92 साल की उम्र में रखे रोज़े,इबादत का जज़्बा बना मिसाल सेंधवा में रमजान के पाक महीने में जहां युवा भी पूरे महीने रोज़ा रखने में थकान महसूस करते हैं, वहीं सेंधवा के टैगोर बेड़ी निवासी 92 वर्षीय कमरुद्दीन तैली ने अपनी उम्र को पीछे छोड़ते हुए रोज़े रखकर इबादत की मिसाल पेश की है। कमरुद्दीन तैली इस उम्र में भी पूरे जज़्बे के साथ रमजान के रोज़े रख रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने एक रोज़ा बिना सहरी किए भी रखा, जो उनके मजबूत इरादे और अल्लाह के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमरुद्दीन तैली हमेशा से नमाज़ और इबादत के पाबंद रहे हैं। 92 वर्ष की उम्र में भी उनका रोज़ा रखना इलाके के लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। रमजान के इस मुबारक महीने में उनका जज़्बा यह संदेश देता है कि सच्ची नीयत और मजबूत ईमान के सामने उम्र भी छोटी पड़ जाती है। इलाके के लोग भी उनकी सेहत और लंबी उम्र की दुआ कर रहे हैं और उनके इस जज़्बे की सराहना कर रहे
92 साल की उम्र में रखे रोज़े,इबादत का जज़्बा बना मिसाल सेंधवा में रमजान के पाक महीने में जहां युवा भी पूरे महीने रोज़ा रखने में थकान महसूस करते हैं, वहीं सेंधवा के टैगोर बेड़ी निवासी 92 वर्षीय कमरुद्दीन तैली ने अपनी उम्र को पीछे छोड़ते हुए रोज़े रखकर इबादत की मिसाल पेश की है। कमरुद्दीन तैली इस उम्र में भी पूरे जज़्बे के साथ रमजान के रोज़े रख रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने एक रोज़ा बिना सहरी किए भी रखा, जो उनके मजबूत इरादे और अल्लाह के प्रति गहरी आस्था को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमरुद्दीन तैली हमेशा से नमाज़ और इबादत के पाबंद रहे हैं। 92 वर्ष की उम्र में भी उनका रोज़ा रखना इलाके के लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है। रमजान के इस मुबारक महीने में उनका जज़्बा यह संदेश देता है कि सच्ची नीयत और मजबूत ईमान के सामने उम्र भी छोटी पड़ जाती है। इलाके के लोग भी उनकी सेहत और लंबी उम्र की दुआ कर रहे हैं और उनके इस जज़्बे की सराहना कर रहे
- सेंधवा। शहर के ईरानी कॉलोनी क्षेत्र में गुरुवार को अज्ञात कारणों से अचानक भीषण आग लगने की घटना सामने आई। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आग की चपेट में आने से मौके पर ही पांच भैंसों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक भैंस गंभीर रूप से घायल हो गई। वहीं आग बुझाने के प्रयास के दौरान एक व्यक्ति भी झुलस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग अचानक भड़क उठी और कुछ ही देर में पशु बाड़े को अपनी चपेट में ले लिया। आसपास के लोगों ने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण स्थिति पर काबू पाना मुश्किल हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सेंधवा नगर पालिका की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जिससे आसपास के मकानों और अन्य स्थानों को आग की चपेट में आने से बचा लिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जमा हो गई और पशुपालक को हुए नुकसान को लेकर लोग चिंता व्यक्त करते नजर आए। इस आगजनी की घटना में पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है, वहीं घायल व्यक्ति का उपचार जारी है।1
- मध्यप्रदेश सरकार की "मां तुझे प्रणाम" योजना के तहत पानसेमल ब्लॉक से 3 छात्रों का चयन हुआ है ।इस योजना के तहत युवाओं में राष्ट्रप्रेम ओर देशभक्ति एवं देश की सेना के प्रति सम्मान जगाने के उद्देश्य से अलग अलग ब्लॉकों से युवाओं का चयन किया जाता हैं।पानसेमल ब्लॉक से राजस्थान के लिए 3 छात्रों का चयन हुआ जिसमें अर्जुन सोलंकी,साहिल कोली एवं सुरेश सोलंकी सीमा पर जाकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अपने अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।छात्रों के चयन पर श्री अटल बिहारी वाजपेई शासकीय महाविद्यालय स्टाफ द्वारा हर्ष जताया है।1
- बाज़ार हाट के दौरान दिखी सख़्ती: थाना प्रभारी ने खुद सड़क पर उतरकर रोड पर लगी दुकाने हटवाई, दी अंतिम चेतावनी1
- बड़वानी। जिला मुख्यालय के कसरावद स्थित बड़े पुल से गुरुवार को एक युवक ने नदी में छलांग लगा दी। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जानकारी के अनुसार युवक की पहचान सायला बामनिया (28) निवासी बोर फलिया, ग्राम लाइझापि, पोस्ट लिम्बी, जिला बड़वानी के रूप में हुई है। पुल से छलांग लगाने के बाद युवक नदी में चला गया था, जिसे एसडीआरएफ टीम ने काफी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद युवक को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल के डॉ. राहुल पाटीदार ने बताया कि युवक सायला बामनिया को इलाज के लिए लाया गया था। परीक्षण के बाद उसका उपचार शुरू कर दिया गया है और फिलहाल उसकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है। युवक ने पुल से छलांग क्यों लगाई, इसका कारण फिलहाल अज्ञात है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और युवक से पूछताछ के बाद ही घटना के पीछे की वजह स्पष्ट हो पाएगी। गौरतलब है कि कसरावद का बड़ा पुल पहले भी कई हादसों और आत्महत्या के प्रयासों को लेकर चर्चा में रहा है। स्थानीय समाज सेवियों और रहवासियों द्वारा कई बार पुल पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने, जाली या ऊंची रेलिंग लगाने तथा निगरानी व्यवस्था करने की मांग उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से पुल पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग दोहराई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।1
- डॉक्टर धीरेंद्र कुमार पवार सर केंसर रोग विशेषज्ञ जिला टीकाकरण अधिकारी खरगोन1
- Post by रिपोर्टर राजा गोखले2
- खेतिया कृषि उपज मंडी में गुरुवार उपज की आवक रही, कपास के भाव न्यूनतम ₹6,610/क्विंटल,औसतन ₹7,350/क्विंटल,अधिकतम ₹7,845/क्विंटल रहे वायवन कपास के भाव ₹6,945 से ₹7,500/क्विंटल तथा गेहूं के भाव ₹2,185 से ₹2,240/ क्विंटल रहे जबकि मक्का ₹1,570/क्विंटल तथा चना [मैक्सिकन] ₹7,360/प्रति क्विंटल तक बिका है।1
- मांडू में दशा माता पर्वः महिलाओं ने ग्रहों के दोष और परेशानियों को दूर करने के लिए व्रत रख की पूजा-अर्चना, पीपल के पेड़ की परिक्रमा करते हुए लपेटा सूत राहुल सेन मांडव मो 9669141814 मांडू न्यूज/मांडू नगर और आसपास के क्षेत्र में महिलाओं ने शुक्रवार को दशा माता का व्रत कर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने मांडू के प्राचीन राम मंदिर के पीछे हनुमान जी परिसर में पीपल के पेड़ की पूजा की। मान्यता है कि इस व्रत को रखने और देवी की पूजा से ग्रहों के दोष और परेशानियां खत्म होती है। कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए भी व्रत करती है। इस विधि से की दशा माता की पूजा-अर्चना महिलाएं सुबह सूर्योदय से पूर्व उठी और व्रत का संकल्प लिया। पूजा करते समय दीवार पर स्वास्तिक बनाया और मेहंदी या सिंदूर से अंगुली से दस बिंदिया बनाई। पूजा सामग्री में रोली, मौली, सुपारी, चावल, दीप, नैवेद्य, धुप, अगरबत्ती लेकर महिलाओं ने कच्चे सूत का डोरा लाकर डोरे की कहानी सुनी और कहीं। इसके बाद सूत का बना श्वेत धागे में गांठ लगाई और उसे हल्दी में रंगा। इस धागे को दशा माता की बेल कहा जाता हैं। धागे की पूजा की और डोरे में 10 गांठ लगाकर गले में बांध ली। इसके बाद धागे को पूरे साल कभी न उतारने का संकल्प लिया। महिलाओं ने पीपल की पूजा कर 10 बार पीपल की परिक्रमा करते हुए उस पर सूत लपेटा। मान्यता है कि आज के दिन दशा माता की पूजा करने से दशा माता की कृपा होती है।कहां जाता है कि पूजा करने घर में सुख शांति और समृद्धि आती है। सुहागिन महिलाओं ने आज इस डोरे की पूजा के बाद पूजन स्थल पर नल-दमयंती की कथा सुनी। इसके बाद महिलाएं अपने घरों पर हल्दी और कुमकुम के छापे लगाए।4
- रानी की बावड़ी उल्टा मंदिर गुजरात में 1062 फीट नीचे1