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बिहार के खगड़िया जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें मोरकाही थानाध्यक्ष अंतिमा कुमारी ग्रामीणों के सामने अपनी पिस्तौल ताने हुए दिख रही हैं। यह घटना मोरकाही थाने में हुई, जहाँ महिला SI को पिस्तौल लहराता देख ग्रामीण भी उग्र हो गए। उन्होंने थानाध्यक्ष अंतिमा कुमारी को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'चलाओ गोली!'
Republic Vaishali
बिहार के खगड़िया जिले से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें मोरकाही थानाध्यक्ष अंतिमा कुमारी ग्रामीणों के सामने अपनी पिस्तौल ताने हुए दिख रही हैं। यह घटना मोरकाही थाने में हुई, जहाँ महिला SI को पिस्तौल लहराता देख ग्रामीण भी उग्र हो गए। उन्होंने थानाध्यक्ष अंतिमा कुमारी को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'चलाओ गोली!'
More news from बिहार and nearby areas
- वैशाली जिले के हाजीपुर में एक BPSC शिक्षिका अपने पति और बच्चे को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए तैयार हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम में शिक्षिका के पति ने अपनी बात रखी है, जिसमें उन्होंने इस स्थिति पर अपना बयान दिया है।1
- कुढ़नी के तुर्की थाना क्षेत्र के दुबियाही में दो युवकों की डूबने से मौत हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और मामले की जाँच में जुट गई है। कुढ़नी मुखिया संघ के अशोक राय ने इस दुखद घटना की जानकारी दी।1
- यह बात समझने योग्य है कि कोई भी परिवार हो या संगठन, वह एक-दूसरे के सहयोग से चलता है, न कि किसी का इस्तेमाल करने से। इस महत्वपूर्ण सीख को राजनीति से ग्रहण किया जाना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक विरोधी हमेशा इस फिराक में रहते हैं कि आपके अपनों को ही माध्यम बनाकर आपको बुलंदी से गिरा दें। जब किसी परिवार, संगठन या नेतृत्व में सहयोग की जगह एक-दूसरे का इस्तेमाल और खींचतान शुरू हो जाती है, तो इसका सीधा और अक्सर बड़ा फायदा विरोधी उठा लेते हैं। देश की राजनीति में ऐसे उदाहरणों की भरमार है, जो इस सच्चाई को प्रमाणित करते हैं। इसलिए, यह समय रहते समझना आवश्यक है कि वास्तविक शक्ति एकता में निहित है, न कि आपसी टकराव में, क्योंकि अपनों की लड़ाई का लाभ अंततः तीसरे पक्ष को ही मिलता है।1
- चेहराकलां प्रखंड में स्थित हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर इस वर्ष भी वार्षिक चादरपोशी का कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। हर साल की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। इस अवसर पर एक दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया, जहाँ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रहीं। मजार के गद्दीनीश अनुल शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 70 सालों से इस मजार पर चादरपोशी की परंपरा चली आ रही है। उनका कहना है कि जो लोग सच्चे मन से दुख की घड़ी में मकदुम शाह जलालुद्दीन को याद करते हैं, उनकी सभी मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। इस मजार पर सभी समुदायों के लोग चादरपोशी करने आते हैं। अनुल शाह ने आगे बताया कि पूर्वजों के अनुसार, मकदुम शाह जलालुद्दीन दीन-दुखियों की सेवा करते थे, और आज भी लोगों में उनके प्रति अटूट आस्था बनी हुई है, यही कारण है कि सभी समुदाय के लोग यहाँ चादरपोशी करने आते हैं। यहाँ तक कि तालसेहान, भरोखड़ा, सेहान, और मुजफ्फरपुर जिले के पैतरापुर सहित अन्य कई स्थानों से भी लोग गाजे-बाजे के साथ चादर चढ़ाने आते हैं। इस पूरे आयोजन में मजार कमेटी के सामाजिक कार्यकर्ता बेहद सक्रिय रहे, जबकि स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था ने भी भीड़ नियंत्रण में अपनी चाक-चौबंद भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, हज़ारों लोगों ने हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर चादरपोशी की, जिनकी मान्यता है कि उनकी मन मुरादें पूरी हुई हैं।1
- Post by Kaushal kumar1
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- मुजफ्फरपुर के कुढ़नी में एक नवविवाहिता का शव जब उसके घर पहुंचा, तो कोहराम मच गया। अस्पताल में मौत होने के बाद, उसके परिजनों में चीख-पुकार मची हुई है।1
- Post by Ankesh Thakur1
- पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के भावी उम्मीदवार डॉ. दिव्य ज्योति ने बिहटा के अमहारा स्थित डॉ. अशोक गगन कॉलेज कैंपस में ग्लोबल शिक्षक आईकॉन अवॉर्ड कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य निजी और सरकारी शिक्षकों के लिए समान अवसर, महिला शिक्षकों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण, वित्त रहित शिक्षकों के अधिकार, और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही जैसे मुद्दों को मजबूती से विधान परिषद तक पहुँचाना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, डॉ. दिव्य ज्योति ने स्पष्ट किया कि एमएलसी फंड किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि शिक्षक समाज और शिक्षा व्यवस्था के विकास का एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसका उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए। वहीं, डॉ. अशोक गगन ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक समाज को अब एक ऐसे संघर्षशील, ईमानदार और जवाबदेह नेतृत्व की आवश्यकता है, जो शिक्षकों की आवाज को प्रभावी ढंग से विधान परिषद तक पहुँचा सके। यह शिक्षण संवाद कार्यक्रम देखते ही देखते एक भव्य रूप ले लिया, जहाँ सभी शिक्षकों, विशेषकर महिला शिक्षिकाओं ने 'डॉ. दिव्य ज्योति जिंदाबाद' के नारों से हुंकार भरी। पूरे कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और अतिथियों में विशेष उत्साह देखने को मिला, और सभी ने प्रतिज्ञा ली कि इस बार पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में परिवर्तन लाना है और शिक्षकों की आवाज बुलंद करते हुए डॉ. दिव्य ज्योति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना है। कई वक्ताओं ने इस आयोजन को शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी और सकारात्मक पहल बताया। उपस्थित लोगों ने आग्रह किया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहें, ताकि शिक्षा एवं शिक्षक हित से जुड़े मुद्दों पर व्यापक स्तर पर संवाद एवं समाधान का मार्ग प्रशस्त हो सके। कार्यक्रम के दौरान, विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षकों और प्राचार्यों को शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण में उनके विशेष योगदान के लिए प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध साहित्यकार हेमंत कुमार ने मंच समन्वयक के रूप में कार्यक्रम का सफल संचालन किया। इस आयोजन में दिलीप शर्मा, चंदन सिंह, चिंटू पटेल, पीयूष प्रसाद, रणजीत प्रसाद, रवि पासवान, जावेद अंसारी, नितेश कुमार, रितेश कुमार, अजित शर्मा, सुधीर कुमार, संजय कुमार, श्रवण कुमार, ई. आशीष सिन्हा, पंकज रजक सहित सैकड़ों शिक्षक, शिक्षाविद एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अंत में डॉ. दिव्य ज्योति ने डॉ. अशोक गगन कॉलेज कैंपस, अमहारा, बिहटा, पटना की प्रबंधन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह शिक्षक सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।1