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दीवारों पर दिखने वाले सफेद दाग, जिन्हें Efflorescence कहा जाता है, एक आम समस्या है। इस विषय पर यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर ये सफेद दाग दीवारों पर क्यों आते हैं और इन्हें जड़ से पूरी तरह कैसे खत्म किया जा सकता है।
Rahul Sir
दीवारों पर दिखने वाले सफेद दाग, जिन्हें Efflorescence कहा जाता है, एक आम समस्या है। इस विषय पर यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर ये सफेद दाग दीवारों पर क्यों आते हैं और इन्हें जड़ से पूरी तरह कैसे खत्म किया जा सकता है।
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- दीवारों पर सफेद दाग, जिन्हें Efflorescence भी कहा जाता है, उनके आने के कारणों और उन्हें जड़ से खत्म करने के तरीकों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।1
- दीवारों पर दिखने वाले सफेद दाग, जिन्हें Efflorescence कहा जाता है, एक आम समस्या है। इस विषय पर यह प्रश्न उठाया गया है कि आखिर ये सफेद दाग दीवारों पर क्यों आते हैं और इन्हें जड़ से पूरी तरह कैसे खत्म किया जा सकता है।1
- गोपालगंज आबकारी विभाग ने एक बड़ी सफलता हासिल की है, जहाँ दिल्ली से बिहार लाई जा रही भारी मात्रा में शराब का भंडाफोड़ किया गया। यह शराब बड़ी मात्रा में दिल्ली से लाई जा रही थी। इस मामले में पकड़ा गया आरोपी पहले भी कई बार जेल जा चुका है।1
- कुशीनगर जिले में एक घटना सामने आई है जहाँ नारायणी नदी में नहाने गए दो किशोर लापता हो गए हैं। इन लापता किशोरों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर खोजबीन अभियान जारी है।1
- पश्चिम चम्पारण के बेतिया नगर थाना क्षेत्र से अपहृत एक नाबालिग लड़की को पुलिस ने घटना के 24 घंटे के भीतर सुरक्षित बरामद कर लिया है। इस मामले में अपहरण के आरोपी जॉनी जार्ज को क्रिश्चियन क्वार्टर, बेतिया से गिरफ्तार किया गया है। बेतिया सदर एसडीपीओ अजीत कुमार ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि नाबालिग के अपहरण की सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया था, जिसने त्वरित कार्रवाई की। गठित टीम ने तेजी से छापेमारी करते हुए नाबालिग को बरामद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। छापेमारी के दौरान घटनास्थल से एक बेडशीट सहित अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी मिली, जिसे साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि बरामद नाबालिग को चिकित्सीय जांच के लिए जीएमसीएच, बेतिया भेजा गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के योगपट्टी ब्लॉक के तहत ढढवा ग्राम पंचायत के दूधियवा गांव में सड़क की हालत बेहद खराब है। गांव के लोगों ने संबंधित अधिकारियों से भावुक अपील की है कि कृपया इस सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें खराब सड़क के कारण हो रही परेशानियों से निजात मिल सके। यह गांव नवलपुर थाना क्षेत्र में आता है।1
- कई वर्षों से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी सेब की पहचान अब बदल रही है, क्योंकि बिहार की धरती पर भी लाल सेबों की बंपर पैदावार हो रही है। पश्चिम चम्पारण के किसान इस बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे बिहार अब सेब उत्पादन की दिशा में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पश्चिम चम्पारण के साथ-साथ गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे ने दो साल पहले करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हुए हैं। प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब का उत्पादन हो रहा है, जिनकी गुणवत्ता, मिठास, रंग और आकार किसी भी पहाड़ी प्रदेश में उगने वाले सेब से कम नहीं है। शिशिर दूबे के अनुसार, शुरुआत में बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन अब दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने और खेती की तकनीक जानने आ रहे हैं। इस अभियान में बेतिया शहर के व्यवसायी मेराजुल हक भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने पर्यावरण प्रेम के चलते अपने आवास और परिसर में सेब के कई पौधे लगाए, जो अब फल दे रहे हैं। उनका मानना है कि फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। पश्चिम चम्पारण में मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे अन्य किसान भी सेब की खेती में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनके बागानों में दर्जनों पौधे लगातार फल दे रहे हैं। बिहार में उगाए जा रहे सेब की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय से पहले उपलब्धता है। जहां हिमाचल और कश्मीर में सेब की कटाई सितंबर और अक्टूबर में होती है, वहीं बिहार में जून और जुलाई तक इसकी तुड़ाई पूरी हो जाती है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है क्योंकि उनका उत्पाद बाजार में दो महीने पहले पहुंच जाता है और उन्हें बेहतर कीमतें मिलती हैं। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में ये सेब ₹200 प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि कई जगहों पर इसकी कीमत ₹250 प्रति किलो तक पहुंच रही है। यह सेब बेहद मीठा, रसीला और आकर्षक लाल रंग का होता है, जो पकने पर पूरी तरह लाल हो जाता है। किसानों द्वारा उगाई जा रही सेब की यह विशेष किस्म HRMN-99 (हरमन-99) है, जिसे विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किस्म 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी आसानी से विकसित होती है और पौधारोपण के एक से दो वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर लाभ देने की क्षमता रखती है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो, तो बिहार भविष्य में सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। पश्चिम चम्पारण में सेब के पौधे खेती में नवाचार और नई सोच से असंभव को संभव बनाने का प्रमाण हैं, जो बिहार में सेब उत्पादन की एक नई कहानी लिख रहे हैं। कभी पहाड़ों की पहचान माना जाने वाला सेब अब बिहार की मिट्टी में भी सफलता की नई फसल बन चुका है और यह बिहार का लाल सेब अब देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।1
- राहुल सर पीसीबी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में अनुवाद के महत्व पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। यह वीडियो अनुवाद की परिभाषा, उसके विभिन्न प्रकारों और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में इसके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में जानकारी प्रदान करेगा।1