सोनभद्र के अनपरा में एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में ‘वन दरोगा पर मोबाइल और ट्रैक्टर लूटने का आरोप’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद, एक खोजी पत्रकार द्वारा इसकी पड़ताल की गई है। इस पड़ताल में सामने आए प्रशासनिक विरोधाभासों ने पूरी व्यवस्था को विधिक कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह घटना 3 तारीख को घटित हुई थी, जबकि 5 तारीख के अखबार में यह सुर्खियाँ बनी। पड़ताल के अनुसार, मानसून और बुआई के मौसम में, जहाँ ग्रामीण सीमांकन के अभाव में पीढ़ियों से परंपरागत खेती करते आ रहे हैं, वहाँ एक किराए के ट्रैक्टर को स्थानीय वन कर्मियों ने रोका। ट्रैक्टर चालक का आरोप है कि वन कर्मियों द्वारा की गई बर्बर मारपीट के कारण उसे अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, जिसके बाद उसने आत्मरक्षा में ट्रैक्टर को अपने निजी आवास के पार्किंग शेड में खड़ा कर दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि वन कर्मियों ने घर में घुसकर महिलाओं से मोबाइल फोन जबरन छीने ताकि ज्यादती का कोई वीडियो बाहर न आ सके। इसके बाद विभाग ने स्वयं 112 पुलिस को 'गाड़ी चढ़ाने' की झूठी सूचना देकर गुमराह किया और फिर, भारी दबाव बनाकर, बिना चाबी के ही घर के भीतर से ट्रैक्टर को जबरन खिंचवा लिया गया, जिसका लाइव वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है। इस मामले में एक बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब 5 तारीख की शाम लगभग 7:00 बजे प्रभाग के डीएफओ (DFO) से बात की गई। दो दिन बीत जाने और खबर प्रकाशित होने के बाद भी शीर्ष स्तर पर इस गंभीर जमीनी हकीकत की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। यह स्थिति प्रशासनिक नियमावली पर गंभीर सवाल उठाती है, जिसके तहत प्रतिदिन की कार्यवाहियों का लेखा-जोखा उसी दिन उच्चाधिकारियों तक पहुँचना अनिवार्य है। प्रश्न उठता है कि स्थानीय रेंजर और दरोगा ने इस जमीनी सच को शीर्ष स्तर से क्यों छुपाया? क्या यह अपनी पुरानी रंजिश और सीज़र (जब्ती) की विधिक त्रुटियों पर पर्दा डालने के लिए उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास था? इस तानाशाही और अधिकार क्षेत्र के खुले उल्लंघन के खिलाफ पीड़ित परिवार ने माननीय मुख्यमंत्री जी के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर एक आधिकारिक शिकायत (संदर्भ संख्या: 40020026012739) दर्ज कराई है। शिकायत में घर में घुसकर छेड़छाड़, अभद्रता और अनुसूचित जाति के उत्पीड़न जैसे गंभीर और गैर-जमानती आरोप शामिल हैं। इस मुस्तैद पड़ताल के बाद रेणुकूट वन अधिकारी ने एक जिम्मेदार रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों को बैठक के लिए बुलाया है, जिससे न्याय की उम्मीद जगी है। पत्रकारिता का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार लाना बताया गया है, न कि किसी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना।
सोनभद्र के अनपरा में एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र में ‘वन दरोगा पर मोबाइल और ट्रैक्टर लूटने का आरोप’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद, एक खोजी पत्रकार द्वारा इसकी पड़ताल की गई है। इस पड़ताल में सामने आए प्रशासनिक विरोधाभासों ने पूरी व्यवस्था को विधिक कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह घटना 3 तारीख को घटित हुई थी, जबकि 5 तारीख के अखबार में यह सुर्खियाँ बनी। पड़ताल के अनुसार, मानसून और बुआई के मौसम में, जहाँ ग्रामीण सीमांकन के अभाव में पीढ़ियों से परंपरागत खेती करते आ रहे हैं, वहाँ एक किराए के ट्रैक्टर को स्थानीय वन कर्मियों ने रोका। ट्रैक्टर चालक का आरोप है कि वन कर्मियों द्वारा की गई बर्बर मारपीट के कारण उसे अपनी जान का खतरा महसूस हुआ, जिसके बाद उसने आत्मरक्षा में ट्रैक्टर को अपने निजी आवास के पार्किंग शेड में खड़ा कर दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि वन कर्मियों ने घर में घुसकर महिलाओं से मोबाइल फोन जबरन छीने ताकि ज्यादती का कोई वीडियो बाहर न आ सके। इसके बाद विभाग ने स्वयं 112 पुलिस को 'गाड़ी चढ़ाने' की झूठी सूचना देकर गुमराह किया और फिर, भारी दबाव बनाकर, बिना चाबी के ही घर के भीतर से ट्रैक्टर को जबरन खिंचवा लिया गया, जिसका लाइव वीडियो साक्ष्य भी मौजूद है। इस मामले में एक बड़ा विरोधाभास तब सामने आया जब 5 तारीख की शाम लगभग 7:00 बजे प्रभाग के डीएफओ (DFO) से बात की गई। दो दिन बीत जाने और खबर प्रकाशित होने के बाद भी शीर्ष स्तर पर इस गंभीर जमीनी हकीकत की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। यह स्थिति प्रशासनिक नियमावली पर गंभीर सवाल उठाती है, जिसके तहत प्रतिदिन की कार्यवाहियों का लेखा-जोखा उसी दिन उच्चाधिकारियों तक पहुँचना अनिवार्य है। प्रश्न उठता है कि स्थानीय रेंजर और दरोगा ने इस जमीनी सच को शीर्ष स्तर से क्यों छुपाया? क्या यह अपनी पुरानी रंजिश और सीज़र (जब्ती) की विधिक त्रुटियों पर पर्दा डालने के लिए उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास था? इस तानाशाही और अधिकार क्षेत्र के खुले उल्लंघन के खिलाफ पीड़ित परिवार ने माननीय मुख्यमंत्री जी के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर एक आधिकारिक शिकायत (संदर्भ संख्या: 40020026012739) दर्ज कराई है। शिकायत में घर में घुसकर छेड़छाड़, अभद्रता और अनुसूचित जाति के उत्पीड़न जैसे गंभीर और गैर-जमानती आरोप शामिल हैं। इस मुस्तैद पड़ताल के बाद रेणुकूट वन अधिकारी ने एक जिम्मेदार रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों को बैठक के लिए बुलाया है, जिससे न्याय की उम्मीद जगी है। पत्रकारिता का उद्देश्य व्यवस्था में सुधार लाना बताया गया है, न कि किसी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना।
- मीरजापुर पुलिस ने पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के निर्देशानुसार एक विशेष 12 घंटे का अभियान 'ऑपरेशन चक्रव्यूह' चलाया है, जिसके तहत जनपद में बड़ी कार्रवाई की गई। इस अभियान के दौरान जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कुल 31 वांछित, वारंटी और अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 23 वारंटी, 4 वांछित अपराधी और 4 अन्य आरोपी शामिल हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों के विरुद्ध यह अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा।1
- मीरजापुर के मड़िहान थाना क्षेत्र में दिनांक 03.07.2026 को सचिन कटारे नामक व्यक्ति ने अपने ड्राइवर सुनील कुमार यादव और सेल्समैन राजकुमार प्रजापति के साथ हुई कथित लूट की सूचना दी थी। शिकायत के अनुसार, दिनांक 02.07.2026 को ये दोनों दुकान का माल बेचकर मीरजापुर लौट रहे थे, तभी मड़िहान के दाती बेला मंदिर के पास दो अज्ञात मोटरसाइकिल सवारों ने उनसे बिक्री के पैसों से भरा बैग छीन लिया। इस सूचना पर मड़िहान पुलिस ने वादी की तहरीर के आधार पर मु0अ0सं0- 164/2026 धारा 309(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस अधीक्षक मीरजापुर, अपर्णा रजत कौशिक, ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और बरामदगी के लिए पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन और क्षेत्रांधिकारी ऑपरेशन के नेतृत्व में तीन टीमों का गठन कर आवश्यक निर्देश दिए थे। चालक और सेल्समैन ने बताया था कि घटना वाले दिन वे लगभग 12:30 बजे मीरजापुर के बाजीराव कटरा से सप्लाई के लिए निकले थे और मड़िहान, जमुई, कलवारी, घोरावल, बनरदेवा, नदीहार राजगढ़, भावा होते हुए वापस मीरजापुर जा रहे थे, जब बेला मंदिर के पास यह कथित लूट हुई। हालांकि, विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी डेटा, मानवीय खुफिया जानकारी और अन्य सबूतों के आधार पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि ड्राइवर सुनील कुमार यादव और सेल्समैन राजकुमार प्रजापति ने खुद ही आर्थिक तंगी और बंधन बैंक के लोन के कारण सुनियोजित तरीके से योजना बनाई थी। उन्होंने बिक्री से मिले पैसे को निजी उपयोग के लिए आपस में बांट लिया था। घटना को वास्तविक दिखाने के लिए सुनील कुमार और राजकुमार ने अपनी गाड़ी के अगले बाएं टायर को धारदार/नुकीले औजार या गिट्टी पर चढ़ाकर फाड़ दिया और गाड़ी में रखे जैक से शीशे को तोड़ा था। इस प्रकार, पुलिस और मालिक सचिन कटारे को लूट की एक मनगढ़ंत कहानी बनाकर झूठी सूचना दी गई थी। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर थाना मड़िहान पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि मड़िहान क्षेत्र में हुई यह 'लूट' की घटना वास्तव में चालक और सेल्समैन द्वारा पैसे हड़पने की एक सुनियोजित साजिश थी।1
- झारखंड में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत चिनिया प्रखंड में कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इसी क्रम में, रविवार दोपहर पंचायत सेवक सह प्रखंड मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रभारी पवन रजक ने प्रखंड के बेता एवं बिलतीखैर गाँव में डोर-टू-डोर चल रहे पुनरीक्षण कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान, पवन रजक ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लगी आंगनबाड़ी सेविकाओं और संबंधित कर्मियों से कार्य की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रत्येक पात्र मतदाता का सत्यापन सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटना नहीं चाहिए और अपात्र नामों की पहचान पूरी पारदर्शिता के साथ की जानी चाहिए। रजक ने कर्मियों को घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने, आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करने और समयबद्ध तरीके से पुनरीक्षण कार्य पूरा करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी कर्मी पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता से कार्य कर रहे हैं।1
- बिहार में वर्तमान में कई बड़ी कंपनियाँ और औद्योगिक इकाइयाँ कार्यरत हैं। राज्य के छह शहरों में खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल क्षेत्रों में कुल 30 नई औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (आईटी), अमेज़न (लॉजिस्टिक्स) और पारस हेल्थकेयर (स्वास्थ्य सेवा) जैसी प्रमुख कंपनियाँ पटना और अन्य शहरों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। पटना और उसके आसपास का क्षेत्र व्यापारिक और कॉर्पोरेट कार्यालयों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है, जहाँ आईटी और टेक सेक्टर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियाँ मौजूद हैं। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पारस हेल्थकेयर (गुलज़ारबाग, पटना) और बिल्टएक्स (कंस्ट्रक्शन/अस्पताल निर्माण) सक्रिय हैं, वहीं एफएमसीजी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अमेज़न का फुलफिलमेंट सेंटर और डिलीवरी हब भी संचालित है। इसके अतिरिक्त, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) के तहत मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और पटना सहित कई शहरों में औद्योगिक इकाइयों का विस्तार हो रहा है, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण और टेक्सटाइल की 30 नई फैक्ट्रियाँ लगाई जा रही हैं। सीमेंट व निर्माण क्षेत्र में लक्ष्मी सीमेंट एंड सिरेमिक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड और बालमुकुंद कॉन्कास्ट प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियाँ काम कर रही हैं। डेयरी उद्योग में बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन (COMFED - सुधा) के प्लांट बरौनी और पटना जैसे स्थानों पर पूरे राज्य में कार्यरत हैं। राज्य सरकार श्रम संसाधन विभाग के माध्यम से समय-समय पर जॉब कैंप आयोजित करती है, जहाँ स्थानीय कंपनियाँ ₹21,400 तक के वेतन पर रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में मौर्य मोटर्स और अलंकार ऑटो सेल्स (पटना/मुजफ्फरपुर) जैसी कंपनियाँ भी अपनी सेवाएँ दे रही हैं।1
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- चंदौली के मुगलसराय में पुलिस और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने अवैध अंग्रेजी शराब की तस्करी के आरोप में दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के तहत, दिनांक 04.07.2026 को मुगलसराय पुलिस और आरपीएफ टीम रेलवे डाउन रिसीविंग यार्ड से जीटीआर पुल की ओर गश्त कर रही थी। इसी दौरान जीटीआर पुल के नीचे रेलवे किमी संख्या 673/86 के पास दो संदिग्ध व्यक्ति पकड़े गए। उनकी पहचान रवि कुमार साव पुत्र स्व. सुरेंद्र कुमार साव और पंकज कुमार मिश्रा पुत्र उपेंद्र मिश्रा के रूप में हुई, दोनों पटना, बिहार के निवासी हैं। गिरफ्तार अभियुक्तों की तलाशी के दौरान, रवि कुमार साव के कब्जे से 20 पीस आफ्टर डार्क ब्ल्यू (75 एमएल), 07 पीस रॉयल स्टैग (750 एमएल) और 40 पीस 8 पीएम टेट्रा पैक (180 एमएल) सहित कुल 13.95 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब, एक वीवो मोबाइल फोन और ₹600 नगद बरामद हुए। वहीं, पंकज कुमार मिश्रा के पास से 30 पीस 8 पीएम टेट्रा पैक (180 एमएल) यानी कुल 5.40 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब, एक कीपैड मोबाइल फोन और ₹200 नगद बरामद किए गए। कुल मिलाकर 19.35 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब जब्त की गई, जिसकी कीमत ₹54,000 आँकी गई है। पंकज कुमार मिश्रा का एक आपराधिक इतिहास भी बताया गया है, जिसमें मु.अ.सं. 176/26 धारा 30(A)BE के तहत थाना गोपालपुर, पटना, बिहार में दर्ज एक मामला शामिल है। पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश की विभिन्न शराब दुकानों से शराब खरीदकर बिहार में शराबबंदी का फायदा उठाते हुए ट्रेनों के माध्यम से ले जाते थे और ऊँचे दामों पर बेचकर अच्छा मुनाफा कमाते थे। गिरफ्तारी के समय भी दोनों शराब लेकर बिहार जाने के उद्देश्य से रेलवे स्टेशन की ओर जा रहे थे। बरामदगी और गिरफ्तारी के आधार पर, थाना मुगलसराय में मु.अ.सं. 323/2026 धारा 60 आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह समेत मुगलसराय थाना के कई पुलिसकर्मी और इंस्पेक्टर पंकज कुमार प्रसाद के नेतृत्व में आरपीएफ टीम के सदस्य शामिल थे।1
- केसरवानी वैश्य सभा ने विश्रामपुर नगर परिषद मुख्यालय के बाजार मुहल्ला स्थित जोड़ा शिव मंदिर परिसर में एक स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में कुल 70 मरीजों ने अपनी जांच करवाई। शिविर की शुरुआत गढ़वा के प्रसिद्ध चिकित्सक सह समाजसेवी डॉ. पतंजलि केशरी, वरीय समाजसेवी संजय बैठा, राधेश्याम केशरी, रामलखन केशरी और अकलू केशरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की। डॉ. पतंजलि केशरी की टीम द्वारा मरीजों का बीपी, शुगर और ईसीजी की जांच की गई। जांच के बाद, मरीजों के बीच मुफ्त दवा का भी वितरण किया गया। इस दौरान शिविर में जांच मशीनों के साथ-साथ एक एम्बुलेंस भी मौजूद रही और कई लोग उपस्थित थे।1
- प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि वह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह यहाँ 'बदल रख देंगे', यानी परिवर्तन लाएंगे।1
- राजस्थान के सूरतगढ़ की धानमंडी में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना सामने आई, जहाँ एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, मंडी में काम करने वाला मजदूर सड़क पर गिरे गेहूं को एक ट्रक के ठीक आगे समेट रहा था। इसी दौरान ट्रक चालक को उसके सामने झुका हुआ मजदूर दिखाई नहीं दिया और उसने लापरवाही से ट्रक को आगे बढ़ा दिया। देखते ही देखते मजदूर ट्रक के अगले टायर की चपेट में आ गया और भारी टायर के नीचे कुचलने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही सिटी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मजदूर के शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।1