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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है। यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है। इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

1 hr ago
user_ओम जैन शंभूपुरा
ओम जैन शंभूपुरा
Salesperson चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
1 hr ago

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है। यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है। इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • श्रीगंगानगर में हुए नाबालिग बालिका दुष्कर्म प्रकरण से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और बालिका की मृत्यु संबंधी खबरें पूरी तरह से भ्रामक, असत्य और अफवाह हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और उन्हें साझा न करें। पुलिस नियंत्रण कक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पुलिस कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।
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    श्रीगंगानगर में हुए नाबालिग बालिका दुष्कर्म प्रकरण से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और बालिका की मृत्यु संबंधी खबरें पूरी तरह से भ्रामक, असत्य और अफवाह हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और उन्हें साझा न करें। पुलिस नियंत्रण कक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में पुलिस कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं।
    user_DS7NEWS NETWORK
    DS7NEWS NETWORK
    News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    47 min ago
  • यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर कितने पति अपनी पत्नियों द्वारा मारे जाएंगे। इसी संदर्भ में यह जानकारी भी सामने आई है कि हर साल 82000 हजार लोग आत्महत्या कर रहे हैं।
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    यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर कितने पति अपनी पत्नियों द्वारा मारे जाएंगे। इसी संदर्भ में यह जानकारी भी सामने आई है कि हर साल 82000 हजार लोग आत्महत्या कर रहे हैं।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    56 min ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है। यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है। इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने स्वयं स्वीकार किया है कि पुलिस आरोपी को बचाने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद, पुलिस विभाग इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय खामोश बैठा है।

यह प्रकरण ग्राम बानसेन थाना भदेसर निवासी नारायण लाल लढ्ढा द्वारा राजसम्पर्क पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत संख्या 072606727584938 से संबंधित है। परिवादी ने आरोप लगाया था कि 24 जनवरी 2025 को न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी।

दिनांक 4 जुलाई 2026 को सीएमओ राजस्थान ने इस परिवाद पर टिप्पणी दर्ज की, जिसमें कहा गया कि परिवादी विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से असंतुष्ट है, और पुलिस आरोपी को बचाने के चक्कर में इसे 132 का प्रकरण बता रही है, जबकि यह मामला 24 जनवरी 2025 का है और 132 का प्रकरण 6 सितंबर 2024 का है। इसके बाद, 6 जुलाई 2026 को चित्तौड़गढ़ के पुलिस अधीक्षक ने स्वयं प्रकरण दर्ज करने और अनुसंधान जारी रखने का आदेश दिया। हालांकि, पुलिस थाना भदेसर द्वारा आदेश के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी एफआईआर संख्या 112/2025 दर्ज नहीं की गई। राज.सम्पर्क 072606727487736 में डीवाईएसपी भदेसर ने भी 24.01.25 को माननीय न्यायालय के स्टे आदेश के बावजूद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को स्वीकार किया है।

इस पर, परिवादी नारायण लाल ने 7 जुलाई 2026 को एसपी, आईजी उदयपुर, डीएम चित्तौड़गढ़ और सीजेएम चित्तौड़गढ़ को मेल भेजकर 2 घंटे में एफआईआर नंबर उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है, तो वे उच्च न्यायालय जोधपुर में अवमानना याचिका दायर करेंगे। इस संबंध में जब एसपी कार्यालय चित्तौड़गढ़ और थाना भदेसर के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो कोई आधिकारिक बयान नहीं मिल सका और उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
    user_ओम जैन शंभूपुरा
    ओम जैन शंभूपुरा
    Salesperson चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया गया है। इस अपडेट के अनुसार, मनरेगा के कार्य समय में बदलाव किया गया है। यह अपडेट 125 दिन के रोजगार, ₹300 की मजदूरी दर, योजना के नए नामों और रविवार के अवकाश से जुड़ी पूरी सच्चाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया गया है। इस अपडेट के अनुसार, मनरेगा के कार्य समय में बदलाव किया गया है। यह अपडेट 125 दिन के रोजगार, ₹300 की मजदूरी दर, योजना के नए नामों और रविवार के अवकाश से जुड़ी पूरी सच्चाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है।
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 80 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक के बैंक खाते से ऑनलाइन बैंकिंग और सिम कार्ड के दुरुपयोग के जरिए 9 लाख 90 हजार 832 रुपये की धोखाधड़ी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी को सीकर जिले से पकड़ा गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को इस मामले में एक सक्रिय साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों के शामिल होने के भी संकेत मिले हैं। इस संबंध में, कपासन थाना क्षेत्र के ताराखेड़ी निवासी और सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त 80 वर्षीय रामचन्द्र शर्मा ने 25 जून 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कपासन शाखा में उनके बचत खाते की जांच करने पर 9 लाख 90 हजार 832 रुपये की कमी पाई गई। बैंक से जानकारी मिलने पर पता चला कि उनके नाम से एक नया एटीएम कार्ड जारी किया गया था, और इस एटीएम तथा ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का उपयोग कर उनके खाते से राशि निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी गई थी। परिवादी ने अपनी रिपोर्ट में बैंक प्रबंधन और डाक विभाग के पोस्टमैन की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि बिना आवेदन के ही ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सुविधा सक्रिय कर दी गई थी, और एटीएम कार्ड उन्हें देने के बजाय किसी अज्ञात व्यक्ति को पहुंचा दिया गया। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक, उदयपुर रेंज गौरव श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा एवं पुलिस उपाधीक्षक (कपासन) हरीश भारती के सुपरविजन में थानाधिकारी सुनील शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर यह कार्रवाई की गई। प्रकरण दर्ज होने के बाद थानाधिकारी सुनील शर्मा ने तत्काल विशेष जांच टीम का गठन कर तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच करते हुए सिम कार्ड धारक रितेश सैनी पुत्र राजेन्द्र प्रसाद सैनी निवासी गोवर्धनपुरा, थाना सदर खाटूश्यामजी, जिला सीकर की पहचान की। आरोपी को 7 जुलाई 2026 को सीकर से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में इस साइबर ठगी में एक संगठित गिरोह की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। मामले की गहन जांच जारी है और शीघ्र ही गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही, बैंक प्रबंधक और पोस्टमैन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जा रही है।
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    चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 80 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक के बैंक खाते से ऑनलाइन बैंकिंग और सिम कार्ड के दुरुपयोग के जरिए 9 लाख 90 हजार 832 रुपये की धोखाधड़ी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी को सीकर जिले से पकड़ा गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को इस मामले में एक सक्रिय साइबर ठगी गिरोह के अन्य सदस्यों के शामिल होने के भी संकेत मिले हैं।

इस संबंध में, कपासन थाना क्षेत्र के ताराखेड़ी निवासी और सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त 80 वर्षीय रामचन्द्र शर्मा ने 25 जून 2026 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कपासन शाखा में उनके बचत खाते की जांच करने पर 9 लाख 90 हजार 832 रुपये की कमी पाई गई। बैंक से जानकारी मिलने पर पता चला कि उनके नाम से एक नया एटीएम कार्ड जारी किया गया था, और इस एटीएम तथा ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का उपयोग कर उनके खाते से राशि निकालकर अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी गई थी।

परिवादी ने अपनी रिपोर्ट में बैंक प्रबंधन और डाक विभाग के पोस्टमैन की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि बिना आवेदन के ही ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सुविधा सक्रिय कर दी गई थी, और एटीएम कार्ड उन्हें देने के बजाय किसी अज्ञात व्यक्ति को पहुंचा दिया गया। जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक, उदयपुर रेंज गौरव श्रीवास्तव के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकुल शर्मा एवं पुलिस उपाधीक्षक (कपासन) हरीश भारती के सुपरविजन में थानाधिकारी सुनील शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर यह कार्रवाई की गई। प्रकरण दर्ज होने के बाद थानाधिकारी सुनील शर्मा ने तत्काल विशेष जांच टीम का गठन कर तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच करते हुए सिम कार्ड धारक रितेश सैनी पुत्र राजेन्द्र प्रसाद सैनी निवासी गोवर्धनपुरा, थाना सदर खाटूश्यामजी, जिला सीकर की पहचान की। आरोपी को 7 जुलाई 2026 को सीकर से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक पूछताछ में इस साइबर ठगी में एक संगठित गिरोह की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। मामले की गहन जांच जारी है और शीघ्र ही गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किए जाने की संभावना है। इसके साथ ही, बैंक प्रबंधक और पोस्टमैन की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जा रही है।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • 8 जुलाई 2026 को एक निःशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगा, जिसमें लोगों को मुफ्त चिकित्सा संबंधी सलाह प्रदान की जाएगी।
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    8 जुलाई 2026 को एक निःशुल्क चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगा, जिसमें लोगों को मुफ्त चिकित्सा संबंधी सलाह प्रदान की जाएगी।
    user_Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉ
    Dr CP Patel 8302083835 आयुष हॉ
    Ayurvedic Practitioner चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • झूठे आरोप किसी भी निर्दोष व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी तबाह कर सकते हैं, और इस पीड़ा को वही समझ सकता है जिस पर यह बीती हो। ऐसे आरोपों के कारण व्यक्ति को वर्षों तक सामाजिक प्रताड़ना, अपमान और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह तो अच्छा हुआ कि किसी पुजारी के संदर्भ में भगवान की दया से सच सामने आ गया, वरना उन्हें भी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता। एक झूठा आरोप केवल व्यक्ति की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सम्मान और मानसिक शांति को भी गहरा आघात पहुँचा सकता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए यह मांग की गई है कि यदि जांच या न्यायालय में यह सिद्ध हो जाए कि किसी ने जानबूझकर झूठा आरोप लगाया था, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। यह कदम निर्दोष लोगों की रक्षा करेगा, झूठे मामलों पर अंकुश लगाएगा और वास्तविक पीड़ितों को भी न्याय मिलने में सहायता करेगा। दरअसल, न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा, जब दोषी को दंड मिले और निर्दोष की गरिमा की भी समान रूप से रक्षा हो।
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    झूठे आरोप किसी भी निर्दोष व्यक्ति की पूरी ज़िंदगी तबाह कर सकते हैं, और इस पीड़ा को वही समझ सकता है जिस पर यह बीती हो। ऐसे आरोपों के कारण व्यक्ति को वर्षों तक सामाजिक प्रताड़ना, अपमान और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। यह तो अच्छा हुआ कि किसी पुजारी के संदर्भ में भगवान की दया से सच सामने आ गया, वरना उन्हें भी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता। एक झूठा आरोप केवल व्यक्ति की प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सम्मान और मानसिक शांति को भी गहरा आघात पहुँचा सकता है।

इस गंभीर समस्या को देखते हुए यह मांग की गई है कि यदि जांच या न्यायालय में यह सिद्ध हो जाए कि किसी ने जानबूझकर झूठा आरोप लगाया था, तो ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। यह कदम निर्दोष लोगों की रक्षा करेगा, झूठे मामलों पर अंकुश लगाएगा और वास्तविक पीड़ितों को भी न्याय मिलने में सहायता करेगा।

दरअसल, न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा, जब दोषी को दंड मिले और निर्दोष की गरिमा की भी समान रूप से रक्षा हो।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान के गंगानगर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 13 साल की एक बच्ची 'मानसिक नपुंसक मर्दों' यानी दरिंदों के हाथ लग गई। हंसने-खेलने की उम्र में, जब उसे किताबें-कलम मिलनी चाहिए थीं, उसे अस्पताल की दीवारें मिलीं। बच्ची को 4 दिन तक 4 होटलों में दरिंदों की हवस का शिकार बनाया गया, जिसके बाद वह 5 दिनों तक ICU में जिंदगी और मौत से जूझती रही। दुर्भाग्यवश, माँ की दुआएँ भी काम न आ सकीं और 'अभी तो कली थी, फूल भी ना बन पाई' वह 'नन्ही सी चिरैया' अपनी जिंदगी की जंग हार गई। उसकी अर्थी के साथ 'सवालों का जनाज़ा' भी जा रहा है। इस घटना से गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि सरकारों के पास ऐसे दरिंदों के लिए कोई 'इलाज' नहीं है और वर्तमान 'तंत्र' केवल अपनी प्रक्रिया कर रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि 'विदेशी रद्दी' से बनी इस व्यवस्था की बजाय यदि 'वैदिक दंडविधान' या मनुस्मृति का पालन होता, तो ऐसे कृत्य का एक ही दंड होता: अधर्मी का सार्वजनिक वध, जिसे दूसरी भाषा में 'सर तन से जुदा' कहा गया है। यह घटना हमें इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि क्या हम इंसान कहलाने के लायक भी रह गए हैं।
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    राजस्थान के गंगानगर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 13 साल की एक बच्ची 'मानसिक नपुंसक मर्दों' यानी दरिंदों के हाथ लग गई। हंसने-खेलने की उम्र में, जब उसे किताबें-कलम मिलनी चाहिए थीं, उसे अस्पताल की दीवारें मिलीं। बच्ची को 4 दिन तक 4 होटलों में दरिंदों की हवस का शिकार बनाया गया, जिसके बाद वह 5 दिनों तक ICU में जिंदगी और मौत से जूझती रही।

दुर्भाग्यवश, माँ की दुआएँ भी काम न आ सकीं और 'अभी तो कली थी, फूल भी ना बन पाई' वह 'नन्ही सी चिरैया' अपनी जिंदगी की जंग हार गई। उसकी अर्थी के साथ 'सवालों का जनाज़ा' भी जा रहा है। इस घटना से गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है कि सरकारों के पास ऐसे दरिंदों के लिए कोई 'इलाज' नहीं है और वर्तमान 'तंत्र' केवल अपनी प्रक्रिया कर रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि 'विदेशी रद्दी' से बनी इस व्यवस्था की बजाय यदि 'वैदिक दंडविधान' या मनुस्मृति का पालन होता, तो ऐसे कृत्य का एक ही दंड होता: अधर्मी का सार्वजनिक वध, जिसे दूसरी भाषा में 'सर तन से जुदा' कहा गया है। यह घटना हमें इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर करती है कि क्या हम इंसान कहलाने के लायक भी रह गए हैं।
    user_Pramod Bairwa
    Pramod Bairwa
    Nimbahera, Chittorgarh•
    18 hrs ago
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