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राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला स्थित चारबाग के होटल परम में गोमतीनगर निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद सनीम सिद्दीकी नामक युवक ने आत्महत्या कर ली है। घटना की सूचना मिलते ही नाका पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की जांच पड़ताल में जुट गई है।
Anurag Kashyap
राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला स्थित चारबाग के होटल परम में गोमतीनगर निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद सनीम सिद्दीकी नामक युवक ने आत्महत्या कर ली है। घटना की सूचना मिलते ही नाका पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की जांच पड़ताल में जुट गई है।
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- राजधानी लखनऊ के नाका हिंडोला स्थित चारबाग के होटल परम में गोमतीनगर निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद सनीम सिद्दीकी नामक युवक ने आत्महत्या कर ली है। घटना की सूचना मिलते ही नाका पुलिस मौके पर पहुँच गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की आगे की जांच पड़ताल में जुट गई है।1
- बच्चों द्वारा तालाब के किनारे किया गया पौधारोपण सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुंदर संदेश है। आज लगाए गए हर पौधे से कल स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और हरा-भरा वातावरण सुनिश्चित होगा, जो एक हरियाली भरे भविष्य की नींव रखेगा। इसी क्रम में, सभी से यह संकल्प लेने का आह्वान किया गया है कि 'एक बच्चा – एक पौधा' अभियान को जन-जन तक पहुँचाकर पर्यावरण संरक्षण को एक जनआंदोलन बनाया जाए। यह संदेश दिया गया है कि पेड़ लगाना और प्रकृति को बचाना ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण उपहार है।1
- बृजभूषण शरण सिंह ने राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था और इस दौरान हुए संघर्षों के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। उनके समर्थकों और स्वयं उनके बयानों के अनुसार, जेल में भी उनका अच्छा खासा दबदबा था, जहाँ वे अन्य आंदोलनकारियों के साथ सक्रिय रहे। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है और इसका श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं, संतों और नेताओं को जाता है जिन्होंने इस आंदोलन को खड़ा किया। हालाँकि, हाल के वर्षों में बृजभूषण शरण सिंह ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है कि मंदिर निर्माण के बाद उन पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है जिन्होंने आंदोलन को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाई थी। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं को व्यवस्था से धीरे-धीरे अलग कर दिया गया। हाल के दिनों में वे मंदिर में दान राशि और व्यवस्था को लेकर काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि वे पिछले चार वर्षों से राम मंदिर के दर्शन के लिए नहीं गए हैं, क्योंकि उन्हें शुरू से ही मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था में कुछ अनियमितताओं की आशंका थी। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।1
- सीतापुर के रामपुर कला क्षेत्र में अवैध खनन के एक मामले को लेकर एक शिकायतकर्ता ने प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि अवैध खनन गतिविधियों के कारण उसकी जमीन को भारी नुकसान पहुँचा है, लेकिन इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानीय थाना प्रभारी ने उनकी शिकायत सुनने से इनकार कर दिया और उन्हें थाने से भगा दिया। पीड़ित ने बताया कि उसे जान से मारने की धमकियाँ भी मिल रही हैं। इस पूरे मामले पर ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति जताई है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।1
- लखनऊ के मोहनलालगंज थाना क्षेत्र की खुजौली चौकी में दहेज उत्पीड़न का एक और दुखद मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटी की कथित तौर पर हत्या कर उसे लटका दिया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत सुनने और कार्रवाई करने के बजाय, बेटी के ससुराल वालों से मिलीभगत कर उन्हें भगा दिया था। जानकारी के अनुसार, बेटी ने अपने परिवार को ससुराल में हो रही प्रताड़ना की पूरी दास्तान बताई थी, जिसके बाद परिवार के सदस्य उसे लेने उसके ससुराल पहुँचे थे। हालाँकि, ससुराल वालों ने बेटी से मिलने नहीं दिया। इसके बाद, पीड़ित परिवार ने मदद के लिए स्थानीय पुलिस चौकी खुजौली का रुख किया। आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने पूरे परिवार को गालियाँ देकर भगा दिया और उनकी शिकायत सुनने से इनकार कर दिया, बल्कि उल्टा बेटी के ससुराल पक्ष का साथ दिया। परिवार को आशंका थी कि उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी हो सकती है, इसीलिए वे उसे बचाने गए थे। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि चौकी इंचार्ज अरुण सिंह और एक सिपाही ने उनके बेटे की पिटाई भी की। परिवार के वापस आते ही, आरोप है कि बेटी को मारकर लटका दिया गया। अब पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस मुकदमा दर्ज करने को तैयार नहीं है। परिवार का स्पष्ट कहना है कि पुलिस बेटी के ससुराल वालों से सांठगांठ कर जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है।1