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एक रेस्क्यू टीम ने गांव के एक घर से दुनिया के सबसे जहरीले और 11 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक बाहर निकालकर मौत को मात देने वाली जीत हासिल की है। इस जोखिम भरे अभियान में रेस्क्यू टीम ने अपनी जान को खतरे में डालकर किंग कोबरा को सुरक्षित निकाला।

3 hrs ago
user_Manoj
Manoj
कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
3 hrs ago

एक रेस्क्यू टीम ने गांव के एक घर से दुनिया के सबसे जहरीले और 11 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक बाहर निकालकर मौत को मात देने वाली जीत हासिल की है। इस जोखिम भरे अभियान में रेस्क्यू टीम ने अपनी जान को खतरे में डालकर किंग कोबरा को सुरक्षित निकाला।

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  • कुछ बदमाशों के द्वारा अंबेडकर चौक में तोड़फोड़ की गई है।
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    कुछ बदमाशों के द्वारा अंबेडकर चौक में तोड़फोड़ की गई है।
    user_Dwarika prasad Yadaw
    Dwarika prasad Yadaw
    हरदीबाजार, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • रायगढ़ शहर में लगातार बढ़ रही लूटपाट की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोतवाली पुलिस ने दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जोगीडीपा निवासी सन्नी उर्फ प्रकाश कुमार सारथी और शाहीद सारथी पर 10 जून की रात दो अलग-अलग स्थानों पर लूट की वारदातों को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया है। पहली घटना रात करीब 10 बजे गंगाराम तालाब के पास हुई, जब चांदमारी निवासी किशन साहू अपने मित्र के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। आरोपियों ने उनका रास्ता रोककर गाली-गलौज की, उनकी जेब से नकदी छीनी और विरोध करने पर मारपीट करते हुए चाकू से हमला कर उनकी मोटरसाइकिल लूटकर फरार हो गए। इसके कुछ ही घंटों बाद, दूसरी वारदात में इंदिरानगर निवासी अभिषेक नागराज को उनके घर के पास रोककर आरोपियों ने चाकू दिखाया, मारपीट की और उनका मोबाइल फोन लूट लिया। इन गंभीर घटनाओं को देखते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान, दोनों ने लूट की इन वारदातों को स्वीकार किया। पुलिस ने उनके पास से लूटी गई बाइक, मोबाइल फोन और एक लोहे का चाकू बरामद किया है। कोतवाली पुलिस टीम ने, जिसमें थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल भी शामिल थे, इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लूटपाट कर आम जनता में भय का माहौल बनाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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    रायगढ़ शहर में लगातार बढ़ रही लूटपाट की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करते हुए कोतवाली पुलिस ने दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जोगीडीपा निवासी सन्नी उर्फ प्रकाश कुमार सारथी और शाहीद सारथी पर 10 जून की रात दो अलग-अलग स्थानों पर लूट की वारदातों को अंजाम देने का आरोप है। पुलिस ने उनके कब्जे से लूटी गई मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त चाकू बरामद कर लिया है।

पहली घटना रात करीब 10 बजे गंगाराम तालाब के पास हुई, जब चांदमारी निवासी किशन साहू अपने मित्र के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। आरोपियों ने उनका रास्ता रोककर गाली-गलौज की, उनकी जेब से नकदी छीनी और विरोध करने पर मारपीट करते हुए चाकू से हमला कर उनकी मोटरसाइकिल लूटकर फरार हो गए। इसके कुछ ही घंटों बाद, दूसरी वारदात में इंदिरानगर निवासी अभिषेक नागराज को उनके घर के पास रोककर आरोपियों ने चाकू दिखाया, मारपीट की और उनका मोबाइल फोन लूट लिया।

इन गंभीर घटनाओं को देखते हुए, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान, दोनों ने लूट की इन वारदातों को स्वीकार किया। पुलिस ने उनके पास से लूटी गई बाइक, मोबाइल फोन और एक लोहे का चाकू बरामद किया है। कोतवाली पुलिस टीम ने, जिसमें थाना प्रभारी निरीक्षक सुखनंदन पटेल भी शामिल थे, इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लूटपाट कर आम जनता में भय का माहौल बनाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
    user_Kumar Poptani
    Kumar Poptani
    Local News Reporter बिलासपुर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से अभद्र टिप्पणियां और भ्रामक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार, सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं की शिकायत के बाद लखनऊ, कानपुर और संतकबीर नगर समेत कई जिलों के साइबर थानों में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक पर कुछ अकाउंट्स द्वारा अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई थी। इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग परिवार और बेटियों के सम्मान को नहीं समझते, वे समाज की भावनाओं को भी नहीं समझ सकते। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कथित रूप से अभद्र टिप्पणियां और भ्रामक पोस्ट साझा किए जाने के मामले में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार, सपा कार्यकर्ताओं और नेताओं की शिकायत के बाद लखनऊ, कानपुर और संतकबीर नगर समेत कई जिलों के साइबर थानों में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक पर कुछ अकाउंट्स द्वारा अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की गई थी।

इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग परिवार और बेटियों के सम्मान को नहीं समझते, वे समाज की भावनाओं को भी नहीं समझ सकते।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने और दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_Akhil Mittal
    Akhil Mittal
    उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    6 hrs ago
  • खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इस गंभीर स्थिति के चलते छत्तीसगढ़ में लोगों को, विशेषकर सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक, बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संकट से राज्य के किसान बेहद परेशान हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो किसान कोई भी बड़ा कदम उठा सकते हैं, और इस पूरी स्थिति की जिम्मेदारी शासन की होगी।
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    खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इस गंभीर स्थिति के चलते छत्तीसगढ़ में लोगों को, विशेषकर सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक, बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इस संकट से राज्य के किसान बेहद परेशान हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो किसान कोई भी बड़ा कदम उठा सकते हैं, और इस पूरी स्थिति की जिम्मेदारी शासन की होगी।
    user_Akash Bhonsale
    Akash Bhonsale
    Bus charter बिलासपुर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • बिलासपुर के चकरभाठा क्षेत्र में स्थित बालाजी ढाबा में पुलिस ने होटल-ढाबा चेकिंग अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए ढाबा संचालक सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस को मौके पर 5 युवक सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते हुए मिले। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि ढाबा संचालक अवैध रूप से शराब पीने की सुविधा उपलब्ध करा रहा था। पुलिस ने इस मामले में आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
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    बिलासपुर के चकरभाठा क्षेत्र में स्थित बालाजी ढाबा में पुलिस ने होटल-ढाबा चेकिंग अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए ढाबा संचालक सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस को मौके पर 5 युवक सार्वजनिक स्थान पर शराब पीते हुए मिले। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि ढाबा संचालक अवैध रूप से शराब पीने की सुविधा उपलब्ध करा रहा था। पुलिस ने इस मामले में आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
    user_द संक्षेप
    द संक्षेप
    Media company बिलासपुर, बिलासपुर, छत्तीसगढ़•
    21 hrs ago
  • कोरबा जिले में हसदेव दर्री बैराज के पास हसदेव नदी जलकुंभी से पूरी तरह घिर गई है, जिससे नदी का दम घुट रहा है। सामने आई चौंकाने वाली तस्वीरों में नदी किसी मैदान जैसी दिखाई दे रही है, जिससे उसके जलीय जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
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    कोरबा जिले में हसदेव दर्री बैराज के पास हसदेव नदी जलकुंभी से पूरी तरह घिर गई है, जिससे नदी का दम घुट रहा है। सामने आई चौंकाने वाली तस्वीरों में नदी किसी मैदान जैसी दिखाई दे रही है, जिससे उसके जलीय जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने 'विशाल किसान रैली एवं कलेक्ट्रेट घेराव' का आयोजन किया। कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य गेट पर जमा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर-पोस्टर थामे सरकार विरोधी नारे लगाए, साथ ही "जय जवान, जय किसान" और "अत्याचार नहीं सहेंगे" के नारे बुलंद किए। इस घेराव को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और मुख्य द्वार पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को परिसर के अंदर जाने से रोका, जहाँ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए किसानों की समस्याओं और अपनी अन्य माँगों को रखा। प्रदर्शन के अंत में, प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें जनहित और किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण करने की माँग की गई है।
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    छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने 'विशाल किसान रैली एवं कलेक्ट्रेट घेराव' का आयोजन किया। कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य गेट पर जमा हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी के झंडे और बैनर-पोस्टर थामे सरकार विरोधी नारे लगाए, साथ ही "जय जवान, जय किसान" और "अत्याचार नहीं सहेंगे" के नारे बुलंद किए।

इस घेराव को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और मुख्य द्वार पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को परिसर के अंदर जाने से रोका, जहाँ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी खुद मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौजूद थे। प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए किसानों की समस्याओं और अपनी अन्य माँगों को रखा। प्रदर्शन के अंत में, प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें जनहित और किसानों की समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण करने की माँग की गई है।
    user_Manoj
    Manoj
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    13 hrs ago
  • नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ी चर्चा तेजी से फैल रही है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का कांग्रेस में विलय हो सकता है। सूत्रों के हवाले से किए जा रहे दावों के अनुसार, यदि यह विलय होता है तो लोकसभा में कांग्रेस सांसदों की संख्या 99 से बढ़कर लगभग 136 तक पहुंच सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कांग्रेस, टीएमसी या एनसीपी (एसपी) की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, और इन दावों को फिलहाल राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है। इसी बीच, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक बयान भी चर्चा में है। गहलोत ने कहा है कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कभी कांग्रेस से अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों को अब "घर वापसी" कर कांग्रेस के साथ आना चाहिए और राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी के भीतर संभावित असंतोष और विपक्षी एकता की रणनीति को देखते हुए इस तरह की चर्चाओं को बल मिल रहा है। फिर भी, सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या टीएमसी और एनसीपी (एसपी) वास्तव में कांग्रेस में शामिल होने जा रही हैं, या फिर यह केवल राजनीतिक अफवाह है। इसका जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएगा। यह समाचार विभिन्न सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है, और संबंधित दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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    नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ी चर्चा तेजी से फैल रही है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) का कांग्रेस में विलय हो सकता है। सूत्रों के हवाले से किए जा रहे दावों के अनुसार, यदि यह विलय होता है तो लोकसभा में कांग्रेस सांसदों की संख्या 99 से बढ़कर लगभग 136 तक पहुंच सकती है।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक कांग्रेस, टीएमसी या एनसीपी (एसपी) की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, और इन दावों को फिलहाल राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है। इसी बीच, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का एक बयान भी चर्चा में है। गहलोत ने कहा है कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कभी कांग्रेस से अलग होकर बने क्षेत्रीय दलों को अब "घर वापसी" कर कांग्रेस के साथ आना चाहिए और राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी के भीतर संभावित असंतोष और विपक्षी एकता की रणनीति को देखते हुए इस तरह की चर्चाओं को बल मिल रहा है।

फिर भी, सवाल अभी भी बरकरार है कि क्या टीएमसी और एनसीपी (एसपी) वास्तव में कांग्रेस में शामिल होने जा रही हैं, या फिर यह केवल राजनीतिक अफवाह है। इसका जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट हो पाएगा। यह समाचार विभिन्न सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित है, और संबंधित दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
    user_Akhil Mittal
    Akhil Mittal
    उदयपुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ की राजनीति में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष ने उन पर सीधा आरोप लगाया है कि उनकी नीतियाँ आदिवासियों के संरक्षण के बजाय रसूखदार उद्योगपतियों के फायदे के लिए काम कर रही हैं। कोंडागांव के मालगांव से सामने आई तस्वीरों ने इस 'नेता-उद्योगपति' गठजोड़ के दावों को बल दिया है, जिसके चलते पूरे बस्तर संभाग में तनाव का माहौल व्याप्त है। स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक जानकारियों के अनुसार, मालगांव में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासियों को बेदखल करने के पीछे कोई जन-कल्याण की योजना नहीं, बल्कि बड़े कॉरपोरेट घरानों और उद्योगपतियों के व्यावसायिक हित छिपे हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इशारे पर प्रशासनिक अमला आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन छीनकर पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश रच रहा है। इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन और आदिवासी समाज पर बढ़ते अत्याचारों के बावजूद मुख्यमंत्री साय की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि सरकार आम जनता के बजाय उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। विपक्ष का सीधा हमला है कि भाजपा जिस शासन को 'सुशासन' कह रही है, वह असल में 'आदिवासियों को उजाड़ो और पसंदीदा उद्योगपतियों को बसाओ' की नीति पर आधारित है। मालगांव की महिलाओं और बुजुर्गों की रोती-बिलखती तस्वीरें स्पष्ट करती हैं कि उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए आदिवासियों के अस्तित्व और सम्मान को दांव पर लगा दिया गया है। आदिवासी नेताओं का कहना है कि बस्तर की जनता ने अपनी जमीन कभी किसी उद्योगपति की तिजोरी भरने के लिए नहीं छोड़ी है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सीधा अल्टीमेटम दिया है कि वे जवाब दें कि बस्तर की इस पावन भूमि को उद्योगपतियों के हाथों क्यों बेचा जा रहा है और आदिवासियों को बेघर कर किसके बैंक खाते भरे जा रहे हैं। यह मामला अब सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनके चहेते उद्योगपतियों के खिलाफ यह आक्रोश आने वाले दिनों में एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है, जो साय सरकार की नींव हिलाने की क्षमता रखता है।
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    छत्तीसगढ़ की राजनीति में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। विपक्ष ने उन पर सीधा आरोप लगाया है कि उनकी नीतियाँ आदिवासियों के संरक्षण के बजाय रसूखदार उद्योगपतियों के फायदे के लिए काम कर रही हैं। कोंडागांव के मालगांव से सामने आई तस्वीरों ने इस 'नेता-उद्योगपति' गठजोड़ के दावों को बल दिया है, जिसके चलते पूरे बस्तर संभाग में तनाव का माहौल व्याप्त है।

स्थानीय सूत्रों और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक जानकारियों के अनुसार, मालगांव में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासियों को बेदखल करने के पीछे कोई जन-कल्याण की योजना नहीं, बल्कि बड़े कॉरपोरेट घरानों और उद्योगपतियों के व्यावसायिक हित छिपे हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इशारे पर प्रशासनिक अमला आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन छीनकर पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश रच रहा है। इतने बड़े पैमाने पर विस्थापन और आदिवासी समाज पर बढ़ते अत्याचारों के बावजूद मुख्यमंत्री साय की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जो दर्शाता है कि सरकार आम जनता के बजाय उद्योगपतियों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। विपक्ष का सीधा हमला है कि भाजपा जिस शासन को 'सुशासन' कह रही है, वह असल में 'आदिवासियों को उजाड़ो और पसंदीदा उद्योगपतियों को बसाओ' की नीति पर आधारित है।

मालगांव की महिलाओं और बुजुर्गों की रोती-बिलखती तस्वीरें स्पष्ट करती हैं कि उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए आदिवासियों के अस्तित्व और सम्मान को दांव पर लगा दिया गया है। आदिवासी नेताओं का कहना है कि बस्तर की जनता ने अपनी जमीन कभी किसी उद्योगपति की तिजोरी भरने के लिए नहीं छोड़ी है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सीधा अल्टीमेटम दिया है कि वे जवाब दें कि बस्तर की इस पावन भूमि को उद्योगपतियों के हाथों क्यों बेचा जा रहा है और आदिवासियों को बेघर कर किसके बैंक खाते भरे जा रहे हैं।

यह मामला अब सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनके चहेते उद्योगपतियों के खिलाफ यह आक्रोश आने वाले दिनों में एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकता है, जो साय सरकार की नींव हिलाने की क्षमता रखता है।
    user_Manoj
    Manoj
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    11 hrs ago
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