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रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, जो अपनी शानदार कार्यशैली के लिए चर्चित हैं, से पूरी जानकारी सुनने की बात कही गई है।
रामदत्त दाहिया
रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, जो अपनी शानदार कार्यशैली के लिए चर्चित हैं, से पूरी जानकारी सुनने की बात कही गई है।
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- रेलवे ने एक ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को कथित तौर पर 'हनीमून' थीम में सजाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। 6 जुलाई को ट्रेन नंबर 11002 नांदेड़-सीएसएमटी नंदीग्राम एक्सप्रेस के 1AC कूपे की इस सजावट का वीडियो वायरल होने के बाद, ड्यूटी पर तैनात टिकट चेकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, एक दंपति ने निजी तौर पर एक ऑनलाइन डेकोरेटर बुक किया था। इस डेकोरेटर ने बिना किसी अनुमति के 1AC कोच में प्रवेश किया और कूपे को सजाया, जिसे एक गंभीर सुरक्षा चूक माना गया है। दक्षिण मध्य रेलवे ने इस पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर इस घटना में आगे की कार्रवाई की जाएगी।1
- मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में लाखों पद रिक्त होने के बावजूद केवल आंतरिक पदोन्नति (प्रमोशन) की प्रक्रिया जारी होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह स्थिति युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और राज्य में नई नियुक्तियों की धीमी गति पर सवाल उठाए गए हैं। यह बताया गया है कि आंतरिक पदोन्नति से निचले स्तर पर बड़ी संख्या में पद खाली हो जाएंगे। यदि इन रिक्त पदों पर नई भर्तियां नहीं की गईं, तो सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी और बढ़ेगी, जिससे कामकाज और जनता को मिलने वाली सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा। प्रदेश में वर्षों से लाखों पद रिक्त पड़े हैं, जबकि नई नियुक्तियों की गति बेहद धीमी है और कर्मचारी लगातार सेवानिवृत्त हो रहे हैं। कई सरकारी कार्यालय अब आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रहे हैं, जिससे दक्षता प्रभावित हो रही है। इसका सबसे अधिक नुकसान मध्य प्रदेश के लाखों योग्य युवाओं को हो रहा है, जो वर्षों से स्थायी रोजगार के अवसरों की तलाश में हैं। आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े रोजगार के वादे किए जाते हैं, लेकिन युवाओं को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि वास्तविक नियुक्तियों की आवश्यकता है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से आग्रह किया गया है कि वे सभी विभागों में रिक्त पदों का पारदर्शी आकलन कराकर शीघ्र ही नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। स्पष्ट किया गया है कि केवल पदोन्नति से व्यवस्था नहीं चल सकती, नई नियुक्तियाँ भी उतनी ही आवश्यक हैं। ऐसा करने से युवाओं को रोजगार मिलेगा, सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और प्रदेश का विकास भी तेजी से होगा। इस पूरे मामले पर सवाल उठाया गया है कि 'युवाओं को अधिकार चाहिए, केवल आश्वासन नहीं', और 'मध्य प्रदेश में रिक्त पदों पर भर्ती कब होगी', यह सवाल प्रदेश का युवा लगातार पूछ रहा है।1
- साइबर सुरक्षा से जुड़ी 'सेफ क्लिक 2.0' पहल के अंतर्गत यह चेतावनी जारी की गई है कि उपभोक्ता अपना ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI PIN) और बैंक संबंधी किसी भी प्रकार की गोपनीय जानकारी किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचाना है। यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत #1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। यह महत्वपूर्ण संदेश बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दिया गया है।1
- रीवा शहर की वर्तमान स्थिति को लेकर महापौर अजय मिश्रा बाबा और नगर निगम अध्यक्ष वेंकटेश पांडे की जोड़ी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन दोनों नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने रीवा शहर को 'नरक निगम' में तब्दील कर दिया है, जिससे शहर की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं।1
- रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत, जो अपनी शानदार कार्यशैली के लिए चर्चित हैं, से पूरी जानकारी सुनने की बात कही गई है।1
- सतना जिले के बिरसिंहपुर नगर परिषद के शिवाजी वार्ड क्रमांक 09 में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र एक अत्यंत जर्जर किराए के भवन में चल रहा है, जिससे यहां पढ़ने वाले छोटे बच्चों की जान लगातार जोखिम में बनी हुई है। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि बारिश का पानी सीधे अंदर टपकता है, छत का प्लास्टर उखड़ चुका है और उसके सरिए भी बाहर निकल आए हैं। इस खतरनाक हालत के बावजूद, प्रतिदिन मासूम बच्चों को इसी भवन में बैठाकर आंगनवाड़ी का संचालन किया जा रहा है, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या से कई बार अवगत कराने के बाद भी संबंधित परियोजना अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक न तो इस भवन का निरीक्षण किया है और न ही केंद्र को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कोई पहल की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी इस मामले में लगातार उदासीन बने हुए हैं।1