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महात्मा गांधी गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल ग्राम समेलिया तहसील फागी जिला जयपुर राजस्थान
Lovely Sharma
महात्मा गांधी गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल ग्राम समेलिया तहसील फागी जिला जयपुर राजस्थान
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- करौली में तिरंगे का अपमान? जिला कलेक्टर के पैरों में गिरा राष्ट्रीय ध्वज, जिला स्तरीय समारोह की बड़ी चूक पर उठे सवाल करौली में तिरंगे का अपमान? जिला कलेक्टर के पैरों में गिरा राष्ट्रीय ध्वज, जिला स्तरीय समारोह की बड़ी चूक पर उठे सवाल करौली। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जहां पूरा देश तिरंगे को सलामी दे रहा था, वहीं राजस्थान के करौली में जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान हुई एक बड़ी चूक ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आपको बता दे कि जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा और पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल की मौजूदगी में ध्वजारोहण के दौरान तिरंगे की गांठ नहीं खुली। रस्सी को झटका देते ही राष्ट्रीय ध्वज पोल से टूटकर नीचे आ गिरा और मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार तिरंगा जिला कलेक्टर के पैरों के पास गिर गया। इस पूरे घटनाक्रम ने समारोह स्थल पर कुछ देर के लिए हड़कंप मचा दिया।जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय पर स्वतंत्रता दिवस का आधिकारिक समारोह पूरे सरकारी प्रोटोकॉल के तहत आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद थे। वहीं ध्वजारोहण की प्रक्रिया शुरू होते ही तिरंगे की गांठ नहीं खुली। इसके बाद रस्सी को झटका दिया गया, लेकिन उसी दौरान तिरंगा पोल से अलग होकर नीचे गिर पड़ा। राष्ट्रीय ध्वज को जमीन की ओर गिरता देख समारोह में मौजूद लोग हैरान रह गए और कुछ पल के लिए पूरा माहौल असहज हो गया।वहीं घटना के बाद एक पुलिस कांस्टेबल ने तत्परता दिखाते हुए पोल पर चढ़कर रस्सी को ठीक किया। इसके बाद दोबारा तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराया गया और कार्यक्रम आगे बढ़ा, लेकिन तब तक यह चूक लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी थी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कोई सामान्य आयोजन नहीं था, बल्कि जिले का सबसे महत्वपूर्ण सरकारी स्वतंत्रता दिवस समारोह था। ऐसे कार्यक्रमों से पहले ध्वजारोहण की व्यवस्था, रस्सी, गांठ और झंडे की पूरी जांच तथा रिहर्सल की जाती है। इसके बावजूद तिरंगे का नीचे गिर जाना तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।राष्ट्रीय ध्वज देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर उससे जुड़ी हर प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और सम्मान के साथ पूरी की जाती है। ऐसे में जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में हुई इस घटना ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।अब निगाहें इस बात पर हैं कि इस पूरे मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या इस चूक की जांच होगी? क्या जिम्मेदारी तय की जाएगी? और सबसे बड़ा सवाल—क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी, या फिर जिला स्तरीय समारोह की व्यवस्थाओं की जवाबदेही तय करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी?1
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