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भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं और पर्सनल लॉ के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। शहर काजी ने स्पष्ट किया कि क्रिमिनल लॉ और सिविल लॉ का पालन सभी करते हैं, लेकिन पर्सनल लॉ व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इस पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही संचालित किया जाए और धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं और पर्सनल लॉ के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। शहर काजी ने स्पष्ट किया कि क्रिमिनल लॉ और सिविल लॉ का पालन सभी करते हैं, लेकिन पर्सनल लॉ व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इस पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही संचालित किया जाए और धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
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- अनिकेत बारी के निर्देशन में नागौद में 'डांस दिल से सीजन 2' डांस क्रीड्स मॉडलिंग कॉम्पटिशन का भव्य आयोजन किया गया। बच्चों के जज्बातों को मंच के माध्यम से निखारने के उद्देश्य से अनिकेत डांस स्टूडियो प्रोजेक्ट के तहत इस प्रतियोगिता का आयोजन शिवम त्रिपाठी और अनिकेत बारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती नीलम मिश्रा मौजूद रहीं, जबकि अध्यक्षता काया धनवानी ने की। प्रतियोगिता में दिल्ली के रिंकू जैज फुंक और अमानगंज की आशी नायक ने जज की भूमिका निभाई। प्रतियोगिता के स्टार जूनियर वर्ग में नागौद के शिवा त्रिपाठी प्रथम, नागौद की ही आशी प्रजापति द्वितीय और सतना की तेजस्वी गौतम तृतीय स्थान पर रहीं। जूनियर वर्ग में प्रयागराज के शिवांश कुशवाहा ने प्रथम, जबलपुर की प्रियंका ठाकुर ने द्वितीय और सतना के अंशु बागरी ने तृतीय स्थान हासिल किया। सीनियर वर्ग में इंदौर के पवन प्रथम और दिल्ली के लोहार द्वितीय रहे। ड्यू वर्ग में हरियाणा के साहिल और अभिषेक प्रथम, प्रयागराज की रेशु और नंदिनी द्वितीय तथा कानपुर के सर्वेश और प्रियंका तृतीय स्थान पर रहे। ग्रुप वर्ग में प्रयागराज के 'बीट बंगशिंग करूँ' ने प्रथम, दिल्ली के 'चटकीला करू' ने द्वितीय और सतना के 'कलयुग करु' ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम में अतिथियों व निर्णायकों के साथ-साथ नूर भाई जान वाला चतुर्वेदी, सुरेश कुमार सोनी, रीवा के उमेश बारी, सतना के रामस्वरूप बारी, कमांक्षा कुमारी और सोनू भाई जान को सम्मानित किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में अनिकेत डांस स्टूडियो टीम के सदस्य अर्पित तिवारी, सौरभ मिश्रा, हर्षिनी सिंह, आकांक्षा माझी, श्रेया सिंह, सामी वर्मा, अर्पित दाहिया, शिवांक सोनी, अंकित वर्मा, ऋषि सिंह परिहार, सचिन यादव, धनंजय और योगेश का विशेष सराहनीय सहयोग रहा।1
- भोपाल में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं और पर्सनल लॉ के अनुसार जीवन जीने का अधिकार देता है। शहर काजी ने स्पष्ट किया कि क्रिमिनल लॉ और सिविल लॉ का पालन सभी करते हैं, लेकिन पर्सनल लॉ व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा हुआ विषय है। इसलिए इस पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही संचालित किया जाए और धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।1
- मध्य प्रदेश विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास होने के बाद भोपाल के यादगार-ए-शाहजहानी पार्क में मुस्लिम समाज ने मंगलवार को धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने UCC को "काला कानून" करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस धरने में बड़ी संख्या में मुस्लिम पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। धरने में शामिल हुए भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने ऐलान किया कि UCC को अदालत में चुनौती दी जाएगी और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून केवल मुसलमानों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। आरिफ मसूद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में "एक देश, एक कानून" की बात करती है, तो किसी भी वर्ग को इससे अलग नहीं रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि जब कुछ समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है, तो "एक देश, एक कानून" का दावा सही नहीं माना जा सकता। आरिफ मसूद ने चेतावनी दी कि यह विरोध केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा और आज से प्रदेशभर में विरोध-प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने भी मांग पूरी न होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप देने की बात कही। पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा।4
- 'गोदी मीडिया' पर तीखा तंज कसते हुए एक नया वीडियो सामने आया है। "एक वीडियो ये भी!" कहते हुए मीडिया के रवैये पर निशाना साधा गया है।1
- मध्य प्रदेश विधानसभा में छात्रों के मुद्दे पर भारी सियासी संग्राम छिड़ गया है। कैलाश विजयवर्गीय के कथित "कीड़ा" वाले बयान पर कांग्रेस ने तीखा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस का आरोप है कि इस बयान से छात्रों का अपमान हुआ है और मंत्री को इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर जोरदार हंगामा हुआ है, जिससे छात्रों के सम्मान और अधिकारों पर नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। यह मामला अब प्रदेश की राजनीति में गरमा गया है और इस पर छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर भी सबकी नजर बनी हुई है।1
- मध्यप्रदेश विधानसभा में UCC बिल पारित होने पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रदेशवासियों को बधाई दी है। इस ऐतिहासिक कदम के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी का आभार व्यक्त किया। कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने पहले जिन्ना के आगे घुटने टेके थे और आज दो मुस्लिम विधायकों के सामने अपने घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बता दिया है कि वह हिंदुओं के साथ नहीं है और UCC का विरोध कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जनसंख्या पर नियंत्रण हिंदुस्तान की माँग है।1
- मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को विपक्ष के भारी विरोध और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया। सदन के भीतर सरकार द्वारा इस विधेयक को मंजूरी दिलाए जाने के बाद विधानसभा के बाहर भी इसका विरोध तेज हो गया है। मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं ने कानून पर गंभीर आपत्ति जताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। विधेयक पारित होने के बाद भोपाल के शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार देता है, जिसमें अपनी धार्मिक मान्यताओं और पर्सनल लॉ के अनुसार जीवन जीने का अधिकार शामिल है। शहर काजी ने स्पष्ट किया कि लोग क्रिमिनल लॉ और सिविल लॉ का पालन बिना किसी विवाद के करते हैं, लेकिन पर्सनल लॉ व्यक्तिगत और धार्मिक जिंदगी से जुड़ा मामला है और इसमें किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। शहर काजी ने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की है कि जो मामले पर्सनल लॉ के तहत संचालित होते हैं, उन्हें उसी व्यवस्था के अनुसार चलने दिया जाए। उन्होंने आगाह किया कि यदि इस प्रकार का कानून लागू किया जाता है तो भविष्य में कई नए सामाजिक और कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं।2