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मैहर के पास NH-30 पर एक भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की जान चली गई है। इस दर्दनाक दुर्घटना के पीछे एक खड़े ट्रक और सड़क की खस्ताहाल स्थिति को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस घटना ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पत्रकार सुधाकर त्रिपाठी सतना
मैहर के पास NH-30 पर एक भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की जान चली गई है। इस दर्दनाक दुर्घटना के पीछे एक खड़े ट्रक और सड़क की खस्ताहाल स्थिति को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस घटना ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की कार्यप्रणाली और सड़क रखरखाव को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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- रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, जो अपनी शानदार कार्यशैली के लिए चर्चित हैं, से पूरी जानकारी सुनने की बात कही गई है।1
- मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में लाखों पद रिक्त होने के बावजूद केवल आंतरिक पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया जारी होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह स्थिति युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और राज्य में नई नियुक्तियों की धीमी गति पर सवाल उठाए गए हैं। यह बताया गया है कि आंतरिक पदोन्नति से निचले स्तर पर बड़ी संख्या में पद खाली हो जाएंगे। यदि इन रिक्त पदों पर नई भर्तियां नहीं की गईं, तो सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी और बढ़ेगी, जिससे कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा। प्रदेश में वर्षों से लाखों पद रिक्त पड़े हैं, जबकि नई नियुक्तियों की गति बेहद धीमी है और कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कई सरकारी कार्यालय अब आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे दक्षता प्रभावित हो रही है। इसका सबसे अधिक नुकसान मध्य प्रदेश के लाखों योग्य युवाओं को हो रहा है, जो वर्षों से स्थायी रोजगार के अवसरों की तलाश में हैं। आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए जाते हैं, लेकिन युवाओं को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि वास्तविक नियुक्तियों की आवश्यकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से आग्रह किया गया है कि वे सभी विभागों में रिक्त पदों का पारदर्शी आकलन कराकर शीघ्र ही नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। स्पष्ट किया गया है कि केवल पदोन्नति से व्यवस्था नहीं चल सकती, नई नियुक्तियाँ भी उतनी ही आवश्यक हैं। ऐसा करने से युवाओं को रोजगार मिलेगा, सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रदेश का विकास भी तेजी से होगा। इस पूरे मामले पर सवाल उठाया गया है कि 'युवाओं को अधिकार चाहिए, केवल आश्वासन नहीं', और 'मध्य प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती कब होगी', यह सवाल प्रदेश का युवा लगातार पूछ रहा है।1
- मैहर में चौरसिया समाज के लोगों ने शासन से पान की खेती को कृषि का दर्जा देने की मांग उठाई है। अधिवक्ता केशव प्रसाद चौरसिया ने इस प्रमुख मांग के साथ-साथ पान बरेजों के लिए भूमि के पट्टे, बांस-बल्लियों की पर्याप्त उपलब्धता और पान मंडी की स्थापना की भी मांग की है। समाज का कहना है कि पान की खेती धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद, पान उत्पादक किसानों को आज भी आवश्यक सुविधाएँ नहीं मिल रही हैं। उन्हें प्राकृतिक आपदाओं या आग से फसल नष्ट होने पर भी पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती है। केशव प्रसाद चौरसिया ने पूर्व में भी सरकारों से कई बार इन मांगों को उठाया था, और तब के मुख्यमंत्रियों से आश्वासन भी मिले थे, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इसके अलावा, चौरसिया समाज ने राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी अपेक्षित भागीदारी न मिलने पर अपनी चिंता व्यक्त की है।1
- रीवा और मऊगंज जिलों में एमडी ड्रग्स के मामले में की गई पुलिस कार्यवाही के बाद जहाँ एक ओर पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने इस सफलता का श्रेय जन चौपाल को दिया, वहीं दूसरी ओर लालगाँव चौकी प्रभारी कंट्रोल रूम के बगल में बने सीएसपी कार्यालय और एक मंदिर के बीच में आरोपियों को सोशल मीडिया पर लाइव करवाते हुए दिखाई दिए।1
- सतना के कलेक्ट्रेट परिसर से एसडीएम रघुराजनगर ग्रामीण शाखा के बाबू शिवांक त्रिपाठी की स्कूटी चोरी हो गई है। MP19 MJ 9952 नंबर की इस स्कूटी की चोरी की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- सतना जिले के नगर परिषद बिरसिंहपुर के शिवाजी वार्ड क्रमांक 09 में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र एक जर्जर किराए के भवन में चल रहा है, जिससे छोटे-छोटे बच्चों की जान को खतरा बना हुआ है। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश का पानी सीधे अंदर टपकता है, छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और लोहे के सरिए तक बाहर निकल आए हैं। इसके बावजूद प्रतिदिन मासूम बच्चों को इसी खतरनाक भवन में बैठाकर आंगनवाड़ी का संचालन किया जा रहा है, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या से कई बार अवगत कराने के बावजूद संबंधित परियोजना अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक न तो इस जर्जर भवन का निरीक्षण किया है और न ही केंद्र को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कोई पहल की है। अधिकारियों की इस उदासीनता के कारण मासूमों की जान लगातार जोखिम में बनी हुई है।1