75 मीटर तिरंगे के साथ निकली भव्य तिरंगा यात्रा, छात्रों ने बढ़ाया उत्साह। 75 मीटर तिरंगे के साथ निकली भव्य तिरंगा यात्रा, छात्रों ने बढ़ाया उत्साह बांदा। बबेरू कस्बे में देशभक्ति के जज्बे के साथ भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। जिला अध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत की मौजूदगी में निकली यह यात्रा मां मढ़ी दाई मैरिज हाल से शुरू होकर मेन चौराहा होते हुए अंबेडकर पार्क तक पहुंची। यात्रा में 75 मीटर लंबा तिरंगा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। बड़ी संख्या में विद्यालयों के छात्र-छात्राओं समेत क्षेत्र के लोगों ने तिरंगा यात्रा में सहभागिता की और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा। तिरंगा यात्रा में जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, भाजपा नेता अजय सिंह पटेल, नगर पंचायत अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजयपाल सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बच्चा सिंह, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, भाजपा जिला महामंत्री सुधीर कुशवाहा, भाजपा मंडल अध्यक्ष सौरभ शिवहरे, पूर्व मंडल अध्यक्ष श्याम जी मिश्रा, राजा दीक्षित सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
75 मीटर तिरंगे के साथ निकली भव्य तिरंगा यात्रा, छात्रों ने बढ़ाया उत्साह। 75 मीटर तिरंगे के साथ निकली भव्य तिरंगा यात्रा, छात्रों ने बढ़ाया उत्साह बांदा। बबेरू कस्बे में देशभक्ति के जज्बे के साथ भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। जिला अध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत की मौजूदगी में निकली यह यात्रा मां मढ़ी दाई मैरिज हाल से शुरू होकर मेन चौराहा होते हुए अंबेडकर पार्क तक पहुंची। यात्रा में 75 मीटर लंबा तिरंगा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। बड़ी संख्या में विद्यालयों के छात्र-छात्राओं समेत क्षेत्र के लोगों ने तिरंगा यात्रा में सहभागिता की और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा। तिरंगा यात्रा में जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल, भाजपा नेता अजय सिंह पटेल, नगर पंचायत अध्यक्ष विवेकानंद गुप्ता, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजयपाल सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख बच्चा सिंह, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष विजय विक्रम सिंह, भाजपा जिला महामंत्री सुधीर कुशवाहा, भाजपा मंडल अध्यक्ष सौरभ शिवहरे, पूर्व मंडल अध्यक्ष श्याम जी मिश्रा, राजा दीक्षित सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
- इलाज के लिए आए थे यहां तो व्यवस्था ही मरीज निकली दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की गैर हाजिरी से लेकर जांच रिपोर्टर तक सवालों का जाल ऑपरेशन से पहले 25 से 30हजार की बाहर वाली पर्ची का आरोप बांदा।मरीज अस्पताल पहुंचता है बीमारी लेकर… लेकिन यहां पहुंचते ही उसे एक और बीमारी पकड़ लेती है—व्यवस्था की।कहीं डॉक्टर की कुर्सी खाली है, कहीं स्टाफ का पता नहीं, कहीं जांच रिपोर्ट पर जिम्मेदारी के हस्ताक्षर तलाशे जा रहे हैं और कहीं ऑपरेशन से पहले मरीज को दवाओं और सामान की ऐसी सूची थमा दिए जाने के आरोप हैं, जिसे देखकर बीमारी से ज्यादा जेब का दर्द बढ़ जाए।यह तस्वीर किसी निजी अस्पताल की नहीं, बल्कि राजकीय रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज की बताई जा रही है।जिस संस्थान को बुंदेलखंड के गरीब मरीजों के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा दरवाजा होना चाहिए, वहां व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल अब इतने गंभीर हैं कि उन्हें नजरअंदाज करना मरीजों की पीड़ा को नजरअंदाज करने जैसा होगा।डॉक्टर कहां हैं? मरीज पूछ रहा है… कुर्सी जवाब दे रही है!ईएनटी विभाग के HOD जितेंद्र यादव और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष कुलदीप के लंबे समय से ड्यूटी से नदारद रहने के आरोप सामने आए हैं।अगर आरोप सही हैं तो फिर सवाल बेहद सीधा है—जब विभागाध्यक्ष ही विभाग में नहीं होंगे तो मरीज की शिकायत कौन सुनेगा? और अगर वे नियमित रूप से ड्यूटी पर हैं तो उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के सामने रखने में परेशानी क्या है? सरकारी अस्पताल में मरीज डॉक्टर को खोजता रहे और डॉक्टर फाइलों में मौजूद मिले—तो फिर इलाज किसका हो रहा है?फार्मेसी में दवा है, लेकिन स्टाफ कहां है?आरोप है कि फार्मेसी में तैनात स्थायी स्टाफ का एक हिस्सा नियमित ड्यूटी पर नहीं पहुंचता।मरीज दवा लेने आता है।काउंटर देखता है। कर्मचारी तलाशता है। फिर व्यवस्था को तलाशता है। दवा मुफ्त हो सकती है, लेकिन अगर उसे देने वाला ही गायब हो तो मरीज के लिए मुफ्त इलाज का अर्थ क्या रह जाता है?जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर नहीं… फिर रिपोर्ट किसकी?सबसे गंभीर सवाल पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की जांच रिपोर्टों को लेकर है। आरोप है कि मरीजों को दी जाने वाली कुछ रिपोर्टों पर स्थायी लैब टेक्नीशियन के हस्ताक्षर तक नहीं होते।जरा सोचिए—एक मरीज अपनी बीमारी का सच जानने के लिए जांच कराता है।रिपोर्ट हाथ में आती है।डॉक्टर उसी रिपोर्ट को देखकर इलाज तय करता है।लेकिन रिपोर्ट पर जिम्मेदारी का हस्ताक्षर ही न हो तो…मरीज भरोसा किस पर करे—मशीन पर, कागज पर या किस्मत पर?यह सवाल सिर्फ प्रशासनिक नहीं, सीधे मरीज की सुरक्षा से जुड़ा है।ऑपरेशन से पहले मरीज की जेब का ‘ऑपरेशन’!सरकारी अस्पताल में गरीब मरीज इस भरोसे आता है कि यहां इलाज उसकी पहुंच में होगा।लेकिन आरोप है कि सर्जरी से पहले मरीजों को 25 से 30 हजार रुपये तक की दवाएं और चिकित्सा सामग्री बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है।यानी—ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले ही मरीज की जेब का ऑपरेशन! दूर गांव से आया मजदूर, किसान या गरीब परिवार इतनी बड़ी रकम कहां से लाए?क्या अस्पताल में जरूरी दवाएं और सर्जिकल सामग्री उपलब्ध नहीं हैं? यदि नहीं हैं तो क्यों नहीं? और यदि उपलब्ध हैं तो मरीजों को बाहर से खरीदारी क्यों करनी पड़ रही है? इन सवालों के जवाब कागज से नहीं, रिकॉर्ड और जांच से मिलने चाहिए।11 साल की तैनाती—कुर्सी से रिश्ता इतना गहरा कि तबादला भी हार गया?डॉ. मुकेश बंसल के करीब 11 वर्षों से इसी मेडिकल कॉलेज में जमे होने का आरोप है।सरकारी सेवा में तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन यहां आरोपों के मुताबिक एक ही जगह पर 11 साल का पड़ाव है।और सवाल यहीं खत्म नहीं होता।आउटसोर्सिंग, सुरक्षा और सफाई समेत कई महत्वपूर्ण प्रभार भी उन्हीं के पास होने की बात कही जा रही है।एक व्यक्ति, इतने महत्वपूर्ण प्रभार और वर्षों की एक ही जगह तैनाती—क्या यह व्यवस्था पारदर्शिता की कसौटी पर खरी उतरती है? यदि सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो दस्तावेज सामने आने चाहिए।यदि नियमों में कोई अपवाद है तो उसका आधार भी सामने आना चाहिए।क्योंकि सवाल व्यक्ति का नहीं, व्यवस्था के चरित्र का है।साढ़े तीन साल से ‘प्रभारी’—क्या कुर्सी को स्थायित्व पसंद नहीं?मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पद पर डॉ. सुनील कौशल करीब साढ़े तीन वर्षों से प्रभारी/कार्यवाहक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है।जिस मेडिकल कॉलेज में मरीजों की जिंदगी का इलाज होता है, उसकी प्रशासनिक व्यवस्था वर्षों तक ‘प्रभारी’ के भरोसे क्यों चले?क्या स्थायी प्राचार्य की जरूरत सिर्फ सरकारी कागजों में है?सबसे बड़ा सवाल—मरीज जाए तो जाए कहां?मेडिकल कॉलेज की सबसे कमजोर कड़ी मरीज है।वह बहस करने नहीं आता।वह व्यवस्था को चुनौती देने नहीं आता।वह सिर्फ इलाज कराने आता है।वह अपनी बीमारी के साथ अपनी बचत भी लेकर आता है।कई बार बचत खत्म होती है तो गहने बिकते हैं।गहने खत्म होते हैं तो कर्ज शुरू होता है।ऐसे मरीज को यदि सरकारी अस्पताल में भी बाहर से दवाएं और सामान खरीदने की मजबूरी झेलनी पड़े, तो फिर गरीब के लिए सरकारी अस्पताल और निजी अस्पताल के बीच अंतर आखिर बचता क्या है?अब जांच जरूरी है—और ऐसी जांच, जिसमें फाइल नहीं, सच खुले इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।डॉक्टरों की उपस्थिति जांची जाए।फार्मेसी स्टाफ की ड्यूटी का रिकॉर्ड देखा जाए।जांच रिपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल हो।ऑपरेशन के दौरान बाहर से खरीदी गई दवाओं और सामग्री का रिकॉर्ड मिलाया जाए।महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रभारों की समीक्षा हो।लंबी तैनाती के नियमों और उसके औचित्य की जांच हो।क्योंकि अगर आरोप झूठे हैं तो जांच उन्हें झूठ साबित करेगी।और अगर आरोप सही हैं तो…फिर यह सिर्फ अस्पताल की अव्यवस्था नहीं होगी—यह उस भरोसे के साथ धोखा होगा, जिसके सहारे बुंदेलखंड का गरीब मरीज मेडिकल कॉलेज की चौखट तक पहुंचता है।अस्पताल की इमारत कितनी भी भव्य क्यों न हो,मरीज को इलाज चाहिए—कुर्सियां नहीं।रिपोर्ट चाहिए—सवाल नहीं।दवा चाहिए—बाहर की पर्ची नहीं।और सबसे बढ़कर… उसे भरोसा चाहिए।अब देखना यह है कि शासन इन सवालों का इलाज करता है या फिर इन सवालों को ही बीमारी बताकर फाइल में बंद कर देता है।1
- 🚨 NH-731A पर बड़ा खतरा! हादसे को दावत दे रहा सड़क का गड्ढा 🚨 NH-731A पर बड़ा खतरा! हादसे को दावत दे रहा सड़क का गड्ढा चित्रकूट। कर्वी–पहाड़ी–राजापुर NH-731A पर पहाड़ी कस्बे में बस स्टैंड से थोड़ी दूरी आगे सड़क के बीचों-बीच बना गहरा गड्ढा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। तेज रफ्तार वाहनों और लगातार आवागमन वाले इस मार्ग पर गड्ढे के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय तत्काल गड्ढे की मरम्मत कराकर सड़क को सुरक्षित कराना चाहिए। NH-731A पर चित्रकूट क्षेत्र में सड़क विकास एवं चौड़ीकरण की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में मौजूदा सड़क की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल—क्या जिम्मेदार अधिकारी हादसा होने के बाद जागेंगे?2
- जिला चित्रकूट बांदा सिक्योरिटी गार्ड भर्ती निर्धारित पद टोटल 500 हजारों की संख्या में बेरोजगार छात्र युवा परेशान नौकरी के लिए दर दर भटक रहे लोग पहाड़ी भर्ती सिक्योरिटी गार्ड भर्ती के नाम पर लूट पहले रजिस्ट्रेशन फीस 350 और बाद में ज्वाइनिंग फीस 7500 इसका जिम्मेदार कौन माननीय जिलाधिकारी महोदय चित्रकूट बांदा ये भर्ती फ्री करवाया जाए आखिर युवा छात्र लोग को कब तक लुटते रहेंगे गरीब लोगों के पास पैसे न होने के कारण परेशान टोटल पद पांच सौ हजारों की संख्या में दिखे बेरोजगार युवा2
- स्टंटबाजों को ट्रैफिक पुलिस ने पकड़ा, माफी मांगते रहे युवक दोबारा ऐसा न करने का लिया संकल्प सतना। जिले में कुछ युुवा और नवयुवा स्टंटबाजी कर एनजॉय करना चाहते थे पर उनके इस घटिया दिमाग की बत्ती तब गुल हो गई जब यातायात पुलिस ने उनको ढूढ़ निकाला। बता दें कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया था। जिसमे कार लहराते हुए दिखाई गई थी। गाड़ी में नंबर प्लेट न होने के बावजूद पुलिस ने वीडियो के माध्यम से ढूढ़ निकाला और वाहनों को यातयात थाने में खड़ा करवाकर उसकी जांच की और आरोपियों को समझाया कि वे इस तरह की हरकतें करके अपने जीवन को बर्बाद न करें। स्टंट बाज की ब्लैक स्कॉर्पियो में एडवोकेट का स्टीकर लगा हुआ था। वहीं पुलिस के सामने स्टंट बाजो ने अपनी गलती स्वीकार की और माफी मांगते हुए दोबारा ऐसी गलती न करने की बात कही। विदित हो कि सतना-रीवा रोड फ्लाईओवर पर ब्लैक स्कॉर्पियो (एमपी 19 सीसी 7769) और क्रेटा (एमपी 19 जेड एम 011) से खतरनाक स्टंट करने वाले युवकों पर ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने दोनों वाहन जब्त कर स्कॉर्पियो पर 15,000 रुपये और क्रेटा पर 4,000 रुपये का चालान किया है इन पर पुलिस ने की कार्यवाही यातायात पुलिस के अनुसार ब्लैक स्कॉर्पियो चालक, क्रेटा कार चालक रील बनाने वाले युवक में आयुष बागरी, ध्रुव सिंह, अर्नव शुक्ला ने गलती स्वीकार की। मामले पर ट्रैफिक पुलिस ने कार्यवाही की । यह कोई पहला मामला नहीं है जहां पर स्टंटबाजों ने इस तरह की हरकतें की हों। कई मामले सामने आ चुके हैं और उन पर कार्यवाहियां भी हो चुकी हैं पर लोगों को स्टंटबाजी करने और रील बनाने का शौक सिर चढ़ गया है जिससे वे अपनी जान को खतरे में डालते हुए दूसरों के लिए भी खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। क्या था मामला सतना के सेमरिया चौक स्थित शहर के मुख्य फ्लाईओवर पर रविवार रात एक काली स्कॉर्पियो से खतरनाक स्टंट किए गए। कार के पीछे चल रहे कार सवार लोगों के दोस्तों ने इसका वीडियो बनाया सोमवार को सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में स्कॉर्पियो चालक तेज रफ्तार में वाहन को लहराते और सड़क पर खतरनाक तरीके से घुमाते हुए दिख रहा था। इस दौरान फ्लाईओवर से गुजर रहे दूसरे वाहन चालकों की जान भी जोखिम में पड़ गई। स्टंट के दौरान स्कॉर्पियो एक बाइक सवार पुलिसकर्मी से टकराते-टकराते बची। अचानक सामने आए वाहन से पुलिसकर्मी ने किसी तरह अपनी बाइक संभाली, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। मुख्य फ्लाईओवर जैसे व्यस्त मार्ग पर इस तरह की लापरवाही से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो सवार युवकों के दोस्तों ने इस घटना का वीडियो खुद रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया। पूर्व में भी हो चुके हैं खतरनाक स्टंट पूर्व में भी कई खतरनाक स्टंट देखे जा चुके हैं। जिसमे अवयस्कों की कार पुल से लटक गई थी तो टे्रेन के दरवाजे पर पैर लटकाकर स्टंट करते देखा गया। कभी रेलवे परिसर में डांस करते देखा गया। वाहनों के साथ तरह तरह के स्टंट देखे जा चुके हैं। पर नव युवकों की अपनी धुन और पागलपन का कोई अर्थ नहीं है। एक्सपर्ट कहते हैं कि यह नकली एनजॉयमेंट है। इससे कोई एनजॉयमेंट उत्पन्न होना किसी कम दिमाग की उपज हो सकती है।1
- Adarsh nagar hawai Patti Tikuriya tila road me kitne gadde Hai ki Kya gadi motor mein jaam lag jata hai schooli bus bhi Jam fash jati hai koi dekane Bale nahi dhayan nahi dete2
- सुनवानी 🚩 हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा सुनवानी , हनुमानगढ़ी से जटाशंकर निकली विशाल कांवड़ यात्रा हजारों भक्तों ने पैदल थामी कांवड़, जगह-जगह फूल-मालाओं से हुआ भव्य स्वागत1
- 108 मीटर तिरंगे के साथ पन्ना में गूंजा देशभक्ति का संदेश एबीवीपी ने निकाली भव्य तिरंगा यात्रा, विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ लिया हिस्सा,प्रधानमंत्री के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को मिला समर्थन, शहर में दिखा राष्ट्रप्रेम का माहौल1
- Post by Chitrakootnewslive1
- ब्लॉक पहाड़ी चित्रकूट सिक्योरिटी गार्ड भर्ती को टोटल सीटे 500 एक हजार लोगों की भीड़ बेराजगार युवा परेशान ब्लॉक पहाड़ी सिक्योरिटी गार्ड भर्ती चार ब्लॉक में टोटल 500 पद निर्धारित किए गए बेरोजगार युवा परेशान एक हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ बी जे पी सरकार भ्रष्ट सरकार आखिर प्राइवेट भारती की भी उम्मीद नहीं1