर जैसी आवश्यक सेवाएं भी ठप रहीं।
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    'जहर मुक्त 'बड़ीसादड़ी संघर्ष समिति' के आह्वान पर बड़ीसादड़ी में पूर्ण बंद सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह बंद हिन्दुस्तान जिंक के 'जेरोफिक्स अपशिष्ट पदार्थ' से जुड़े मामले के विरोध में किया गया था। इस सफल बंद के दौरान, मेडिकल स्टोर जैसी आवश्यक सेवाएं भी ठप रहीं।
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    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में मानवता और जीव दया का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय सामने आया, जब जंगली श्वानों के हमले में गंभीर रूप से घायल एक नीलगाय के शावक को नया जीवन मिला। चिकारड़ा क्षेत्र में एक कुएं के पास जंगली श्वानों ने नीलगाय के शावक पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया था। शावक की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण पुष्कर गुर्जर, राजू सुथार, कैलाश गुर्जर, जसू गुर्जर, विक्रम नायक और अन्य लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस दिखाते हुए श्वानों को भगाया और घायल शावक को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद उसे प्राथमिक सहायता दी गई। इसी दौरान, भाटोली गुजरान में पदस्थापित पशुधन निरीक्षक बलराम चौधरी अपने सहयोगी ललित मीणा और विजय चौधरी के साथ एक अन्य कार्य से गुजर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम स्थगित किया और तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल शावक का निःशुल्क उपचार किया। पशुधन निरीक्षकों ने जोर देकर कहा कि बेजुबान जीवों की सेवा करना उनका नैतिक दायित्व है और वे ऐसी किसी भी स्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। सूचना मिलने पर, मंगलवाड़ से वन विभाग की एक टीम प्रेमलता लोहार के नेतृत्व में घटना स्थल पर पहुंची। उन्होंने घायल शावक को अपने संरक्षण में लिया और उसके आगे के उपचार तथा सुरक्षित देखभाल की व्यवस्था की। इस दौरान, वन विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि पूरे जिले में केवल एक रेस्क्यू वाहन होने के कारण कई बार उन्हें समय पर पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त रेस्क्यू वाहनों की आवश्यकता पर बल दिया। घायल शावक को सुरक्षित उपचार केंद्र तक पहुंचाने में ग्रामीणों ने भी अनुकरणीय सहयोग दिया। गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर दवाइयों और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री की व्यवस्था की, साथ ही टेम्पो का किराया वहन कर शावक को सुरक्षित मंगलवाड़ पहुंचाया। ग्रामीण प्रकाश सुथार ने बताया कि पूरे गांव ने मिलकर जीव दया और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। ग्रामीणों की सजगता, पशुधन निरीक्षकों की संवेदनशीलता और वन विभाग की मुस्तैदी के कारण ही एक बेजुबान वन्यजीव की जान बच सकी। इस सराहनीय कार्य के लिए ग्रामीणों ने सभी सहयोगकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के चिकारड़ा क्षेत्र में मानवता और जीव दया का एक प्रेरणादायक उदाहरण उस समय सामने आया, जब जंगली श्वानों के हमले में गंभीर रूप से घायल एक नीलगाय के शावक को नया जीवन मिला। चिकारड़ा क्षेत्र में एक कुएं के पास जंगली श्वानों ने नीलगाय के शावक पर हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर दिया था। शावक की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण पुष्कर गुर्जर, राजू सुथार, कैलाश गुर्जर, जसू गुर्जर, विक्रम नायक और अन्य लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने साहस दिखाते हुए श्वानों को भगाया और घायल शावक को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद उसे प्राथमिक सहायता दी गई।

इसी दौरान, भाटोली गुजरान में पदस्थापित पशुधन निरीक्षक बलराम चौधरी अपने सहयोगी ललित मीणा और विजय चौधरी के साथ एक अन्य कार्य से गुजर रहे थे। घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने अपना कार्यक्रम स्थगित किया और तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल शावक का निःशुल्क उपचार किया। पशुधन निरीक्षकों ने जोर देकर कहा कि बेजुबान जीवों की सेवा करना उनका नैतिक दायित्व है और वे ऐसी किसी भी स्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

सूचना मिलने पर, मंगलवाड़ से वन विभाग की एक टीम प्रेमलता लोहार के नेतृत्व में घटना स्थल पर पहुंची। उन्होंने घायल शावक को अपने संरक्षण में लिया और उसके आगे के उपचार तथा सुरक्षित देखभाल की व्यवस्था की। इस दौरान, वन विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि पूरे जिले में केवल एक रेस्क्यू वाहन होने के कारण कई बार उन्हें समय पर पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त रेस्क्यू वाहनों की आवश्यकता पर बल दिया।

घायल शावक को सुरक्षित उपचार केंद्र तक पहुंचाने में ग्रामीणों ने भी अनुकरणीय सहयोग दिया। गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर दवाइयों और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री की व्यवस्था की, साथ ही टेम्पो का किराया वहन कर शावक को सुरक्षित मंगलवाड़ पहुंचाया। ग्रामीण प्रकाश सुथार ने बताया कि पूरे गांव ने मिलकर जीव दया और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। ग्रामीणों की सजगता, पशुधन निरीक्षकों की संवेदनशीलता और वन विभाग की मुस्तैदी के कारण ही एक बेजुबान वन्यजीव की जान बच सकी। इस सराहनीय कार्य के लिए ग्रामीणों ने सभी सहयोगकर्ताओं और विभागीय अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
    user_पवन अग्रवाल
    पवन अग्रवाल
    Local News Reporter डूंगला, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
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