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पश्चिम बंगाल में चुनाव, दो चरणों में होंगे, परिणाम - 4 मई को
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पश्चिम बंगाल में चुनाव, दो चरणों में होंगे, परिणाम - 4 मई को
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- Post by Abhishek ranjan C E O1
- पीरपैंती से बाराहाट जाने वाली मुख्य मार्ग एनएच-133 पर शनिवार देर शाम एक टोटो पलटने से चार लोग घायल हो गए। यह घटना जगदीशपुर मोड़ के पास हुई। बताया गया कि सड़क पर अचानक एक अज्ञात जानवर आ जाने के कारण टोटो चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा। इसके परिणामस्वरूप, टोटो अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक गड्ढे में पलट गया। हादसे में रिफातपुर निवासी प्रेम कुमार दास की पत्नी पिंकी देवी, उनके पुत्र भानु राज, पुत्री प्रज्ञा राज और पंचानंद दास की पुत्री प्रतिमा देवी घायल हो गईं। भानु राज के दाहिने हाथ में गंभीर चोट आई है, जबकि अन्य घायलों को सिर और शरीर के विभिन्न हिस्सों में चोटें लगी हैं। आसपास से गुजर रहे लोगों ने तुरंत सभी घायलों को पीरपैंती रेफरल अस्पताल पहुंचाया। पीरपैंती रेफरल अस्पताल में डॉ. गणेश खंडेलिया ने रविवार को दोपहर 2:00 बजे जानकारी देते हुए बताया गया कि सभी घायलों का प्राथमिक उपचार किया। बेहतर इलाज के लिए उन्हें भागलपुर स्थित मायागंज अस्पताल रेफर कर दिया गया है।1
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- पीरपैंती प्रखंड के हरिनकोल पहाड़िया टोला और संथाली टोला के ग्रामीणों ने अदानी पावर प्लांट प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। ग्रामीणों ने पुनर्वास और कब्रिस्तान की व्यवस्था की मांग की है। उनका आरोप है कि अदानी पावर प्लांट परियोजना के लिए उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई है, जिससे सैकड़ों परिवार बेघर होने की कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक उनके पुनर्वास, रहने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है। घर और जमीन छिन जाने के बाद उनके सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी, साथ ही छोटे बच्चों की शिक्षा को लेकर भी अभिभावकों में चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों ने रविवार को संध्या 4:45 पर मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि वर्तमान में उनके पास न तो पक्का घर है, न ही पीने के पानी की समुचित व्यवस्था और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए उचित सुविधा उपलब्ध है। वे अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अदानी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक वे अधिग्रहित जमीन खाली नहीं करेंगे। ग्रामीण रामदेव पहाड़िया, संतोषी हेमरबन, डब्लू मुर्मू और बज्जी मुर्मू सहित अन्य लोगों ने बताया कि उनके घर अदानी पावर प्लांट परियोजना में चले गए हैं और उन्हें बार-बार घर खाली करने को कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे भूमिहीन हैं और उनके पास रहने के लिए कहीं और जमीन नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, कई अधिकारियों ने आकर उन्हें घर बनाने के लिए जमीन और कब्रिस्तान की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक घरों की गिनती तक नहीं की गई है। ये आश्वासन केवल कागजों तक ही सीमित रहे हैं।1