Shuru
Apke Nagar Ki App…
लखनऊ के पुरनिया स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह एक अत्यंत दुखद घटना है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण अग्निकांड की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल मौके पर पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। साथ ही, उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद यह गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इन दर्दनाक मौतों का जिम्मेदार कौन है।
Anas Ansari
लखनऊ के पुरनिया स्थित एक कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह एक अत्यंत दुखद घटना है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भीषण अग्निकांड की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तत्काल मौके पर पहुंचे और उन्होंने घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। साथ ही, उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि घटना के कारणों और जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद यह गंभीर सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर इन दर्दनाक मौतों का जिम्मेदार कौन है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- लखनऊ में योगीराज के तहत, थाना विभूतिखंड क्षेत्र के जलवा क्लब, साइबर हाइट्स के बाहर एक किशोरी के साथ हुई गंभीर आपराधिक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जलवा क्लब में गांजा और अफीम परोसा जा रहा है, और इसी क्लब के बाहर एक महिला से मारपीट, नशेबाज़ी और वीडियो बनाकर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया। समिट पुलिस चौकी प्रभारी पर कार्रवाई न करने का भी गंभीर आरोप है। पीड़िता किशोरी ने बताया कि 25 जनवरी 2026 की रात करीब 12:10 बजे कुछ युवतियों ने उसे कागज़ात लौटाने के बहाने बुलाकर योजनाबद्ध तरीके से बेरहमी से पीटा। इस दौरान न केवल मारपीट की गई, बल्कि गाली-गलौज करते हुए उसका वीडियो भी बनवाया गया, जिससे उसे बदनाम करने की धमकी दी गई। किशोरी का कहना है कि आरोपी युवतियां पहले भी चोरी, धमकी और नशे की हालत में हिंसा जैसी घटनाओं में शामिल रही हैं। जलवा क्लब के बाहर देर रात तक खुलेआम नशेबाज़ी और गांजा पीने के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जो कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाते हैं। घटना सीसीटीवी में कैद होने और 112 पर कॉल करने के बावजूद, अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। किशोरी पीड़ित ने स्पष्ट किया है कि यदि लखनऊ पुलिस उनकी सुनवाई नहीं करती है, तो उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। उसने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ योगी सरकार है और दूसरी तरफ लखनऊ पुलिस बेलगाम हो चुकी है, जिसके कारण उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। यह सवाल बना हुआ है कि क्या इस मामले में कार्रवाई होगी या इसे भी दबा दिया जाएगा।1
- लखनऊ से संवाददाता आशीष मिश्रा की ब्रेकिंग न्यूज़ के अनुसार, शहर में हुए अग्निकांड ने गहरा दर्द दिया है। इस दुखद घटना के दौरान एक बच्चे की हृदयविदारक पुकार सामने आई, जिसने कहा, "पापा आग लग गई, बाथरूम में हूं, बचा लो।" इस बीच, बच्चे की मां रोते हुए अपने बच्चे को ढूंढने की गुहार लगाती रही, बार-बार कहती रही, "कोई तो मेरे बच्चे को ढूंढ दो…", और फिर बेहोश हो गई। यह पूरा दृश्य लखनऊ अग्निकांड के दर्द को बयां करता है।1
- लखनऊ में अलीगंज स्थित लाइब्रेरी में लगी आग की घटना ने राजधानी की भवन सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। इस हादसे के बाद अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अधिकारियों की कथित मिलीभगत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मांग की है कि जिन भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। साथ ही, अवैध निर्माण को संरक्षण देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि हर हादसे के बाद केवल शोक व्यक्त करना और घायलों के इलाज का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को जन्म देने वाली व्यवस्था में सुधार किया जाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी ऐसे हादसे दोहराए जा सकते हैं। यह मामला केवल अलीगंज लाइब्रेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि राजधानी में कितनी ऐसी इमारतें हैं जो बिना सुरक्षा मानकों के संचालित हो रही हैं और कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। नागरिकों ने सभी सार्वजनिक भवनों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं जागी, तो अगली दुर्घटना और भी गंभीर साबित हो सकती है। इस प्रकार, प्रशासन के लिए यह घटना एक कड़ी चेतावनी है कि जनता की सुरक्षा से जुड़े दावों को वास्तविक धरातल पर उतारा जाए।1