लखनादौन से सिस्टम को आईना दिखाती तस्वीरें: अंतिम यात्रा भी नदी के भरोसे, बारिश में बढ़ जाती है गंजटोला की मुश्किल उत्तम सेन संवाददाता | लखनादौन। सिवनी जिले के लखनादौन जनपद क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम पंचायत गणेशगंज के गंजटोला गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों और समाज के लोगों के सामने अंतिम यात्रा को कब्रिस्तान तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। गांव से कब्रिस्तान के बीच मुतिया नदी पड़ती है, जिसे पार करके ही अंतिम संस्कार के लिए पहुंचना पड़ता है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में यह रास्ता बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है। गंजटोला गांव और कब्रिस्तान के बीच मुतिया नदी होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे में अंतिम यात्रा लेकर नदी पार करना परिजनों और ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन परिस्थिति बन जाती है। एक ओर परिवार किसी अपने को अंतिम विदाई देने के दुख में होता है, वहीं दूसरी ओर कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए नदी पार करने की चिंता सामने रहती है। हाल ही में गंजटोला निवासी नईम शाह के निधन के बाद सामने आया वीडियो इस समस्या को फिर चर्चा में ले आया। परिजन और समाज के लोग जनाजा लेकर कब्रिस्तान की ओर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में मुतिया नदी को पार करना पड़ा। वीडियो में ग्रामीणों को नदी पार करते हुए देखा गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एक बार फिर गांव और कब्रिस्तान के बीच बेहतर रास्ते और पुल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए हैं। स्थानीय ग्रामीणों मतीन खान, फईम मोहम्मद, इरफान खान, शोहेल खान और शमीम खान का कहना है कि बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। जब नदी में पानी अधिक होता है तो ग्रामीणों को जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में अंतिम यात्रा को कब्रिस्तान तक पहुंचाने में देरी होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोगों के लिए सड़क और नदी पर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बेहद जरूरी है। सामान्य आवागमन के साथ-साथ आपात स्थिति और अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसरों पर भी रास्ते की समस्या सामने आती है। बारिश के मौसम में नदी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। सिस्टम पर सवाल गंजटोला की यह तस्वीर केवल एक गांव की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है। जब किसी गांव के लोगों को अंतिम यात्रा के लिए भी प्राकृतिक बाधा पार करनी पड़े, तो सड़क, पुल और सुरक्षित संपर्क मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि मौके की स्थिति का जायजा लें और गांव से कब्रिस्तान तक सुरक्षित पहुंच मार्ग की व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाएं। विशेष रूप से मुतिया नदी पर पुल या उपयुक्त आवागमन व्यवस्था होने से बरसात के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी कम हो सकती है। अब सवाल यह है कि आखिर गंजटोला के लोगों को इस समस्या से कब राहत मिलेगी? क्या हर बारिश में नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ेगा? क्या किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा के समय भी यही चुनौती बनी रहेगी? और क्या गांव तक स्थायी एवं सुरक्षित रास्ता पहुंचाने के लिए किसी हादसे का इंतजार करना जरूरी है? गंजटोला की यह तस्वीरें व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर रही हैं। आखिर ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
लखनादौन से सिस्टम को आईना दिखाती तस्वीरें: अंतिम यात्रा भी नदी के भरोसे, बारिश में बढ़ जाती है गंजटोला की मुश्किल उत्तम सेन संवाददाता | लखनादौन। सिवनी जिले के लखनादौन जनपद क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्राम पंचायत गणेशगंज के गंजटोला गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद परिजनों और समाज के लोगों के सामने अंतिम यात्रा को कब्रिस्तान तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। गांव से कब्रिस्तान के बीच मुतिया नदी पड़ती है, जिसे पार करके ही अंतिम संस्कार के लिए पहुंचना पड़ता है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में यह रास्ता बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता है। गंजटोला गांव और कब्रिस्तान के बीच मुतिया नदी होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का बहाव भी तेज हो जाता है। ऐसे में अंतिम यात्रा लेकर नदी पार करना परिजनों और ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन परिस्थिति बन जाती है। एक ओर परिवार किसी अपने को अंतिम विदाई देने के दुख में होता है, वहीं दूसरी ओर कब्रिस्तान तक पहुंचने के लिए नदी पार करने की चिंता सामने रहती है। हाल ही में गंजटोला निवासी नईम शाह के निधन के बाद सामने आया वीडियो इस समस्या को फिर चर्चा में ले आया। परिजन और समाज के लोग जनाजा लेकर कब्रिस्तान की ओर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में मुतिया नदी को पार करना पड़ा। वीडियो में ग्रामीणों को नदी पार करते हुए देखा गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने एक बार फिर गांव और कब्रिस्तान के बीच बेहतर रास्ते और पुल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए हैं। स्थानीय ग्रामीणों मतीन खान, फईम मोहम्मद, इरफान खान, शोहेल खान और शमीम खान का कहना है कि बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। जब नदी में पानी अधिक होता है तो ग्रामीणों को जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में अंतिम यात्रा को कब्रिस्तान तक पहुंचाने में देरी होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के लोगों के लिए सड़क और नदी पर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था बेहद जरूरी है। सामान्य आवागमन के साथ-साथ आपात स्थिति और अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसरों पर भी रास्ते की समस्या सामने आती है। बारिश के मौसम में नदी का बहाव तेज होने के कारण लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। सिस्टम पर सवाल गंजटोला की यह तस्वीर केवल एक गांव की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है। जब किसी गांव के लोगों को अंतिम यात्रा के लिए भी प्राकृतिक बाधा पार करनी पड़े, तो सड़क, पुल और सुरक्षित संपर्क मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि मौके की स्थिति का जायजा लें और गांव से कब्रिस्तान तक सुरक्षित पहुंच मार्ग की व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाएं। विशेष रूप से मुतिया नदी पर पुल या उपयुक्त आवागमन व्यवस्था होने से बरसात के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी कम हो सकती है। अब सवाल यह है कि आखिर गंजटोला के लोगों को इस समस्या से कब राहत मिलेगी? क्या हर बारिश में नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार करना पड़ेगा? क्या किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा के समय भी यही चुनौती बनी रहेगी? और क्या गांव तक स्थायी एवं सुरक्षित रास्ता पहुंचाने के लिए किसी हादसे का इंतजार करना जरूरी है? गंजटोला की यह तस्वीरें व्यवस्था के सामने एक सीधा सवाल खड़ा कर रही हैं। आखिर ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा?
- GPF का पैसा निकालने मांगी थी रिश्वत, लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने रंगे हाथ पकड़ा बाबू को । लोकेशन-मंडला स्लग-GPF का पैसा निकालने मांगी थी रिश्वत, रंगे हाथों लोकायुक्त ने पकड़ा एंकर-मंडला जिले के नारायणगंज विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आज सुबह जबलपुर लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। यहां पदस्थ बाबू नोखे लाल बेलिया को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। वी/ओ-शिकायतकर्ता दशरथ लाल बरमैया के मुताबिक, उनके GPF खाते से करीब एक लाख रुपए की राशि निकालने के एवज में बाबू द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने इसकी सूचना जबलपुर लोकायुक्त को दी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद आज सुबह लोकायुक्त की टीम नारायणगंज विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची। जैसे ही बाबू नोखे लाल बेलिया ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपए लिए, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। फिलहाल लोकायुक्त की टीम द्वारा आरोपी बाबू के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। मामले में आगे की जांच के बाद रिश्वत की मांग और कार्रवाई से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा हो सकेगा। वाइट-रेखा चक्रवर्ती,उप पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त जबलपुर वाइट-दशरथ लाल बरमैया, शिकायतकर्ता1
- कहानी में कचरा डंपिंग यार्ड की मांगकहानी में कचरा डंप करने के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने से नगर में सड़क किनारे ही कचरा फेंका जा रहा है कहानी में कचरा डंपिंग यार्ड की मांग घंसौर | 13 अगस्त 2026, गुरुवार। घंसौर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कहानी में कचरा डंप करने के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होने से नगर में सड़क किनारे ही कचरा फेंका जा रहा है। इससे जगह-जगह गंदगी फैल रही है और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामवासियों का कहना है कि कचरा व्यवस्था को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन 13 अगस्त तक कचरा डंप करने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से सरकारी भूमि चिन्हित कर कचरा डंप यार्ड बनाने की मांग की है, ताकि सड़क किनारे कचरा फेंकने की समस्या से निजात मिल सके।1
- दमोह- दमोह में भव्य तिरगा यात्रा, तहसील ग्राउंड से शुरु हुई यात्रा1
- नवोदय विद्यालय की प्राचार्य पर महिला थाने में छेड़छाड़ का मामला दर्ज छात्रा ने लगाई थी गंभीर आरोप1
- Post by Sourabh Kumar nath1
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