पीपराकोठी में मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्तावित भूमि हस्तांतरण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। अंचल कार्यालय द्वारा रैयतों और दावेदारों को जारी किए गए दावा-आपत्ति नोटिस के खिलाफ पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा की अध्यक्षता में किसानों की रविवार को एक बैठक हुई। बैठक में किसानों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गरीब और मध्यवर्गीय किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया। किसानों का कहना है कि पीपराकोठी में बिहार सरकार के पास लगभग 400 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसमें से करीब 100 एकड़ पर पहले से विभिन्न सरकारी कार्यालय और संस्थान संचालित हैं। इसके बावजूद लगभग 300 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध रहने के बाद भी किसानों की 25 एकड़ बकास्त भूमि को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करना अनुचित है, जिससे उनकी खेती और रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोध को आगे बढ़ाते हुए अंचलाधिकारी को संबोधित एक आवेदन तैयार कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रोकने की मांग की गई है। साथ ही आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए 26 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति में पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा को अध्यक्ष, सरपंच मनोज कुमार को उपाध्यक्ष, सुरेंद्र नारायण सिंह को सचिव, अरुण कुमार कुशवाहा को सहसचिव, पंचायत समिति सदस्य रीतज कुमार को कोषाध्यक्ष और जितेंद्र नारायण सिंह को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा डॉ. जयप्रकाश नारायण सिंह, ददन शर्मा, सुनील गुप्ता, अनिल गुप्ता, रंजन गुप्ता, अशोक जायसवाल, मनोरंजन सिंह, मनोज यादव, रामशीष महतो और अवध महतो समेत 21 लोगों को सदस्य बनाया गया है। बैठक में मौजूद किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि भूमि का अधिग्रहण या हस्तांतरण वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं करते, लेकिन जमीन छीनकर किया जाने वाला विकास स्वीकार्य नहीं होगा।
पीपराकोठी में मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्तावित भूमि हस्तांतरण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। अंचल कार्यालय द्वारा रैयतों और दावेदारों को जारी किए गए दावा-आपत्ति नोटिस के खिलाफ पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा की अध्यक्षता में किसानों की रविवार को एक बैठक हुई। बैठक में किसानों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गरीब और मध्यवर्गीय किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया। किसानों का कहना है कि पीपराकोठी में बिहार सरकार के पास लगभग 400 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसमें से करीब 100 एकड़ पर पहले से विभिन्न सरकारी कार्यालय और संस्थान संचालित हैं।
इसके बावजूद लगभग 300 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध रहने के बाद भी किसानों की 25 एकड़ बकास्त भूमि को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करना अनुचित है, जिससे उनकी खेती और रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोध को आगे बढ़ाते हुए अंचलाधिकारी को संबोधित एक आवेदन तैयार कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रोकने की मांग की गई है। साथ ही आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए 26 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति में पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा को अध्यक्ष, सरपंच मनोज कुमार को उपाध्यक्ष, सुरेंद्र नारायण सिंह को सचिव, अरुण कुमार
कुशवाहा को सहसचिव, पंचायत समिति सदस्य रीतज कुमार को कोषाध्यक्ष और जितेंद्र नारायण सिंह को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा डॉ. जयप्रकाश नारायण सिंह, ददन शर्मा, सुनील गुप्ता, अनिल गुप्ता, रंजन गुप्ता, अशोक जायसवाल, मनोरंजन सिंह, मनोज यादव, रामशीष महतो और अवध महतो समेत 21 लोगों को सदस्य बनाया गया है। बैठक में मौजूद किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि भूमि का अधिग्रहण या हस्तांतरण वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं करते, लेकिन जमीन छीनकर किया जाने वाला विकास स्वीकार्य नहीं होगा।
- पीपराकोठी में मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्तावित भूमि हस्तांतरण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। अंचल कार्यालय द्वारा रैयतों और दावेदारों को जारी किए गए दावा-आपत्ति नोटिस के खिलाफ पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा की अध्यक्षता में किसानों की रविवार को एक बैठक हुई। बैठक में किसानों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गरीब और मध्यवर्गीय किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार बताया। किसानों का कहना है कि पीपराकोठी में बिहार सरकार के पास लगभग 400 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसमें से करीब 100 एकड़ पर पहले से विभिन्न सरकारी कार्यालय और संस्थान संचालित हैं। इसके बावजूद लगभग 300 एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध रहने के बाद भी किसानों की 25 एकड़ बकास्त भूमि को मेडिकल कॉलेज के लिए हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करना अनुचित है, जिससे उनकी खेती और रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो जाएगा। विरोध को आगे बढ़ाते हुए अंचलाधिकारी को संबोधित एक आवेदन तैयार कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रोकने की मांग की गई है। साथ ही आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए 26 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति में पैक्स अध्यक्ष राजेश प्रसाद कुशवाहा को अध्यक्ष, सरपंच मनोज कुमार को उपाध्यक्ष, सुरेंद्र नारायण सिंह को सचिव, अरुण कुमार कुशवाहा को सहसचिव, पंचायत समिति सदस्य रीतज कुमार को कोषाध्यक्ष और जितेंद्र नारायण सिंह को सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा डॉ. जयप्रकाश नारायण सिंह, ददन शर्मा, सुनील गुप्ता, अनिल गुप्ता, रंजन गुप्ता, अशोक जायसवाल, मनोरंजन सिंह, मनोज यादव, रामशीष महतो और अवध महतो समेत 21 लोगों को सदस्य बनाया गया है। बैठक में मौजूद किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि भूमि का अधिग्रहण या हस्तांतरण वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। किसानों का कहना है कि वे विकास कार्यों का विरोध नहीं करते, लेकिन जमीन छीनकर किया जाने वाला विकास स्वीकार्य नहीं होगा।3
- पूर्वी चंपारण के फेनहारा थाना क्षेत्र स्थित मनकरवा राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में बिना अनुमति के एक विशालकाय बरगद का पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कुमारी माला देवी ने फेनहारा थाना में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनकी बिना अनुमति के रसोइया हरिनंदन साह द्वारा यह पेड़ काटा जा रहा था। जब उन्होंने इस बारे में पूछा तो रसोइया ने बताया कि उसने यह पेड़ स्कूल के ही शिक्षक सुधाकर कुमार से खरीदा है। आवेदन के अनुसार, पूर्व में भी पेड़ का एक हिस्सा गिरने के बाद उसे ₹10 हजार में बेचा गया था और अब शेष बचे पेड़ को भी शिक्षक की अनुमति से काटा जा रहा था। इस बात की जानकारी न तो प्रधानाध्यापिका को दी गई थी और न ही ग्रामीणों को थी। मामले में फेनहारा के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कपिलदेव राम ने बताया कि प्रधानाध्यापक का आवेदन मिला है और पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, मंदीप कुमार, नीतीश कुमार, हाकिम साह, दिलीप कुमार राम, छबीला साह, नरेश साह और सद्दाम हुसैन सहित स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि परिसर में लगे हरे-भरे बरगद को आखिर किसकी इजाजत से काटा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने में आवेदन दिए दो दिन बीत जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।1
- पटना में छात्रों के उग्र प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस अधिकारियों का सख्त रूप देखने को मिला है। स्थिति को संभालने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया।1
- मुज़फ़्फ़रपुर के साहेबगंज थाना क्षेत्र में मारपीट की घटना सामने आई है, जहाँ गुड़िया किन्नर ने एक ड्राइवर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि ड्राइवर ने उनके साथ मारपीट की और उनका मोबाइल छीन लिया।1
- बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर राजनीति तेज हो गई है। आरोप है कि प्रशांत किशोर ने न्याय की लड़ाई के नाम पर चुनाव में प्रचार करने की बात कही है। वहीं दूसरी तरफ, भरत तिवारी के परिवार ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भरोसा जताते हुए न्याय मिलने की उम्मीद व्यक्त की है। हाल के दिनों में सम्राट चौधरी ने खुद पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिया है।1
- मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र में 30 मार्च को हुए हत्याकांड के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो और अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया है।1
- भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस फैसले के सामने आने के बाद छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई है और आम लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उधर, बिहार के मोतिहारी में रेपिस्टों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर महाआंदोलन का ऐलान किया गया है।1
- शिवहर जिले के तरियानी में पुलिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए 2 बदमाशों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बदमाशों के पास से देसी कट्टा और बाइक बरामद की है।1