मेरे बचपन का आंगन और लोधीपुर की मजार इसे हजरत मियां बुलंद शाह (रहमतुल्लाह अलैह) या आस्ताना आलिया हजरत बूलन शाह दादा की मजार के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र मजार शाहजहांपुर के लोधीपुर क्षेत्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित और पहुंचे हुए सूफी संत हजरत मियां बुलंद शाह की याद में बनाई गई है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, इस ऐतिहासिक दरगाह का अस्तित्व लगभग 312 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है, जो इसे इस क्षेत्र के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है। स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों के बीच इस जगह को लेकर बेहद गहरी आस्था है मेरा बचपन शाहजहांपुर के लोधीपुर की उन्हीं गलियों में बीता है, जहाँ से यह पवित्र मजार मात्र 100 मीटर की दूरी पर है। मेरे लिए यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मेरे बचपन का सबसे करीबी हमसाया रही है। जब मैं छोटा था, तो हमारे घर की छत से इस मजार का खूबसूरत नजारा साफ दिखाई देता था। वह छत मेरे लिए एक ऐसी जगह थी, जहाँ बैठकर मैंने अपने बचपन के न जाने कितने सुकून भरे पल इस पावन आस्ताने को देखते हुए गुजारे हैं। इस मजार का यह पथरीला आंगन मेरे लिए किसी खेल के मैदान जैसा था, जहाँ खेल-कूद कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ। न जाने बचपन में मेरे मासूम कदमों ने इस आंगन में कितनी आहटें दी होंगी और कितनी ही शामें दोस्तों के साथ यहाँ दौड़ते-भागते बीती हैं। यहाँ की हवाओं में मेरी हँसी और मेरे बचपन की शरारतें आज भी कहीं न कहीं महफूज हैं। साल के आम दिनों में जहाँ यहाँ एक रूहानी शांति पसरी रहती थी, वहीं उर्स के आते ही नजारा बिल्कुल जादुई हो जाता था। जब उर्स के दिनों में यह मजार रंग-बिरंगी लाइटों से पूरी तरह जगमगा उठती थी, तो मेरी रातें जैसे हसीन हो जाती थीं। मैं हर रोज घंटों अपनी छत पर खड़े होकर इस रोशनी को निहारा करता था। हवा में तैरती कव्वालियों की आवाज और लोबान की खुशबू सीधे हमारी छत तक आती थी, जो मेरे बाल-मन को एक अजीब सी खुशी और कौतूहल से भर देती थी। आज वक्त बदल गया है और जिंदगी की मसरूफियत बढ़ गई है, लेकिन जब भी मैं इस मजार की तस्वीर देखता हूँ, तो मुझे अपना वह बचपन और वह आंगन याद आ जाता है। यह मजार आज भी मेरे दिल के उतने ही पास है, जितनी बचपन में हुआ करती थी। यह तस्वीर मुझे मेरे उस मासूम दौर की याद दिलाती है, जब खुशियाँ बेहद सादी थीं और दुनिया का सबसे बड़ा सुकून बस इस आंगन में खेलने और घर की छत से इस रोशन मीनार को देखते रहने में था।
मेरे बचपन का आंगन और लोधीपुर की मजार इसे हजरत मियां बुलंद शाह (रहमतुल्लाह अलैह) या आस्ताना आलिया हजरत बूलन शाह दादा की मजार के नाम से जाना जाता है। यह पवित्र मजार शाहजहांपुर के लोधीपुर क्षेत्र के एक बहुत ही प्रतिष्ठित और पहुंचे हुए सूफी संत हजरत मियां बुलंद शाह की याद में बनाई गई है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार, इस ऐतिहासिक दरगाह का अस्तित्व लगभग 312 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है, जो इसे इस क्षेत्र के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है। स्थानीय लोगों और अकीदतमंदों के बीच इस जगह को लेकर बेहद गहरी आस्था है मेरा बचपन शाहजहांपुर के लोधीपुर की उन्हीं गलियों में बीता है, जहाँ से यह पवित्र मजार मात्र 100 मीटर की दूरी पर है। मेरे लिए यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मेरे बचपन का सबसे करीबी हमसाया रही है। जब मैं छोटा था, तो हमारे घर की छत से इस मजार का खूबसूरत नजारा साफ दिखाई देता था। वह छत मेरे लिए एक ऐसी जगह थी, जहाँ बैठकर मैंने अपने बचपन के न जाने कितने सुकून भरे पल इस पावन आस्ताने को देखते हुए गुजारे हैं। इस मजार का यह पथरीला आंगन मेरे लिए किसी खेल के मैदान जैसा था, जहाँ खेल-कूद कर ही मैं बड़ा हुआ हूँ। न जाने बचपन में मेरे मासूम कदमों ने इस आंगन में कितनी आहटें दी होंगी और कितनी ही शामें दोस्तों के साथ यहाँ दौड़ते-भागते बीती हैं। यहाँ की हवाओं में मेरी हँसी और मेरे बचपन की शरारतें आज भी कहीं न कहीं महफूज हैं। साल के आम दिनों में जहाँ यहाँ एक रूहानी शांति पसरी रहती थी, वहीं उर्स के आते ही नजारा बिल्कुल जादुई हो जाता था। जब उर्स के दिनों में यह मजार रंग-बिरंगी लाइटों से पूरी तरह जगमगा उठती थी, तो मेरी रातें जैसे हसीन हो जाती थीं। मैं हर रोज घंटों अपनी छत पर खड़े होकर इस रोशनी को निहारा करता था। हवा में तैरती कव्वालियों की आवाज और लोबान की खुशबू सीधे हमारी छत तक आती थी, जो मेरे बाल-मन को एक अजीब सी खुशी और कौतूहल से भर देती थी। आज वक्त बदल गया है और जिंदगी की मसरूफियत बढ़ गई है, लेकिन जब भी मैं इस मजार की तस्वीर देखता हूँ, तो मुझे अपना वह बचपन और वह आंगन याद आ जाता है। यह मजार आज भी मेरे दिल के उतने ही पास है, जितनी बचपन में हुआ करती थी। यह तस्वीर मुझे मेरे उस मासूम दौर की याद दिलाती है, जब खुशियाँ बेहद सादी थीं और दुनिया का सबसे बड़ा सुकून बस इस आंगन में खेलने और घर की छत से इस रोशन मीनार को देखते रहने में था।
- 45 दिन की शादी और प्रेमी का ‘वादा’ — रिश्तों की ऐसी कहानी कि मोहल्ला भी बोले, भाई साहब ये तो स्क्रिप्ट से बाहर है! झांसी-भांडेर की इस कथित प्रेम कहानी ने रिश्तों के उस अध्याय को खोल दिया, जिसे देखकर शायद शादी के कार्ड छापने वाले भी सोच में पड़ जाएं—शादी हुई किसी और से, लेकिन दिल का ‘कॉन्ट्रैक्ट’ पुराने वाले से ही चलता रहा! 45 दिन की शादी और प्रेमी का ‘वादा’ — रिश्तों की ऐसी कहानी कि मोहल्ला भी बोले, भाई साहब ये तो स्क्रिप्ट से बाहर है! झांसी-भांडेर की इस कथित प्रेम कहानी ने रिश्तों के उस अध्याय को खोल दिया, जिसे देखकर शायद शादी के कार्ड छापने वाले भी सोच में पड़ जाएं—शादी हुई किसी और से, लेकिन दिल का ‘कॉन्ट्रैक्ट’ पुराने वाले से ही चलता रहा!1
- नेपाल के रसुआ जिले की आबादी करीब 45 हजार है। लेकिन ये काठमांडू से 125 किलोमीटर ही दूर है। दूसरी बात इसी रूट से लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं। इसलिए इस जिले में हमेशा से बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं। नदियों के किनारे स्थिति यह है कि पूरा का पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया है। इस इलाके को देखिए। यहां अच्छे और बड़े मकान थे, अब सब मलबे से भर गए।1
- ईद मिलाद-उन-नबी के जन्म दिन की याद में बाराबफात रोशनी कर धूमधाम से मनाया गया1
- शाहजहांपुर यूपी। 11 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा एवं रुद्राभिषेक का हुआ विधिवत समापन। ब्यूरो रिपोर्ट योगेश बाजपेई। शाहजहांपुरके खिरनी बाग रामलीला मैदान में आयोजित 11 दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा एवं रुद्राभिषेक का बुधवार को विधिवत हुआ समापन । 11 दिनों तक आयोजित इस शिवामहापुराण कथा एवं रुद्राभिषेक में कथा वाचक प्रशांत प्रभु जी महाराज काशी बनारस ने अपनी मधुर वाणी से श्रोताओं को कथाओं का श्रवण करवाया। सोमवार को कथा के अंतिम दिन कथा वाचक ने तारकासुर के बध की कथा का सुंदर वर्णन किया। उसके उपरांत भगवान शिव के रुद्राभिषेक की विस्तृत महत्वता की कथा सुनाई। प्रतिदिन नगर के खिरनी बाग रामलीला मैदान में दूर दूर से सैंकड़ों लोग कथा श्रवण के लिए पहुंचे। कथा विश्राम के उपरांत सैकड़ो शिव भक्तों ने मंगलवार को भगवान शिव का सामूहिक रुद्राभिषेक पार्थिव शिवलिंग बनाकर किया इसके उपरांत बुधवार को आचार्य विवेकानंद शास्त्री काशी बनारस के द्वारा हवन यज्ञ के साथ कथा को विधिवत विराम दिया गया।4
- जुलूस में फंसी वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की गाड़ी, सुरक्षा कर्मियों ने निकाला शाहजहांपुर में ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर बुधवार को निकाले जा रहे जुलूस के दौरान लाल इमली चौराहे पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की गाड़ी करीब चार मिनट तक फंसी रही। वित्त मंत्री गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लौट रहे थे। चौराहे पर जुलूस और भारी भीड़ के कारण उनके काफिले को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिल सका। अचानक काफिला रुकने से सुरक्षा कर्मियों के सामने भीड़ को नियंत्रित कर रास्ता बनाने की चुनौती खड़ी हो गई। सुरक्षा कर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए लोगों को किनारे कराया और वाहन के निकलने के लिए रास्ता बनाने का प्रयास शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद भीड़ के बीच से रास्ता बनाया जा सका। इसके बाद वित्त मंत्री की गाड़ी को सुरक्षा घेरे में वहां से सुरक्षित निकालकर आगे रवाना किया गया।1
- ****बारावफात पर पुलिस का सख्त पहरा, शांतिपूर्ण संपन्न हुआ पर्व*** शाहजहांपुर। बारावफात पर्व को लेकर पुलिस पूरे दिन हाई अलर्ट पर रही। पुलिस अधीक्षक ने स्वयं सड़क पर उतरकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और जुलूस मार्ग, प्रमुख चौराहों व संवेदनशील स्थानों का पैदल भ्रमण किया। पुलिस अधीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक नगर, क्षेत्राधिकारी नगर और पुलिस बल के साथ थाना कोतवाली क्षेत्र में पैदल गश्त की। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ ड्यूटी करने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए। बारावफात को लेकर जिलेभर में पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। लगातार गश्त और निगरानी के साथ अधिकारियों ने भी संवेदनशील क्षेत्रों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। पुलिस की कड़ी निगरानी और व्यापक सुरक्षा इंतजामों के चलते बारावफात पर्व शाहजहांपुर में शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सकुशल संपन्न हो गया। शाहजहांपुर पुलिस का संदेश—सुरक्षा से कोई समझौता नहीं, कानून-व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता।1
- थाना खुदागंज क्षेत्रान्तर्गत ग्राम मकरन्दापुर में ग्राम समाज की भूमि पर थाना खुदागंज क्षेत्रान्तर्गत ग्राम मकरन्दापुर में ग्राम समाज की भूमि पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में मारपीट की घटना व पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध मे अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण की बाइट।1
- पॉक्सो एक्ट में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार शाहजहांपुर। थाना रामचंद्र मिशन पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में पॉक्सो एक्ट में वांछित अभियुक्त गिरफ्तार शाहजहांपुर। थाना रामचंद्र मिशन पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के मुकदमे में वांछित चल रहे 30 वर्षीय अभियुक्त राजकुमार पुत्र बांके निवासी मोहल्ला रेती को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्त को 26 अगस्त को सुबह करीब 10:50 बजे उसके घर से मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 23 अगस्त को एक महिला की तहरीर पर मु.अ.सं. 161/26 धारा 74, 351(3) बीएनएस और 7/8 पॉक्सो एक्ट के तहत राजकुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि अभियुक्त करीब एक माह से पीड़िता की पुत्री को मोबाइल दिखाने के बहाने अपने साथ ले जाता था और उसके साथ छेड़छाड़ करता था। आरोप है कि 17 अगस्त को भी घिसा महल के पास बने बंगर के निकट उसके साथ छेड़छाड़ की गई। घटना किसी को बताने पर अभियुक्त ने पीड़िता और उसके पिता को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है। मुकदमे की विवेचना के दौरान पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अभियुक्त को उसके मकान से गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तार करने वाली टीम में उपनिरीक्षक प्रवीण कुमार और कांस्टेबल सहदेव कुमार, थाना रामचंद्र मिशन शामिल रहे।1