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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव के आमरण अनशन के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। इस आंदोलन से जुड़ी तीनों प्रमुख मांगों को प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। मांगें माने जाने के बाद, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज और स्वयं टी एस सिंहदेव को नारियल पानी पिलाकर उनका आमरण अनशन समाप्त कराया गया। कांग्रेस के नेताओं ने इस सफल नतीजे को जनता की जीत बताया है।
Pradesh Khabar
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के आंदोलन को एक बड़ी सफलता मिली है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव के आमरण अनशन के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। इस आंदोलन से जुड़ी तीनों प्रमुख मांगों को प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। मांगें माने जाने के बाद, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज और स्वयं टी एस सिंहदेव को नारियल पानी पिलाकर उनका आमरण अनशन समाप्त कराया गया। कांग्रेस के नेताओं ने इस सफल नतीजे को जनता की जीत बताया है।
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- तेज़ धूप में बिना किसी स्वार्थ के प्रतिदिन लोगों को राहत पहुँचाने का कार्य कर रही एक महिला मानवता, सेवा और करुणा की सच्ची मिसाल बनी हैं। उनके निस्वार्थ प्रयास समाज को यह संदेश देते हैं कि छोटी-छोटी सेवाएँ भी किसी के जीवन में बड़ी राहत बन सकती हैं। उनकी संवेदनशीलता, समर्पण और सेवा भावना हम सभी के लिए प्रेरणादायी है, क्योंकि समाज में ऐसे लोगों की मौजूदगी ही इंसानियत को जीवित रखती है। इस नेक पहल को सलाम।1
- धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत नवागांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लगभग 19 लाख रुपये की लागत से चल रहे तालाब निर्माण कार्य को तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। खास तौर पर, फेस ऑथेंटिकेशन आधारित हाजिरी व्यवस्था मजदूरों और कर्मचारियों दोनों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। यह तालाब गांव के किसानों, पशुपालकों और आम ग्रामीणों के लिए सिंचाई और निस्तारी की सुविधा प्रदान करने की एक बड़ी उम्मीद है। सैकड़ों मजदूर भीषण गर्मी में भी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत पर तकनीकी दिक्कतें भारी पड़ रही हैं। रोजगार सहायक अनिता गुप्ता और मेट शांति के अनुसार, नई व्यवस्था में मजदूरों की उपस्थिति चेहरे के मिलान के आधार पर दर्ज की जाती है। हालांकि, तकनीकी कारणों से कई बार मजदूरों का चेहरा सिस्टम से मैच नहीं हो पाता, जिससे उनकी हाजिरी दर्ज नहीं होती। इससे मजदूरों में यह चिंता बढ़ गई है कि दिनभर काम करने के बाद भी कहीं उन्हें मजदूरी से वंचित न होना पड़े। इस स्थिति का असर अब कार्य की गति पर भी दिख रहा है और कुछ मजदूर हाजिरी संबंधी समस्याओं के कारण काम पर आने से हिचक रहे हैं। जून माह के अंत तक तालाब निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन लगातार आ रही तकनीकी बाधाएं इस लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है और समाधान का आश्वासन भी मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही कम मजदूरी और श्रमिकों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रही मनरेगा योजना में यह नई तकनीकी परेशानी गरीब मजदूरों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है। कार्यस्थल पर पेयजल, छाया और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) बॉक्स जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था तो है, लेकिन यदि फेस ऑथेंटिकेशन से जुड़ी समस्याओं का जल्द व्यावहारिक समाधान नहीं हुआ, तो न केवल तालाब निर्माण प्रभावित होगा बल्कि जरूरतमंद मजदूरों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में यह मांग की जा रही है कि तकनीक और व्यवस्था के बीच ऐसा संतुलन बने, जिससे मजदूरों की मेहनत का पूरा सम्मान हो और यह महत्वपूर्ण परियोजना समय पर पूरी हो सके।4
- मनेंद्रगढ़ शहर में गंदे पानी की सप्लाई को लेकर नगर पालिका जल शाखा कार्यालय के सामने चल रहा धरना-प्रदर्शन नायब तहसीलदार के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। बुधवार सुबह 10 बजे से पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमार केशरवानी सहित कांग्रेसी पार्षद शहरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। इस प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद थे। धरना स्थल पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने प्रदर्शनकारियों को एक सप्ताह के भीतर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। हालांकि, पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर साफ पानी की व्यवस्था नहीं होती है, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे।1
- आज दिनांक 27 मई 2026 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी संघर्ष कुमार मिश्र के नेतृत्व में एक विभागीय टीम ने कोरबा शहर के पुराना बस स्टैंड, पॉवर हाउस रोड और बुधवारी बाजार क्षेत्र में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान कुल 11 दुकानों का गहन निरीक्षण किया गया, जिनमें राजा नारियल पानी एवं फ्रूट सेंटर, राजेश फ्रूट सेंटर, सर्वमंगला फ्रूट सेंटर, माँ शारदा फ्रूट सेंटर और चौरसिया फ्रूट सेंटर शामिल थे। जांच के दौरान, दुकानों में बेचने के लिए रखे गए 15 किलो आम, 4 दर्जन केले, 2 किलो अनार और 7 किलो खरबूजे खराब अवस्था में पाए गए। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लगभग 28 किलो इन सभी खराब फलों को नष्ट करवा दिया। यह अभियान खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्री दीपक अग्रवाल, छत्तीसगढ़ के निर्देशन में चल रहे एक विशेष अभियान का हिस्सा है, जो 28 और 29 मई 2026 तक संचालित रहेगा। इसका मुख्य उद्देश्य आमजन को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध कराना है। इस निरीक्षण के दौरान, टीम कृत्रिम मिठास (सैकरीन) और कार्बाइड से फल पकाने जैसे अवैध तरीकों की भी जांच कर रही है। जिन फल विक्रेताओं के पास फूड लाइसेंस नहीं पाया गया, उन्हें तत्काल लाइसेंस बनवाने के निर्देश दिए गए और आगे कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।3
- छत्तीसगढ़ के एक क्षेत्र में महिलाओं द्वारा महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाले पैसों को ठुकराए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इन महिलाओं ने इस योजना के पैसों को स्वीकार करने से क्यों इनकार किया।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाया है जो कथित तौर पर करोड़ों रुपये की गाड़ियों में घूमते हैं, लेकिन फिर भी 45 रुपये का एक छोटा गमला चुराने से नहीं हिचकते। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि आखिर यह किस तरह की मानसिकता है।1
- भूपेश बघेल ने रामभद्राचार्य जी से तीखे सवाल पूछे हैं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल और उनकी नीतियों के संबंध में। बघेल ने रामभद्राचार्य जी को गौ-भक्त और राम भक्त बताते हुए जानना चाहा कि मोदी ने गौ-मांस भक्षक किरण रिजिजू को अपने मंत्रिमंडल में क्यों रखा है। उन्होंने विनम्र निवेदन करते हुए रामभद्राचार्य जी से यह भी कहा कि वे अपने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री जी को निर्देश दें कि वे पेट्रोल-डीजल के दाम कम करवाएं। भूपेश बघेल ने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रामभद्राचार्य जी इतने ज्ञानी और दिव्यदृष्टि वाले हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि मोदी डोनाल्ड ट्रंप के सामने इतना क्यों झुक जाते हैं।1
- स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का अधिकार है, ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों की यह जिम्मेदारी है कि वे जनता को गुणवत्तापूर्ण पानी मुहैया कराएं। हालांकि, नगर पालिका द्वारा बिना किसी जांच के पानी की सप्लाई किया जाना एक गंभीर लापरवाही के रूप में सामने आया है, जिसे सीधे तौर पर आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताया गया है। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, संबंधित विभाग से तत्काल पानी की गुणवत्ता की जांच करवाने और यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि सप्लाई किया जा रहा पानी सभी स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप हो। प्रशासन से यह भी अपेक्षा की गई है कि वह योग्य लैब टेक्निकल स्टाफ की नियुक्ति करे और नियमित जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ पानी मिल सके। वर्तमान में, पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच न होना और लैब टेक्निकल स्टाफ के बिना सप्लाई जारी रहना चिंता का विषय है।1
- मनेंद्रगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत बरबसपुर और सिरौली में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अभियान तेज हो गया है। इस पहल के अंतर्गत, बरबसपुर के स्वच्छता ग्राहियों ने 15 किलोग्राम सफेद पन्नी, 46 किलोग्राम रंगीन पन्नी और 8 किलोग्राम प्लास्टिक बोतलें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन इकाई चनवारीडांड को बेचीं। इसके साथ ही, सूची ऐप का उपयोग करते हुए आंगनबाड़ी, स्कूल, सामुदायिक शौचालय सहित सार्वजनिक परिसंपत्तियों का जियो टैगिंग कार्य पूरा किया गया। सिरौली, नागोई, पिपरिया और कठौतिया गांवों में भी प्लास्टिक संग्रहण और जियो टैगिंग अभियान चलाया गया। प्रशासन ने बताया कि डिजिटल मॉनिटरिंग और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से गांवों में स्वच्छता व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।1