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Lucknow Munshi Priya Chauraha ka najara kaisa hota hai bhej dijiye aaye din yahan jaam Laga rahata hai all India
Dhananjay Kumar Kushwaha
Lucknow Munshi Priya Chauraha ka najara kaisa hota hai bhej dijiye aaye din yahan jaam Laga rahata hai all India
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- all India1
- Post by एनामुल हक1
- सरिया का माहौल देखा भाई1
- दिल्ली में हीटवेव की चुनौती को देखते हुए सरकार पूरी तरह एक्शन में है और हर मंत्रालय को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मजदूरों के लिए दोपहर 1 से 4 बजे तक विश्राम, पानी और छाया की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।स्कूलों में बच्चों के लिए ठंडा पानी, स्वच्छ वातावरण और ORS उपलब्ध कराया जा रहा है। परिवहन विभाग बस शेल्टरों पर पानी के काउंटर और DTC बसों में कोल्ड बॉक्स के जरिए ठंडा पानी उपलब्ध करा रहा है। MCD, PWD और स्वास्थ्य विभाग समेत सभी एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं, जबकि फायर, पावर और जल विभाग निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्रीमती @gupta_rekha1
- घटना का सार: मजबूरी: जिटू मुंडा अपनी मृत बहन के खाते से ₹19,300 निकालने गए थे, जो उनकी बहन की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार और अन्य जरूरतों के लिए आवश्यक थे। प्रशासनिक अड़चन: बैंक ने नियम का हवाला देते हुए खाताधारक (मृतक) को आने या कानूनी दस्तावेज (डेथ सर्टिफिकेट/सक्सेशन सर्टिफिकेट) दिखाने को कहा। अशिक्षा और लाचारी: जिटू अनपढ़ थे और उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं थी। हृदयविदारक कदम: जब बैंक ने पैसे नहीं दिए, तो जिटू ने लाचार होकर श्मशान से अपनी बहन के अवशेष (हड्डियां) एक कपड़े में लपेटे और 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुँच गए, ताकि वे साबित कर सकें कि उनकी बहन अब इस दुनिया में नहीं है। इस घटना से उठे सवाल: संवेदनहीन सिस्टम: क्या बैंक के कर्मचारियों में इतनी मानवीयता नहीं थी कि वे एक ग्रामीण की लाचारी को समझें और उन्हें डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की उचित प्रक्रिया बताते, बजाय इसके कि उन्हें ऐसी सीमा तक जाने पर मजबूर किया जाए? डिजिटल खाई: एक तरफ हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि गरीब और अनपढ़ लोगों के लिए बैंकिंग प्रक्रियाएं एक दुःस्वप्न (nightmare) बनी हुई हैं। मृत्यु के बाद की प्रक्रिया: भारत में मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी (legal heir) के कागजात बनवाना, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, बहुत जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया है। यह घटना न केवल ओडिशा, बल्कि पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक शर्मनाक पल है, जो सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है।2
- Post by डुमरा पंचायत की जनता जिंदाबाद1
- Post by Mojahid husain1
- Post by डुमरा पंचायत की जनता जिंदाबाद1