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जबलपुर के बरेला जुनवानी महंगवा क्षेत्र में कई सालों से पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में आवागमन का रास्ता पूरी तरह से बाधित हो जाता है, क्योंकि पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। इस स्थिति के चलते क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मानसून के दौरान जुनवानी का यह रास्ता "समंदर" में तब्दील हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन और भी दुष्कर हो जाता है। ऐसे में प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी और कब जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी।
Deepak Vishawakarma
जबलपुर के बरेला जुनवानी महंगवा क्षेत्र में कई सालों से पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में आवागमन का रास्ता पूरी तरह से बाधित हो जाता है, क्योंकि पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। इस स्थिति के चलते क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मानसून के दौरान जुनवानी का यह रास्ता "समंदर" में तब्दील हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन और भी दुष्कर हो जाता है। ऐसे में प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी और कब जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी।
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- आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर पूरे देश सहित जबलपुर के बरेला में भी यह दिन बड़े हर्ष, उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर आयोजित इस देशव्यापी अभियान के तहत लोगों से योग को अपने जीवन के स्वाभाविक आचरण में उतारने की भावपूर्ण अपील की गई। इस अवसर पर नगर परिषद बरेला द्वारा वार्ड क्रमांक 11 स्थित सार्वजनिक गार्डन में एक वृहद योग अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसने 'करें योग, रहें निरोग' के मूल मंत्र को चरितार्थ किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह भी कहा कि योग वर्तमान की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से लड़ने का सबसे सरल उपाय है। इस गरिमामयी आयोजन में नगर के प्रबुद्ध जन, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रबुद्ध नागरिक और नगर परिषद के अधिकारी व कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से विभिन्न योगासनों और प्राणायाम का अभ्यास करते हुए स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संकल्प लिया।1
- ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ, एक ‘धर्म संगठन’ ने बाबा से प्रार्थना की है कि मन को साफ और निर्मल किया जाए, ताकि उसमें कोई बुराई न रह सके और केवल अच्छाई ही बनी रहे। संगठन का कहना है कि वे दूसरों के लिए अच्छे काम करते हैं और सच्ची राहों पर चलते हैं, क्योंकि उनका दृढ़ विश्वास है कि ‘कर भला सो हो भला’।1
- जबलपुर के गढ़ा थाना क्षेत्र के कृपाल चौक में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक युवक अपने दोस्त की एक्टिवा गाड़ी की डिक्की में मिले देसी कट्टे से गोली लगने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया। लगभग 20 वर्षीय घायल युवक शुभम ठाकुर अपने दोस्त भारत की एक्टिवा गाड़ी लेकर घर आया था। घर में गैस खत्म हो जाने पर वह गाड़ी लेकर गैस भरवाने निकला था, और इसी दौरान जब उसने गाड़ी की डिक्की खोली, तो उसमें एक देसी कट्टा मिला। बताया जा रहा है कि शुभम उस कट्टे को घर के अंदर रखने के लिए उठा रहा था, तभी अचानक ट्रिगर दब गया और गोली सीधे उसके हाथ में जा लगी। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत शुभम को मेडिकल अस्पताल पहुँचाया। इस घटना ने इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है, और यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर एक सामान्य गाड़ी में अवैध हथियार कैसे पहुँचा और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। फिलहाल, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह अवैध हथियार गाड़ी में किसने रखा और इसका असली मालिक कौन है। यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि अवैध हथियार न केवल अपराध के लिए, बल्कि आम लोगों की जान के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुके हैं।1
- बरेला थाना अंतर्गत एक महिला ने अपने पति से परेशान होकर जहर खा लिया। जानकारी के अनुसार, महिला का पति अत्यधिक शराब का सेवन करता था, जिसके कारण वह अक्सर परेशान रहती थी और इसी परेशानी के चलते उसने यह कदम उठाया।1
- एक पोस्ट में इस बात पर हैरानी व्यक्त की गई है कि किसी व्यक्ति को इतना भयभीत पहले कभी नहीं देखा गया। इसमें यह सवाल भी उठाया गया है कि यदि कोई पढ़ा-लिखा होता, तो क्या वह सीधे आँख में आँख डालकर बात कर पाता।1
- अपने खिलाफ दर्ज मामले पर व्यक्ति ने अपना व्यक्तिगत पक्ष रखा है, जिसमें उन्होंने कानून और न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान व्यक्त किया और कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य हमेशा समाज के कमजोर और पीड़ित लोगों की आवाज़ उठाना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी किसी अनजानी गलती से किसी को ठेस पहुँची है, तो उन्हें उसका खेद है, और अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे वीडियो को पूरा देखें, अपनी राय शालीन भाषा में दें और किसी भी प्रकार की अफवाह या आपत्तिजनक टिप्पणी से बचें, यह इंगित करते हुए कि दुष्कर्म पीड़ित ब्राह्मण समाज की बिटिया को न्याय दिलाना उन्हें महंगा पड़ा है।1
- दमोह जिले में गेहूं और अन्य अनाज के भंडारण में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवा की दुर्गंध से बच्चों की दुखद मौत के बाद, कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिलेवासियों से विशेष सावधानी बरतने की मार्मिक अपील की है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि अनाज संरक्षण के लिए उपयोग की जाने वाली ये दवाएं अत्यंत विषैली होती हैं और इनके उपयोग के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि इन दवाओं को बच्चों की पहुँच से दूर एक सुरक्षित स्थान पर रखें और इनके उपयोग के समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने दवा के उपयोग संबंधी निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ने और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने पर जोर दिया। यदि दवा की तीव्र गंध, सांस लेने में परेशानी, चक्कर आना या कोई अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई दें, तो तत्काल प्रभावित व्यक्ति को खुले स्थान पर ले जाकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिलाने की सलाह दी गई है। कलेक्टर ने इस बात पर भी बल दिया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि अनाज भंडारण में प्रयुक्त रसायनों का उपयोग पूरी सतर्कता के साथ करें और बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।1
- जबलपुर के बरेला जुनवानी महंगवा क्षेत्र में कई सालों से पुल का निर्माण नहीं हुआ है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में आवागमन का रास्ता पूरी तरह से बाधित हो जाता है, क्योंकि पुल के ऊपर से पानी बहने लगता है। इस स्थिति के चलते क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मानसून के दौरान जुनवानी का यह रास्ता "समंदर" में तब्दील हो जाता है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन और भी दुष्कर हो जाता है। ऐसे में प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी और कब जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी।1