लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर से जुड़े दर्दनाक हादसे के बाद, फर्रुखाबाद प्रशासन अब सतर्कता से कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान, जिले के कई कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। जांच टीमों को ऐसी तंग गलियों में संचालित होते कोचिंग सेंटर मिले, जहाँ किसी आपात स्थिति में छात्रों का सुरक्षित बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम ने पाया कि कई कोचिंग सेंटर केवल तीन फीट चौड़ी गलियों में चल रहे थे, जबकि कुछ संस्थानों में कक्षाएं अंडरग्राउंड बेसमेंट में संचालित की जा रही थीं। कई जगहों पर अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) भी उपलब्ध नहीं मिला, और कुछ भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं थे। इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की थी, जहाँ एक ही कक्ष में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया गया था और आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव पाया गया, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने बताया कि जांच में सुरक्षा संबंधी कई खामियां उजागर हुई हैं, जिसके मद्देनजर सभी कोचिंग संस्थानों को 48 घंटे के भीतर अपने भवन संबंधी दस्तावेज, फायर एनओसी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में अभिलेख प्रस्तुत न करने या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ हादसे के बाद फर्रुखाबाद में शुरू हुई इस कार्रवाई ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासनिक सख्ती के बाद कितने संस्थान इन नियमों का पालन करते हुए छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर से जुड़े दर्दनाक हादसे के बाद, फर्रुखाबाद प्रशासन अब सतर्कता से कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान, जिले के कई कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। जांच टीमों को ऐसी तंग गलियों में संचालित होते कोचिंग सेंटर मिले, जहाँ किसी आपात स्थिति में छात्रों का सुरक्षित बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम ने पाया कि कई कोचिंग सेंटर केवल तीन फीट चौड़ी गलियों में चल रहे थे, जबकि कुछ संस्थानों में कक्षाएं अंडरग्राउंड बेसमेंट में संचालित की जा रही थीं। कई जगहों पर अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) भी उपलब्ध नहीं मिला, और कुछ भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं थे। इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की थी, जहाँ एक ही कक्ष में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया गया था और आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव पाया गया, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने बताया कि जांच में सुरक्षा संबंधी कई खामियां उजागर हुई हैं, जिसके मद्देनजर सभी कोचिंग संस्थानों को 48 घंटे के भीतर अपने भवन संबंधी दस्तावेज, फायर एनओसी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में अभिलेख प्रस्तुत न करने या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ हादसे के बाद फर्रुखाबाद में शुरू हुई इस कार्रवाई ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासनिक सख्ती के बाद कितने संस्थान इन नियमों का पालन करते हुए छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
- फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ स्थित नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय में रिश्वतखोरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। कार्यालय के बाबू शिव शंकर पर एक वकील से फाइल अवलोकन के नाम पर पाँच सौ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा है। रिश्वत लेते हुए लिपिक का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना के बाद, पीड़ित वकील ने भ्रष्ट बाबू शिव शंकर की शिकायत करते हुए जिलाधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया है। प्रार्थना पत्र में वकील ने बाबू पर यह भी आरोप लगाया है कि वह शहर के दलाल और हिस्ट्रीशीटर, सजायाफ्ता सुधीर दिवाकर और सुशील दिवाकर से कार्यालय की फाइलों के साथ छेड़छाड़ करवाने और दलाली कराने का काम करवाता है।1
- उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद से संबंधित हर छोटी और बड़ी खबर दर्शकों तक पहुँचाने का उद्देश्य बताया गया है।1
- लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर से जुड़े दर्दनाक हादसे के बाद, फर्रुखाबाद प्रशासन अब सतर्कता से कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में चलाए गए विशेष जांच अभियान के दौरान, जिले के कई कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। जांच टीमों को ऐसी तंग गलियों में संचालित होते कोचिंग सेंटर मिले, जहाँ किसी आपात स्थिति में छात्रों का सुरक्षित बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है। निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम ने पाया कि कई कोचिंग सेंटर केवल तीन फीट चौड़ी गलियों में चल रहे थे, जबकि कुछ संस्थानों में कक्षाएं अंडरग्राउंड बेसमेंट में संचालित की जा रही थीं। कई जगहों पर अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) भी उपलब्ध नहीं मिला, और कुछ भवनों के नक्शे स्वीकृत नहीं थे। इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की थी, जहाँ एक ही कक्ष में बड़ी संख्या में छात्रों को बैठाया गया था और आपातकालीन निकास मार्गों का अभाव पाया गया, जिससे किसी दुर्घटना की स्थिति में बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। नगर मजिस्ट्रेट पारुल तरार ने बताया कि जांच में सुरक्षा संबंधी कई खामियां उजागर हुई हैं, जिसके मद्देनजर सभी कोचिंग संस्थानों को 48 घंटे के भीतर अपने भवन संबंधी दस्तावेज, फायर एनओसी और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों का विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय में अभिलेख प्रस्तुत न करने या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ हादसे के बाद फर्रुखाबाद में शुरू हुई इस कार्रवाई ने कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासनिक सख्ती के बाद कितने संस्थान इन नियमों का पालन करते हुए छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।1
- उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में भोलानाथ ज्वेलर्स के संचालक मुदित टंडन पर किसानों का सोना कम ब्याज दर का झांसा देकर गिरवी रखने और फिर उस पर 21% सालाना ब्याज वसूलने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर किसानों को उनका सोना वापस न देने और जान से मारने की धमकी भी दी जाती है। एक मामले का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि एक किसान से ₹1,10,000 के ऋण पर एक साल का ₹4,19,967 ब्याज लिया गया है। इस तरह के सूदखोरों के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी फर्रुखाबाद से तत्काल भोलानाथ ज्वेलर्स (नेहरू रोड, फर्रुखाबाद) के खिलाफ जांच बैठाने का निवेदन किया गया है। चेतावनी दी गई है कि यदि इन सूदखोरों के कारण किसी किसान ने आत्महत्या की, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भोलानाथ ज्वेलर्स के संचालक मुदित टंडन की होगी। ऐसे ज्वेलर्स को तत्काल प्रभाव से सीज करना जनहित में आवश्यक बताया गया है।1
- अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का एक मामला इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। इस घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।1
- फर्रुखाबाद में डीजीजीआई ने शंख छाप तम्बाकू से जुड़े कई ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए छापेमारी की है।1
- बुधवार सुबह फर्रुखाबाद के कायमगंज तहसील क्षेत्र में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने तंबाकू व्यापार से जुड़े बड़े कारोबारियों पर एक साथ बड़े पैमाने पर छापेमारी की। करीब एक दर्जन वाहनों के काफिले के साथ सुबह लगभग 6 बजे पहुंची DGGI की कई टीमों ने तीन प्रमुख तंबाकू कारोबारियों और उनके दो मुनीमों के आवासों तथा गोदामों समेत कुल 12 ठिकानों पर दबिश दी। इस कार्रवाई की सूचना फैलते ही पूरे क्षेत्र के तंबाकू कारोबारियों में हड़कंप मच गया, और स्थानीय व्यापारी इसे जीएसटी अनुपालन व संभावित टैक्स चोरी की जांच से जोड़कर देख रहे हैं। छापेमारी के प्रमुख ठिकानों में शमशाबाद-फैजबाग रोड स्थित 'शंख छाप तंबाकू' का गोदाम और उसके मालिक कृष्ण गोपाल रस्तोगी का मोहल्ला मूलचंद्र स्थित आवास शामिल थे, जहां टीमों ने स्टॉक, माल की आवाजाही के रिकॉर्ड और अन्य व्यापारिक दस्तावेजों की गहन जांच की। इसके अतिरिक्त, कृष्ण गोपाल रस्तोगी के मुनीम अखिलेश मिश्रा और संजू शाक्य के ताड़ वाली हवेली स्थित घरों की भी तलाशी ली गई। मोहल्ला पाठक निवासी तंबाकू कारोबारी अभिषेक अग्रवाल के घर भी टीम पहुंची, जहां उनकी पत्नी ने दरवाजा खोला, जबकि मोहल्ला लोकमन निवासी दूसरे तंबाकू कारोबारी रचित गुप्ता के घर उनकी मां मौजूद मिलीं, जिन्होंने अपने दामाद भगवानदीन गुप्ता को बुलाया, जिनकी मौजूदगी में अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की। DGGI अधिकारियों ने पूरे ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी; हर ठिकाने पर पहुंचते ही मुख्य दरवाजे बंद कर दिए गए और जांच पूरी होने तक किसी को भी अंदर-बाहर आने-जाने की अनुमति नहीं दी गई। छापेमारी की खबर फैलते ही कायमगंज और आसपास के तंबाकू व्यापारिक समुदाय में अफरा-तफरी मच गई और कई व्यापारियों ने अपने दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पिछले कुछ महीनों से चल रही गुप्त जानकारी के आधार पर की गई है, जिसमें जीएसटी रिटर्न, इनपुट टैक्स क्रेडिट और स्टॉक की बुकिंग में अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। अभी तक DGGI की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और जांच अभी जारी है। टीमों द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और स्टॉक की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।3
- लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद फर्रुखाबाद का जिला प्रशासन जागा और जिलाधिकारी के आदेश पर तत्काल कार्रवाई की गई। नगर मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी और अग्नि शमन अधिकारी की एक संयुक्त टीम ने जिले में छापेमारी की, जिसमें कई अनियमितताएँ सामने आने से हड़कंप मच गया। इन अनियमितताओं के चलते कुल एक कंप्यूटर सेंटर, दो कोचिंग सेंटर और दो मार्ट को सील कर दिया गया। जिला प्रशासन द्वारा सील किए गए इन संस्थानों में स्वरूप क्लासेस, आचार्य क्लासेस, विशाल मेगा मार्ट, वी मार्ट और ए प्लस आर आर कंप्यूटर इंस्टीट्यूट सेंटर शामिल हैं।2