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Hello, namaskar, main AAP sabka Bhai Sultan Khan, or play video, ek road, ke samasyam, se, banai, Hui hai, kripya. Mere support define namaste Hello, namaskar Mein AAP sabka Bhai Sultan a video ek road ke maksath ke saath banai hui hai

1 hr ago
user_Sultan Khan
Sultan Khan
रामनगर, नैनीताल, उत्तराखंड•
1 hr ago

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More news from उत्तराखंड and nearby areas
  • Hello, namaskar Mein AAP sabka Bhai Sultan a video ek road ke maksath ke saath banai hui hai
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    Hello, namaskar Mein AAP sabka Bhai Sultan a video ek road ke maksath ke saath banai hui hai
    user_Sultan Khan
    Sultan Khan
    रामनगर, नैनीताल, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर अब आपकी जेब पर पड़ने वाला है. कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर पार कर चुके हैं और इनके 150 डॉलर तक पहुंचने की आशंका है. भारत अपना आधा तेल खाड़ी देशों से खरीदता है. ऐसे में क्रूड ऑयल की यह आग देश में भारी महंगाई ला सकती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लग सकता है. भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि हम अपनी जरूरत का लगभग 30 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल सीधे मिडिल ईस्ट से खरीदते हैं. देश की रिफाइनरियां भी मुख्य रूप से इसी क्षेत्र के क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने के लिए ही डिजाइन की गई हैं. हालांकि, संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास 25 से 30 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ आपातकाल के लिए है, लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए नहीं.
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    ईरान-इजरायल युद्ध का सीधा असर अब आपकी जेब पर पड़ने वाला है. कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर पार कर चुके हैं और इनके 150 डॉलर तक पहुंचने की आशंका है. भारत अपना आधा तेल खाड़ी देशों से खरीदता है. ऐसे में क्रूड ऑयल की यह आग देश में भारी महंगाई ला सकती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रेक लग सकता है.
भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि हम अपनी जरूरत का लगभग 30 से 50 प्रतिशत कच्चा तेल सीधे मिडिल ईस्ट से खरीदते हैं. देश की रिफाइनरियां भी मुख्य रूप से इसी क्षेत्र के क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने के लिए ही डिजाइन की गई हैं. हालांकि, संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास 25 से 30 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व मौजूद है. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सिर्फ आपातकाल के लिए है, लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए नहीं.
    user_Aasif News Network
    Aasif News Network
    Painter and Decorator बाजपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • महिला दिवस पर खटीमा में मिलेट मेले की धूम, लेकिन मुख्य अतिथि महिला ब्लॉक प्रमुख ही रहीं नदारद ! खटीमा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया नारी शक्ति का जश्न मना रही है, वहीं उत्तराखंड के खटीमा में एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। ब्लॉक सभागार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भव्य मिलेट मेले का आयोजन किया गया था। विडंबना देखिए, जिस कार्यक्रम की मुख्य शोभा महिला ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा को बढ़ानी थी, वे खुद इस खास मौके पर कार्यक्रम से नदारद रहीं। मेले में सजे स्टॉल, उपस्थित महिलाएं और खाली मुख्य अतिथि की कुर्सी, खटीमा के ब्लॉक सभागार में सुबह से ही गहमागहमी रही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कृषि और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मोटे अनाज यानी 'मिलेट' को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई थी। मेले में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी प्रतिभा व उत्पादों का प्रदर्शन किया जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, चर्चा का विषय महिला सशक्तिकरण से हटकर ब्लॉक प्रमुख की गैर-मौजूदगी पर टिक गया। आयोजन की सूचना और निमंत्रण के बावजूद, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा कार्यक्रम में नहीं पहुँचीं। हालांकि, ब्लॉक प्रमुख की अनुपस्थिति के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने कार्यक्रम को जारी रखा। मेले का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को "श्री अन्न" मिलेट की खेती और उसके पौष्टिक फायदों के प्रति जागरूक करना था। स्टॉल्स पर मांडवा, झंगोरा और अन्य स्थानीय उत्पादों के व्यंजन परोसे गए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। सवाल तो अब यह उठ रहा है कि क्या यह केवल समय की कमी थी या कोई आपसी खींचतान, मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं मिला।विनीता सक्सेना जिलाध्यक्ष।
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    महिला दिवस पर खटीमा में मिलेट मेले की धूम, लेकिन मुख्य अतिथि महिला ब्लॉक प्रमुख ही रहीं नदारद !
खटीमा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहाँ पूरी दुनिया नारी शक्ति का जश्न मना रही है, वहीं उत्तराखंड के खटीमा में एक अजीबोगरीब स्थिति देखने को मिली। ब्लॉक सभागार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भव्य मिलेट मेले का आयोजन किया गया था। विडंबना देखिए, जिस कार्यक्रम की मुख्य शोभा महिला ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा को बढ़ानी थी, वे खुद इस खास मौके पर कार्यक्रम से नदारद रहीं। मेले में सजे स्टॉल, उपस्थित महिलाएं और खाली मुख्य अतिथि की कुर्सी, खटीमा के ब्लॉक सभागार में सुबह से ही गहमागहमी रही। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में कृषि और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मोटे अनाज यानी 'मिलेट' को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी लगाई गई थी। मेले में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी प्रतिभा व उत्पादों का प्रदर्शन किया जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, चर्चा का विषय महिला सशक्तिकरण से हटकर ब्लॉक प्रमुख की गैर-मौजूदगी पर टिक गया। आयोजन की सूचना और निमंत्रण के बावजूद, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा कार्यक्रम में नहीं पहुँचीं। हालांकि, ब्लॉक प्रमुख की अनुपस्थिति के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने कार्यक्रम को जारी रखा। मेले का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को "श्री अन्न" मिलेट की खेती और उसके पौष्टिक फायदों के प्रति जागरूक करना था। स्टॉल्स पर मांडवा, झंगोरा और अन्य स्थानीय उत्पादों के व्यंजन परोसे गए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। सवाल तो अब यह उठ रहा है कि क्या यह केवल समय की कमी थी या कोई आपसी खींचतान, मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर कोई जवाब नहीं मिला।विनीता सक्सेना जिलाध्यक्ष।
    user_Kush BAZPUR
    Kush BAZPUR
    Bajpur, Udam Singh Nagar•
    13 hrs ago
  • Post by Chandra Devi
    1
    Post by Chandra Devi
    user_Chandra Devi
    Chandra Devi
    काशीपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • मामला सिसोना गांव का है जैसा की विडियो में देख सकते हैं। कि एक व्यक्ति नशे में महिला के साथ अभद्रता और पत्थर से मारपीट कर रहा है। हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है कि किस बात को लेकर यह मामला है। उत्तराखंड पुलिस से निवेदन है इस मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत उचित दडंतात्मक कार्यवाही करें।
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    मामला सिसोना गांव का है जैसा की विडियो में देख सकते हैं। कि एक व्यक्ति नशे में महिला के साथ अभद्रता और पत्थर से मारपीट कर रहा है। 
हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है कि किस बात को लेकर यह मामला है।
उत्तराखंड पुलिस से निवेदन है इस मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत उचित दडंतात्मक कार्यवाही करें।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    1 hr ago
  • जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव से बिगड़ रही पहाड़ों की सुंदर तस्वीर पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा मानवीय गतिविधियों से उपज रही आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरण के दृष्टिगत विकास के मानक तय नहीं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव ने पहाड़ों की सुंदर तस्वीर बिगड़ रही है। जिसका भयानक खामियाजा बादल फटने, ग्लेशियर पिघलने, बाढ़ और सूखे के रूप भुगतना पढ़ रहा है। पहाड़ों की तबाही के सिलसिला का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, बल्कि तभी से शुरू हुआ, जब विकास की गति में तेजी आई । पहाड़ों को काटना प्रकृति के साथ सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है, जो पेड़ों को काटे बिना संभव नहीं। साथ ही भूस्खलन को बढ़ावा देती है और यह किसीसे छिपा नहीं की भूस्खलन की त्रासदियां हर वर्ष जानलेवा साबित होती है तो वृक्षों की कमी से कार्बन जैसी घातक गैसों में वृद्धि स्वाभाविक है, जो वायु प्रदूषण को न्यौता देना है और प्रदूषण रोकने के प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। फलस्वरूप पीएम 2.5 जैसी जहरीली गैसों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विकास के चलते अंधाधुंध होटल और रिजॉर्ट की संख्या के कोई मानक नहीं हैं, जबकि इतना तो तय होना चाहिए कि किसीभी क्षेत्र के क्षेत्रफल के हिसाब से विकास हो। साथ ही वाहनों की आवाजाही की संख्या भी क्षेत्र की क्षमता के अनुसार निर्धारित होनी चाहिए। मगर इस दिशा में कोई कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। जिस कारण कई तरह की दुश्वारियों से दोचार होना पड़ता है। बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, हाईवे और सुरंग खोदा जाना प्रकृति के साथ अन्याय है। बांधों का निर्माण क्षेत्रीय मौसम पर बड़ा असर डालता है, जो उस क्षेत्र के साथ नजदीकी क्षेत्रों की बारिश में अनिश्चितता पैदा करता है और कृषि, आर्थिकी और सामाजिक स्तर प्रभावित होता है। मानवीय गतिविधियों के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में एक बड़ा दुष्प्रभाव हिमालय भुगत रहा है। हालाकि इसकी इसके पीछे प्रमुख जिम्मेदार वैश्विक ताप में वृद्धि है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में मानवीय गतिविधि भी कम जिम्मेदार नहीं है। पहाड़ों में नदियों किनारे निर्माण, अत्यधिक वाहनों की आवाजाही, प्लास्टिक कचरा और बेहिसाब माइनिंग पर्यावरण पर अटैक जैसा है। हिमालय से जुड़े राज्य लेह लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में अभी तक किया गया विकास आपदाओं को जन्मदाता रहा है। लिहाजा प्रदूषण बढ़ रहा है तो नुकसान अनेक उठाने पड़ रहे हैं। जिस ओर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त जरूरत है। समय रहते इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में आपदाओं से निबटने के निबटने के लिए तैयार रहना होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट मानवीय कृत्य को जिम्मेदार मानती हैं आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ पर्यावरण व वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह कहते हैं कि अनियोजित माननीय विकास को लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ का विरोध करती हैं। विकास का आधार वैज्ञानिक होना चाहिए और पर्यावरण के अनुरूप होना चाहिए। भारतीय मौसम विभाग, वाडिया इंस्टीट्यूट हिमालयन जियोलॉजी और पर्यावरण मंत्रालय समेत कई अन्य रिपोर्ट आ चुकी हैं। एरीज भी हिमालय क्षेत्र की वायुमंडलीय स्थिति पर कई शोध कर चुका है, जो बताता है कि विकास पर्यावरण संरक्षण के आधार पर होना चाहिए। खनन से अधिक निकलती है मीथेन ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरण वैज्ञानिकों का शोध बताता है कि खनन से मीथेन गैस अधिक निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अधिक जिम्मेदार मानी जाती है। कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में मीथेन 40 प्रतिशत अधिक वैश्विक ताप बढ़ाती है। इधर पहाड़ों में निरंतर खनन जारी है तो जिम्मेदार कोई और नहीं इंसान है।
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    जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव से बिगड़ रही पहाड़ों की सुंदर तस्वीर 
पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा मानवीय गतिविधियों से उपज रही आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरण के दृष्टिगत विकास के मानक तय नहीं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव ने पहाड़ों की सुंदर तस्वीर बिगड़ रही है। जिसका भयानक खामियाजा बादल फटने, ग्लेशियर पिघलने, बाढ़ और सूखे के रूप भुगतना पढ़ रहा है।
पहाड़ों की तबाही के सिलसिला का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, बल्कि तभी से शुरू हुआ, जब विकास की गति में तेजी आई । पहाड़ों को काटना प्रकृति के साथ सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है, जो पेड़ों को काटे बिना संभव नहीं। साथ ही भूस्खलन को बढ़ावा देती है और यह किसीसे छिपा नहीं की भूस्खलन की त्रासदियां हर वर्ष जानलेवा साबित होती है तो वृक्षों की कमी से कार्बन जैसी घातक गैसों में वृद्धि स्वाभाविक है, जो वायु प्रदूषण को न्यौता देना है और प्रदूषण रोकने के प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। फलस्वरूप पीएम 2.5 जैसी जहरीली गैसों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विकास के चलते अंधाधुंध होटल और रिजॉर्ट की संख्या के कोई मानक नहीं हैं, जबकि इतना तो तय होना चाहिए कि किसीभी  क्षेत्र के क्षेत्रफल के हिसाब से विकास हो। साथ ही  वाहनों की आवाजाही की संख्या भी क्षेत्र की क्षमता के अनुसार निर्धारित होनी चाहिए। मगर इस दिशा में कोई कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। जिस कारण कई तरह की दुश्वारियों से दोचार होना पड़ता है। बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स,   हाईवे और सुरंग खोदा जाना प्रकृति के साथ अन्याय है। बांधों का निर्माण क्षेत्रीय मौसम पर बड़ा असर डालता है, जो उस क्षेत्र के साथ नजदीकी क्षेत्रों की बारिश में अनिश्चितता पैदा करता है और कृषि, आर्थिकी और सामाजिक स्तर प्रभावित होता है। मानवीय गतिविधियों के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में एक बड़ा दुष्प्रभाव हिमालय भुगत रहा है। हालाकि इसकी इसके पीछे प्रमुख जिम्मेदार वैश्विक ताप में वृद्धि है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में मानवीय गतिविधि भी कम जिम्मेदार नहीं है। पहाड़ों में नदियों किनारे निर्माण, अत्यधिक वाहनों की आवाजाही,  प्लास्टिक कचरा और बेहिसाब माइनिंग पर्यावरण पर अटैक जैसा है। हिमालय से जुड़े राज्य लेह लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में अभी तक किया गया विकास आपदाओं को जन्मदाता रहा है। लिहाजा प्रदूषण बढ़ रहा है तो नुकसान अनेक उठाने पड़ रहे हैं। जिस ओर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त जरूरत है। समय रहते इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में आपदाओं से निबटने के निबटने के लिए तैयार रहना होगा। 
पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट मानवीय कृत्य को जिम्मेदार मानती हैं
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ पर्यावरण व वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह कहते हैं कि अनियोजित माननीय विकास को लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ का विरोध करती हैं। विकास का आधार वैज्ञानिक होना चाहिए और पर्यावरण के अनुरूप होना चाहिए। भारतीय मौसम विभाग, वाडिया इंस्टीट्यूट हिमालयन जियोलॉजी और पर्यावरण मंत्रालय समेत कई अन्य रिपोर्ट आ चुकी हैं। एरीज भी हिमालय क्षेत्र की वायुमंडलीय स्थिति पर कई शोध कर चुका है, जो बताता है कि विकास पर्यावरण संरक्षण के आधार पर होना चाहिए।
खनन से अधिक निकलती है मीथेन 
ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरण वैज्ञानिकों का शोध बताता है कि खनन से मीथेन गैस अधिक निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अधिक जिम्मेदार मानी जाती है।  कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में मीथेन 40 प्रतिशत अधिक वैश्विक ताप बढ़ाती है। इधर पहाड़ों में निरंतर खनन जारी है तो जिम्मेदार कोई और नहीं इंसान है।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    11 hrs ago
  • तेज रफ्तार ट्रक का कहर: स्विफ्ट डिजायर और टेंपो को मारी टक्कर, 3 की दर्दनाक मौत। बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हरदिया चौराहे के पास रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने स्विफ्ट डिजायर कार और टेंपो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं। हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में एक की हालत गंभीर देखते हुए उसे रेफर कर दिया गया है, जबकि एक घायल का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि टेंपो में सवार एक व्यक्ति की हालत नाजुक होने पर परिजनों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कराया है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पूरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के हरदिया चौराहे के पास की बताई जा रही है।
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    तेज रफ्तार ट्रक का कहर: स्विफ्ट डिजायर और टेंपो को मारी टक्कर, 3 की दर्दनाक मौत।
बस्ती जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत हरदिया चौराहे के पास रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। 
तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने स्विफ्ट डिजायर कार और टेंपो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, 
जिनमें दो पुरुष और एक महिला शामिल हैं।
हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। 
घायलों में एक की हालत गंभीर देखते हुए उसे रेफर कर दिया गया है, जबकि एक घायल का जिला अस्पताल में इलाज जारी है।
बताया जा रहा है कि टेंपो में सवार एक व्यक्ति की हालत नाजुक होने पर परिजनों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कराया है।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों वाहनों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पूरी घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के हरदिया चौराहे के पास की बताई जा रही है।
    user_इस्लाम सलमानी ठाकुरद्वारा जिला मुरादाबाद
    इस्लाम सलमानी ठाकुरद्वारा जिला मुरादाबाद
    Salesperson ठाकुरद्वारा, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • रुद्रपुर में ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को सम्मोहित कर करीब 15 लाख रुपये के सोने के आभूषण ठग लिए। यह घटना कोतवाली क्षेत्र की शांति विहार कॉलोनी में रविवार दोपहर हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।जानकारी के अनुसार शांति विहार कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला रजनी गर्ग बाजार जाने के लिए घर से निकली थीं। जब वह रेलवे क्रॉसिंग मोड़ के पास पहुंचीं तो एक युवक ने उनसे किसी बाबा का नाम लेकर पता पूछा। महिला ने रास्ता बताया और आगे बढ़ने लगीं, तभी कुछ दूरी पर दो अन्य व्यक्ति, जो नकाब और हेलमेट पहने हुए थे, उनसे बातचीत करने लगे।आरोपियों ने महिला को बताया कि उनके परिवार पर बुरा साया है और इसी वजह से घर में परेशानियां चल रही हैं। बातचीत के दौरान ठगों ने महिला को इस तरह अपने प्रभाव में ले लिया कि उनकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो गई और वह उनके कहे अनुसार काम करने लगीं।इसके बाद महिला उनके कहने पर अपने घर गई और अलमारी का लॉकर खोलकर करीब 12 से 13 तोले सोने के आभूषण निकालकर आरोपियों को दे दिए। ठगों ने आभूषणों को सफेद कागज में लपेटकर एक पोटली बनाकर महिला को दे दी और भगवान का नाम लेते हुए पीछे मुड़कर न देखने और रास्ते में पोटली न खोलने की हिदायत दी।डरी हुई महिला घर पहुंची और पोटली को मंदिर में रख दिया। कुछ देर बाद शक होने पर जब उन्होंने पोटली खोली तो उसके अंदर आभूषणों की जगह पत्थर मिले। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी।सूचना मिलने के बाद रुद्रपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। सी ओ प्रशांत कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ,प्रशांत कुमार सीओ सिटी रूद्रपुर
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    रुद्रपुर में ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग महिला को सम्मोहित कर करीब 15 लाख रुपये के सोने के आभूषण ठग लिए। यह घटना कोतवाली क्षेत्र की शांति विहार कॉलोनी में रविवार दोपहर हुई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया।जानकारी के अनुसार शांति विहार कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला रजनी गर्ग बाजार जाने के लिए घर से निकली थीं। जब वह रेलवे क्रॉसिंग मोड़ के पास पहुंचीं तो एक युवक ने उनसे किसी बाबा का नाम लेकर पता पूछा। महिला ने रास्ता बताया और आगे बढ़ने लगीं, तभी कुछ दूरी पर दो अन्य व्यक्ति, जो नकाब और हेलमेट पहने हुए थे, उनसे बातचीत करने लगे।आरोपियों ने महिला को बताया कि उनके परिवार पर बुरा साया है और इसी वजह से घर में परेशानियां चल रही हैं। बातचीत के दौरान ठगों ने महिला को इस तरह अपने प्रभाव में ले लिया कि उनकी सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो गई और वह उनके कहे अनुसार काम करने लगीं।इसके बाद महिला उनके कहने पर अपने घर गई और अलमारी का लॉकर खोलकर करीब 12 से 13 तोले सोने के आभूषण निकालकर आरोपियों को दे दिए। ठगों ने आभूषणों को सफेद कागज में लपेटकर एक पोटली बनाकर महिला को दे दी और भगवान का नाम लेते हुए पीछे मुड़कर न देखने और रास्ते में पोटली न खोलने की हिदायत दी।डरी हुई महिला घर पहुंची और पोटली को मंदिर में रख दिया। कुछ देर बाद शक होने पर जब उन्होंने पोटली खोली तो उसके अंदर आभूषणों की जगह पत्थर मिले। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी।सूचना मिलने के बाद रुद्रपुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। सी ओ प्रशांत कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपियों की तलाश की जा रही है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
,प्रशांत कुमार सीओ सिटी रूद्रपुर
    user_Kush BAZPUR
    Kush BAZPUR
    Bajpur, Udam Singh Nagar•
    14 hrs ago
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