मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का हल्लाबोल: 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेराव की तैयारी मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का हल्लाबोल: 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेराव की तैयारी लखनऊ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप के साथ कथित छेड़छाड़ और केंद्र सरकार की 'मजदूर विरोधी' नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के अगले चरण के तहत आगामी 17 फरवरी को प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ता और श्रमिक लखनऊ में विधानसभा का घेराव करेंगे। 'ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा' पर संकट कांग्रेस का कहना है कि 20 वर्ष पहले यूपीए-1 सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून संविधान में निहित 'काम के अधिकार' को साकार करता है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और कोविड-19 जैसे भीषण संकट के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालने वाला यह कानून आज भाजपा सरकार की कथित साजिशों का शिकार हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस कानून को कमजोर कर इसे खत्म करने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीबों की गरिमा और सुरक्षा खतरे में है। एक महीने से जारी है देशव्यापी संग्राम पार्टी के अनुसार, भाजपा के नए नियमों के विरोध में 3 जनवरी से ही देशव्यापी 'मनरेगा बचाओ संग्राम' शुरू किया गया था। पिछले एक महीने के दौरान: प्रदेश भर में 5000 से ज्यादा चौपालों का आयोजन कर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। 13 फरवरी को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पदयात्राएं निकालकर गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। संघीय ढांचे पर प्रहार का आरोप कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलाव न केवल मजदूरों के खिलाफ हैं, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का एक 'कुत्सित प्रयास' है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। "जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता, हमारी लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। 17 फरवरी का विधानसभा घेराव सोई हुई सरकार को जगाने का काम करेगा।" आह्वान: कांग्रेस ने प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं और आम जनमानस से अपील की है कि वे 17 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ कूच करें और इस जनविरोधी नीति के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का हल्लाबोल: 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेराव की तैयारी मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का हल्लाबोल: 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेराव की तैयारी लखनऊ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप के साथ कथित छेड़छाड़ और केंद्र सरकार की 'मजदूर विरोधी' नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के अगले चरण के तहत आगामी 17 फरवरी को प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ता और श्रमिक लखनऊ में विधानसभा का घेराव करेंगे। 'ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा' पर संकट कांग्रेस का कहना है कि 20 वर्ष पहले यूपीए-1 सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून संविधान में निहित 'काम के अधिकार' को साकार करता है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और कोविड-19 जैसे भीषण संकट के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालने वाला यह कानून आज भाजपा सरकार की कथित साजिशों का शिकार हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस कानून को कमजोर कर इसे खत्म करने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीबों की गरिमा और सुरक्षा खतरे में है। एक महीने से जारी है देशव्यापी संग्राम पार्टी के अनुसार, भाजपा के नए नियमों के विरोध में 3 जनवरी से ही देशव्यापी 'मनरेगा बचाओ संग्राम' शुरू किया गया था। पिछले एक महीने के दौरान: प्रदेश भर में 5000 से ज्यादा चौपालों का आयोजन कर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। 13 फरवरी को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पदयात्राएं निकालकर गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। संघीय ढांचे पर प्रहार का आरोप कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलाव न केवल मजदूरों के खिलाफ हैं, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का एक 'कुत्सित प्रयास' है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। "जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता, हमारी लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। 17 फरवरी का विधानसभा घेराव सोई हुई सरकार को जगाने का काम करेगा।" आह्वान: कांग्रेस ने प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं और आम जनमानस से अपील की है कि वे 17 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ कूच करें और इस जनविरोधी नीति के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
- मनरेगा बचाने के लिए कांग्रेस का हल्लाबोल: 17 फरवरी को लखनऊ में विधानसभा घेराव की तैयारी लखनऊ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के मूल स्वरूप के साथ कथित छेड़छाड़ और केंद्र सरकार की 'मजदूर विरोधी' नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के अगले चरण के तहत आगामी 17 फरवरी को प्रदेश भर के कांग्रेस कार्यकर्ता और श्रमिक लखनऊ में विधानसभा का घेराव करेंगे। 'ग्रामीण अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा' पर संकट कांग्रेस का कहना है कि 20 वर्ष पहले यूपीए-1 सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून संविधान में निहित 'काम के अधिकार' को साकार करता है। ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने और कोविड-19 जैसे भीषण संकट के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संभालने वाला यह कानून आज भाजपा सरकार की कथित साजिशों का शिकार हो रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार इस कानून को कमजोर कर इसे खत्म करने का प्रयास कर रही है, जिससे गरीबों की गरिमा और सुरक्षा खतरे में है। एक महीने से जारी है देशव्यापी संग्राम पार्टी के अनुसार, भाजपा के नए नियमों के विरोध में 3 जनवरी से ही देशव्यापी 'मनरेगा बचाओ संग्राम' शुरू किया गया था। पिछले एक महीने के दौरान: प्रदेश भर में 5000 से ज्यादा चौपालों का आयोजन कर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। 13 फरवरी को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में पदयात्राएं निकालकर गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया। संघीय ढांचे पर प्रहार का आरोप कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलाव न केवल मजदूरों के खिलाफ हैं, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का एक 'कुत्सित प्रयास' है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर राज्यों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। "जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता, हमारी लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक जारी रहेगी। 17 फरवरी का विधानसभा घेराव सोई हुई सरकार को जगाने का काम करेगा।" आह्वान: कांग्रेस ने प्रदेश के सभी कार्यकर्ताओं और आम जनमानस से अपील की है कि वे 17 फरवरी को अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ कूच करें और इस जनविरोधी नीति के खिलाफ आवाज बुलंद करें।1
- पीलीभीत गोयल कॉलोनी से कांवरियों का एक टोली हरिद्वार के लिए गया था जो आज दिनांक 15/02/26 पैदल यात्रा करते हुए और भोलेनाथ की जयकारा लगाते हुए 350 किलोमीटर की दुरी तय कर अपने क्षेत्र गोयल कॉलोनी पहुंचे, भोले का कहना है l1
- पीलीभीत। शहर के एक रसूखदार प्रॉपर्टी डीलर के कार्यालय में कर्मचारी अनिल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है। घटना के 30 घंटे बीत जाने के बाद भी शहर कोतवाली पुलिस द्वारा एफआईआर F I R दर्ज न करने से नाराज पीड़ित परिवार ने पीडब्ल्यूडी P W D गेस्ट हाउस पहुंचकर राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार से गुहार लगाई। इस दौरान शहर कोतवाल की कार्यप्रणाली से नाराज मंत्री ने पुलिस अधीक्षक को मौके पर बुलाकर कोतवाल को तत्काल सस्पेंड करने के निर्देश दिए। क्या है पूरा मामला मृतक अनिल शहर के कथित बड़े कॉलोनाइजर वेद प्रकाश कश्यप के कार्यालय में कर्मचारी था। अनिल का शव संदिग्ध अवस्था में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला था, जिसके बाद परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। परिजनों का सीधा आरोप है कि अनिल की हत्या की गई है और इसमें प्रॉपर्टी डीलर की भूमिका संदिग्ध है। रसूख के आगे बेबस पुलिस और मंत्री को ही पढ़ाया पाठ हैरानी की बात यह रही कि मौत के 30 घंटे बाद भी शहर कोतवाली पुलिस ने रसूखदार प्रॉपर्टी डीलर के दबाव में मुकदमा दर्ज नहीं किया। हद तो तब हो गई जब पीड़ित परिवार की फरियाद सुनकर राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने जवाब मांगा, तो शहर कोतवाल सत्येंद्र कुमार उन्हें ही कानून का पाठ पढ़ाने लगे। कोतवाल ने तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी, जिस पर मंत्री भड़क गए। राज्य मंत्री का सख्त रुख: 'सरकार पीड़ितों के साथ कोतवाल की इस दलील और टालमटोल वाली कार्यशैली को देख राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने तत्काल पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा को गेस्ट हाउस तलब किया। मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश की योगी सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है और अपराधियों को बचाने वाले अधिकारियों के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है। उन्होंने एसपी से स्पष्ट कहा— "शहर कोतवाल की कार्यशैली संदिग्ध है, इन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए।" प्रशासनिक हलचल तेज मंत्री के इस कड़े रुख के बाद जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिस प्रॉपर्टी डीलर वेद प्रकाश कश्यप के रसूख के आगे पुलिस मौन साधे बैठी थी, अब उस पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक कर्मचारी की जान की कीमत पुलिस की नजर में इतनी कम क्यों थी कि 30 घंटे तक तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई1
- रम्पुरा कोन फार्म हाउस से पालतू कुत्ता उठा ले गया तेंदुआ, गांव में दहशत, वीडियो वायरल पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गांव रम्पुरा कोन निवासी दीप सिंह के फार्म हाउस से शुक्रवार रात एक तेंदुआ पालतू कुत्ते को उठा ले गया। जिसका वीडियो शनिवार दोपहर एक बजे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी इसी फार्म हाउस से कुछ दिन पूर्व एक अन्य कुत्ते को तेंदुआ उठा ले गया था। लगातार दूसरी घटना से ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई दिनों से तेंदुए की चहलकदमी गांव और आसपास के खेतों में देखी जा रही है, जिससे रात के समय बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। जिसको लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।1
- Post by Raunak Ali Ansari1
- जिला बरेली थाना कूयुलाडिया ग्राम परसरामपुर में उर्स मुबारक के मौके पर मलंग लोगों ने दिखाएं है हैरतअंगेज करतब और मलंग लोगों ने देश के लिए अमने अमन चैन कि दुआ कि1
- पीलीभीत। राज्यमंत्री ने कोतवाल के व्यवहार पर नाराज़गी जताई बोले मुझे कानून समझाने की जरूरत नहीं है, वे खुद उच्च शिक्षित हैं और कई उद्योग संचालित करते हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की माग की1
- प्रॉपर्टी डीलर के ऑफिस में कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। घटना के बाद मौके पर पहुंचे संजय सिंह गंगवार का उग्र रूप देखने को मिला। बताया जा रहा है कि मृतक के परिजनों ने प्रशासन को पहले ही एप्लीकेशन देकर न्याय की गुहार लगाई थी। परिजनों का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मौके पर पहुंचे संजय सिंह गंगवार ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जब मृतक के परिजनों ने एप्लीकेशन दिया था, तो आखिर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।1